Jugnu jayant -JJ
Social Activist @TeamJJ and Matri Chaya Charitable Hospital
10/06/2026
हमारे टीम जे जे के सच्चे टाइगर, सामाजिक कार्यो में बढ़ चढ़ कर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने वाले,रक्तवीर और मेरे व सामाजिक जीवन मे हर संघर्ष का साथी सूरज कुमार यादव को जन्मदिन की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।
आप ऐसे ही हँसते मुस्कुराते रहे।ईश्वर आपको सबल करे🙏
Suraj Yadav Surya
09/06/2026
2018 में झारखंड एकता संघ द्वारा मुझे बिरसा रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।यह सम्मान मुझे सामाजिक कार्यो एवम खेल कूद के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया गया लेकिन पूरी निष्ठता से बताऊं तो इस सम्मान के दिये जाने से पहले मैं भगवान बिरसा के बारे में बड़ा सतही स्तर पर जान रहा था।कार्यक्रम के एक दिन पहले जब मैं धरती आबा के बारे में जानने बैठा तो मेरी आँखे खुली की खुली रह गई।
इतना शौर्य - इतना पराक्रम🙏
आज ही के दिन मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में हमारे “धरती आबा” बिरसा मुंडा जी ने अपने प्राण त्याग दिए, लेकिन उनका संघर्ष और संदेश आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है। वे एकमात्र आदिवासी महापुरुष हैं जिनकी तस्वीर संसद के सेंट्रल हॉल में स्थापित है। 1895 से 1900 के बीच उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध उलगुलान (महाविद्रोह) का नेतृत्व किया और आदिवासी समाज में स्वाभिमान, अधिकार तथा स्वतंत्रता की चेतना जगाई।
उनका प्रसिद्ध उद्घोष—“महारानी राज तुंडु जाना, ओरो अबुआ राज एटे जाना” (महारानी का राज समाप्त हो और हमारा राज स्थापित हो)—जन-जन में साहस का संचार करता था। जब देश में स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापक पृष्ठभूमि तैयार हो रही थी, तब बिरसा मुंडा जैसे वीरों ने अपने बलिदान से संघर्ष की नींव मजबूत की।
धरती आबा को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन, आंदोलन, शौर्य और बलिदान से परिचित कराएँ। उनका जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और स्वाभिमान का अमर प्रतीक है।
08/06/2026
मरकच्चो के प्रेमनगर में जो हुआ वो किस सभ्य देश मे स्वीकार्य होगा?किसी के घर घुस कर पीट पीट का मार डालना, यह कतई नहीं होना चाहिए ।
अनीश सिंह के साथ हत्यारो की कितनी भी दुश्मनी होगी हत्या स्वीकार्य नही होना चाहिये।
जिस की हत्या हुई और जो हत्या में शामिल रहे दोनों के साथ साथ दोनों का परिवार आजीवन एक दुःख भोगता है।
हर रोज सुबह जब फेसबुक खोलता हूँ तो मन मे एक उम्मीद रहती है कि कोडरमा से कोई अच्छी खबर पढ़ने को मिल जाये लेकिन हर दिन मौत,हर दिन दुर्घटना हर दिन कुव्यवस्था की खबरे मन को कचोटती है कि कैसे यह सब ठीक होगा।
कैसे लोग सुरक्षित महसूस करेंगे।
क्या इन अपराधों के नीव पर खुशहाल कोडरमा का भविष्य खड़ा होगा?
सोचिए और अपराधमुक्त कोडरमा के लिए जुटिये🙏
07/06/2026
इस विषय पर पहली गंभीर टिप्पणी कर रहा हूँ।
पहली बार जब इशारे में लिखा तो आशंका थी,आज अनुभव लिख रहा हूँ।
जिस दिन देश मे कॉकरोच जनता पार्टी के नाम पर एक इंस्टाग्राम आईडी राकेट की भाँति फॉलोवर्स के बादलों में चढ़ गया उस दिन देश की एक आबादी ने उनमे राजनीति का युवा विकल्प के रूप में देखा।मेरे कई परिचितों ने उसपर मेरी राय माँगी थी लेकिन मैं कभी भी विषय पर त्वरित राय नही बनाता। थोड़ा समय लिया और थोड़ी पड़ताल की तो यह संज्ञान में आया कि एक बड़ी धनराशि और कुछ देश विरोधी ताक़ते आपदा का अवसर उठाने में तुली है।
फिर पार्टी ने अपने प्रवक्ता तय किये जिनमे वो लोग थे जिनका राजनीतिक झुकाव वाम-संगठनो की ओर था। देश के लेफ्ट संगठनों का इतिहास भले जुझारू लोगो से भरा था लेकिन वर्तमान में उनकी पूरी ऊर्जा देश को अस्थिर करने में लगी हुई है और यही कारण है कि उनको देश ने एक सिरे से नकार दिया है।
कल जंतर मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी के सुप्रीमो अभिजीत दीपके के नेतृत्व में प्रोटेस्ट बुलाया गया तो वहाँ से जो वीडियो क्लिप आये वो बेहद निराशाजनक थे।देश की शिक्षा व्यवस्था के सुधार के नाम पर जुटी भुद से वाम संगस्थनों के लोकप्रिय नारे लगवाए जा रहे थे।देश को अस्थिर करने को लगी ताक़ते युवा कंधों पर बंदूक रख सत्ता की छाती पर गोली चला रहे थे। पहलेअन्ना आंदोलन की तुलना इस आंदोलन से हो रही थी लेकिन कल के नजारों ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
राजनीति और आंदोलन एक गंभीर विषय है। सतही स्तर की तैयारी से बस स्टंट हो सकता है देश हित मे कुछ भी नही।
आंदोलन के माध्यम से बदलाव के लिए जयप्रकाश नारायण जैसी गंभीरता चाहिए ।ऐसे आन्दोलनो को वीकेंड फन गेम नही बनाना चाहिए।
05/06/2026
विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम अपने कोडरमा को आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा छोड़कर जा रहे हैं।
आज हमारा जिला कई पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं और भूजल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। कभी घने और हरे-भरे रहे हमारे जंगल अवैध कटाई, खनन और बढ़ती आबादी के दबाव में सिमटते जा रहे हैं। इसका सीधा असर वन्यजीवों और पूरे पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ रहा है।
उद्योग और विकास आवश्यक हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रकृति को नष्ट करके नहीं चुकाई जा सकती। प्रदूषण बढ़ने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। सांस की बीमारियां, जलजनित रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है। यदि हम सभी मिलकर छोटी-छोटी जिम्मेदारियां निभाएं तो बड़ा बदलाव संभव है। एक पेड़ लगाना, पानी बचाना, स्वच्छता बनाए रखना और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मातृछाया और Team JJ पिछले 10 वर्षों से समाज सेवा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध रहे हैं। इस विश्व पर्यावरण दिवस पर हम संकल्प लेते हैं कि जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर और हरित पहल के माध्यम से कोडरमा को स्वच्छ, स्वस्थ और हरा-भरा बनाने के लिए अपना प्रयास लगातार जारी रखेंगे।
आइए, प्रकृति की रक्षा को अपना कर्तव्य बनाएं, क्योंकि सुरक्षित पर्यावरण ही सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।
04/06/2026
हमारा कोडराम जो कभी गानों की फरमाइश के लिए प्रसिद्ध हुआ अब पूरी तरह से 90 के दशक का मिर्जापुर और वासेपुर बन गया है। कल रात हमारी विधायक मैडम के निजी ड्राइवर राजकुमार यादव जी मामूली जमीन विवाद में मौत के घाट उतार दिए गए।उनके पिता गंभीर घायल है और माँ और बेटी को भी चोट है।
यह स्थिति तब है जब घटना के दोपहर ही विधायक मैडम संबंधित थाना प्रभारी को इस विवाद की सूचना दे चुकी थी।
आप स्तिथि की भयावहता का अंदाजा लगाइए।लोग ये तक नही देख रहे है कि कल उनके इस कुकर्म का क्या फल मिलेगा।
किसी को मार कर अगर जमीन का छोटा टुकड़ा मिल भी जाये तो उसकी कीमत आजीवन कारावास होगी।
विधायक मैडम का बयान भी सुना और उन्हें रोते हुए भी देखा ,उनके और राजकुमार जी के परिवार के साथ आज कोडरमा का हर नागरिक है लेकिन एक विनम्र बात है कि जिले में इससे पहले जो हत्याएं हुई अगर उनपर वो न्याय सुनिश्चित करने में अपना पूरा जोर लगा देती तो लोगो मे हिंसा न करने का भय होता।
एक विधायक प्रोटोकॉल में अपने विधानसभा क्षेत्र ही नही बल्कि राज्य के अधिकांश सचिव स्तर के अधिकारियों से बड़े होते है। यह छोटी सी बात चुने हुए जनप्रतिनिधि क्यों नही समझते।
यह प्रश्न सिर्फ हमारी विधायक मैडम का नही है बल्कि राज्य के हर विधायक का है कि आप अपनी जिम्मेदारी कब सुनिश्चित करेंगे?
अगर आपके विधानसभा में अराजकता है तो पुलिस पर नकेल कसने की जिम्मेदारी जनता की तरफ से आपकी है ।
मैडम अभी भी देर नही हुई है,यह आपकी निजी क्षति भी है,उतरिये सड़क पर और जबतक कोडराम में अपराधियों की रूह न कांपे तबतक कान पकड़े रहिए पुलिस का।
पूरा कोडरमा आपके साथ है।
राजकुमार जी ,आप को श्रद्धांजलि 🙏
03/06/2026
ये कैसी मरी हुई व्यवस्था है?कैसा मरा हुआ प्रशासन है हेमन्त सरकार का?
उदित के गए 1 माह हो गए ।कथित पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस के पास है तो उसे सार्वजनिक क्यों नही करती?
अगर उदित ने आत्महत्या की है तो उसको आत्महत्या के लिए उकसाने वाले कौन है?
क्या स्कूल की साख बचाने के लिए हो रही है लीपापोती?
ये सवाल कोडरमा की हर जागरूक जनता कर रही है आज।
सड़को पर लोग एक महीने से है लेकिन सरकार जस की तस सोई हुई है।
02/06/2026
एनसीआरबी यानी कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो एक सरकारी संस्था है जो देश में घटित अपराध के आंकड़े समय समय पर जारी करती है के अनुसार देश मे औसतन 76 हत्याएं रोज होती है।
हमारा राज्य झारखंड सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ राज्यवर सूची में सबसे ऊपर है,यानी कि सबसे ज्यादा हत्याएं जनसंख्या के अनुपात में हमारे यहां होता है।
रोजाना के 76 हत्याओं में बकरीद के दिन एक हत्या गाजियाबाद के खोड़ा में सूर्या प्रताप चौहान की हुई। सूर्या के कई दोस्तो में एक दोस्त असद था।असद से सूर्या की मोटरसाइकिल को लेकर एक छोटा सा विवाद बकरीद के दोपहर में हुई और इस विवाद के बाद असद ने अपने पिता नवाब और परिवार के फरहान और आतिफ के साथ मिलकर अपने दोस्त सूर्या को सबक सिखाने का सोचा।
बकरीद तो थी ही ,बकरे हलाल होने ही थे तो बकरा हलाल कैसे करते है ये दिखाने के लिए असद ने सूर्या को शाम में अपने घर बुला लिया।
यह शाम सूर्या की आखरी शाम थी। असद ,नवाब, फरहान और आतिफ ने मिलकर सूर्या को मौत के घाट उतार दिया।
सुर्या की अर्थी उठी, एक माँ की चीख पूरे प्रदेश ने सुनी। वह केवल अपने बेटे के लिए नहीं रो रही थी, बल्कि उस विश्वासघात के लिए रो रही थी जिसने दोस्ती का चेहरा कलंकित कर दिया।
लेकिन यहीं से शुरू हुआ उत्तर प्रदेश का वह मॉडल, जिसकी चर्चा पूरे देश में होती है।
पुलिस ने पाँच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। तीन तुरंत गिरफ्तार हुए — नवाब, फरहान और आतिफ। असद ₹50,000 के इनाम के साथ फरार था।
31 मई की रात, खोड़ा इलाके में असद के आने की सूचना मिली । पुलिस ने बैरिकेडिंग की। जब असद बाइक पर आया, तो पुलिस ने रुकने को कहा। असद ने फायरिंग शुरू कर दी।
दोनों तरफ से 50 राउंड गोलियाँ चलीं। जवाबी कार्रवाई में असद को गोली लगी। असद को अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
न्याय की यह व्यवस्था अगर योगी जी कर सकते है तो हमारे हेमंत जी क्यों नही!!!यह सवाल हमे खुद से पूछना होगा और नही तो हम हत्या के आंकड़ों की सूची में हमेशा टॉप करेंगे।
01/06/2026
झारखंड आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ कानून व्यवस्था को लेकर जनता के मन में गहरी चिंता पैदा हो चुकी है। NCRB के अनुसार वर्ष 2024 में 1472 हत्या के मामलों के साथ झारखंड पूरे देश में पहले स्थान पर रहा। इसके बाद भी स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिखा। वर्ष 2025 में 1347 हत्याएँ हुईं और 2026 के केवल पहले तीन महीनों में ही 337 लोगों की हत्या हो चुकी है।
ये आंकड़े केवल संख्याएँ नहीं हैं, बल्कि उन परिवारों का दर्द हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। सवाल यह है कि आखिर सरकार की प्राथमिकता क्या है? जब अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हों, तब आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करे?
सरकार की पहली जिम्मेदारी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। लेकिन बढ़ते अपराध यह संकेत दे रहे हैं कि अपराधियों में कानून का भय कम हुआ है और प्रशासन की पकड़ कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। जनता जवाब चाहती है कि आखिर कब तक झारखंड अपराध और हत्याओं की खबरों से सुर्खियों में बना रहेगा?
समय आ गया है कि सरकार केवल दावे न करे, बल्कि जमीन पर कठोर और प्रभावी कार्रवाई करके जनता का विश्वास पुनः स्थापित करे।
30/05/2026
2020 से मार्च 2026 तक झारखंड में 8990 रेप की घटनाएँ दर्ज हुईं। यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि 8990 परिवारों का दर्द, 8990 बेटियों की चीख और व्यवस्था की असफलता की कहानी है।
सबसे बड़ा सवाल सरकार से है कि आखिर बेटियाँ कब सुरक्षित होंगी? जब हर साल सैकड़ों नहीं, हजारों बेटियाँ दरिंदगी का शिकार हो रही हैं, तब कानून व्यवस्था की मजबूती के दावे कितने सच हैं? अपराधियों के मन में कानून का डर क्यों नहीं है? क्यों हर घटना के बाद सिर्फ बयानबाज़ी होती है और कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है?
झारखंड की जनता जानना चाहती है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई योजनाओं और दावों का ज़मीनी असर कहाँ है। अगर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा? एक सभ्य समाज की पहचान उसकी बेटियों की सुरक्षा से होती है, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि माता-पिता अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर भय और चिंता में जी रहे हैं।
यह राजनीति का नहीं, समाज और मानवता का सवाल है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करना होगा, अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई करनी होगी और जनता का विश्वास बहाल करना होगा। क्योंकि आँकड़े नहीं, सुरक्षित बेटियाँ ही किसी राज्य की असली पहचान होती हैं।
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