Arya Verma
Social Activist
I'm the alarm you can’t snooze...
01/12/2025
जब प्रेम ईश्वर से होता है, तब वह हर जीव में ईश्वर को देखकर प्रेम करना सिखाता है। और यही निष्कपट प्रेम मनुष्य की सच्ची मुक्ति का मार्ग बन जाता है ❣️
27/11/2025
Reminder:
Let every tough moment refine you, not shake your balance ♎
26/11/2025
Oneness वही पल है जब सब कुछ एक महसूस होने लगता है — पेड़, आसमान, साँस, तुम्हारा दर्द, तुम्हारी ख़ुशी… सब। जब तुम प्रकृति से प्रेम करते हो, खुद से प्रेम करते हो, भगवान से प्रेम करते हो और भगवान की हर रचना में अपना ही अंश देखते हो। जब कुछ भी अलग नहीं लगता… वही असली Oneness है 🍃
21/11/2025
Reminder:
Don't forget to love yourself 💚
20/11/2025
*Reminder:* वायरस को अपने भीतर से निकालें और प्रेम की ज्योति से स्वयं को प्रकाशित करें। उस दिन से यह दुनिया और दुनिया के लोग हर चीज़ से आपको प्रेम हो जायेगा 💚
04/11/2025
Just a Reminder 👉
Learning life lessons...
31/10/2025
God created this world in perfect harmony,
and made man as a reflection of that perfection.
Negativity is but a small bug in the code of creation —
a glitch that makes us forget our divine design.
When that bug is healed,
we return to what we always were —
pure, whole, and one with God 🤍💚
04/10/2025
Rubaru 🫂 (Body = Reflection)
हमारा शरीर हमेशा सांसारिक चीज़ों से जुड़ा रहता है—खाना, पानी, हवा, रिश्ते और अनुभव, इन सबके बिना हम जीवित ही नहीं रह सकते। लेकिन हमारी परछाईं इन सबसे अलग दिखाई देती है। वह वस्तुओं को छूती नहीं, उनसे बंधी नहीं, फिर भी उसका अस्तित्व साफ़ तौर पर दिखाई देता है। यही जीवन का गहरा संदेश है। हमें संसार से जुड़े रहकर अपने कर्तव्य निभाने हैं, संबंधों को निभाना है और अनुभवों से सीखना है। पर साथ ही, परछाईं की तरह थोड़ा सा अलग, थोड़ा सा स्वतंत्र रहना भी ज़रूरी है। यह अलगाव हमें याद दिलाता है कि हम सिर्फ़ शरीर नहीं हैं, हमारी आत्मा भी है जो स्वतंत्र और अमर है। जब हम जुड़ाव और अलगाव, दोनों के संतुलन को समझ लेते हैं, तभी हम इस संसार में रहते हुए भी भीतर से शांत और सुखमय हो पाते हैं।
आर्या वर्मा
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