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12/04/2026
किसान को देश की रीढ़ ही हड्डी कहा जाता है !
लेकिन आज किसान शब्दों तक ही रीढ़ की हड्डी रह गया है !
किसान अपनी फसल से अपना ही नहीं पूरे देश का पेट पालता है !
6 महीने दिन रात मेहनत करता है !जमीन जोतता है !बीज उगाता है ,सिंचाई करता है खेत में अपना पसीना बहाता है! धूप में जलता है ,ठंड में ठरता है!
अपनी ओलाद जैसे फसल का ख्याल रखता है तब जाकर एक फसल तैयार होती है!
अब जब खड़ी फसल में किसी के बीड़ी सिगरेट फेक देने से या अन्य कारणवश आग लग जाती है!
या मौसम की मार पड़ जाती है तो सोचिए उसके दिल पर क्या बीतती होगी वो अंदर से टूट जाता है!
अगर फसल सही सलामत हो जाए तो किसान को फसल का उचित दाम नहीं मिलता!
फसल नहीं होती तो किसान कर्ज ले लेता है ,कर्ज नहीं ले पाता तो depression में चला जाता है ! NCRB रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लगभग 11000 किसान और मजदूर आत्महत्या करते है!
सरकार मुआवजे के नाम पर सिर्फ आश्वासन देती है ! जब बड़े बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ हो सकता है तो किसान का क्यों नहीं हो सकता ?
12/04/2026
मैंने एक बार एक आदमी को रेस्टोरेंट में सबके सामने शर्मिंदा होते देखा।
उसका कार्ड बार-बार डिक्लाइन हो रहा था, पीछे खड़े लोग धीरे-धीरे बातें करने लगे।
वो शांत था… जरूरत से ज्यादा शांत।
फिर मुस्कुराया, साइड में हुआ और बोला, “5 मिनट दीजिए।”
सबको लगा वो भाग रहा है।
ठीक 4 मिनट बाद वो वापस आया, अपना बिल चुकाया और जाते-जाते लाइन में खड़े अगले तीन लोगों का भी पेमेंट कर गया।
न कोई भाषण, न किसी से नजर मिलाई… बस चला गया।
बाद में कैशियर ने बताया कि उसके बैंक ऐप में गड़बड़ी थी।
लेकिन जो बात सबसे ज्यादा असर कर गई…
वो ये थी कि उसने उस शर्मिंदगी को ऐसे संभाला, जैसे वो उसकी थी ही नहीं।
हर बात पर रिएक्ट करना जरूरी नहीं होता।
कुछ लोग खामोशी में भी आत्मविश्वास से चलते हैं।
12/04/2026
खबर आ रही है कि ईरान और अमेरिका के युद्ध की मध्यस्थता असफल हो गई !
कुछ लोगों का कहना था कि भारत भी मध्यस्थता करवा सकता था ,बात ठीक है करवा सकता है !लेकिन अमेरिका बोले तब ! शायद अमरीका को मोदी जी की काबिलियत पर कोई शक था !
अमेरिका ने युद्धविराम के लिए पाकिस्तान को बोला था जो अमेरिका के लिए unlucky साबित हुआ!
अगर अमेरिका पाकिस्तान की जगह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से आग्रह करता तो कुछ बात बन सकती थी !
अमेरिका के पास अब भी मौका है ज्यादा कुछ बिगड़ा नहीं है नरेंद्र को फोन घुमाओ और युद्ध रुकवाओ !
प्रधानमंत्री जी के पास भी अच्छा मौका है पूरे विश्व को अपने विश्वगुरु की काबिलियत दिखाने का!
इस बात पर आप क्या सोचते है! क्या सही मौका है?
12/04/2026
फिर से आज एक जिंदगी चली गई
जब तक हम इन नेताओ के गुलाम बने रहेंगे - तब तक हमारा यही हाल होगा और ना ही ये हमे और हमारे बच्चों को पढ़ने देंगे ताकि हमारे अंदर जागरुकता पैदा हो सके।
एक 13 साल के लड़के (अमित) को साँप काट लेता है - लेकिन वो उसको सीधे हॉस्पिटल लेकर नहीं गए बल्कि
पहले झाड़ फूंक कराया और उसके बाद उसको बहती गंगा मे बाँध के पानी के उपर 12 घंटा तक रखा - उनको लगा था कि साँप का जहर निकल जाएगा पानी मे इस तरह रखने से।
पर ऐसा नहीं हुआ और अंधविश्वास की बली चढ़ गया।
12/04/2026
कभी-कभी जिंदगी आपको ज़मीन पर गिराती है, सिर्फ ये देखने के लिए कि आप उठते कैसे हो।
उस आदमी की नौकरी चली गई थी। सब कुछ अचानक खत्म हो गया था।
लेकिन उसने हार नहीं मानी।
क्योंकि उसका एक दोस्त था जो उसके साथ खड़ा था, जिसने अपना सबसे महंगा गाड़ी अपना दोस्त को दे दिया ताकि वो कुछ कर सके।
उसने अपनी car के trunk को ही अपनी दुकान बना लिया।
और छोटा सा setup खरा कर लिया।
धीरे-धीरे वही trunk एक उम्मीद बन गया।
हर दिन की मेहनत, हर छोटी sale, उसे वापस खड़ा कर दिया।
सोचिए,
जहाँ लोग मुश्किल वक्त में साथ छोड़ देते हैं,
वहाँ किसी ने अपनी सबसे कीमती चीज़ उसके भरोसे दे दी।
और इसलिए सच कहूँ तो… success हमेशा बड़े resources से नहीं आती,
कभी-कभी सिर्फ एक सच्चा दोस्त और हार न मानने की जिद ही काफी होती है।
आपकी जिंदगी में वो एक इंसान कौन है जिसने आपको गिरने नहीं दिया?
12/04/2026
पहले गांव में न टेंट हाउस होते थे और न ही कैटरिंग
थी तो बस अपनापन, साथ और सच्ची सामाजिकता
शादी की खबर मिलते ही हर घर से चारपाई आ जाती थी
थालियाँ, लोटे, करछी, कड़ाही सब अपने आप इकट्ठा हो जाते थे
गांव की महिलाएं मिलकर खाना बनाती थीं
और साथ ही गीत गाती हुई पूरे माहौल को जीवंत बना देती थीं
दुल्हन को भी वही महिलाएं तैयार करती थीं
हर रस्म में गीत, गारी और हंसी अपने आप घुली रहती थी
न कोई DJ होता था, न शोर शराबा
फिर भी हर कोना खुशियों से भरा रहता था
गांव के बड़े-बुजुर्ग और जवान मिलकर काम संभालते थे
मजाक, ठिठोली के बीच पूरा आयोजन निपट जाता था
बारातियों को पहले खिलाना इज्जत की बात होती थी
घराती बाद में खाते थे, यही असली संस्कार थे
खाना परोसने के लिए गांव के लड़कों की टोली तैयार रहती थी
हर कोई अपनी जिम्मेदारी समझता था
अगर किसी बड़े घर की शादी होती
तो टेप रिकॉर्डर पर वही पुराना गाना जरूर बजता था
"मैं सेहरा बांध के आऊंगा…"
और दूल्हा खुद को किसी राजा से कम नहीं समझता था
नाई हर वक्त दूल्हे के साथ रहता था
समय-समय पर कंघी, काजल और पाउडर लगा देता था
फिर शुरू होती थीं रस्में
पंडित जी की बातें और मंत्रों के बीच रात कब बीत जाती, पता ही नहीं चलता
कोहबर की रस्म में दूल्हा-दुल्हन को थोड़ी देर अकेला छोड़ा जाता
लेकिन इतने कम समय में बातें कम, मुस्कान ज्यादा होती थी
सुबह खिचड़ी की रस्म आती
जहां गारी और नखरे दोनों साथ चलते थे
दूल्हा जिद करता, "मैं नहीं खाऊंगा"
और फिर उसे मनाने का मजेदार सिलसिला शुरू होता
थोड़ी देर की मनुहार के बाद
एक चावल का दाना दूल्हे के मुंह तक पहुंच ही जाता
और पूरे माहौल में जीत की खुशी गूंज उठती
फिर अचर धरउवा की रस्म होती
जहां दूल्हे का परिचय और मजाक दोनों साथ चलते
और उसे प्यार के साथ छोटे-बड़े उपहार भी मिलते
सच कहें तो उस दौर में दिखावा कम था
और रिश्तों में सच्चाई ज्यादा थी
आज सब कुछ है
लेकिन वो अपनापन और मिलकर जीने वाली खुशी कहीं पीछे छूट गई है
12/04/2026
जेल से बाहर आये रामपाल बाबा, 11 साल पांच महीने हिसार जेल में रहे। जेल लेने पहुंचा परिवार, फारच्यूनर गाड़ी से सोनीपत आश्रम रवाना।
सतलोक आश्रम संचालक रामपाल को माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को जेल से बाहर आ गया। रापमाल के परिवार के लोग उनको लेने के लिए हिसार जेल परिसर पहुंचे थे। सफेद रंग की फारच्यूनर गाड़ी में सवार होकर रामपाल हिसार से सोनीपत के धनाना के लिए रवाना हुए। पुलिस ने व्यवस्था बनाए रखने जेल परिसर के सामने बैरिकेडिंग की थी। उनके वकील सचिन दास ने हिसार जेल में दोपहर के समय जेल बांड भरे थे। शाम 5 बजकर 5 मिनट पर रामपाल जेल से बाहर आये। संत रामपाल की रिहाई के समय उसके परिवार के सदस्य सात गाड़ियों के काफिले में जेल पहुंचे थे। जेल से बाहर निकलने के बाद वह सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर में बैठकर वहां से रवाना हुए। गाड़ी के शीशों पर सफेद पर्दे लगे हुए थे। बताया जा रहा है कि जेल से बाहर निकलते वक्त रामपाल के चहरे पर मुस्कान थी। जेल के बाहर सैकड़ों की संख्या में रामपाल के अनुयायी हाथ जोडकर खड़े थे। कुछ को सड़क पर लेटकर प्रणाम करते हुए भी देखा गया।
12/04/2026
JIO वाले बहुत शातिर बन रहे थे पर TRAI ने इनकी चालाकी अब पकड़ ली है।
जियो ने सस्ते वाले रिचार्ज (जैसे ₹199 और ₹249 वाले) अपनी वेबसाइट और ऐप से गायब कर दिए
ताकि जनता को दिखे ही नहीं और मजबूरी में लोग महंगे वाले प्लान चुनें।
ये सस्ते प्लान सिर्फ कुछ चुनिंदा दुकानों या चुपके से MY JIO APP के किसी कोने में छिपा कर रखे गए थे।
अब ट्राई ने इस छल को पकड़ लिया है।
जियो को 14 अप्रैल तक की डेडलाइन दी गई है।
तब तक इन्हें अपने सारे सस्ते-महंगे प्लान हर जगह (ऐप, वेबसाइट, दुकान) एक बराबर दिखाने होंगे।
09/04/2026
अंधा प्यार… कभी-कभी सबसे बड़ा विनाश लिख देता है।”🔥
रात के सन्नाटे में… जब पूरी दुनिया सो रही होती है,
कुछ कहानियां जागती हैं हमें सच दिखाने के लिए।
महाभारत के युद्ध के बाद…
चारों ओर सिर्फ सन्नाटा था, लाशें थीं, और एक माँ का टूटा हुआ दिल…
गांधारी रो रही थी…
उसकी गोद सूनी हो चुकी थी… उसके 100 पुत्र अब इस दुनिया में नहीं थे।
वो श्रीकृष्ण के सामने खड़ी हुई और बोली
“हे प्रभु… मेरा तप, मेरा त्याग… सब व्यर्थ हो गया
क्या?”
श्रीकृष्ण ने शांत स्वर में कहा
माता… आपने अपनी आंखों पर पट्टी सिर्फ पति के लिए नहीं,
बल्कि अपने पुत्रों के अधर्म को अनदेखा करने के लिए भी बांधी थी…”
उस पल… गांधारी के आंसू और भारी हो गए।
क्योंकि सच कड़वा था… लेकिन सच्चा था।
👉 संदेश:
जब हम अपनों की गलतियों पर पर्दा डालते हैं,
तो हम उन्हें बचाते नहीं…
बल्कि उनकी बर्बादी की नींव खुद रखते हैं।
“प्यार अंधा नहीं होना चाहिए…
वरना वो प्यार नहीं, विनाश बन जाता है।”
🙏 अगर ये कहानी दिल को छू गई हो…
तो आज से एक वादा करो
सही का साथ दोगे, चाहे वो अपने के खिलाफ ही क्यों न हो।
09/04/2026
सभ्यता खत्म करने का ठेका लेकर निकले ट्रम्प आखिर खुद ही “सरेंडर स्पेशल” लेकर बैठ गए। दुनिया को डराने निकले थे, और खुद ही डरावनी फिल्म का कॉमेडी सीन बन गए! 🤪
250 साल पुरानी एक महान अमेरिकी सभ्यता की हालत अब ऐसी लग रही है जैसे पुराना स्मार्टफोन — दिखता अभी भी “प्रो”, पर अंदर से हैंग! एटॉमिक ताकत का जो ढोल पीटा गया था, वो निकला वही — दूर से धांसू, पास से फुस्स पटाखा।
अब दुनिया भर के देश लाइन में खड़े हैं — “भाईसाहब, जो नुकसान हुआ है उसका UPI ID दीजिए, क्लेम भेजना है!” और अगर पैसे की दिक्कत हो, तो ट्रम्प टावर की “क्लियरेंस सेल” लगा दो — “आज लो, कल पछताओ ऑफर” 😄
और इस युद्ध के बाद की असलियत यह है कि — दुनिया की “सुपरपावर” वाली कुर्सी अब अमेरिका के नीचे से खिसककर रूस, चीन और ईरान के पास चली गई है। अमेरिका का हाल ऐसा कि जैसे इंटरव्यू में बहुत अंग्रेज़ी झाड़ी, और आख़िर में “We’ll get back to you” सुनकर घर आ गया। 😂
निष्कर्ष: शोर बहुत था, शो कम निकला… और अंत में अमेरिका वही निकला — “बड़ा खिलाड़ी, लेकिन खाली पिच”! 😜
09/04/2026
शैतान अपनी शैतानी से कभी बाज़ नहीं आता.
आज US IRAN WAR के युद्धविराम की घोषणा हुईं 14 दिन की.
सभी ने राहत की सांस ली. बाजार के हालात सुधरे, पर, Beirut और LEBANON के नहीं.
अमेरिका ने फायरिंग रोक दी, ईरान ने भी यही किया, पर इजराइल ने इसके उल्टा चलते हुए
बेरूत और lebanon पर हमले जारी रखे
CEASEFIRE AGREEMENT को तोड़ते हुए रिहायाशी घरों और बिल्डिंग को निशाना बनाते हुए गाज़ा की तरह सेंकड़ो मासूमों की जान ली.
STRAIT of HORMUZ के लिए ईरान पर हमले करने ट्रम्प और नेतान्याहु ने युद्ध के फैसले की भी कदर नहीं की.
वाइट हॉउस की तरफ से एक बयान नहीं आया इस हमले के खिलाफ..
मुझे लगता नहीं SHEHBAZ SHARIF वॉर रुकवा दी paw paw का तमगा ले पायेंगे..
09/04/2026
दोस्तों, सुनिए ये दिलचस्प और सोचने लायक कहानी।
अल्जीरिया की एक मुस्लिम लड़की से स्थानीय टीवी इंटरव्यू में पूछा गया “अगर आप पैगंबर मुहम्मद को देख लें तो क्या करेंगी?”
लड़की रोने लगी, जवाब नहीं दे पाई। उसकी आँखों में आँसू और चेहरा भावुक हो गया।
ये देखकर अमेरिका का एक मुस्लिम युवक प्रभावित हुआ। उसने सोचा कि ये तो सच्ची मुसलमान है, पैगंबर से इतना प्यार। उसने लड़की से शादी कर ली और उसे अमेरिका ले आया।
लेकिन अमेरिका पहुँचते ही कुछ महीनों बाद ही उस लड़की ने पति को तलाक दे दिया। हिजाब उतार फेंका और सेकुलर, आजाद जीवन जीने लगी बिना किसी धार्मिक बंधन के।
ये कहानी बताती है कि इस्लामिक दुनिया में कितनी लड़कियाँ दबाव में जी रही हैं। बाहर से दिखावा एक, अंदर से इंसानी आजादी की तड़प दूसरी। जब मौका मिला, तो उसने आजादी चुन ली।
कई लोग इसे प्रोपगैंडा कहते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि इस्लामिक समाज में महिलाओं पर लगे जंजीरें जब टूटती हैं, तो असली चेहरा सामने आ जाता है।
सनातन की बात करें तो यहाँ कोई जबरदस्ती नहीं, कोई पर्दा का फरमान नहीं स्वतंत्रता, सम्मान और आत्म-सम्मान सबको हासिल है।
ये कहानी हमें याद दिलाती है जबरन थोपी गई विचारधारा कितनी नाजुक होती है, और इंसानी स्वभाव आजादी की तरफ कितना खिंचता है।
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