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03/03/2022
daughter-in-law does not have an indefeasible right of residence in a shared household under the Domestic Violence Act and she can be evicted at the behest of aged in-laws who are entitled to live peacefully.
Daughter-In-Law Has No Indefeasible Right Of Residence, Can Be Evicted: High Court Delhi High Court has said that a daughter-in-law does not have an indefeasible right of residence in a shared household under the Domestic Violence Act and she can be evicted at the behest of aged in-laws who are entitled to live peacefully.
10/02/2022
The Central Consumer Protection Authority (CCPA) has also passed an order against Naaptol Online Shopping Ltd for misleading advertisements and unfair trade practice, and asked it pay a penalty of Rs 10 lakh.
The National Consumer Helpline data indicates that 399 complaints were registered against Naaptol from June 2021 to Janary 25 this year, it added
The Central Consumer Protection Authority has also passed an order against Naaptol Online Shopping Ltd for misleading advertisements and unfair trade practice.
Sensodyne asked to discontinue advertisements in India The Central Consumer Protection Authority has also passed an order against Naaptol Online Shopping Ltd for misleading advertisements and unfair trade practice.
09/11/2021
मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में फैसला दिया है कि लिव-इन जोड़े विवादों के समाधान के लिए फैमिली कोर्ट का रुख नहीं कर सकते हैं।
क्या लिव-इन जोड़े फ़ैमिली कोर्ट में वाद दायर कर सकते है? जानिए हाई कोर्ट का निर्णय मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में फैसला दिया है कि लिव-इन जोड़े विवादों के समाधान के लिए फैमिली कोर्ट का रुख नहीं क...
04/11/2021
एक साथ रहने से वैवाहिक अधिकार नहीं मिल जाते, कानूनी ढंग से विवाह जरूरी`
मद्रास हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दो लोगों के लंबे समय तक एक साथ रहने से उन्हें वैवाहिक अधिकार नहीं मिल जाते.
'एक साथ रहने से वैवाहिक अधिकार नहीं मिल जाते, कानूनी ढंग से विवाह जरूरी' मद्रास हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दो लोगों के लंबे समय तक एक साथ रहने से उन्हें वैवाहिक अधिकार .....
08/10/2021
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश: विवाह अवैध तो भी गुजारा भत्ते से नहीं किया जा सकता इनकार :
हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा कानून के तहत पीड़ित महिला यदि सहमति संबंध में भी रहती है तो उस स्थिति में भी वह अंतरिम रूप से गुजारा भत्ता की हकदार है।
याची ने कहा कि महिला के दूसरे विवाह के समय उसका पहले पति के साथ तलाक नहीं हुआ था। तलाक न होने के चलते उनका विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध विवाह नहीं था। ऐसे में गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी नहीं किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह की वैधता को देखना ट्रायल कोर्ट का कार्य है, लेकिन यदि विवाह अवैध भी है तो भी महिला याची के साथ एक छत के नीचे रिश्ते में रही है। घरेलू हिंसा कानून के तहत पीड़ित महिला यदि सहमति संबंध में भी रहती है तो उस स्थिति में भी वह अंतरिम रूप से गुजारा भत्ता की हकदार है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह कानून पीड़ित महिलाओं के हित के लिए बना हुआ है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश: विवाह अवैध तो भी गुजारा भत्ते से नहीं किया जा सकता इनकार दूसरे विवाह के समय महिला का पूर्व के पति से तलाक न होने के चलते विवाह अवैध है, यह दलील देते हुए गुजारा भत्ता आदेश खार....
26/09/2021
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति के खिलाफ बार-बार झूठी शिकायत देना क्रूरता, यह तलाक मांगने का ठोस आधा पति को परेशान करने के लिए बार-बार पत्नी द्वारा झूठी शिकायत देना निश्चित तौर पर पति के प्रति क्रूरता है। यदि शिकायत.....
21/09/2021
ATM से अगर निकले कटे-फटे नोट तो न हो परेशान:
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों के मुताबिक अगर ATM से कभी कटे-फटे नोट निकलते हैं तो आप उसे बैंक से आसानी से बदल सकते हैं। बैंक के पास इनकार करने का अधिकार नहीं है। इसके लिए आपको उस बैंक में जाना होगा, जिसके एटीएम से आपने पैसा निकाला है। वहां जाकर आपको एक आवेदन देना होगा जिसमें आपको पैसे निकालने की तारीख, समय, जहां से पैसा निकासी की है, उसका नाम लिखान होगा।
आवेदन के साथ एटीएम से निकली वो स्लिप दिखानी होगी और अगर स्लिप नहीं ली है तो फोन पर SMS को दिखाना होगा, जिसमें डेबिट की जानकारी दी गई है। इसके बाद बैंक में मौजूद अधिकारी आपके नोट या नोटों को तत्काल बदल देगा।
आरबीआई ने जुलाई 2016 के अपने एक अन्य एक सर्कुलर में कहा था कि अगर बैंक खराब नोट को बदलने से इनकार करते हैं, तो उनपर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। RBI का ये निर्देश सभी बैंकों की सभी ब्रांच पर लागू होता है।
Kaam Ki Baat : ATM से अगर निकले कटे-फटे नोट तो न हो परेशान, तुरंत करें ये काम RBI, ATM, Kaam Ki Baat : आजकल लोग पैसों का लेनदेन ज्यादातर यूपीआई यानी डिजिटल के माध्यम से कर रहे हैं। लेकिन कैश से भी लेनदेन कर...
16/09/2021
ऑफिस में पति की बेइज्जती करना मानसिक क्रूरता, Supreme Court ने माना Divorce का आधार:
ऑफिस में पति की बेइज्जती करना मानसिक क्रूरता, Supreme Court ने माना Divorce का आधार सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने तलाक (Divorce) के एक मामले में सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि पति या पत्नी के खि....
12/09/2021
कायदा कानून: Section 498 A- आईपीसी की इस धारा के बारे में पूरी जानकारी, जानिए क्या है Section 498 A?
आईपीसी की धारा 498 A महिलाओं के लिए सबसे बड़ा हथियार, जानिए Indian Law legal knowledge of IPC Section 498-A: स्त्रियों का उत्पीड़न (Women Harassment) रोकने और उन्हें उनके हक दिलाने के लिए हमारे देश में कई कानून पारित .....
10/09/2021
सुप्रीम कोर्ट का आदेश, हर यात्री का समय कीमती है! मुसाफिर को 30 हजार रुपये हर्जाना दो, ट्रेन लेट होने पर छूटी थी फ्लाइट
ट्रेन लेट होने पर यात्री की छूटी फ्लाइट, सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को दिया ये आदेश भारत में ट्रेन का लेट चलना या होना बड़ी आम बात है. आए दिन यात्रियों को इसके कारण काफी परेशानी होती है. कई दफा तो इसके .....
10/09/2021
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दाखिल-खारिज या म्यूटेशन का मतलब मालिकाना हक नहीं
कोर्ट ने कहा कि कानून के तय प्रस्ताव के मुताबिक दाखिल-खारिज से जुड़ी एंट्री व्यक्ति के पक्ष में कोई अधिकार टाइटल या उसके हित में कोई फैसला नहीं करती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेवेन्यू रिकार्ड में दाखिल-खारिज केवल वित्तीय उद्देश्य के लिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दाखिल-खारिज या म्यूटेशन का मतलब मालिकाना हक नहीं कोर्ट ने कहा कि कानून के तय प्रस्ताव के मुताबिक दाखिल-खारिज से जुड़ी एंट्री व्यक्ति के पक्ष में कोई अधिकार टाइटल य.....
23/08/2021
गिरफ्तारी कानूनी रूप से वैध है, इसका मतलब यह नहीं कि की ही जाए : सुप्रीम कोर्ट उच्चतम न्यायालय ने कहा कि महज इसलिए किसी को गिरफ्तार करना कि यह कानूनी रूप से वैध है इसका यह मतलब नहीं है कि गिरफ्ता...
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