9 Devi Yatra

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01/04/2022

इस साल चैत्र नवरात्रि का त्योहार 2 अप्रैल 2022 से शुरू हो रहा है और 11 अप्रैल 2022 को इसका समापन होगा. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है ऐसे में इसके लिए कुछ सामग्रियों की जरूरत होती है. तो आइए जानते हैं नवरात्रि पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट-
मां दुर्गा की पूजन सामग्री

- आम के पत्ते
- चावल
- लाल कलावा
- गंगा जल
- चंदन
- नारियल
- कपूर
- जौ
- गुलाल
- लौंग
- इलायची
- 5 पान
- सुपारी
- मिट्टी का बर्तन
- फूल
- श्रंगार का सामान
- चौकी
-आसान
- कमलगट्टा
कलश स्थापना के लिए 7 तरह का अनाज, मिट्टी का बर्तन, पवित्र स्थान से लायी गयी मिट्टी, कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, सुपारी, जटा वाला नारियल, लाल सूत्र, मौली, इलाइची, लौंग, कपूर, रोली, अक्षत, लाल कपड़ा और फूलों की जरूरत होती है.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022 Kalash Sthapana 2022 Shubh Muhurat)

चैत्र घटस्थापना शनिवार, अप्रैल 2, 2022 को
घटस्थापना मुहूर्त - सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 31 मिनट तक
अवधि - 02 घण्टे 21 मिनट्स
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 12 बजे से लेकर 12 बजकर 50 मिनट तक
(घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है.)
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 01, 2022 को 11 बजकर 53 मिनट से शुरू
प्रतिपदा तिथि समाप्त - अप्रैल 02, 2022 को 11 बजकर 58 मिनट तक
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित किया जाता है. कलश स्थापना से पहले मंदिर की अच्छी तरह से सफाई करें और एक लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद इस कपड़े पर थोड़े से चावल रखें. एक मिट्टी के चौड़े बर्तन में जौ बोएं. अब इस पात्र में पानी से भरा कलश रख दें. कलश पर कलावा बांधे. इसके अलावा कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत डालें. अब इसमें अशोक के पत्ते या आम के पत्ते रखें और इसके ऊपर चुनरी लपेटकर एक नारियल रख दें. नारियल पर कलावा बांध लें. नारियल को कलश में रखते हुए मां दुर्गा का आवाहन करें. इसके बाद दीप जलाकर पूजा कर करें.

03/02/2022

वर्ष में कुल चार नवरात्रियां
वर्ष में कुल चार नवरात्रि होते हैं। दो गुप्त व दो उजागर। चैत्र व आश्विन माह की नवरात्रियां उजागर नवरात्रि कहलाती हैं। आषाढ़ व माघ माह की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है,ये तंत्र, मन्त्र व यन्त्र साधना का सर्वश्रेष्ठ काल मानी जाती है। माघ माह की नवरात्रि दस महाविद्या की साधना के साथ ही विद्या की देवी मां सरस्वती की साधना हेतु भी श्रेष्ठ है। बुधादित्य योग विद्यार्थियों हेतु भगवती दुर्गा के साथ मां शारदा उपासना हेतु भी सर्वश्रेष्ठ है। 10 फरवरी, गुरुवार को गुप्त नवरात्रि का समापन पूर्ण रवियोग व मिथुन राशि के चन्दमा में होगा। गुप्त नवरात्रि में गौरी तृतीया, बसन्त पंचमी, नर्मदा जयंती,अचला आरोग्य सप्तमी, भीमाष्टमी व देवनारायण जयंती के पर्व भी कुछ खास योग निर्मित कर पर्व की शोभा बढ़ा रहे हैं।

12/04/2021

मां दुर्गा की उपासना का पर्व नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू होने वाले हैं। चैत्र नवरात्रि का 22 अप्रैल को समापन होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी होगी। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की उपासना की जाती है।

इस साल नवरात्रि के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग आदि शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा के लिए घटस्थापना की जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस नवरात्रि मां दुर्गा की सवारी घोड़ा (अश्व) है। जबकि प्रस्थान नर वाहन (मानव कंधे) पर होगा।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त-

दिन- मंगलवार
तिथि- 13 अप्रैल 2021
शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक।
अवधि- 04 घंटे 15 मिनट
घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक।

Chaitra Navratri 2021: मां दुर्गा (Maa Durga) के उपासकों को चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का बेसब्री से इंतजार रहता है. ये पर्व इसलिए भी खास है क्योंकि पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा की उपासना का उत्सव मनाया जाता है. इस साल शक्ति की उपासना का ये पर्व यानी चैत्र नवरात्रि मंगलवार, 13 अप्रैल (13 April 2021) से शुरू होने वाले हैं. 21 अप्रैल तक ये पर्व चलेगा. नवरात्रि के आरंभ के साथ ही हिन्दू नववर्ष (Hindu New Year) की शुरुआत भी होगी
नवरात्रि के कई नियम होते हैं. अगर आप मां दुर्गा की पूजा करते हैं तो ये आवश्यक है कि आप इन नियमों का अवश्य पालन करें.

सबसे पहले आवश्यक है कि प्रतिदिन मंदिर जाएं. अगर कोरोना के कारण मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो मां की घर में ही पूजा-अर्चना करें. मातारानी को जल अवश्य अर्पित करें. घर में नंगे पैर रहना चाहिए. साफ-सफाई का खास ध्यान रखें. साफ कपड़े पहनें.
सात्विक रहें. घर में कलह-क्लेश नहीं होना चाहिए. मां को अपने हाथों से बना प्रसाद अर्पित करें. सुबह-शाम मां के नाम की ज्योत जलनी चाहिए. घी से जलाएं. गरीबों की यथाशक्ति मदद करें.

मांस-मदिरा का सेवन न करें. तामसिक भोजन से दूर रहें. इन दिनों में नाखून व बाल न काटें. किसी से अभद्र भाषा में बात न करें. मन में बुरे विचार न आने दें.

07/04/2019

Happy Navratraas ! Jai Mata di !!

नव दुर्गे मैया की जय

22/03/2018

Jai Mata Di..

22/03/2018
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