Ruby Gupta Advocate
Ruby Gupta
Advocate,
High Court & Civil Court, Lucknow, U.P.
15/03/2026
तलाक के बढ़ते मामले और बदलता समाज
हाल के वर्षों में तलाक के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 वर्षों में तलाक के मामलों में लगभग 50% की वृद्धि हुई है और कई मामलों में पहल महिलाओं की ओर से की जा रही है। यह बदलाव समाज में आ रहे नए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों को भी दर्शाता है।
आज महिलाएं पहले की तुलना में अधिक शिक्षित और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। ऐसे में यदि वैवाहिक जीवन में सम्मान, समझ और सुरक्षा की कमी होती है तो कई महिलाएं रिश्ते को मजबूरी में निभाने के बजाय उससे बाहर निकलने का निर्णय लेने लगी हैं।
हालांकि इसके पीछे कई कारण भी सामने आते हैं, जैसे घरेलू हिंसा, क्रूरता, आपसी मतभेद और विश्वास की कमी। यह स्थिति केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए चिंता का विषय बन जाती है, क्योंकि तलाक का प्रभाव बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पड़ता है।
इस बदलती स्थिति में जरूरी है कि विवाह को केवल एक औपचारिक संबंध न मानकर आपसी समझ, सम्मान और जिम्मेदारी के साथ निभाया जाए। संवाद, धैर्य और पारिवारिक सहयोग ही किसी भी रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं।
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15/03/2026
18/07/2025
जन्मदिन की बधाइयाँ और ढेर सारी शुभकामनाएँl
हाई कोर्ट में नकाब से चेहरा ढककर आई मुस्लिम महिला वकील, जज ने हटाने को कहा तो बोली- ये मेरा मौलिक अधिकार: जानिए फिर क्या हुआ, क्या कहते हैं नियम
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने बहस के दौरान चेहरा दिखाने से इनकार करने वाली महिला वकील सैयद ऐनैन कादरी की बात नहीं सुनी।
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने हिजाब पहनी एक महिला वकील की बात सुनने से इनकार कर दिया।
महिला वकील ने अपना चेहरा ढक रखा था। जब जज ने महिला वकील से अपना चेहरा दिखाने को कहा तो उस महिला वकील ने चेहरा दिखाने से इनकार कर दिया। जज ने कहा कि कोई भी महिला वकील अपना चेहरा ढक कर अदालत में बहस नहीं कर सकती।
न्यायमूर्ति मोक्ष खजुरिया काज़मी और न्यायमूर्ति राहुल भारती की ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि महिला वकीलों को अपना चेहरा ढककर अदालत में उपस्थित होने की अनुमति नहीं है। इसके बाद खंडपीठ ने महिला वकील की बातें सुनने से इनकार कर दिया और इस केस में अगली तारीख दे दी।
दरअसल, यह मामला 27 नवंबर का है। उस दिन ‘मोहम्मद यासीन खान बनाम नाज़िया इकबाल’ से जुड़े घरेलू हिंसा के मामले की सुनवाई हो रही थी। इसी दौरान एक महिला हाई कोर्ट में पेश हुई। उसने खुद को सैयद ऐनैन कादरी नाम की एक वकील बताया और कोर्ट को कहा कि इस मामले को रद्द करने से जुड़ी याचिका में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हो रही है।
वह कोर्ट में वकील की पोशाक में आई, लेकिन उसने अपना चेहरा ढक रखा था। उस समय मामले की सुनवाई जस्टिस राहुल भारती कर रहे थे। जब न्यायाधीश राहुल भारती ने उस महिला वकील से अपना चेहरा दिखाने का अनुरोध किया तो उसने इनकार कर दिया। महिला वकील ने जोर देकर कहा कि चेहरा ढककर आना उनका मौलिक अधिकार है। इसलिए कोर्ट उससे नकाब हटाने के लिए नहीं कह सकता।
इसके बाद जज राहुल भारती ने 27 नवंबर के अपने आदेश में कहा, “यह न्यायालय याचिकाकर्ताओं के वकील के रूप में खुद को अधिवक्ता सुश्री सैयद ऐनैन कादरी बताने वाली महिला की उपस्थिति पर विचार नहीं करता, क्योंकि कोर्ट के पास एक व्यक्ति और एक पेशेवर के रूप में उनकी वास्तविक पहचान की पुष्टि करने का कोई आधार/अवसर नहीं है।” कोर्ट ने मामले को 5 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।”
इसके बाद कोर्ट ने न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से पूछा कि क्या ऐसा कोई नियम है, जो महिला अधिवक्ताओं को अपना चेहरा ढककर पेश होने या अपना नहीं चेहरा ढकने के न्यायालय के अनुरोध को अस्वीकार करने का अधिकार देता है। इसके बाद रजिस्ट्रार जनरल ने 5 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट की जाँच करने के बाद न्यायमूर्ति मोक्ष खजूरिया काजमी ने 13 दिसंबर को कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा निर्धारित नियमों में ऐसे किसी अधिकार का उल्लेख नहीं है। बीसीआई नियमों के अध्याय IV (भाग VI) की धारा 49(1) (जीजी) के तहत महिला अधिवक्ताओं के लिए ड्रेस कोड का विवरण दिया गया है।
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