Akash Singh Rathore

Akash Singh Rathore

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विभाग संयोजक ABVP Jaipur, Ex organisation secretary Sikar and churu, Ex presid

26/01/2026

मेरे प्रिय सामान्य श्रेणी के बंदुओ

“अपने बच्चो को गाला घोट कर मार दो”

आप सभी को बहुत-बहुत बधाई। आज फिर आपको आपकी सरकार द्वारा बहुत बड़ा तोहफ़ा दिया गया है। जिस तोहफे के दंश को आपकी आने वाली पीढ़ियों को भुगताना होगा। और उस तोहफ़े का नाम है (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) द्वारा बनाया गया यह नियम “promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulat 2026”

का ये नियम सामान्य वर्ग के लिए वैसा ही कार्य कर रहा है जैसा SC (साइमन कमीशन) हिंदुस्तान के लिए ब्रिटिश हुकूमत द्वारा कर रहा था।

सबसे पहले हमे ये जानना चाहिए क्या है और ये कैसे सामान्य श्रेणी के युवाओ को प्रभावित करेगा।

इसके कारण छात्र को भेदभाव, शोषण और अत्याचार का शिकार होना पड़ेगा (जिस तथाकथित कृत्य का आरोप हम पर और हमारी 2 से 3 पीढ़ी पर लगाया जाता है) जबकि उनके और हमारे द्द्वारा ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया “अपवाद और अपराधी हर वर्ग और समाज में होते है उनके आधार पर पूरे वर्ग को नहीं निशाना नहीं बनाया जाना चाहिये ।

(विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulat 2026 एक नया नियम बनाया गया है, जिसका उद्देश्य कॉलेज और विश्वविद्यालयों में समानता (Equity) और न्यायपूर्ण माहौल सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी जो कि “SC, ST, *OBC* और *अल्पसंख्यक*” वर्ग से हो उनको सुरक्षित वातावरण देना के साथ जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव न हो।

का मानना है की इन्हें ख़तरा सामान्य श्रेणी के छात्र, शिक्षक या कर्मचारी से ही है। अभी इसमें *OBC* और *अल्पसंख्यक* वर्ग को भी जोड़ा गया हैं जोकि साफ़ तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित है। और जो छात्र इनसे प्रताड़ित है वो कहाँ शिकायत करेगा इसका कोई उल्लेख नहीं है। अगर द्वेषता या रंजिश के तहत किसी सामान्य वर्ग के छात्र छात्र पर झूठा आरोप लगाया जाता है तो उसका उसमें कोई प्रावधान नहीं है।

के अनुसार हर Higher Education Institution को Equity Committee बनानी होगी और इस कमेटी में SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े सदस्य होगे ( सामान्य श्रेणी के सदस्यों के प्रतिनिधित्व के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं है), जोकि भेदभाव से जुड़े मामलों को देखेगी एवं छात्रों और कर्मचारियों की शिकायत सुनेगी।

साथ ही हर Higher Education Institution में Equity Officer (इन श्रेणियों से) नियुक्त करना होगा जो शिकायत दर्ज करेगा और जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। अगर किसी को *लगे* कि उसके साथ भेदभाव हुआ है, तो वह औपचारिक शिकायत कर सकता है।

साथ ही अगर Equity Committee को भी ये *लगे* (चाहे उसके कोई सबूत नहीं हो, सिर्फ लगे) तो कार्यवाही क्या करनी है इस पर साफ़ कुछ नहीं लिखा गया है।

ये Equity Officer पर ही छोड़ा गया है कि उस सामान्य श्रेणी के छात्र के साथ क्या किया जाए उसे एग्जाम नहीं देने दिया जाए, कॉलेज या यूनिवर्सिटी से निकाल दिया जाए, पुलिस केस किया जाए या उससे सबके सामने माफ़ी मागने का आदेश दिया जाए “किसी झूठी शिकायत पर इस तरह की कार्यवाही होने से एक छात्र *आत्महत्या* भी कर सकता है” इस सबके बाद अगर आप बच गए तो संबंधित कॉलेज/यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई कर सकता है। फंड या मान्यता रद्द कर सकता है।

इससे ये सुनिश्चित होता है कि आप पर आरोप लगे तो यूनिवर्सिटी को आप पर कार्यवाही करनी ही पड़ेगी”

इसके साथ ही हर Higher Education Institution में एक Equity Force भी होगी जो की जाति और वर्ग के आधार पर भेदभाव की शिकायतें सुनना, शिकायत की जांच करना और रिपोर्ट बनाना ज़रूरत पड़ने पर संस्थान प्रशासन को कार्रवाई की सलाह देने का काम करेगी।

इस Equity Force में आमतौर पर वरिष्ठ शिक्षक / प्रोफेसर प्रशासनिक अधिकारी SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक प्रतिनिधि कभी-कभी छात्र प्रतिनिधि शामिल होगे। इस क़ानून में स्पष्ट तौर पर सामान्य श्रेणी के छात्र को एक अपराधी की तरह पेश किया जा रहा हैं।

Universities में Discrimination की हकीकत ये है कि 2019 में 173 और 2024 में 374 शिकायतें हुई देशभर में लगभग 40 लाख OBC/SC/ ST छात्रों में से 374 ने शिकायतें की। यानी 0.009% ने। यह ख़ुद UGC का डेटा है। Ministry of Social Justice and Empowerment की रिपोर्ट में SC/ST के लगभग 92% केस ग़लत साबित होते हैं। इसके बाद भी ये नियम ले कर आई है।और इसमें OBC, अल्पसंख्यको को भी जोड़ा गया है,

भारत के हर भाई- बहन को हर समाज को न्याय मिलना चाहिए। उन्हें भी समानता का अधिकार मिलना चाहिए पर इस अधिकार की राजनीति की आड़ में सामान्य वर्ग के छात्रों/ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

समानता के खेल की आड़ में समाज का विभाजन और सामान्य वर्ग के छात्रों की शैक्षणिक हत्या बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है।

इस तरह का कदम भारत को विकसित या विश्व गुरु नहीं बल्कि Civil War की तरफ़ धकेलेगा।

इस नियम के ख़िलाफ़ अगर आप सामान्य श्रेणी के लोग सामान्य प्रतिक्रिया देते है, तो आने वाली पीढ़ी आपको कभी माफ नहीं करेगी और उन्हें आपके चुप रहने की कीमत आपने भविष्य और जीवन को दाव पर लगा कर चुकानी पड़ेगी।

PM Narendra Modi
UGC
Dharmendra Pradhan
CMO Rajasthan
Bhajanlal Sharma
Dr. Prem Chand Bairwa

“ये मेरे व्यक्तिगत विचार है इनका किसी संस्था या संगठन से कोई संबंद नहीं है”
Akash Singh Rathore

30/04/2022

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