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Happy Life
15/09/2022
सास बहू की तकरार
29/06/2022
आपने कभी ध्यान दिया है कि फ़िल्मों मे
90 के बाद से गायकों का करियर ग्राफ़
कैसा रहा है??
याद है #कुमार_शानू जो करियर मे पीक
पर चढ़कर अचानक ही,धुँध में खो गये।
फिर आये #अभिजीत,
जिन्हें टाप पर पहुँचकर अचानक ही
काम मिलना बंद हो गया।
#उदित_नारायण भी उदय होकर
समय से पहले अस्त हो गये।
उसके बाद #सुखविंदर अपनी
धमाकेदार आवाज से फलक
पर छा गये और फिर अचानक
ही ग्रहण लग गया।
उसके बाद आये #शान,और शान
से बुलंदियों को छूने के अचानक ही
कब नीचे आये पता ही नही लगा।
फिर #सोनू_निगम को कब काम
मिलना बंद हुआ, लोग समझ ही
नही पाये।
उसके बाद #अरिजीत_सिंह,
जिनकी मखमली आवाज ने दिलों में
जगह बनानी शुरू ही की कि सलमान
खान ने उनहे पब्लिकली माफ़ी माँगने
के बाद भी 'जग घूमया' जैसा गाना
नही गवाया और धीरे धीरे उसका
करियर खतम करने की साज़िश
चलने लगी।
सारे ही गायकों को असमय बाहर
का रास्ता दिखा दिया गया।
इसके उल्टा इसके पहले चीख़ कर
गाने वाले,क़व्वाल नुसरत फ़तेह अली
खान को क़व्वाली गाने के लिये बुलाया
जाता है,और पाकिस्तानी गायकों के लिये
दरवाज़े खोल दिये जाते हैं।
उसके बाद राहत फ़तेह अली खान
आते हैं और बॉलीवुड में उन्हे लगातार
काम मिलने लगता है और बॉलीवुड
की वजह से सुपरहिट हो जाते है।
फिर नये स्टाईल के नाम पर आतिफ़
असलम आते हैं जिसकी आवाज को
ट्यूनर मे डाले बग़ैर कोइ गाना नही
निकलता है,उन्हे एक के बाद एक
अच्छे गाने मिलने लगते हैं।
अली जाफ़र जैसे औसत गायक को
भी काम मिलने में कोई दिक़्क़त नही आती।
धीरे धीरे पाकिस्तानी हीरो हीरोइन
को भी बॉलीवुड मे लाकर स्थापित
किया जाने लगा और भारतियों को
बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा।
पर उरी हमले के बाद, बैक डोर से
चुपके से उन्हे लाने की यह चाल,
कुछ भारतियों की नज़र में उनकी
यह चाल समझ में आ गयी और
उन्होंने निंदा करने की माँग करने
की,हिमाक़त कर डाली जो उन्हे
नागवार गुज़री और वो
पाकिस्तान वापस चले गये।
क्या आपको लगता है कि यह केवल
संयोग है तो आप से बड़ा भोला कोई नहीं।
पूरा बॉलीवुड डी कंपनी या पी कंपनी
(पाकिस्तान) के इशारों पर चलता है,
और इसका इलाज है #टोटल_बॉयकाट।
हमारे पैसों से मेहनत की खून पसीने
की कमाई से ये हमें ही अपने कुकर्म
में भागीदार बना रहे।
खुद तो देश विरोधी कर्म करते ही हैं
हमें भी इसमें सान लेते हैं।
इनके यहाँ तो देशभक्ति और जन्म
भूमि मातृ भूमि से प्रेम हराम बताया
है इनके लोगों ने।... तो,ये उसी राह
पर गद्दारी किये जा रहे।
पर हमारे यहाँ सनातन में किसी भी
पूजा हवन हो उसमें जन्म भूमि धरती
माँ को पहले पूजा जाता है उनके नाम
से हवन में आहुति दी जाती है।...
इसलिए हमें प्रण लेना ही होगा कि
हमें इन गद्दारों को अपना पैसा दे कर,
किसी भी तरह से अपनी मातृभूमि से
छल नहीं करना है।
इनको पैसा दे कर व्यवहारिक रूप
से हमें इन असुरो की भाँति स्वयं को
नहीं बनाना है।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी💐
यही कारण था कि #गुलशन कुमार जी
को इन्होंने सरेराह मरवा दिया और उनके
बाद बॉलीवुड से तो जैसे भजन और हिन्दू
धार्मिक संगीत अदृश्य हो गया,और संगीत
के नाम पर अश्लीलता और धर्म के विरूद्ध
एक षड्यन्त्र काम करने लगा और नई युवा
पीढ़ी को पथभ्रमित करने का कार्य विशेष
रूप से किया गया।
गुलशन कुमार को हटाकर भजन कीर्तन
का बॉलिवुड से खात्मा किया गया।
अब केवल अली अली मौला बचा है।
खान गैंग ने ये सब पूरी प्लानिंग से किया
और कम्युनिस्टों के इशारे पर किया।
ये फिल्मी खान ने पूरी इंडस्ट्री पर कब्जा
जमा कर दाऊद के धंधे को जिंदा रखा है
और इस कारनामे में लालची और सेक्युलर
हिंदू उनके साथ है ☹️
बॉलीवुड दाऊद कंपनी के इशारों पर
चलता है ये जग ज़ाहिर हो चूका है l
अतः अपने खून पसीने की कमाई को
कदाचित बॉलीवुड पर खर्च न करें l
लेकिन अब ये अपनी कुटिल और
हिन्दू विरोधी सोच में सफल नहीं
हो पायेंगे।
अनेक लोगों ने अपने पैसे इस
कूड़ेदान में फेंकने बंद कर दिए हैं
आप भी बंद किजिए बहिष्कार किजिए ।।
जयश्रीराम🚩🏹🙏🏻 जी 🙏🏻
ातन⛳
28/06/2022
उठकर पानी तक ना पीने वाले...!
आज अपने कपड़े खुद धो लेते हैं,वह जो कल तक घर के लाडले थे आज अकेले में रोते हैं !
सिर्फ #बेटियां ही नहीं #बेटे भी पराए होते हैं।
पापा के डांटने पर मम्मी को शिकायत लगाने वाले अब जमाने के नखरे सहते हैं !
खाने में सौ नखरे करने वाले अब कुछ भी खा लेते हैं।
मम्मी के बाजू पर सर रखकर सोने वाले अब बगैर बिस्तर के ही सो लेते हैं !
बहन को छोटी-छोटी बात पर तंग करने वाले अब बहन को याद करके रोते हैं
सिर्फ बेटियां ही नहीं बेटे भी पराए होते हैं !
यह उन बेटों के लिए जो घर की जिम्मेदारियों की वजह से घर से दूर रहते हैं और वह मजबूत बनते रहते हैं जमाने के सामने।
सिर्फ बेटियां ही नहीं साहब बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
😭😭😔😭😭😭😭
25/06/2022
हां मैं ही कुम्हार हूँ। गांव के किनारे पर बसा छोटा संसार हूँ। हां मैं ही..............
तुम्हारे ही खेत से मिट्टी उठाता हूँ। फिर उसे जीवित करने की कोशिश करता हूँ। कलम की देवी की मूरत भी बनाता हूँ। अनपढ़ होकर भी समझदार हूँ। हां मै ही................
तेरे पनघट पर मेरी ही घरा उतरती है। आंगन के कोने में जो पानी से भरी रहती है। आषाढ़ में मेढ पर बिछती मृदाभार हूँ। हां मैं ही.............
चाक पर नाचती लोककला जब दुनिया तालियां बजाती है तब राष्ट्र को इक सम्मान दिलाता कलाकार हूँ। हां मैं ही...............
हाथी, घोड़ों के खिलौने बेचता हूँ। बचपन को धरती से जोड़ता है। छठ की घाट पर जलती दिया है मार हां में ही कुम्हार हूँ।
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