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12/10/2022
04/05/2020
और हम ज़रूर तुमको आज़माएंगे कुछ डर और भूख से और मालों और जानों और फलों में कमी के ज़रिए, और साबित-क़दम रहने वालों को ख़ुश-ख़बरी दे दो।
अल-क़ुरआन :- 2 : 155
अपने रब के रास्ते की तरफ़ हिकमत और अच्छी नसीहत के साथ बुलाइए और उनसे अच्छे तरीक़े से बहस कीजिए, बेशक आपका रब ख़ूब जानता है कि कौन उसकी राह से भटका हुआ है और वह उनको भी ख़ूब जानता है जो राह पर चलने वाले हैं।
सूरह नहल :- 16 : 125
ऐ ईमान लाने वालो, जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए पुकारा जाए तो अल्लाह की ज़िक्र की ओर दौड़ पड़ो और खरीद व फरोख्त छोड़ दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा है, यदि तुम जानो
फिर जब नमाज़ पूरी हो जाए तो जमीन में फैल जाओ और अल्लाह का फ़ज़ल (रोजी) तलाश करो, और अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते रहो, ताकि तुम फला पाओ।
सूरह जुमा:- 62 : 9,10
आजकल जिस तरह निक़ाह से पहले (भीख़) दहेज़ के लिए मांग की जाती हैं और फ़िर निक़ाह के मौकें पर जिस तरह उसकी नुमाइश की जाती है शरअन इसके हराम होने में क़ोई सन्देह नहीं| सूरह लुक़मान, आयत-8 में अल्लाह का इरशाद हैं: "अल्लाह किसी इतराने वाले और गर्व करने वाले इंसान को पसन्द नहीं करता|"
किसी मां-बाप के इच्छा व ख़ुशी के बगैर उन्हें मज़बूर करके दहेज़ लेना हक़ीक़त में असत्य तरीक़े से माल खाने के जैसा आता हैं जिसके बारे में अल्लाह ने सूरह निसा, आयत-29 में इरशाद फ़रमाया हैं: "ऐ लोगो ! जो ईमान लाए हो! एक दूसरे के माल ग़लत तरीक़ों से न खाओ|" अगर किसी ने ज़बरदस्ती दहेज़ हासिल किया हो तो इस आयत में अनुसार वह पूरी तरह हराम हैं जिसे वापस लौटाना चाहिए या माफ़ कराना चाहिए |
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रदिअल्लाहु अन्हो कहते है के मैं एक दिन रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ सवारी पर पीछे था। आप ने फरमाया ऐ लड़के बेशक में तुम्हे कुछ अहम बाते बतला रहा हु। तुम अल्लाह के अहकाम की हिफाज़त करो। वो तुम्हारी हिफाज़त फरमाएगा। तुम अल्लाह के हुक़ुक़ का खयाल रखो उसे तुम अपने सामने पाओगे। जब तुम कोई चीज़ मांगो तो सिर्फ अल्लाह से मांगो। जब तुम मदद चाहो तो सिर्फ अल्लाह से मदद तलब करो। और ये बात जान लो के अगर सारी उम्मत भी जमा हो कर तुम्हे कुछ नफा पहुँचाना चाहे तो वो तुम्हे उस से ज्यादा कुछ भी नफा नही पहुँचा सकती जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है। और अगर वो तुम्हे कुछ नुकसान पहुँचाने के लिए जमा हो जाये तो उस से ज्यादा कुछ नुकसान नही पहुँचा सकती जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, क़लम उठा लिए गए और (तकदीर के) सहीफे खुश्क हो गए है।
जाम ए तिर्मिज़ी हदीस न. 2516
*रसूल अल्लाह सल अल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगो को किसी काम करने का हुक्म देंते तो वोह ऐसा ही काम होता जिस के करने की लोगो मे ताकत होती (इस पर) सहाबा रदिअल्लाहु अन्हुम ने अर्ज किया के या रसूल अल्लाह! हम लोग तो आप जैसे नही है (आप तो मासूम है) और आपकी अल्लाह पाक ने अगली पिछली सब लग़जिशे मुआफ़ फरमा दी है। (इसलिए हमे अपने से कुछ ज्यादा इबादत करने का हुक्म फरमाइए) (ये सुन कर) आप सल अल्लाहु अलैहि वसल्लम नाराज़ हुए हत्ता के गुस्सा आप सल अल्लाहु अलैहि वसल्लम के चेहरे मुबारक से जाहिर होने लगा। फिर फ़रमाया के बेशक मैं तुम से ज्यादा अल्लाह से डरता हूँ और तुम सबसे ज्यादा उसे जानता हूँ।(पस तुम मुझसे बढ़कर इबादत नही कर सकते)*
सही बुखारी :- 20
रसूल ईमान लाए हैं उस पर जो उनके रब की तरफ़ से उन पर उतरा है और मोमिन भी उस पर ईमान लाए हैं, सब ईमान लाए हैं अल्लाह पर और उसके फ़रिश्तों पर, और उसकी किताबों पर, और उसके रसूलों पर, हम उसके रसूलों में से किसी के दरमियान फ़र्क़ नहीं करते, और वह कहते हैं कि हमने सुना और इताअत की, हम तेरी बख़्शिश तलब करते हैं, और ऐ हमारे (प्यारे) रब! लौटना तो तेरी ही तरफ़ है।
सुरह बकर :- 2 : 285
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