Wayam Collective

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Women Achieving & Yearning to Achieve More

14/08/2024

-saksham

25/03/2024

Happy Holi everyone , आपको और पूरे परिवार को अच्छी सेहत और खुशियों के ढ़ेरों मौके मिले यही कामना है!! -SakshamEkta SinhaAditya I-Saksham Tyagi

14/03/2024

समाज की पहली किरण

यह कहानी बिंदी नाम की एक लड़की की है, जिसके मन में हमेशा से एक अलग पहचान बनाने का सपना था। बिंदी ने इस सपने को पूरा करने की शुरुआत i-Saksham फेलोशिप से की। इस फेलोशिप के तहत, वह हर रोज अपने गाँव के सरकारी स्कूल में शिक्षण का कार्य करती थी।
बिंदी को शिक्षा के प्रति जुनून था। वह 2-3 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती थी। घरवाले उसकी शादी करवाना चाहते थे, लेकिन बिंदी ने हार नहीं मानी। वह पढ़ना चाहती थी।
एक दिन, i-Saksham से कुछ लोग बिंदी के गाँव में सर्वेक्षण करने गए। बिंदी उनसे मिली और i-Saksham फेलोशिप के बारे में जानकारी प्राप्त की। उसने इस फेलोशिप के लिए आवेदन किया और सफलतापूर्वक चयनित हो गई।
बिंदी ने 2 वर्ष का i-Saksham फेलोशिप कार्यक्रम पूरा किया। इस दौरान, उसने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। फेलोशिप समाप्त होने के बाद, बिंदी "प्रथम" नामक संस्था के साथ जुड़ गई।
इस संस्था के साथ काम करते हुए, बिंदी को अपने घर से दूर दूसरे जिले में रहने का अवसर मिला। उसने इस अवसर का सदुपयोग करते हुए स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
बिंदी अपने समाज की पहली लड़की है जिसने स्नातक की डिग्री प्राप्त की है और घर से दूर रहकर नौकरी कर रही है।
आज, बिंदी अपने आप पर गर्व महसूस करती है। वह अपने सपने को पूरा करने की राह पर आगे बढ़ रही है।
women i-SakshamEkta SinhaAditya I-Saksham Tyagi

08/03/2024

Happy international women's day all of you
-Saksham

16/02/2024

10 Feb को i-Saksham बैच 7 और बैच 8 के Edu-Leaders और वयम् के 150 सदस्य Convocation ceremony & Wayam Alumni Meet ,बैच 7 और बैच 8 Edu-Leaders के certificate ceremony में शामिल हुए थे। जिसमें विभिन्न प्रकार की गतिविधि की गई |
Certificate वितरण|
Wayam Sharing |
i-Saksham Sharing |
Edu-Leaders Journey Sharing |
जिसमें सभी साथी आपस में मिल कर इस आयोजन को सफलता की ओर लेकर गए |
-i i-SakshamEkta SinhaWayam CollectiveAditya I-Saksham Tyagi

15/02/2024

शिक्षा का द्वितीय अवसर

परिचय:

यह कहानी बिहार के जमुई जिले के एक छोटे से गाँव चौडिहा में रहने वाली दौलती नाम की एक लड़की की है। दौलती ने 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन उसके बाद पढाई छोड़ दी और घर के कामों में लग गई।

शिक्षा का महत्व:

दौलती के माता-पिता हमेशा चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़े-लिखे और जीवन में सफलता प्राप्त करे। वे उसे समझाते थे कि शिक्षा जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है।
पुनः शिक्षा की शुरुआत:
एक दिन, WAYAM संस्था के दो सदस्य दौलती के गाँव में फील्ड विजिट के लिए गए। वहाँ उन्होंने गाँव की किशोरियों से मुलाकात की और उनके जीवन के बारे में जानने की कोशिश की।
जब सभी किशोरियाँ अपनी शिक्षा के बारे में बता रही थीं, तब दौलती चुपचाप बैठी उन्हें सुन रही थी। WAYAM सदस्यों ने दौलती से पूछा कि वह क्यों नहीं बोल रही है, तो वह चुप हो गई।
गाँव के कुछ लोगों ने कहा कि वह पढ़ती ही नहीं है और उसने अपनी पढ़ाई छोड़ दी है। बार-बार पूछने पर भी दौलती कुछ नहीं बोल रही थी।
अंत में, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह फिर से अपनी पढ़ाई शुरू करना चाहती हैं, तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया।
आगे का रास्ता:
दौलती उसी गाँव की किरण दीदी, जो वयम की सदस्य भी हैं, के पास पढ़ने के लिए जाने लगी। किरण दीदी ने दौलती को न केवल पढ़ाई में मदद की, बल्कि उसे जीवन में आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया।
दौलती की कहानी हमें सिखाती है कि कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। दौलती को भी जब मौका मिला तो फिर से वह अपनी पढ़ाई शुरू कर दी।
दौलती की कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है जो हमें सिखाती है कि शिक्षा जीवन में कितनी महत्वपूर्ण है। हमें कभी भी शिक्षा को नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों। -i i-Saksham Wayam Collective Reshma WayamEkta SinhaAditya I-Saksham Tyagii-Saksham

26/01/2024

Wishing you all a very Happy 75th Republic Day i-Saksham Wayam Collective

24/01/2024

"न्याय की तलाश में खुशबू"

खुशबू की कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है। खुशबू ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन से काम किया। उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

खुशबू का सपना वकील बनना था। उन्हें अपने भाई के साथ हुए एक घटना से प्रेरणा मिली। जब उनके भाई पर झूठा मुकदमा दर्ज किया गया, तो खुशबू ने सोचा कि अगर वह वकील होतीं, तो वे अपने भाई को न्याय दिलवा सकती थीं।

खुशबू ने अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर वकील की पढ़ाई के लिए कॉलेज में दाखिला लिया। उन्हें कॉलेज में दाखिला लेने में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके पिता ने उन्हें पढ़ाई करने से मना किया और उनकी शादी की बात करने लगे। लेकिन खुशबू ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पिता को समझाया कि वे अपने सपने को पूरा करना चाहती हैं।

खुशबू के लगातार प्रयासों से उनके पिता ने उन्हें पढ़ाई करने की अनुमति दी। खुशबू ने कॉलेज में भी कड़ी मेहनत की और अपनी पढ़ाई में सफल रहीं। अब खुशबू वकील की तैयारी कर रही हैं |

खुशबू की कहानी हमें सिखाती है कि अगर हम अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं, तो हमें कड़ी मेहनत और लगन से काम करना चाहिए। हमें किसी भी चुनौती से नहीं डरना चाहिए। अगर हम अपने सपनों को पाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, तो हम उन्हें जरूर पूरा कर सकते हैं।

खुशबू की कहानी से हमें यह भी प्रेरणा मिलती है कि हम दूसरों की मदद करने के लिए अपने सपनों का उपयोग कर सकते हैं। खुशबू ने अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की और अब वह दूसरों की मदद कर रही हैं। वह लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक कर रही हैं और उन्हें न्याय दिलवाने में मदद कर रही हैं।

खुशबू एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि अगर हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, तो हम उन्हें जरूर पूरा कर सकते हैं।
i-Saksham Wayam Collective

19/01/2024

*डर से आत्मविश्वास पाने तक का सफ़र*

ये कहानी है रंजू दीदी की जिन्होंने लगातार अपने प्रयास से खुद को बदलाव से जोड़ा | रंजू दीदी अपने बदलाव की शुरुआत आई-सक्षम फ़ेलोशिप से किया ,जहाँ पे हर रोज लगातार 2 वर्ष तक अपने गावं के सरकारी स्कूल में सिखने -सिखाने का कार्य किया उसके बाद उन्होंने आई -सक्षम में ही Buddy के रूप में ज्वाइन किया | रंजू हर रोज अपने ससुराल से साड़ी पहनकर ऑफिस आती थी | ऑफिस में रह -रहे सभी लोग उनसे बोलते थे की आप सूट पहनकर ऑफिस क्यों नही आते हैं ? तो उनका ये जवाब आता था की मेरा भी बहुत मन करता है की हम भी सूट पहनना चाहते हैं, हम भी सूट पहन कर ऑफिस और हर जगह जाये | लेकिन मैं अपने ससुराल से आती हूँ | इस लिए मैं साड़ी पहन कर आती हूँ ,अगर मैं सूट पहन कर आउंगी | तो लोग क्या बोलेंगे सभी लोगो ने उनको ये बोला की लोगों के बारे में आप सोचेंगे तो लोग क्या करेंगे फिर रंजू दीदी ने सोचा की एक सूट सिलवाकर पहने उन्होंने एक सूट सिलवाया और ऑफिस में ही पहना और उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक दिख रहा था| ऐसा लग रहा था की बहुत दिनों के बाद एक नयी उम्मीद जगी है उसके बाद लगातार वो हर रोज सूट पहन कर ऑफिस आने लगी | एक दिन ऑफिस में स्कूटी खरीदने की बात चल रही थी तो रंजू के मन में एक और नयी उम्मीद जगी मुझे भी स्कूटी चलाना सीखना है रंजू ये सोच ही रही थी की सामने उनको अपनी बेटी दिखी जो की साइकिल चला रही थी तो उन्होंने सोचा क्यूँ न स्कूटी से पहले साइकिल चलाना सिख ले रंजू ने अपनी बेटी से साइकिल चलाना सिखा और आज वो अच्छे से साइकिल चला लेती है |

women -SakshamWayam Collective

01/01/2024

Happy New Year All of You🥳🥳💐💐 i-Saksham Wayam Collective

22/12/2023

14 Dec को i-Saksham के एडू-लीडर्स और वयम् के 27 सदस्य Chandragupta Institute of Management Patna का विजिट में शामिल हुए थे। यहां पर अलग-अलग तरह के कोर्स की पढ़ाई करवाई जाती है और उद्यमिता से संबंधित जानकारी और सहयोग दिया जाता है।
Courses
PGDM (EQUIVALENT TO MBA)
PGDM-LEV
FPM
EFPM
इस में सभी एडू-लीडर्स और सदस्य खुद में एक उम्मीद जगाई हैं और आगे शिक्षा पाने के लिए बहुत उत्साहित हैं और आगे सपना देख रही हैं कि अब हम भी अपने गॉव /शहर से निकल पाएंगे | -SakshamWayam Collective

22/12/2023

सामूहिक पुस्तकालय की खोज

पुस्तक:
पुस्तक,जिसे जितना खंगाला जाए उसे हीरे निकलते रहते है उसी प्रकार हम इंशान है,जितना खंगाला जाए अलग अलग कहानी और उनके कार्यों के जोश निकलते रहते है।हमे जरूरत है उसे सही समय पर पुस्तक के अनुसार पढ़ा जाए और मोतियों जैसे शब्द जो समझ न आए उसे अलग से निकाल उसपर कार्य किया जाए।
मैंने ऊपर के कुछ पंक्तियों को लिखा है वो कहीं न कहीं एक इंसान के अन्दर का हुनर बताता है..।आइए मिलते है वो जोश भरे इंसान से जिन्होंने जितना अपने आप को खंगाला नई- नई आईने खुद का पाई है।
ये कहानी है एक लड़की की है।।
जिसका नाम रजनी है इनका सपना है की उनके समाज का कोई बच्चा शिक्षा से वंछित न हो | रजनी का जन्म जमुई जिला के छोटे से गाँव ढंड में हुआ जो की करीबन जिला से 15 किलोमीटर है।रजनी बचपन से ही अपने समाज के बच्चे एवम् युवाओं के लिए कुछ करना चाहती है ,रजनी ने इसकी शुरुआत i-Saksham फ़ेलोशिप से किया जहाँ पर उन्होंने 2 वर्ष तक अपने गाँव के सरकारी विद्यालय में सिखने -सिखाने का कार्य में अग्रसर रही। तदप्रान्त उन्होंने मैत्री प्रोजेक्ट से मिलकर गाँव -गाँव में जाकर सर्वे करने का काम किया। अभी तक में उन्होंने 45-50 गांवो का सर्वे किया है।रजनी हर महीने अपने पंचायत के क्लस्टर मीटिंग में शामिल होती है और वहां पर अपने समाज के युवाओ के साथ मिलकर अपने समाज को शिक्षित कैसे बनाये पर लगातार विचार -विमर्श किया है।उसके साथ ही उन्होंने एक सामूहिक पुस्तकालय खोलने के बारे में सोचा इसके लिए वो अपने पंचायत के मुखिया से बात करने गए तो आस -पास के लोगो से ये पता चला की वहां पे जो मुखिया है वो औरत है और उनका सारा काम उनका बेटा करता है।उसका बेटा बदमाश है और उसके पास बंदूक रहता है। उसपे बहुत मुकदमा दर्ज किया है कुछ दिन पहले ही जेल से निकला है ,ये सब सुनकर वो डर गई लेकिन फिर भी उन्होंने सोचा की एक बार उनसे बात करके देखे जब वो उनके घर पहुंचे तो घर पे ही थे |रजनी ने उनसे बात की और बोले की वो उनके गाँव में सामूहिक पुस्तकालय खोलना चाहते है ये सुनकर वो बहुत खुश हो गये और सपोर्ट करने के लिए तैयार हो गये बहुत जल्द ही उनके गाँव में सामूहिक पुस्तकलय होगा।

i-SakshamWayam Collective

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