Afroz Roshan
मेरी पहचान तो मोहब्बत है
आपका दिल मेरा ठिकाना है
~ अफरोज़ रौशन किछौछवी
contect no - 9569111178
16/02/2025
عجیب کرب میں گزری، جہاں جہاں گزری
اگر چہ چاہنے والوں کے درمیاں گزری
تمام عمر جلاتے رہے چراغِ امید
تمام عمر امیدوں کے درمیاں گزری
گزر گئی جو ترے ساتھ یادگار رہی
ترے بغیر جو گزری ، وبالِ جاں گزری
مجھے سکون میّسر نہیں تو کیا غم ہے
گلوں کی عمر تو کانٹوں کے درمیاں گزری
عجیب چیز ہے محسن یہ گردشِ حالات
کبھی زمِیں تو کبھی مثلِ آسماں گزری
محسن نقوی ❤️
15/02/2025
आज काफी दिनों बाद इक ग़ज़ल के कुछ अशआर आपकी खिदमत में पेश कर रहा हूँ --------
۱- اے مرے دل تری حمایت کا
مجھ پہ الزام ہے بغاوت کا
अय मेरे दिल तेरी हिमायत का
मुझपे इल्ज़ाम है बगावत का
۲- مجھکو اپنا بنا کے لوٹ لیا
شکریہ آپکی عنایت کا
मुझको अपना बना के लूट लिया
शुक्रिया आपकी इनायत का
۳- نفرتوں کی ہوائیں خوب چلیں
دیپ جلتا رہا محبت کا
नफरतों की हवाएं खूब चलीं
दीप जलता रहा मोहब्बत का
۴- اپنا حق تمکو چھیننا ہوگا
دور ہے ہی نہیں شرافت کا
अपना हक़ तुमको छीनना होगा
दौर है ही नहीं शराफत का
۵- آج پھر سے تری قیادت میں
لٹ گیا قافلہ محبت کا
आज फिर से तेरी कयादत में
लुट गया काफिला मोहब्बत का
۶- ہو گیا اب جناب بس کیجے
کھیل مت کھیلئے سیاست کا
हो गया अब जनाब बस की जे
खेल मत खेलिए सियासत का
۷- ہر طرف جھوٹ اور مکاری
یہ بھی آسار ہے قیامت کا
हर तरफ झूठ और मक्कारी
ये भी आसार है कयामत का
۸- اسکی تکلیف پوچھنا روشن
جو ستایا ہوا ہو غربت کا
उसकी तकलीफ पूछना रौशन
जो सताया हुआ हो गुरबत का
------- अफरोज रौशन किछौछवी
05/02/2025
इंशाल्लाह बज़्म ए अर्मुगान अदब अम्बेडकर नगर के आनलाइन तरही मुशायरे में बतौर नाज़िम ए मुशायरा शिरकत रहेगी असातज़ा का हुक्म सर आँखों पर!
दुआ की दरख़्वास्त-
तालिब ए दुआ--- अफरोज रौशन किछौछवी
26/01/2025
शाम ए यौमे ज़म्हूरिया
खामोशियों की मौत गवारा नहीं मुझे
शीशा हूँ टूट कर भी खनक छोड़ जाऊंगा!
आज का प्रोग्राम बेहद शानदार रहा, आप सभी ने मुझे खूब अच्छी तरह सुना और अपनी दुआओं से नवाजा मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करता हूँ!
26/01/2025
आज के प्रोग्राम में इंशाल्लाह शिरकत रहेगी !
यौम ए विलादत अमीरुल मोमिनीन शेर ए खुदा फातेह खैबर दामाद ए रसूल ﷺ मौला ए काएनात हज़रत सय्यिदुना मौला अली 💖 کَرَّمَ اللہُ تَعَالىٰ وَجْہَہُ الْکَرِیْم
कभी दीवार हिलती है कभी दर काँप जाता है,
अली का नाम सुन कर अब भी खैबर काँप जाता है!
14/01/2025
वो अपने आप का ऊँचा मकाम करता है
अली के नाम का जो एहतेराम करता है
~ अफरोज रौशन किछौछवी
जश्न ए मौलूद ए काबा का प्रोग्राम बहुत ही कामयाब रहा
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