VIPIN MEENA
~ *जय बिरसा*~
मैं एहसासों को जुबान देता हूँ. मैं सिर्फ उसका जिम्मेदार हूँ जो मेने कहाँ.🙏
❤️Ín Relationship~With "ŇÁŤÙŔÈ 🍃
🍃जोहार🙏
कावड़ हमारी सामाजिक, अध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर विदेशी संस्कृति का हमला है।
हमारा इतिहास पत्थर की मूर्तियों में नही खेत की मिट्टी में दफन है।
जोहार कावड़ लाने वाले कबिलाई चुतियों
06/05/2024
Life is full of struggle...🤝
We too are not weak...💪
mechanic🪛💡
20/02/2024
Happy moments of life.. ❤
💐Congratulations💐 to your sister on her new life..
Be happy🥰wherever you are...
Dr.Manisha Meena🙏
16/01/2024
शहरों में जाकर बस गये वो लोग जिन्हें पैसे और भौतिक सुख सुविधाओं की जरूरत थी..!
तुम लोगों को जरा भी शर्म ना आई मेरा पुरा गाँव खाली कर गये..!
गाँव के कच्चे रास्ते झाकते है कहा गये वो जो मेने बचपन मे खेलते खेलते बडे़ किये थे..!
माँ रास्तों से पुछती है कब आयेगा मेरा बेटा जो पैसे कमाने गया था अभी तक लोटा नहीं, बाप गाँव के चौक तक जाता है कोई तो आया होगा शहर से मेरे बेटे कि खबर लेके...!
अब तो वो घर भी ढह गया जो तुमने बचपन में बनाया थे..!
तुमे शर्म नहीं आई मेरा गाँव खाली कर गये...!
क्या अब तुम्हारे अंदर का गाँव मर गया है जो तुम गाँव नहीं आते हो..!
अब यहाँ होली का रंग फिका फिका रहता है दिवाली की मिठाईयाँ भी ख्वाद नहीं लगती..!
सावन तो जैसे कब का मर गया हो,तुम्हारे बचपन की गलियां बहुत उदास उदास रहती है..!
हमें से रोज पुछती है कब आयेगे वो क्या अब नहीं आयेगें,हमारा तो कोई दोष नहीं था फिर क्यो चले गए..!
गाँव का स्कूल भी विराने मे बदल गया ,दिवारें चिल्लाती रहती है..!
दादी कि कहानियों अधुरी रह गई अब कोई सुनने नहीं आता, दादा अपने हुक्के में पानी खुद भरने लगा है..!
तुम्हारे लगाये आम के पेड़ भी बडे़ हो गये लेकिन कोई छाया मे खेलने वाला नहीं बचा..!
तुम्हारे हाथी घोड़े भी उदास उदास रहते हैं जो तुम जिद करके मैले से लाये थे...!
तुम जरा भी शर्म नहीं आई हमारा गाँव खाली कर गये..!
~विपिन 🖊
13/01/2024
मै जब भी शहर कि भीड़ वाली गलियों में जाता हूँ..! मुझे गाँव की आजाद गलियारे याद आते हैं.. मुझे वो कोयल कि आवाज सुनाई देती है जो अक्सर छत कि मुंडेर पर गाती है.
वो नीम के पेड़ दिखाई देता है जहाँ मोर, तौते. चिड़िया एक दुसरे से बात करते हैं.. पनघट पर औरतों कि हसी सुनाई देती है.. में जब भी शहर कि भीड़ वाली गलियों में जाता हूं..
मुझे दादा जी के साथ लोग बैठे दिखाई देतें है.और पुराने किस्से सुनाई देते है.. मुझे गाँव के वो आजाद गलियारे याद आने लगते है..
मुझे डर लगता है ये शहर मुझे निगल नहीं ले..
मेरे भीतर एक गाँव है जो मरना नहीं चाहता है...!
विपिन मीणा✒️
07/01/2024
मै अब पहले जैसा नहीं रहा में अब समझदार हो गया हूं !!
मुझे अब अच्छे बुरे मे फर्क दिखाई देता है, मै अब पहलें से ज्यादा समझदार हो गया हूं!!
मुझे अब संसार के लोगों का दुःख दर्द समझ आता है, ये मेरे जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा है मैं समझ सकता हूं कि इंसान बड़ा स्वार्थी है!!
मेरे हिसाब से इस संसार में कोई सुखी नहीं है इस पृथ्वी पर कभी सुख ना आएगा ना कभी आया था लोग एक दूसरे के हक अधिकारों को छीनने में लगे हुए हैं,
मैं अब यह सारी चीज पूर्ण रूप से समझने लगा हूं ,
मैं अब पहले जैसा नहीं रहा मैं अब समझदार हो गया हूं!!
मैंने देखा है कि यहां एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं!!
यहां कीड़े मकोड़े की भांति लोग एक दूसरे को मसल रहे हैं, इंसान की आवश्यकता पूरी नहीं हो रही है,
घर की जिम्मेदारियां ने युवाओं से उनका बचपन और गांव छीन लिया सबकी जिम्मेदारी लिए युवा शहरों में भटक रहे हैं!!
मैं अब पहले जैसे नहीं रहा मैं अब समझदार हो गया हूं |
विपिन मीणा ✒️
07/01/2024
प्रकृति के संरक्षण की जब भी कहीं भी कभी भी बात होती है, यह तब तक अधूरी है जब तक आदिवासी समाज के महान योगदान को याद न कर कर लिया जाए आदिवासी संस्कृति ने न केवल प्रकृति का संरक्षण किया बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति का भी संरक्षण किया है!!
#हसदेव_बचाओ_आदिवासी_बचाओ
16/10/2023
चट्टानों को
या तो ज्वालामुखी बनाते हैं
या समुद्र
चट्टानें चट्टानों को नहीं बनातीं
मनुष्य को भी मनुष्य नहीं
कोई न कोई तूफान ही बनाता है।...... #भानगढ़
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