Do you know
This page is only for knowledge and facts. All about is only for the unknown and untold stories.
26/08/2023
जय श्री राम 🙏
* वनवास के दौरान केवट और प्रभु श्रीराम का रोचक प्रसंग *
केवट भोइवंश का था तथा मल्लाह का काम करता था। केवट रामायण का एक खास पात्र हैं, जिसने प्रभु श्रीराम को वनवास के दौरान माता सीता और लक्ष्मण के साथ अपने नाव में बिठा कर नदी पार कराया था।
राम केवट को आवाज देते है - नाव किनारे ले आओ, पार जाना है।
*मागी नाव न केवट आना। कहइ तुम्हार मरमु मै जाना।।
चरन कमल रज कहूं सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछू अहई।।*
श्रीराम ने केवट से नाव मांगी, पर वह लाता नही है। वह कहने लगा - मैने तुम्हारा मर्म जान लिया है। तुम्हारे चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते है कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी है। वह कहता है कि पहले पाव धुलवाओ, फिर नाव पर चढ़ाऊंगा।
केवट प्रभु श्रीराम का अनन्य भक्त था। अयोध्या के राजकुमार केवट जैसे सामान्यजन का निहोरा कर रहे है। यह समाज की व्यवस्था की अद्भुत घटना है।
केवट चाहता है कि वह अयोध्या के राजकुमार को छुए। उनका सानिध्य प्राप्त करे। उनके साथ नाव में बैठकर अपना खोया हुआ सामाजिक अधिकार प्राप्त करे। अपने संपूर्ण जीवन की मजूरी का फल पा जाए। राम वह सब करते हैं, जैसा केवट चाहता है। उसके श्रम को पूरा मान - सम्मान देते है ।
केवट की श्रीराम प्रभु के लिए उसकी भक्ति उसे युग युगान्तर तक अनन्य भक्त के रूप में याद किया जाएगा।
जय श्री राम 🙏
25/08/2023
रामायण अंश - ( श्रीराम हनुमान मिलन )
जय श्रीराम 🙏
भारतीय महाकाव्य 'रामायण' में भगवान श्रीराम और हनुमान के दिव्य बंधन का प्रसंग अद्भुत भक्ति, निष्ठा और निस्वार्थ सेवा के सबसे महत्वपूर्ण सिखने का स्रोत है।
भारतीय महाकाव्य 'रामायण' में, भगवान श्रीराम और हनुमान के दिव्य बंधन में अटूट भक्ति और निष्ठा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। हनुमान, एक विशेष और शक्तिशाली देवता, जिन्होने भगवान श्रीराम की पत्नी सीता को रावण से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसकी अनथक संकल्पना, अपराजित साहस और श्रीराम के प्रति गहरी श्रद्धा ने उसे भक्ति और विनम्रता के प्रतीक बनाया।
श्रीराम और हनुमान की मिलनसर कहानी उनके असाधारण संबंध को सुंदरता से दर्शाती है। जब श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण सीता की खोज में थे, तो उन्होंने हनुमान द्वारा नेतृत्व किए गए वानर सेना से मुलाकात की। उनके उद्देश्य के बारे में जानकर हनुमान ने अपना अतुलनीय समर्थन प्रस्तुत किया और उनके मिशन का अभिन्न हिस्सा बन गए। उनकी श्रीराम के प्रति भक्ति सिर्फ उनकी मदद की प्रेरणा ही नहीं थी, बल्कि उनकी अद्वितीय दिव्य प्रकृति में भी थी।
हनुमान की निष्ठापूर्ण सेवा और समुंद्र पार करके लंका पहुंचने, शक्तिशाली असुरों से साहसपूर्ण मुकाबले, और अपने स्वामी के सामने विनम्र आचरण में उनके असामान्य चरित्र का प्रदर्शन है। उनके दिल में श्रीराम के प्रति प्रेम और श्रद्धा थी, और उनके कर्म उनकी अद्वितीय निष्ठा का साक्षी देते हैं। उनका मन श्रीराम के प्रति प्रेम से भरपूर था, और उनके कार्य उनकी अलंकरण नहीं, बल्कि उनकी अपरिहार्य वफादारी की प्रतिष्ठा थी।
श्रीराम और हनुमान की मिलनसर कहानी एक सुंदरता से आकारभद्ध क्षण है जो उनके गहरे बंधन को सुन्दरता से प्रस्तुत करता है। श्रीराम की हनुमान भक्ति की प्रशंसा और हनुमान की उनके प्रति गहरी सम्मान की व्यक्ति स्थिति दिव्य संबंध का एक माहक सूत्र बनाती है। श्रीराम ने हनुमान को अपने श्रद्धांजलि के रूप में स्वीकार किया, उनके श्रीराम के प्रति अपने अद्वितीय भक्ति को मानते हुए। हनुमान, प्रभु की आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए विनम्रता से प्रार्थना की, अपने निष्ठापूर्ण समर्पण की प्रकटि की।
उनकी वार्तालाप भौतिक रूप को पार करके दिखाता है कि भक्त और दिव्य के बीच आध्यात्मिक संबंध है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति केवल एक बाह्यिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह दिल की अवस्था है। हनुमान की श्रीराम के प्रति अनिवार्य समर्पण की उदाहरणीय श्रेणी है। उनके कर्म हमें यह याद दिलाते हैं कि सच्ची भक्ति में सेवा करना शारीरिक चुनौतियों के बावजूद भी होना चाहिए।
श्रीराम और हनुमान की मिलनसर कहानी हमें यह याद दिलाती है कि जीवन की यात्रा में वफादारी, भक्ति और निष्ठा अविरल गुण हैं। उनका बंधन यह दिखाता है कि अदृश्य विभाजन को पार करने, रुकावटों को पार करने और व्यक्तियों के बीच एक गहरा संबंध बनाने के लिए निष्ठा और सेवा अत्यंत महत्वपूर्ण गुण होते हैं। यह हमें यह प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन में भी इस तरह की गुणों को पूजनीयता और विनम्रता के साथ प्रवृत्ति करें, आदर और विनम्रता के साथ हमारे रिश्तों को पोषण दें।
आखिरकार, श्रीराम और हनुमान की मिलनसर कहानी केवल एक ऐतिहासिक घटना ही नहीं है, बल्कि एक सर्वसामान्य सिखने की बात है जो पीढ़ियों में आवाज़न करती है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति अस्वार्थ, निर्बिन्दु, और दिन-रात बनी रहने वाली होती है, समय और स्थान को पार करके। उनकी मिलनसर कहानी हमें धर्म, सेवा और अद्वितीय श्रद्धा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
जय श्रीराम 🙏🙏
04/08/2023
रामायण अंश - ( माता सबरी मिलन)
माता शबरी एक साधारण और भक्तिभावपूर्ण स्त्री थी, जो दंडक वन के जंगल में रहती थीं, जहां राम अपने वनवास काट रहे थे।
शबरी ने भगवान राम के बारे में सुना था और उनके आगमन की बेताबी से इंतज़ार कर रही थी। निष्ठा और विश्वास से भरी हुई, वे प्रतिदिन सुबह निकलकर जंगल में जाकर बड़ी ध्यान से मीठे फल और बेर ढूंढतीं थीं, जिन्हें वे भगवान राम को समर्पित करने के लिए संग्रहित करतीं। उनके राह में नित्य पुष्प बिछाती।
महीनों बीत गए, लेकिन शबरी का भक्ति स्थिर रहा। उनकी सतत विश्वासपूर्ण भक्ति ने महर्षि मतंग की ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने उन्हें आशीर्वाद दिया और उन्हें बताया कि उनकी भक्ति का फल जरूर मिलेगा।
आखिरकार, वह दिन आया जब भगवान राम और लक्ष्मण शबरी के आश्रम पहुंचे। जंगल के आकर्षण से प्रेरित, उन्होंने शबरी के आश्रम को प्रवेश किया। भगवान राम और लक्ष्मण, शबरी की सतत भक्ति के प्रभाव से आकर्षित हो गए। शबरी ने अपनी आत्मीयता और भक्ति से फलों और बेर का प्रशाद बनाकर उन्हें शुद्ध करके दिया। शबरी अपनी राम भक्ति में इतनी लीन थी कि वह सभी बेर को पहले खुद चखती और जो बेर मीठे होते वही भगवान राम को देती।
भगवान राम, शबरी के संग्रहित फलों को स्वीकार करके उनकी प्रेमभाव से प्रशाद लिया। उन्होंने शबरी को अपने विशेष आशीर्वाद दिया और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति का वचन दिया। शबरी की आत्मा दिव्य स्थान को प्राप्त हुई और उन्हें अनंत आनंद का अनुभव हुआ, जो उनकी सतत भक्ति के पुरस्कार था।
शबरी की अनकही कहानी वेदांत भारतीय संस्कृति में भक्ति के आदर्श को सुंदरता से दिखाती है और इसे भगवान राम की अनंत कृपा और दया का प्रतीक माना जाता है। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि वास्तविक भक्ति वहां से उत्पन्न होती है, जहां दिल की शुद्धता होती है, चाहे व्यक्ति की जाति या पेशा कोई भी हो।
जय श्री राम 🙏🙏
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Lucknow