Rahul Ratnakar

Rahul Ratnakar

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YouTuber & Standup Comedian.

26/03/2024

मुख़ालिफ़त से मिरी शख़्सियत सँवरती है
मैं दुश्मनों का बड़ा एहतिराम करता हूँ !

- बशीर बद्र

24/03/2024

आज हर साल की तरह रंगों का त्यौहार फिर आया है। तो सभी को "होली की ढ़ेरों बंधाईयां व शुभकामनाएं "वैसे तो सभी को ईलम होगा कि होली क्यों और कैसी मनाई जाती है। लेकिन होली प्रेम,स्नेह का त्यौहार है। इसका मुख्यत:उद्देश्य आपस में प्यार,मुहब्बत का संचार करना है। हालांकि मेनें बालमन में होली बहोत मनाई हैं।
उस समय मैं और मेरे दोस्त गाॅंव की गलियों की में घूम-घूमकर दुसरों को जबरदस्ती से रंग लगाया करते थे और मेरे मित्रगण मेरे घर में आकर मुझे ठंडे पाने से नहलाया करते थे और मैं उनको!वो भी दिन थे,आज फिर होली आते वो यादें मन के इतर हुई। मन खुशी से जूम उठा और एक तरफ वो यादें भी स्मरण हो आई। वो घरवालों से छुपकर घर से पानी की बाल्टी भरकर दोस्तों को नहलाना,उन्हें रंग से लथपथ करना,वो रंग लगाने के आगे-आगे भागना और न जाने क्या-क्या?वो दिन तो जिदंगी के सबसे हसीन पल थे। अब वो दिन जब याद आते है। तो ऑंखे नम हो उठती हैं। कक्षा ८ वीं के बाद पहली बार आज रंग लगवाया और लगाया। तो वो यादें याद आ गई। मैं दुआ करता हूं कि इस होली आपका जीवन खुशियाॅं,प्यार,मौहब्बत से भर जाए। तो अपने दोस्तों,परिवारजनों,प्रेमिका व सगे-सम्बधियों के साथ इस स्नेहरूपी रंगों के त्यौहार को मनाई और खुशियों का प्रसार करे।
"होली रंग!"

Photos from Rahul Ratnakar's post 27/02/2024

Life in Screenshots.

23/02/2024

हरियाणा की अंबाला पुलिस ने 22 फ़रवरी की रात नोटिस जारी किया कि आंदोलनकारी किसानों पर NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून की धारा लगाई जाएगी और सम्पत्ति की कुर्की होगी। बारह घंटे बाद प्रशासन ने फ़ैसला वापिस ले लिया। लेकिन सवाल बना हुआ है कि क्या एक लोकतांत्रिक देश में अपनी माँग करने की ये सज़ा है कि NSA लगा दिया जाए। इसके अलावा किसान नेताओं के घरों पर नोटिस लगाए गए हैं कि उन्हें अनुमति लेकर प्रदर्शन होगा। आख़िर किसानों के साथ ही ऐसा बर्ताव क्यों किया जाता है? भाजपा शासित प्रदेशों की राजधानियों में छात्रों से लेकर कर्मचारी प्रदर्शन करते हैं, सरकारों को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। किसानों के आंदोलन में ऐसा क्या है कि उनके दमन के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें चुप कराने की कोशिश हो रही है? इस बीच पंजाब के एक और किसान की मौत की ख़बर आई है।

17/02/2024

आज के इस वैस्टरन कल्चर के दौर में "राजपूत समाज"एकमात्र वो समुदाय है। जिसने राजस्थानी परम्पराओं,रीति-रिवाजों,पहनावा व सभ्यता आदि!
का जीवंत उद्भव करवाया है। राजपूत समाज की महिलाएं आज भी उसी समय के परिधान व कपङे पहनती है। जो बरसों से राजस्थान में पहने जाते थे और पुरूष भी वो ही पगङी,धोती व कूर्ता पहनते हैं व महिलाएं लहंगा-चून्नी!
मेनें आज एक राजपूत लङकी का इंस्टाग्राम देखा,तो मुझे स्मरण हुआ कि यह वो एकमात्र ऐसे लोग बचे है। जो हमारी विरासत को साथ लेकर चल रहै हैं। हालिंक मैं कुछ समय पहले राजपूतों से नफ़रत करता था लेकिन वो केवल कुछ कमियों के कारण और आपको पता है कि कमियां सब में होती है। आप में और मुझ में भी है ना। तो कुछ खा़मियों के कारण किसी को पूर्णत:गलत नहीं ठहाराया जा सकता है। मुझे तो गर्व हुआ कि यह लोग आज भी हमारी संस्कृति के साथ खङे है। आगे आने वाले समय में भी खङे रहैंगें। तो हमें भी इनके साथ होना चाहिए।
सच कहूं तो उस लङकी के कपङे देखकर मन खुशी से झूम उठा। अब कुछ मेरे चाहने वाले कहेगे कि आपको तो राजपूत अच्छे नहीं लगते,तो उनको बता दूं कुछ अपवाद सब में होते है। जो अपवाद है मैं आज भी उनको पसंद नहीं करता।
इसमें कोई शक नहीं है लेकिन मुझे इनकी संस्कृति,वेशभूषा से प्रेम है और सदैव रहैगा। हालांकि समय के साथ चीजें,लोग,विचार आदि बदलते है। तो मेरे भी बदलें है।
लेकिन यह लोग नहीं बदलें,ना ही इनके नियम बदलें है। तो हमें हमारी बची-कूची विरासत का संरक्षण करना चाहिए।
इति!
आपका
|राहुल रत्नाकर|

15/02/2024

कट्टरपंथी मुसलमानों और ईसाइयों को अपना भाई बताने वालों को यह प्रामाणिक क़ुरान और बाइबिल की बाते सुननी चाहिए इस व्याख्यान को सुनने के बाद सेक्युलर लोगो के पैरों के नीचे से ज़मीन ना खिसक जाए तो कहना ! बहुत मज़ाक़ बना लिया ज़ाकिर नाइक ने सनातन धर्म का अब हम उसका ऑपरेशन करेंगे !

15/02/2024

इस पर मेरे पास एक तर्क है: क्या महँगी गाड़ियाँ या फोन रखने वाला किसान गरीब नहीं हो सकता? क्या गरीबी का मतलब फटे कपड़े और भुखमरी ही है? पंजाब के किसान का स्टेट ऑफ माइंड गरीबी का है।

अपने मन में जो संघी परिभाषा बना रखी है गरीबी की, उसे हटा कर उनके चश्मे से देखो।

Photos from Rahul Ratnakar's post 26/12/2023

मन को मोह लेने वाले दृश्य,कितने सुंदर नज़ारे हैं।

09/12/2023

भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट क्यों नहीं है?

आपको जानकर हैरानी होगी कि 1965 तक मुस्लिम रेजिमेंट थी। 3 प्रमुख घटनाएं हैं जिन्होंने सेना से मुस्लिम रेजिमेंट को हटाने के लिए मजबूर किया।
*पहली* - 15 अक्टूबर 1947 को जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पठानों ने भारत पर हमला किया, तो पूरी सोई हुई बहादुर गोरखा कंपनी को अपनी ही बटालियन के साथी मुस्लिम सैनिकों ने मार डाला। कंपनी कमांडर प्रेम सिंह सबसे पहले शिकार बने। 30 अन्य रैंकों के साथ 2 गोरखा JCO भागने में सफल रहे और घटना की रिपोर्ट करने के लिए झंगर भाग गए। अगले दिन मेजर नसरुल्ला खान मुस्लिम सैनिकों को थारोची किले में ले गया, जहां गैरीसन ने उन्हें आनंदित किया। रात के पहले के विकास से अनजान और उन्हें जल्द ही क्या होने वाला था, रात में, बेखौफ गोरखाओं की एक भयानक पुनरावृत्ति प्रदर्शन में हत्या कर दी गई थी। उनके कमांडर कप्तान रघुबीर सिंह थापा को "जिंदा जला दिया गया"। पी.एम. नेहरू ने मामले को दबा दिया। यह सब "द मिलिट्री प्लाइट ऑफ पाकिस्तान" पुस्तक में वर्णित है।
*दूसरी* - पाकिस्तान के साथ 1947 के युद्ध के दौरान नेहरू द्वारा छिपाई गई एक और बड़ी बात यह थी कि कई मुसलमानों ने अपने हथियार डाल दिए और भारतीयों से लड़ने के लिए ब्रिटिश प्रमुख जॉन बर्ड के नेतृत्व में पाकिस्तान में शामिल हो गए। लेकिन बाद के चरण में ब्रिटिश प्रमुख को निलंबित कर दिया गया और तुरंत अगले जहाज पर इंग्लैंड बुला लिया गया।
स्वर्गीय सरदार पटेल इसे सार्वजनिक करना चाहते थे लेकिन गांधी द्वारा ऐसा न करने का आदेश दिया गया था।
*तीसरी* - 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान मुस्लिम रेजीमेंट के 30,000 भारतीय सैनिकों ने न केवल पाकिस्तान से लड़ने से इनकार किया बल्कि उनका समर्थन करने के लिए हथियार लेकर पाकिस्तान चले गए।इसने भारत को बड़ी मुसीबत में डाल दिया क्योंकि उन्होंने उन पर भरोसा किया। लाल बहादुर शास्त्री ने मुस्लिम रेजिमेंट को खत्म कर दिया था।

07/12/2023

मेरे कुछ दर्शक मुझसे हर विडियो,पोस्ट कविता व अन्य पर सवाल पुछते रहते है कि,सर!आप इस्लाम धर्म की इतनी प्रंशसा क्यों करते है। मैं उन तमाम दर्शकों व साथियों को कहना चाहता हूं,कि मैं व्यक्तिगत रूप से इस्लाम से जुङा हुआ हूं। मेरे बचपन की यादें,लम्हें,पल इस्लाम से जुङे हुए है।
मेरा बचपन मुस्लमानों के घर पर बीता हैं।अनेकों लोग मुस्लमानों कट्टरपंथी,देशद्रोही व न जाने कितने ही अभ्रद शब्दों से बुलाते हैं,लेकिन मेरी परिपाटी व विचारधारा भिन्न है। मैं इस्लाम को बैहद ही पंसद करता हूं और इस्लाम मुझे प्रिय लगता है। मैं उर्दू भाषा को हद से ज्यादा पंसद करता हूं,इसके पीछे एक बङी लम्बी कहानी है।
मेरे गांव व घर पास मुस्लमानों का घर है एवं उनका और हमारा प्यार,स्नेह परिवार से बढ़कर है। वो हमें परिवार से बढ़कर है और मेरे गांव में मुस्लमानों व अन्य लोगों के बीच में प्रेम व लगाव बहुत ज्यादा है। हम उनके सुख-दु:ख में आङे आते है और वो हमारे!
कहानी इतनी लम्बी है कि मैं शब्दों में बया नहीं कर सकता हूं।
शुक्रिया!

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