PMG
शिक्षा,कला,कृषि,ग्रामोदय, परंपरागत व्?
04/05/2026
https://youtu.be/Ay9JAdHOF_0
🇮🇳🙏जय भारत 🙏🇳🇪
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
Dr. Harsh Kumar Tiwari 64 likes, 3 comments. "व्यंग्यकार प्रतुल श्रीवास्तव से एक मुलाकात | आज कहां है व्यंग्य Satire? | Patul Srivastava Interview"
23/01/2026
सेवाभावी स्व. मुन्नालाल जी दुबे
*स्मृति जन्मोत्सव पर सादर नमन*
पी एम जी शिक्षा - कला शोध समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश दुबे के पिताश्री सेवाभावी मालगुजार स्व. मुन्नालाल जी दुबे के स्मृति जन्मोत्सव (वसंत पंचमी) पर उन्हें पी एम जी परिवार की ओर से सादर नमन। विनम्र श्रद्धांजलि ।
- विनम्र *समस्त पी एम जी परिवार*
13/01/2026
*खलीफा गनेश जायसवाल*
*स्मृति समारोह 10 जनवरी 2026 को सम्पन्न*
जबलपुर/ देशी व्यायाम पद्धति के पक्षधर, संरक्षक खलीफा गनेश जायसवाल का स्मृति जन्मोत्सव ,सिटी काफी हाउस, करमचंद चौक, जबलपुर सभागार में पी एम जी शिक्षा - कला शोध समिति आयोजित कार्यक्रम की मीडिया कवरेज, सभी सम्माननीय मिडिया सहयोगीयों को हार्दिक आभार।
10/01/2026
I've just reached 500 followers! Thank you for continuing support. I could never have made it without each one of you. 🙏🤗🎉
10/01/2026
*खलीफा गनेश जायसवाल*
*स्मृति समारोह 10 जनवरी 2026 को सम्पन्न*
जबलपुर/ देशी व्यायाम पद्धति के पक्षधर, संरक्षक खलीफा गनेश जायसवाल का स्मृति जन्मोत्सव ,सिटी काफी हाउस, करमचंद चौक, जबलपुर सभागार में पी एम जी शिक्षा - कला शोध समिति आयोजित कार्यक्रम की झलकियां।
10/01/2026
31/12/2025
https://www.facebook.com/share/p/1TZPrsJnZP/
68 th Foudation Day Starting & Speeach 68 th Foundation day Celebration of Gunjan Kala Sadan on 27 Dec.2025 atShaheed Smarak , Jabalpur
30/10/2025
11/08/2025
https://youtube.com/shorts/QDZzb0tzguk?si=-BtvCPPsL0QBp6Xv
Beta | Binge Production | #Shorts #BingeProduction #ytshorts #ytshorts #emotional #motivation
(125 वें जन्म दिवस पर विशेष)
*राजनीति के चाणक्य और कलम के सिपाही : पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र*
गंगा की निर्मल रवानी कहेगी
माटी भी उनकी कहानी कहेगी
सूरज थे वो सदा सूरज ही रहेंगे
किरणों की ताजा रवानी कहेगीl
- अज्ञात
कवि श्रेष्ठ के द्वारा लिखी गई यह पंक्तियां कालजयी प्रखर विलक्षण बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र जी पर पूरी तरह सही चरितार्थ होती है l द्वारका प्रसाद जी का जन्म 05 अगस्त 1901 को उत्तर प्रदेश के 'उन्नाव' जिले में छोटे से गांव 'पड़री खुर्द' में पं. अयोध्या प्रसाद एवं श्रीमती रामदेवी के यहां हुआ था l कालांतर में उनके इस यशस्वी पुत्र का यशगान संपूर्ण राष्ट्र में गूंजा l मिश्र जी की शिक्षा रायपुर, जबलपुर एवं इलाहाबाद में हुई l आपने स्नात्तकोत्तर उपाधि के साथ-साथ एल एल बी की डिग्री भी प्राप्त की l युवावस्था में ही आप स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गएl राष्ट्रवादी आंदोलनों में सक्रियता के कारण उन्हें अनेक बार जेल भी जाना पड़ाl अपनी कर्मठता एवं तीक्षण बुद्धि के कारण वे कांग्रेस पार्टी के सचेतक के रूप में जाने जाते थेl लाला राजपत राय की मृत्यु पर मिश्र जी के तीखे सटीक वक्तव्य एवं उनके द्वारा लिखी गई संपादकीय पर पंडित मोतीलाल नेहरूजी ने प्रशंसा करते हुए कहा था कि "सबसे अच्छा आपराधिक वकील भी इतना अच्छा आरोप पत्र नहीं लिख पाता l" इलाहाबाद लॉ कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य और पंडित द्वारका प्रसाद जी के गुरु ने इसे पढ़कर बधाई संदेश भेजा था l स्वाभाविक है कि किस भी विद्यार्थी के लिए यह अत्यंत गौरव-गर्व की बात थी l
अन्याय,अव्यवस्था, भ्रष्टाचार भेदभाव, सांप्रदायिकता के खिलाफ उन्हें भयंकर आक्रोश था l वे अद्भुत साहस के साथ बिना जान की परवाह किए इस पर निरंतर प्रहार करते रहे l सत्याग्रह आंदोलनों के मध्य 1930 में जेल में रहकर उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव जीता,किंतु जेल से बाहर आकर पद ग्रहण करते ही तत्कालीन निरंकुश, आतंकित सरकार ने पं. मिश्र के अन्याय विरोधी तेजस्व व्यक्तित्व के भय से उन्हें बर्खास्त कर दिया l इतिहास में यह अपने प्रकार का पहला मामला था l उनके ओजस्व व्यक्तित्व के कारण ही उन्हें 1934 में भी केंद्रीय असेंबली चुनाव लड़ने नहीं दिया गया l यद्यपि सरकार के इस अन्याय का पुरजोर विरोध हुआ, किंतु विदेशी सरकार ने उनके व्यक्तित्व से भयभीत होकर कोई खतरा देना उचित नहीं समझाl शारीरिक मानसिक कष्ट सहने के अदम्य साहस ने उनके व्यक्तित्व को और भी निखारा l उनके आत्मविश्वास ने उन्हें विषम परिस्थितियों एवं विरोधों के बीच भी *"मानोगे क्या, मानना होगा l*
*हुक्म हूँ मैं फरियाद नहींl"* की अंतर्भावना से अडिग नहीं होने दिया l वे जानते थे कि सत्य-निष्ठा, ईमानदारी को डिगाना आसान नहीं असंभव भी है l प्रजातांत्रिक/ लोकतांत्रिक समाजवादी व्यवस्थाओं के प्रति उनके निष्ठा ने उन्हें निरंतर संघर्ष रत रखा l
सन 1942 में स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सक्रिय भूमिका एवं आक्रामक विरोध के कारण उन्हें 3 वर्ष के लिए कठोर कारावास में सबसे अलग रखा गया l दार्शनिक तेजस बुद्धि,ईश्वरवादी मानवीय संवेगों से पूर्ण पं. द्वारका प्रसाद मिश्र जी ने इस समय का सदुपयोग 8 खण्डो में वर्गीकृत प्रसिद्ध काव्य कृति 'कृष्णायन' की रचना करने में व्यतीत कियाl सांस्कृतिक,सामाजिक,आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से रचित इस उत्कृष्ट कृति की महान साहित्यकार श्री रामधारी सिंह दिनकर जी ने भी इसे उच्च मानकों की कृति बात कर इसकी सरहाना की l यह कृति देश-विदेश में बड़ी चर्चित हुई और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की छवि से इतर उनके अंदर के एक कवि का संवेदनशील नया चेहरा समाज के सामने आयाl वह प्रखर साहित्यकार थे l पत्रिका 'शारदा','लोकमत' 'सारथी' का उन्होंने कुशल संपादन किया l उनकी प्रमुख उल्लेखनीय कृतियां है 'लिविंग इन एरा' (आत्मकथा), स्टडीज इन प्रोटोहिस्ट्री ऑफ इंडिया, सर्च ऑफ़ लंका,तुलसी के राम और सीता आदि l उनके साहित्य में विचारों की नवीनता, सार्थकता और व्यावहारिकता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती हैl हिंदी,अंग्रेजी,संस्कृत,उर्दू आदि भाषा में विशेषज्ञता रखने वाले पं. मिश्र जी का विशाल अध्ययन, विषय प्रतिपादन, तर्क युक्त विश्लेषण, सजकता,गंभीरता, पैनी दृष्टि और सूक्ष्म अवलोकन अद्भुत था l उन्हें उत्कृष्ट पत्रकार के रूप में जाना जाता था l वे भाषा की उदारता के पक्षपाती थे l उर्दू,संस्कृत,अंग्रेजी ही नहीं साहित्य सृजन में प्रादेशिक भाषा के भी वे पक्षधर थेl उनका मानना था भाषा सरल- सहज सार्थक और बुद्धिग्राह्य होनी चाहिएl
श्रेष्ठ प्रशासनिक कुशलता एवं अकादमिक योग्यताओं के कारण उन्हें 1956 में सागर विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया l उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने ऊंचाइयों के नए आयाम स्थापित किए l उन्हें अध्ययन करने और नई-नई जानकारी एकत्र करने का जुनून था l उनके लिए कहा जाता था कि उन्हें पढ़ने का 'व्यसन' था पं. मिश्र को साहित्याचार्य (डॉक्टरेट) की विभूति से भी सम्मानित किया गयाl
1962 में कांग्रेस पार्टी की गिरती लोकप्रिय एवं अंतर्कलह के कारण पार्टी में उनकी कमी शिद्दत से महसूस की जाने लगीl फलस्वरुप उन्होंने कुलपति पद से इस्तीफा दिया एवं राजनीति में पुनः सक्रिय हो गए l मई 1962 में पं. मिश्र उपचुनाव में भारी बहुमत से विजयी हुए और कांग्रेस दल के नेता चुनकर मुख्यमंत्री बने l पार्टी में एक नई आशा,उमंगऔर उत्साह का संचार हुआ l मध्यप्रदेश की राजनीति में यहाँ से एक नया मोड़ आया l समाजवादी विचार 'बहुजन हिताय बहुजन सुखाय' की भावना से उन्होंने कार्य किया l आत्म बल, दृढ़विश्वास, कुशल प्रशासनिक क्षमता, समस्या समाधान की निपुणता ने उन्हें लोकप्रिय बनायाl वे 30 सितंबर 1963 से 8 मार्च 1967 एवं 9 मार्च 1967 से 29 जुलाई 1967 तक मुख्यमंत्री रहेl पं. मिश्र की सख्ती एवं ईमानदारी चर्चित रहीl मध्य प्रदेश का यह स्वर्णिम काल माना जाता हैl
अपने साथियों के बीच डी.पी. के नाम से जाने,जाने वाले श्री मिश्र जी नियमों,सिद्धांतों और समय के बड़े पाबंद थेl ईमानदारी और निष्ठा के अनेक मिसाल उनके जीवनकाल में देखने को मिलते हैं l अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में वे सरकारी आवास छोड़कर निजी किराए के आवास में रहे और उसका किराया उन्होंने स्वयं वहन किया l वे राजनीतिक क्षेत्र में उद्योगपतियों, व्यापारियों, अधिकारियों के हस्तक्षेप के विरोधी थे l 'कसडोल' चुनाव में पं. मिश्र जी के चुनावी एजेंट श्री श्याम चरण शुक्ला जी थे l उन्होने इस चुनाव में निर्धारित राशि से 249 रुपए 72 पैसे अधिक खर्च कर दिए थे फल स्वरुप चुनाव निरस्त कर दिया गया l पं. द्वारका प्रसाद मिश्र जी ने में सहजता से इस त्रुटि को स्वीकारते हुए पद त्याग दियाl 1988 की वह घटना भी उल्लेखनीय है जबकि अस्वस्थता के दौरान मध्य प्रदेश शासन के द्वारा उनके इलाज हेतु 15000 रुपए खर्च किए l इस बात का पता ज़ब उन्हें चला तो उन्होंने तत्काल वह राशि अपनी पेंशन से कटवाने के निर्देश देकर उच्च चारित्रिक मिसाल स्थापित किया l
कुशल प्रशासक,सुविख्यात साहित्यकार, शिक्षाविद, इतिहास विद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रखर राजनेता पंडित द्वारका प्रसाद जी का निधन 31 मई 1988 में हो गया l हर आत्मा हर रूह से एक ही आवाज निकली..
*एक रोशन दिमाग था न रहा*
*देश में एक चिराग था न रहा..!*
आज उनके 125 वें जन्मदिन पर भावपूर्ण स्मरण एवं श्रद्धापूर्वक नमन....
-डॉ.वंदना पाण्डेय दुबे
प्राचार्य
चंचलबाई महिला महाविद्यालय
जबलपुर l
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