Aayushi Rakhecha
देश, दिल , माटी की आवाज़ : आयुषी
Voice of Soil, Soul & Swadesh : Aayushi
Contact: 9911206419
Email : [email protected] OH WOW..
Aayushi Rakhecha is a leading poetess, guitarist, singer, educator, motivational speaker. Born in Jodhpur, Rajasthan. Finely trained in Hindustani Classical Vocal, this engineering graduate not only teaches students for Civil Services Examinations (UPSC & state PSCs) but also writes and composes songs ,poetry, bhajans with commendable command in Hindi, English as well as in Rajasthani. itz a magne
मुश्किल से रोक पाई मैं भी अपने आप को ♥️ ॥ Aayushi Rakhecha
10/06/2026
दूरदर्शन पर आज ♥️
09/06/2026
दोस्त सच मुच बहुत ज़रूरी हैं
ज़िंदगी को गुज़ारने के लिए,
वक़्त का ज़हर मारने के लिए,
अपना ग़ुस्सा उतारने के लिए,
फोन पर शब गुज़ारने के लिए,
दोस्त सच मुच बहुत ज़रूरी हैं
दिल के छालों को फोड़ने के लिए
बर्फ़ उदासी की तोड़ने के लिए,
रुख हवाओं का मोड़ने के लिए,
दिल के टुकड़ों को जोड़ने के लिए,
दोस्त सच मुच बहुत ज़रूरी हैं
हमने माना कि दर्द देते हैं,
राह में साथ छोड़ देते हैं,
आस की डोर देते हैं,
तार दिल के झिंझोड देते हैं,
फिर भी मुझ जैसे आदमी के लिए,
कूचा ए जाँ में रोशनी के लिए,
इब्न ए आदम की बेहतरी के लिए,
दोस्त सच मुच बहुत ज़रूरी हैं
~ शकील जमाली
08/06/2026
एग्ज़ाम्स ख़त्म आज !!!!!!!!
इस उपलक्ष्य में आज कम से कम ३ घंटे काव्य पाठ करूँगी ताकि श्रोताओं की सुरक्षा हेतु एक नए कार्यक्रम की संभावना पैदा की जा सके 😂 शुक्रिया !
दिल्ली उड़ गया पानी और समस्या दोनों ।। Aayushi Rakhecha
उदासी धीरे धीरे कम करेंगे ॥ Aayushi Rakhecha
बड़े ही प्यार से जो ठग गया था ॥ Aayushi Rakhecha
03/06/2026
अच्छे पत्रकार ही गूढ़ बातें बताते हैं जैसे एक चैनल से बताया था कि रशिया के राष्ट्रपति पुतिन ब्रेकफास्ट में बटेर के अंडे खाते हैं । ये खोजी पत्रकारिता है ये सब कोचिंग वाले नहीं पढ़ा सकते..
देश को अर्थव्यवस्था, कूटनीति, विज्ञान वाले नहीं कैमरा, कैप्शन और कमेंट वाले चाहिए 😎
( तस्वीर डॉक्टर कुमार विश्वास जी के पुत्री विवाह समारोह से )
03/06/2026
धूप भी लाज से पिघलती है
सुर्ख गालों पे जब उतरती है
चाँद पानी में पाँव धरता है
झील अपनी हदें बदलती है
रोज़ ही धूप के बयाबाँ से
इक नई ज़िंदगी गुज़रती है
~ आयुषी राखेचा
02/06/2026
हबकि न बोलिबा, ठबकि न चालिबा, धीरै धरिबा पावं ।।
गरब न करिबा, सहजै रहिबा, भणत गोरष रावं ॥
बिना सोचे-समझे या हड़बड़ाहट में नहीं बोलना चाहिए।
ज़ोर-ज़ोर से पाँव पटक कर नहीं चलना चाहिए।
कदम हमेशा धीरे, सँभल कर और दृढ़ता से रखने चाहिए
जीवन में हमेशा सहज और स्वाभाविक बने रहना चाहिए।
गोरखनाथ जी कहते हैं कि यही एक सच्चे और ज्ञानी साधक की पहचान है ।
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