Health Tips
Health Tips में घरेलू नुस्खे: स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए आयुर्वेदिक और प्रभावी उपायों का खजाना।
01/07/2024
आयुर्वेद
आयुर्वेद भारत की एक पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है, जो 3,000 साल से भी अधिक पुरानी है। "आयुर्वेद" शब्द संस्कृत के "आयु" (जीवन) और "वेद" (विज्ञान या ज्ञान) शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ "जीवन का विज्ञान" है।
आयुर्वेद के मुख्य सिद्धांत:
1. दोष:-आयुर्वेद तीन प्रमुख ऊर्जा या दोषों को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित करता है: वात (वायु और आकाश), पित्त (अग्नि और जल), और कफ (जल और पृथ्वी)। प्रत्येक व्यक्ति का एक विशिष्ट दोष मिश्रण होता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक गुणों को निर्धारित करता है।
2. समग्र दृष्टिकोण:- आयुर्वेद स्वास्थ्य के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा का विचार किया जाता है। यह संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देता है, जिसमें आहार, व्यायाम और मानसिक अभ्यास जैसे ध्यान शामिल हैं।
3. प्राकृतिक उपचार:- आयुर्वेद में उपचार अक्सर प्राकृतिक उपचारों के माध्यम से किया जाता है, जिनमें जड़ी-बूटियाँ, तेल और आहार समायोजन शामिल होते हैं। शरीर को शुद्ध करने के लिए पंचकर्म एक सामान्य प्रक्रिया है।
4. निवारक देखभाल:-आयुर्वेद निवारक देखभाल पर जोर देता है और दैनिक दिनचर्या (दिनचर्या), मौसमी दिनचर्या (ऋतुचर्या), और नैतिक जीवन (सद्वृत्त) के माध्यम से स्वास्थ्य बनाए रखने की सलाह देता है।
5.व्यक्तिगत चिकित्सा:-उपचार और सिफारिशें व्यक्ति की दोष संरचना (प्रकृति) और वर्तमान असंतुलन की स्थिति (विकृति) के आधार पर व्यक्तिगत रूप से की जाती हैं।
आयुर्वेद को दुनिया के कई हिस्सों में एक पूरक और वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त है, और इसके सिद्धांत आधुनिक स्वास्थ्य और कल्याण प्रथाओं में भी समाहित किए जा रहे हैं।
01/07/2024
धतूरे की भस्म
उपचार:- दमे में काम आता है
क्या करना है:-
मिटटी की हांड़ी में धतूरे के पके ताजे फल डालकर ढकन से उसका मुँह बंद कर दे ।
संधि पर कपड़मिटटी कर गजपुट में फुक दे एक ही पुट में अन्तधूर्म दग्ध काली भस्म बन जाएगी
और उसको कूट कर कपडे मे छान कर रख ले
कैसे ले:-
इसको एक से दो रती तक भस्म मधु/ सहद के साथ लेना चाहिए सधारण तोर पर इसको सुबह और शांयकाल को लेना चाहिए अगर रोग अधिक है तो एक एक मात्रा में चार चार घंटे के बाद लिया जा सकता है दो रत्ती इसकी पूर्ण मात्रा है बच्चो और दुर्बल को उनकी उम्र का अंदाजा लगा कर इसकी मात्रा को दिया जाना चाहिए
वात नाशक बटी उपचार
उपचार:-
दस्त (अतिसार )
उदरशूल (पेट दर्द)
वातनाशक
30/06/2024
बरसात के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स निम्नलिखित हैं:
1. स्वच्छता बनाए रखें:- इस मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नियमित रूप से हाथ धोएं और अपने आसपास की सफाई का ध्यान रखें।
2. उबला हुआ पानी पिएं:- पीने के लिए केवल उबला हुआ या फ़िल्टर किया हुआ पानी ही प्रयोग करें। बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
3. स्वस्थ भोजन करें:- ताजे फल और सब्जियाँ खाएं। तले-भुने और स्ट्रीट फूड से बचें क्योंकि ये जल्दी खराब हो सकते हैं और पेट की समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
4. मच्छरों से बचाव करें:- मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का उपयोग करें। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी बरतें।
5. भीगने से बचें:- बारिश में भीगने से बचें। यदि आप भीग जाएं तो तुरंत सूखे और साफ कपड़े पहनें ताकि ठंड या अन्य संक्रमण से बचा जा सके।
6. योग और व्यायाम:- नियमित योग और हल्का व्यायाम करें। यह आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करेगा।
7. हल्दी और अदरक का सेवन:- हल्दी और अदरक का सेवन करें। यह आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
8. विटामिन सी का सेवन बढ़ाएं:- विटामिन सी युक्त फलों जैसे संतरा, नींबू और आंवला का सेवन करें। यह आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करेगा।
9. सही कपड़े पहनें:-हल्के, सूती और आरामदायक कपड़े पहनें जो जल्दी सूख जाएं और आपको बारिश से बचाएं।
10. भरपूर आराम करें:- अच्छी नींद और आराम लें ताकि आपका शरीर ताजगी महसूस कर सके और बीमारियों से लड़ने की शक्ति बढ़ सके।
इन टिप्स को अपनाकर आप बरसात के मौसम में भी स्वस्थ रह सकते हैं।
30/06/2024
Health Tip:-हाइड्रेटेड रहने का महत्व
हाइड्रेटेड रहने और इष्टतम स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पिएं।
जलयोजन लाभ:-शारीरिक कार्यों को बनाए रखने के लिए उचित जलयोजन महत्वपूर्ण है, जैसे पाचन, परिसंचरण और तापमान विनियमन।
ऊर्जा का स्तर:- पर्याप्त पानी पीने से थकान को रोकने के लिए पूरे दिन आपकी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
28/06/2024
आँखों की समस्याओं का रामबाण इलाज: आयुर्वेदिक उपचार
आंखो के दर्द के लिए आयुर्वेदिक लेप:-
औषधि:-
कासनी लगभग ७ ग्राम
काहू के बीज लगभग ७ ग्राम
रसौती लगभग ३/२ ग्राम
अफीम लगभग ३/२ ग्राम
इसबगोल लगभग 3 ग्राम
विधि :-
खरल में कासनी, काहू के बीज और रसौती इन तीन चीज़ो को डाल ले और कूट ले
कुछ टाइम बाद कूटने के बाद देखे की वो बारीक़ (महीन) हो चुकी है तो उसको निकल ले
अगर वो मिक्सचर महीन नहीं पीसा है तो दोबारा कूट कर अथवा पीस है महीन (बारीक़ ) करे
एक चमच पानी ले कर और अफीम में मिला ले
और अफीम को आग पर खौलाकर गाढ़ा लेप बना ले
फिर छोटे चार चमच पानी के साथ इसबगोल मिला ले या भिगो दे |
घंटेभर बाद साफ़ कपडे से छान कर या मसलकर उसका लूआब निकाल ले
अब इस लुआब में सभी चिच्जो को एक एक करके मिक्स कर ले
मिक्सचर एक सा हो व् अच्छे से मिक्स हो ये जरूर कन्फर्म कर ले
उस बने मिक्सचर को एक साफ़ सुथरे बर्तन में ढक कर रख ले
उपयोग कैसे करे :-
एक 5 ग्राम तक कपडे की बनी गोल पट्टी ले ले
उसके ऊपर गाढ़ी तह लेप की चढ़ा ले
उसको आँखे से दोनों कनपटियों तक साटना है (रखना है)
यह लगभग दो से चार घंटे तक नहीं हटानी चाहिए
जब भी दो से चार घंटे बाद हटाएंगे तो दोबारा यह परिक्रिया करनी है
लाभ व् उपचार :-
इसका उपयोग आँख में आने वाली लाली में किया जाता है यह उसमे राहत पहुँचता है
इसका उपयोग आँख में होने वाले दर्द में भी राहत दिलाता है
अगर पलके आपस से चपकति है तो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है
आँखों में कीचड़ आने की समस्या के लिए भी इस लेप का उपयोग किया जा सकता है
आखो की रोशनी का अच्छा न मालूम होने भी यह उपचार राहत दिला सकता है
नोट:-
आँखों के लिए उपचार करते समय पूर्ण तरिके से जान कर समझ कर ही इसका उपचार करे
कोई भी उपचार करते समय एक बार डॉक्टर से परमर्श जरूर ले ले
और उपचार के समय शास्त्र कथित व् बड़े बजुर्गो के द्वारा कही बातो (परहेज )का भी पालन करे
28/06/2024
आँखों के लिए आम घरेलु नुस्खे :-
कुछ आपके सुने सुनाये प्रमुख घरेलु नुस्खे जो आमतौर पर लोग अपनी आँखों को आराम पहुंचने लिए करते है जिसमे से कुछ आप जानते हो
गुलाब जल का उपयोग आँखों की ऊपरी पलक की सूजन और थकान को दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है। इसे आँखों पर लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। इससे आँखों को ठंडक मिलती है और सूजन कम होती है।
खीरे के टुकड़े को आँखों पर रखने से आँखों की ऊपरी पलक की थकान दूर होती है और ठंडक मिलती है। इसे 15-20 मिनट तक रख सकते हैं।
उपयोग किए गए टी बैग्स को फ्रिज में ठंडा करके आँखों पर लगाने से सूजन और जलन में राहत मिलती है। कैमोमाइल और ग्रीन टी बैग्स विशेष रूप से लाभकारी होते हैं।
एलोवेरा जेल को आँखों की ऊपरी पलक पर लगाने से जलन और सूजन में आराम मिलता है। यह त्वचा को ठंडक पहुँचाने और उसे नमी प्रदान करने में मदद करता है।
गर्म पानी में एक कपड़ा भिगोकर आँखों पर रखने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और आँखों की ऊपरी पलक की सूजन कम होती है। इसे दिन में दो बार कर सकते हैं।
हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। हल्दी पाउडर को दूध में मिलाकर आँखों की ऊपरी पलक पर लगाने से सूजन और लालिमा कम होती है। इसको किसी भी चोट लगने के बाद भी लिया जा सकता है इसको गोल्डन मिल्क के नाम से भी जाना जाता है
गाजर के रस में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे नियमित रूप से पीने से आँखों की समस्याओं में कमी आती है।
आँखों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन और मिनरल्स युक्त संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है। हरी सब्जियाँ, फल, नट्स और बीज आँखों के लिए लाभकारी होते हैं।
इन सभी उपायों को आजमाकर आप भी अपनी आँखों की समस्याओं को आसानी से दूर कर सकते हैं। आयुर्वेदिक व् घरेलु उपाय न सिर्फ सुरक्षित होते हैं बल्कि इनके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं होते। इसको शेयर करें और अपने दोस्तों तक भी इन उपायों से अवगत कराएं।
आपकी आँखें स्वस्थ और सुंदर रहें!
26/06/2024
अजवाइन की बर्फी: भूख को बढ़ने का घरेलु उपाय
भूख लगना एक नेचुरल प्रोसेस है हमारे शरीर को एनर्जी भोजन से ही मिलती है जो हमारे शरीर की ज़रूरत को दर्शाती है कुछ लोगों को अक्सर भूख नहीं लगती जो उनके स्वस्थ्य को प्रभावित कर सकती है इसका घरेलु नुस्खा की कैसे अजवाइन की बर्फी एक घरेलु उपचार के रूप में हमारी मदद कर सकती है इस पूरी प्रक्रिया के बारे में जानेगे
औषधि:-
बड़े दाने वाली अजवाइन
कागजी निम्बू का रस
चीनी
विधि:- अजवाइन को अच्छे से साफ़ करने के बाद किसी शीशे या पत्थर के बर्तन में डाल ले निम्बू का रस डाल दे और रस अच्छे से मिल चूका है उसको सूखने के बाद उसको कपडे के साथ छान ले
फिर चीनी में पानी डाल कर चाशनी बना ले
चाशनी में अजवाइन डाले और मिला ले जब आपको लगे की यह गाढ़ी हो गयी है तो उसको किसी थाली में डाल कर सुख जाने के बाद काट कर निकाल ले
उपयोग :-
इसका कुछ दिनों तक नियम पूर्वक सेवन करे आपको भूख अधिक लगती हैऔर खाया पिया भी अच्छे से पच रहा है, पेट के रोग शांत हो रहे है
25/06/2024
अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
अस्थमा:- आप जानते है की अस्थमा (दमा) एक बहुत ही खतरनाक बिमारी है जिसको समय रहते ठीक ना किया जाये तो जान लेवा बन जाती है यह रोग भिन्न भिन्न कारण से हो सकता है जिसके कारण हमारे शरीर के फेफड़े फूलना बंद हो जाते है या ये कहे की सांस लेना बंद कर देते है या बहुत कम लेते है जिसका एक कारण फेफड़े में सूजन भी होता है फेफड़े में सूजन का कारण धूम्रपान भी हो सकता है
अस्थमा को सिगरेट से दूर करने का रामबाण इलाज
अस्थमा (दमा) से घर्षित लोगो को धूल मिट्टी और धुएं से एलर्जी होने लगती है व् सांस लेने में तकलीफ होने लग जाती है तेज भागने पर, पहड़ो पर चढ़ने पर ,साइकल चलाने पर, अधिक देर तक रोड पर चलने पर भी उनका सांस फूलने लगता है जो लोग सिगरेट पीते है उनको यह समस्या अधिक होती है
इस ब्लॉग पोस्ट में अस्थमा का उपचार "सिगरेट बना कर" "उसको उपयोग में ला कर" ही ठीक करेंगे जो लोग सिगरेट पीते है उनके लिए यह आयुर्वेदिक उपचार सबसे बढ़िया है वैसे तो हमने अस्थमा (दमा) के लिए धतूरे की काली भस्म के बारे में बताया है जिसका लिंक दिया गया है -आप www.upachaardesi.blogspot.com पर क्लिक करके जानकारी हासिल कर सकते है पर हम यहाँ धतूरे का प्रयोग करके अस्थमा के आयुर्वेदिक उपचार के लिए सिगरेट बनाएगे
औसधि:- काले धतूरे का पंचांग(जड़, फल ,फूल ,पत्ता ,और डाल)भांग और कलमीशोरा पांच पांच तोले लेना है
विधि :-धतूरे का पंचांग (जड़, फल ,फूल ,पत्ता ,और डाल) को तोडना है
इन सब के छोटे छोटे टुकड़े कर लो
अब भांग को इनके साथ मिला कर कूट लो
कोई भी तार वाली छलनी से छान कर चूर्ण को अलग कर लो
अब एक तामचीन ,कठाया पत्थर के बर्तन में चूर्ण डाल ले
अलग से कलमीशोरा ले उसमे थोड़ा सा जल मिला ले
बर्तन में रखा चूर्ण में पानी में मिला कलमीशोरा मिला ले
अगर अच्छे से ना मिले तो पानी के छींटे मार मारकर दोबारा मिलाये
अच्छे से मिलने के बाद चूर्ण कुछ मुलायम सा लगेगा
एक छोटा सिगरेट बनाने वाले कागज़ लो
कागज में थोड़ा चूर्ण रख कर लेई या अरारोट से उसे साट दे
आयुर्वेदिक सिगरेट के लाभ :-
इसको लेने से या पीने से अस्थमा या दमे का दौरा रुक जाएगा
रोगी को नींद भी अच्छी आएगी
उपयोग:-जिस दिन दमे का या अस्थमा का दौरा हो या दमे/अस्थमा के जोर पकड़ रहा हो उस वक्त एक सिगरेट पीकर ऊपर से एक या दो गिलास गाये का गुनगुना दूध पीना चाहिए इस औषदि या घरेलु उपचार में धतूरा और भांग है इसकी खुश्की को दूध ही दूर कर सकता है
नोट :-दूध के साथ लेने से औषधि की गर्मी के कारण रोगी को जो बेचैनी सी होने लगती है वो नहीं होती इसलिए दूध के साथ ही लेने को कहा जाता है
इसका उपयोग सोच समझ कर ही करना चाहिए
यह और्वेदिक उपचार करने से पहले और लेने से पहले डॉक्टर या वैध का परामर्श जरूर ले
Health Tips Health Tips में घरेलू नुस्खे: स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए आयुर्वेदिक और प्रभावी उपायों का खजाना। यहाँ आपको घर पर आसानी से ...
22/06/2024
पीलिया को दूर करने का आयुर्वेदिक काढ़ा:-
सफेद पुनर्नवा की जड़,(जिसको आम भाषा में गध-बड़ कहा जाता है ),सोंठ,नीम की हरी छाल,ताज़ी गडूची,हल्दी,कुटकी,देवदारु,हरड़ ये आठों चीज़ो को तीन तीन माशे ले,
एक एक करके कूट ले फिर एक मिट्टी या कलईदार बर्तन में ५००ग्राम पानी में भिगो ले
उसका काढ़ा पका ले
जब पकने के बाद लगभग 125 ग्राम रह जाये तो कपडे से छान कर उसको ठंडा होने के लिए रखे
फिर उसमे लगभग ६ माशे ( ६ ग्राम ) मधु / सहद मिला ले
इसकी लेने की यह एक मात्रा है
21/06/2024
पेट की गैस का घरेलु उपचार - रोचक चूर्ण
रोचक चूरन:-
पेट की गैस का घरेलु उपचार -रोचक चूरन
स्वादिष्ट चूर्ण जिसको रोचक चूरन भी कहा जाता है और बच्चे जवान और बुड्ढे भी इसको बहुत पसंद करते है यह करियाने की दुकान पर आसानी से अलग अलग नाम से मिल जाता है जो चटपटा होता है खाने में भी स्वादिष्ट है यह हमारी हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छा होता है जो पाचन क्रिया के साथ भूख को बढ़ाता है यह पेट की गैस का घरेलु उपचार रोचक चूरन है, यह पेट को ठीक करने का एक आयुर्वेदिक उपचार भी है इस ब्लॉग पोस्ट के माद्यम से हम आज इस चूर्ण के ऊपर चर्चा करेंगे जिसमे समझगे की इसको कैसे तैयार करना है इसकी विधि यह घरेलु उपचार में कैसे उपयोगी है व् किसी मात्रा में लेना सही होगा
रोचक चूर्ण औषदि :-
सौंफ -दो तोले
छोटी पीपली - दो तोले ,
काली मिर्च -तीन तोले
टाटरी(इमली का सत्व )- तीन तोले
सफ़ेद जीरा -चार तोले
सेंधा नामक -तेरहा तोले
चीनी -तेरहा तोले
कैसे तैयार करे :-
नमक, चीनी, टाटरी इन तीन चीज़ो की अलग अलग करके पीसे ले और कपडे से छान कर रख ले
फिर सौंफ, काली मिर्च, पीपली और जीरे को एक साथ कूट ले और उसको भी कपडे से छान ले
उसके बाद उन सभी को एक साथ अच्छे से मिला ले
और एक साफ़ सुथरी काच की शीशी में रख ले
गुण:-
स्वादिष्ट चूर्ण - यह चूर्ण विशेष कर रूचि-उत्पादक है स्वादिष्ट होने के कारण बार-बार खाने को मन करता है
पाचक - यह चूर्ण पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पाचन में हेल्प करता है
भूख - यह चूर्ण मन को प्रसन्नकर व् मुख की विरसता को ठीक करके भूख को बढ़ाता है
पेट गैस - अगर भोजन के बाद इसकी एक निश्चित मात्रा ली जाये तो यह पेट में गैस को इकठा होने की शिकायत को दूर करता है
मात्रा व् समय:-
मात्रा - इस चूर्ण को एक से तीन माशे (1 से 3 ग्राम )तक लेना सही रहता है
समय - भोजन के बाद दोनों वक्त सुबह शाम लेना सही रहेगा या कष्ट के समय इसका उपयोग करना चाहिए
20/06/2024
जले स्थान के लिए मलहम-रामबाण उपचार
जले स्थान के लिए मलहम:-
पारंपरिक उपचारों की दुनिया में, अनेकों खजाने हैं जो पीढ़ियों से हमें प्राप्त हुए हैं। भारत एक ऐसा देश है जहा हमेसा घरेलु नुस्खों जा उपयोग होता रहा है और आज की दुनिया भी आयुर्वेदिक उपचारो पर भरोसा करती आई है ऐसा ही एक खजाना है, जले स्थान के लिए मलहम का, जो एक घरेलु उपचार है जो सरल परंतु प्रभावी सामग्री का प्रयोग करके शांति और चिकित्सा प्रदान करता है। आज, हम एक पुरानी प्रसिद्धि की रेसिपी में गहराई से झाँकते हैं, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है जिसका सारा सामान आपके घर में ही मौजूद है ।
सामग्री:-
जले स्थान के लिए मलहम - एक समय-परीक्षित उपचार
सेमल की रुई - 2.5 तोले (35 gram)
ारेड़ी का तेल (रेड़ी का तेल) - 2.5 तोले (35 gram)
विधि:-
कांसे की थाली में रेड़ी का तेल डालें।
सेमल की रुई को इसमें फ़ैला कर, हथेलियों से मलें।
मलहम का स्वरुप प्राप्त होने पर, मिश्रण को किसी साफ़ सुथरी शीशी में संग्रहित करें।
मलहम के फ़ायदे:-
मलहम का प्रयोग, जलने पर हुए स्थान पर, सुकून पहुंचाने में महत्वपूर्ण होता है।
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Address
Kurukshetra
20/06/2024