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जय जय राजस्थान
01/01/2026
उदयपुर राजमहल
01/01/2026
जोधपुर फोर्ट राजस्थान का ऐसा फोर्ट है जहां से पाकिस्तान का नजारा भी दिखता है राजस्थान के इतिहास के जनक कर्नल जेम्स टॉड लिखते हैं कि राव जोधा के वंशज जोधपुर फोर्ट से पूरे जोधपुर रियासत पर निगरानी रख सकते हैं
31/12/2025
"मुट्ठी भर बाजरे के लिए मैं आज पूरे हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता।" - शेरशाह सूरी
(जनवरी 1544) में मारवाड़ की पावन धरा पर 'गिरी-सुमेल' का वह ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया था, जिसने दिल्ली की सल्तनत को हिला कर रख दिया था।
भले ही छल-कपट से शेरशाह सूरी यह युद्ध जीत गया, लेकिन सेनापति जैता और कुंपा के अदम्य साहस और बलिदान ने इतिहास के पन्नों में अपनी अमिट छाप छोड़ दी।
मारवाड़ के इन वीर सपूतों ने मुट्ठी भर सैनिकों के साथ शेरशाह की विशाल सेना के पसीने छुड़ा दिए थे।
वीर शिरोमणि जैता और कुंपा जी के बलिदान को कोटि-कोटि नमन! 🙏⚔️
JaitaKumpa Rajputana
30/12/2025
बड़ौदा की महारानी राधिका राजे, जयपुर की राजकुमारी दिया कुमारी और बीकानेर की राजकुमारी सिद्धि कुमारी, 🙏
30/12/2025
🚩 राजस्थान का गौरवशाली इतिहास: एक भी जिला मुगलों के नाम पर नहीं! 🚩
वीरभूमि राजस्थान का इतिहास न केवल शौर्य और बलिदान का है, बल्कि स्वाभिमान का भी है। जहाँ शेष भारत में कई स्थानों के नाम मुगलों के नाम पर मिल जाते हैं, वहीं राजस्थान का एक भी जिला मुगलों के नाम पर नहीं है।
यहाँ के जिलों के नाम हमारे महान राजपूत शासकों, स्थानीय वीरों और हमारी संस्कृति की गवाही देते हैं। 👇 पढ़िए और गर्व कीजिए:
🏰 जिलों का ऐतिहासिक परिचय:
📍 अजमेर: 27 मार्च 1112 में चौहान वंश के 23वें शासक अजयराज चौहान ने बसाया।
📍 बीकानेर: जांगल देश की धरती, जिसे राव बीका जी राठौड़ ने बसाया।
📍 गंगानगर: आधुनिक भारत के भागीरथ महाराजा गंगा सिंह जी के नाम पर।
📍 जैसलमेर: महारावल जैसलजी भाटी द्वारा स्थापित।
📍 उदयपुर: झीलों की नगरी, महाराणा उदय सिंह सिसोदिया जी द्वारा बसाई गई।
📍 जोधपुर: 12 मई 1459 को राव जोधा जी ने सूर्यनगरी की स्थापना की।
📍 बाड़मेर: इसकी स्थापना राव बहाड़ जी ने की।
📍 चित्तौड़गढ़: स्वाभिमान और त्याग का प्रतीक! यहाँ बप्पा रावल से लेकर महाराणा प्रताप तक सिसोदिया गहलोत वंश ने शासन किया।
📍 जालौर: 10वीं शताब्दी में परमार राजपूतों द्वारा नींव रखी गई, बाद में चौहान, राठौड़ और सोलंकी राजवंशों ने शासन किया।
📍 सिरोही: 1425 ई. में राव सोभा जी के पुत्र शेशथमल ने सिरोही किले की नींव रखी।
📍 डूंगरपुर: 1358 ई. में वागड़ के राजा डूंगरसिंह ने स्थापित किया।
📍 प्रतापगढ़: प्रताप सिंह महारावत ने बसाया।
📍 हनुमानगढ़: 285 ई. में भाटी राजा भूपत सिंह ने भटनेर दुर्ग बनवाया। मंगलवार को स्थापना होने के कारण इसका नाम हनुमान जी के नाम पर पड़ा।
📍 राजसमंद: मेवाड़ के राणा राज सिंह द्वारा 17वीं सदी में निर्मित 'राजसमन्द झील' के नाम पर।
📍 बूंदी: 1242 ई. में हाड़ा वंश के राव देवा ने इसे जीता। कहा जाता है बून्दा मीणा के नाम पर इसका नाम बूंदी पड़ा।
📍 सीकर: इसे वीरभान ने बसाया, इसका पुराना नाम 'वीरभान का बास' था।
📍 पाली: महाराणा प्रताप की जन्मस्थली और महाराणा उदयसिंह का ससुराल। यह पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा बसाया गया।
📍 भीलवाड़ा: इसका नाम स्थानीय भील जनजाति के नाम पर पड़ा, जिन्होंने अकबर के खिलाफ महाराणा प्रताप की मदद की थी।
📍 करौली: 955 ई. के आसपास यदुवंशी राजा विजय पाल ने स्थापना की।
📍 सवाई माधोपुर: राजा माधोसिंह ने बसाया।
📍 जयपुर: 1727 में सवाई जयसिंह ने स्थापना की।
📍 अलवर: कछवाहा राजपूत राजवंश द्वारा शासित, 1770 में प्रताप सिंह प्रभाकर ने स्थापना की।
📍 नागौर: भारत के प्राचीन दुर्गों में से एक। इसके मूल निर्माता नाग क्षत्रिय माने जाते हैं।
📍 धौलपुर: 11वीं शताब्दी में राजा धोलन देव ने बसाया (मूल नाम धवलपुर)।
📍 झालावाड़: राज्य के प्रथम नरेश महाराजराणा मदन सिंह झाला ने 1840 में गढ़ का निर्माण करवाया।
📍 दौसा: बड़गूजरों और बाद में कछवाहा शासकों द्वारा निर्माण करवाया गया।
🙏 यह जानकारी अपने इतिहास और संस्कृति को जानने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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अपनी संस्कृति पर गर्व करें। 🧡
29/12/2025
तनोट माता जैसलमेर के रहस्य 🤐🇮🇳📌
जय तनोट माता
28/12/2025
ठाकुर कुशाल सिंह अऊआ ओर ठाकुर शिवनाथ सिंह जी आसोप दोनों ने 1857 की क्रांति में संपूर्ण मारवाड़ की सेना का नेतृत्व करते हुवे ब्रिटिश सेना और उनके सहयोगियों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी, बिठोड़ा और चेलावास के युद्धों में उन्हें हराया, और 'चलो दिल्ली, मारो फिरंगी' के नारे के साथ क्रांति का नेतृत्व कर मारवाड़ को स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया
उन्होंने ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट कैप्टन मेसन का सिर आउवा किले पर टांग दिया था, जिससे वे मारवाड़ में स्वतंत्रता और राजपूती शौर्य के प्रतीक बन गए
26/12/2025
🔥 अद्भुत शौर्य गाथा: एक वीर जिसने अपना वचन निभाने के लिए दो बार वीर-गति प्राप्त की! 🔥
राजस्थान के इतिहास के पन्नों में एक ऐसी कहानी दर्ज है, जिस पर विश्वास करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह सत्य है। एक ऐसा क्षत्रिय वीर जो मृत्यु के उपरांत भी अपना वचन निभाने युद्ध भूमि में लौट आया।
वे थे वीरवर बल्लू जी चांपावत राठौड़।
इनके लिए यह दोहा प्रसिद्ध है:
"जलम्यो केवल एक बर, परणी एकज नार |
लडियो, मरियो कौल पर, इक भड दो दो बार ||"
(अर्थात्: उस वीर ने केवल एक बार जन्म लिया, एक ही स्त्री से विवाह किया, परन्तु अपने वचन (कौल) का निर्वाह करते हुए वह वीर दो-दो बार लड़ता हुआ वीर-गति को प्राप्त हुआ।)
⚔️ स्वाभिमान और पहला वचन:-
जब जोधपुर के कुंवर अमरसिंह राठौड़ को देश निकाला मिला, तब बल्लू जी चांपावत ने विपत्ति में सदैव साथ देने का वचन दिया। उनका स्वाभिमान इतना प्रबल था कि जब नागौर में उन्हें मेंढों की रखवाली का काम सौंपा गया, तो यह कहकर चल दिए कि "मैं विपत्ति में प्राण देने आया था, मेंढे चराने नहीं।"
⚔️ मेवाड़ को दिया दूसरा वचन:-
वे मेवाड़ गए, जहाँ निहत्थे ही शेर का शिकार कर अपनी वीरता सिद्ध की। महाराणा ने प्रसन्न होकर उन्हें एक विशेष घोड़ी भेंट की। इस पर बल्लू जी ने वचन दिया कि "जब भी मेवाड़ पर संकट आएगा, मैं सहायता के लिए अवश्य आऊंगा।"
🚩 पहली वीर-गति (आगरा का किला):-
जब आगरा के किले में अमरसिंह राठौड़ धोखे से मारे गए, तो रानी हाड़ी के सती होने के लिए उनका शव लाना आवश्यक था। अपना पहला वचन निभाने के लिए बल्लू चांपावत आगरा किले में घुस गए। अमरसिंह का शव लेकर उन्होंने अपने घोड़े सहित किले की बुर्ज से छलांग लगा दी। शव को साथियों के हवाले कर, वे शाही सेना को रोकते हुए आगरा में पहली बार वीर-गति को प्राप्त हुए।
🐎 दूसरी वीर-गति (देबारी का चमत्कार):-
इतिहास की सबसे अद्भुत घटना इसके कुछ समय बाद घटी। जब मेवाड़ के महाराणा राजसिंह का औरंगजेब से 'देबारी की घाटी' में भीषण युद्ध हुआ।
रणभूमि में लोगों ने एक चमत्कार देखा! उन्होंने देखा कि वीर बल्लू चांपावत उसी घोड़ी (जो महाराणा ने भेंट की थी) पर सवार होकर भीषण तलवारबाजी कर रहे हैं। आगरा में वीर-गति पा चुका वह योद्धा, मेवाड़ को दिया अपना वचन निभाने के लिए मृत्यु के बाद भी युद्ध लड़ने आया था और देबारी की घाटी में लड़ते हुए दूसरी बार वीर-गति को प्राप्त हुआ।
यह घटना प्रमाण है कि एक क्षत्रिय के लिए उसका 'वचन' देह त्यागने के बाद भी जीवित रहता है।
कोटि-कोटि नमन ऐसे वचनबद्ध वीर योद्धा को! 🙏⚔️
26/12/2025
आसोप का इतिहास कुंपाजी के वंशजों से जुड़ा है, जिन्होंने मारवाड़ की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ठाकुर शिवनाथ सिंह जैसे योद्धाओं ने अंग्रेज़ों और जोधपुर महाराजा का विरोध कर अपनी शौर्य गाथा लिखी।
26/12/2025
इसका इतिहास कुंपाजी के वंशजों से जुड़ा है, जिन्होंने मारवाड़ की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ठाकुर शिवनाथ सिंह जैसे योद्धाओं ने अंग्रेज़ों और जोधपुर महाराजा का विरोध कर अपनी शौर्य गाथा लिखी।
25/12/2025
⚔️ "चुण्डावत मांगी सैनानी, सिर काट दे दियो क्षत्राणी"⚔️
राजस्थान का इतिहास वीरता और त्याग की स्याही से लिखा गया है, लेकिन हाड़ी रानी का बलिदान उन सबमें स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। एक ऐसी घटना जिसने पत्नी प्रेम पर मातृभूमि के कर्तव्य को सर्वोच्च साबित किया।
यह अमर गाथा है बूंदी की बेटी और मेवाड़ (सलुम्बर) के रावत चुण्डावत जी की हाड़ी रानी की।
विवाह को अभी मात्र सात दिन ही हुए थे, हाथों की मेहंदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था कि मेवाड़ रक्षार्थ युद्ध का बुलावा आ गया। नई-नवेली दुल्हन के मोह में बंधे रावत जी का मन युद्धभूमि में जाने से हिचक रहा था। रानी ने पति को उनका क्षत्रिय धर्म याद दिलाया और युद्ध के लिए प्रेरित किया।
लेकिन रणभूमि की ओर बढ़ते कदम फिर ठिठक गए। रावत जी ने अपने सेवक को भेजकर रानी से कोई 'निशानी' (सैनानी) मंगवाई, ताकि युद्ध में उनका संबल बना रहे।
वीरांगना हाड़ी रानी क्षण भर में समझ गईं कि पति पत्नी-मोह में उलझकर कहीं अपना कर्तव्य न भूल जाएं। उन्हें लगा कि मेरा रूप इनकी कमजोरी बन रहा है।
फिर जो हुआ, वह इतिहास बन गया...
उस महान क्षत्राणी ने एक पल की भी देरी किये बिना, अपना शीश तलवार से काटकर थाल में सजाकर 'निशानी' के तौर पर भिजवा दिया।
रावत चुण्डावत ने जब यह अकल्पनीय निशानी देखी, तो उनका मोह भंग हो गया और रगों में प्रतिशोध की ज्वाला धधक उठी। उन्होंने रानी का कटा शीश अपने गले में लटकाया और मुगलों की सेना पर काल बनकर टूट पड़े। अदम्य शौर्य का परिचय देते हुए वे मातृभूमि के लिए वीरगति को प्राप्त हुए।
शत-शत नमन है ऐसी वीरांगना के सर्वोच्च त्याग और बलिदान को! 🙏🙏
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#बलिदान #हाड़ीरानी #राजपूत_इतिहास #मेवाड़ #वीरगाथा
24/12/2025
राजस्थान के प्रमुख क्षत्रिय राजवंश एवं शासक
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