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जबलपुरवासियों के लिए शहर में आधुनिक UIDAI आधार सेवा केंद्र का शुभारंभ किया गया है, जहां आधार नामांकन, अपडेट और अन्य सभी आधार संबंधी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इस नए केंद्र के शुरू होने से अब नागरिकों को आधार संबंधी कार्यों के लिए भोपाल या दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही नगर निगम के विभिन्न वार्डों और जोन कार्यालयों में विशेष आधार शिविर भी लगाए जाएंगे, जिससे लोगों को उनके क्षेत्र में ही सुविधाएं मिल सकेंगी।
जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शहपुरा तहसील में पदस्थ राजस्व निरीक्षक करण सिंह लोधी को 80 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ग्राम कुलोन की जमीन के सीमांकन के बदले आरोपी द्वारा 1 लाख की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने पर लोकायुक्त ने सत्यापन कराया, जिसमें सौदा 80 हजार में तय हुआ। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने कटंगा स्थित रतन कॉलोनी में ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी को रिश्वत लेते हुए दबोच लिया।
जबलपुर में अनुकंपा नियुक्ति और पैसों के लेन-देन को लेकर सामने आए विवाद में अब रघु तिवारी का पक्ष भी सामने आया है। रघु तिवारी का कहना है कि उनके खिलाफ की गई शिकायत पूरी तरह गलत है और उनके द्वारा ली गई राशि किसी नौकरी के नाम पर नहीं, बल्कि कोर्ट केस और अधिवक्ता की फीस से संबंधित थी।
रघु तिवारी के अनुसार संबंधित मामला न्यायालय में लंबित था और केस की फीस पहले से तय की गई थी। उनका दावा है कि लगभग 50 हजार रुपये अधिवक्ता फीस के रूप में दिए गए थे, जबकि शिकायत में इसे नौकरी के नाम पर ली गई राशि बताया गया है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष के आरोप और कथित कॉल रिकॉर्डिंग भी कई सवाल खड़े कर रही है।
इस वीडियो में हम आपको सुना रहे हैं कथित कॉल रिकॉर्डिंग के कुछ हिस्से और साथ ही रघु तिवारी का पक्ष, ताकि दर्शक दोनों पक्षों को सुनकर अपनी राय बना सकें।
⚠️ Disclaimer:
इस वीडियो में प्रस्तुत जानकारी संबंधित पक्षों के दावों, शिकायतों, दस्तावेजों और प्राप्त ऑडियो सामग्री पर आधारित है। कथित कॉल रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता। मामला जांचाधीन है और अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसियों एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा। इस वीडियो का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों का पक्ष समाचार के रूप में प्रस्तुत करना है।
क्राइम ब्रांच और बरेला थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी के पास से 33 किलो 300 ग्राम गांजा, दो मोबाइल, नकदी और एक क्रेटा कार जब्त की गई।
पुलिस के अनुसार जब्त गांजे की कीमत करीब 16.65 लाख है। आरोपी ओडिशा से गांजा लाकर जबलपुर में सप्लाई करता था। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर पुलिस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
जबलपुर में चर्चा का विषय बने मामले में अब सामने आई है एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग का दूसरा भाग। इस ऑडियो में केस नंबर, दस्तावेज और पेमेंट को लेकर बातचीत सुनाई देती है। बातचीत के दौरान एक पक्ष लगातार केस नंबर और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात करता सुनाई देता है, जबकि दूसरी ओर पेमेंट और जूनियर से हुई चर्चा का भी जिक्र किया जाता है।
क्या यह बातचीत केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा थी या इससे कुछ नए सवाल खड़े होते हैं? इस वीडियो में हम आपको सुनवा रहे हैं कथित कॉल रिकॉर्डिंग का Part-02, ताकि आप स्वयं पूरी बातचीत सुन सकें।
⚠️ Disclaimer:
इस वीडियो में सुनाई गई ऑडियो सामग्री एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि हमारा चैनल नहीं करता। वीडियो में प्रस्तुत जानकारी उपलब्ध दस्तावेजों, पक्षकारों के दावों एवं प्राप्त सामग्री पर आधारित है। मामला जांचाधीन है और अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसियों एवं न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा। इस वीडियो का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या पक्ष की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि उपलब्ध सामग्री को समाचार के रूप में प्रस्तुत करना है।
जबलपुर के मेडिकल कॉलेज परिसर में महिला के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता अपने सड़क दुर्घटना में घायल पिता के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंची थी, जहां उसके साथ यह वारदात हुई।
पीड़िता की शिकायत के अनुसार, उसका पूर्व परिचित राहुल कसरा उसका पीछा करते हुए मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित पल्मोनरी बिल्डिंग तक पहुंचा। आरोप है कि आरोपी ने महिला को धमकाकर एक सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी।
जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र से दबंगई और मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित दीपक साहू ने आरोप लगाया है कि शिवाजी नगर क्षेत्र के कुछ लोगों ने उनके घर में घुसकर परिवार के साथ मारपीट की, घर में जमकर तोड़फोड़ की और नकदी व जेवरात भी लेकर फरार हो गए। पीड़ित परिवार एसपी कार्यालय पहुंचा और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जबलपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लगाए गए आरोपों के बीच अब मामले ने नया मोड़ ले लिया है। एक ओर रघु तिवारी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताया है। वहीं दूसरी ओर एक कथित कॉल रिकॉर्डिंग सामने आई है, जिसमें नौकरी और केस से जुड़ी बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।
ज्ञापन में दावा किया गया है कि CAT प्रकरण में आदेश 13 फरवरी 2026 को प्राप्त हो चुका था। वहीं कथित कॉल रिकॉर्डिंग में मार्च-अप्रैल तक इंतजार करने और नौकरी मिलने की बात कही जा रही है। यही विरोधाभास अब कई नए सवाल खड़े कर रहा है।
हालांकि इस कथित ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है और मामला फिलहाल जांचाधीन है। वीडियो में प्रस्तुत सभी तथ्य उपलब्ध दस्तावेजों, पक्षकारों के दावों और प्राप्त सामग्री पर आधारित हैं। अंतिम सत्य जांच एजेंसियों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
⚠️ Disclaimer: इस वीडियो का उद्देश्य किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करना नहीं है। प्रस्तुत सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों, पक्षकारों के दावों और प्राप्त सूचनाओं पर आधारित है। मामला जांचाधीन है।
समाजसेवी या मास्टरमाइंड? सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर ठगी के आरोप! नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर लोगों को करता था प्रभावित?
समाजसेवा की आड़ में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के गंभीर आरोपों ने जबलपुर में सनसनी फैला दी है। हाथीताल कॉलोनी निवासी एक कथित समाजसेवी पर बेरोजगार युवाओं और परिवारों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप लगे हैं। पीड़ितों का दावा है कि नेताओं से करीबी और पहुंच का हवाला देकर भरोसा जीता गया और फिर पैसों की मांग की गई।
मामले की शिकायत एडिशनल एसपी कार्यालय तक पहुंच चुकी है और पुलिस जांच में जुटी हुई है।
जबलपुर में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर एसपी कार्यालय में अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला। पीड़ित लोग अपनी शिकायत को बैनर पर प्रिंट करवाकर एसपी ऑफिस पहुंचे और कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया।
पीड़ितों ने माढ़ोताल थाना क्षेत्र स्थित सेंट अलॉयसियस स्कूल के प्रिंसिपल पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि धर्म परिवर्तन नहीं करने पर पांच लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया।
पीड़ितों के अनुसार, इस मामले की शिकायत करीब 20 दिन पहले माढ़ोताल थाने में की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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