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08/11/2020
मंगलमय दीपावली पर पूज्य बापूजी का पावन सन्देश - 17/10/2017
84 लाख योनियों के बाद मनुष्य जन्म मिलता है, बड़ा दुर्लभ है। दुर्लभ होते हुए भी क्षणभंगुर है। कब कहां किस निमित्त मृत्यु हो जाए पता नहीं,उसमें भी महापुरुषों का संपर्क और भी दुर्लभ है।
दुर्लभो मानुषों देहो देहिनां क्षणभंगुरः।
तत्रापि दुर्लभम् मन्येत वैकुंठः प्रियदर्शनम्।।
वैकुंठपति के जो प्रिय है उन महापुरुष का दर्शन संपर्क अतः ऐसे दुर्लभ जीवन का, दीवाली की रात ईश्वर प्राप्ति के उद्देश्य से जब जागरण सत्संग की पुस्तक पठन उसमें विश्रांति व ॐ कार के जप में विश्रांति। हास्य,दीर्ध,प्लूत दिवाली की रात सभी साधक फायदा ले।
सोते समय ईश्वर गुरु के अनुभव में स्मरण में प्रीति करते-करते, आनंदपूर्वक विश्रांति पाते पाते नींद आ जाए वह योग निद्रा का काम करेगी और नूतन वर्ष शांत अंतरात्मा रस से संपन्न चित्त हरि शरणम्। यह और वह के रूप में मैं व मेरे के रूप में सब एक सच्चिदानंद की अभिव्यक्ति है।
ॐ आनंद.. ॐ माधुर्य.. सोहम् .. शिवोहम्..। उस उच्च ज्ञान उच्च भाव में जो अपने से अलग दूर व दुर्लभ ईश्वर को मानता है,शास्त्र कहते हैं अंधेन कूपेन प्रविष्यन्ति -> वह अंधे कूप में प्रवेश करता है।
अतः अंतरात्म देव को ही जहां से शरीर मन बुद्धि चित्त सुख-दुख जानने की सत्ता स्फूर्ति व चेतना आती है वही चैतन्य आत्म स्वरुप ईश्वर तुम्हारा अपना आपा है। दूर नहीं दुर्लभ नहीं परे नहीं पराया नहीं।
नूतन वर्ष के दिन जब मौका मिले पूछते रहना अपने निर्मल नर-नारी में छुपे नारायण को । जो कभी तुम्हारा साथ नहीं छोड़ता वह अंतर्यामी ईश्वर अभी भी तुम्हारे साथ है,महल में रहो चाहे जेल में..।
पूर्ण गुरु...हो गए साईं...।
बापू के बच्चे नहीं रहना कच्चे।
मंगल दिवाली..मंगल प्रभात.. नूतन वर्ष।
यह संदेश मेरे साधक तक अवश्य पहुंचें।
मंगलमय दीपावली पर पूज्य बापूजी का पावन सन्देश - 26/10/2016
पूज्य बापूजी :
दिया जलाएं प्रकाश लायें सूझ बूझ | सब स्वप्न है चैतन्य अपना है |
सफाई करें अर्थात किसीके लिए बुरा न सोचें, बुरा न चाहें, बुरा न करें |
मिठाई खायें, खिलायें, खुश रहें और खुशियाँ बाँटें | और दिये जलायें अर्थात ज्ञान का दिया जलायें |
यह भी बीत जायेगा, वह भी बीत जायेगा |
गम की अँधेरी रात में दिल को न बेक़रार कर, सुबह जल्दी आयेगी सुबह का इंतजार कर |
मंगलमय दीपावली पर पूज्य बापूजी का पावन सन्देश - 10/11/2015
शुभ दीपावली मंगलमय दीपावली आनंदमय दीपावली ।।
सफाई करना, नयी चीज़ लाना, दीप जलाना, मिठाई खाना-खिलाना, चार मुख्य काम होते हैं दीपावली के ।
दुःख, चिंता, भय और नकारात्मक विचारों को ह्रदय से निकालना, ये आतंरिक दिवाली है । नयी चीज़ लाना : मै सत् हूँ, चेतन हूँ, साक्षी हूँ, ये दिव्य चीज़ लाना चित्त में और हमेशा अपने ज्ञान स्वाभाव में, साक्षी स्वाभाव में ।
ॐ ॐ आनंद । हम है अपने आप, हर परिस्थिति के बाप । ऐसा ज्ञान का दिया भीतर प्रगट करना और प्रसन्न रहना, मधुमय स्वाभाव और मधुमय विचार फैलाना । पहली है बाह्य दिवाली, दूसरी है आतंरिक दिवाली । आतंरिक दिवाली ठीक से जान लो, मना लो, तो हर रोज दिवाली, हर हाल दिवाली, हर दम दिवाली |
जो साधक मस्त गुरु का हुआ, सोऽहं स्वाभाव का हुआ, गुरु और ईश्वर के अनुभव से एक हुआ, उसको क्या दिलगीरी बाबा !
सभी साधकों को खूब-खूब स्नेह, सद्भाव और कितनी शाबाशी दूँ, कितना धन्यवाद दूँ !
“बापू के बच्चे ...............”, समझ गए ? तुम्हारी श्रद्धा और धैर्य को मैं फिर-फिर से ह्रदय से लगा रहा हूँ । मेरे प्यारे बच्चे-बच्चियाँ ! कितने प्रलोभन और कितना क्या, क्या ? फिर भी अडिग रहे हो । कितनी शाबाशी, कितना धन्यवाद, कितना प्यार दूँ मेरे प्यारों को बताओ ?
ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ.......... हाँ...हाँ...हाँ...हाँ ।
धन्या माता ...पिता धन्यो गोत्रं धन्यं .....
धन्या च वसुधा .......यत्र स्यात गुरुभक्ततः....।।
01/01/2020
08/10/2019
May this Dussehra all your worries are over.
Happy Dussehra!
26/03/2018
OM Graphics Get the 1st Award - Best Vendors Award 2018 !!
23/03/2016
OMGraphics Wishes you Happy Holi...
23/03/2016
OMGraphics Wishes you Happy Holi...
31/12/2015
Happy New Year and Cheers, to 2016
31/12/2013
Wishing you an eventful new year,
replete with great achievements & experiences!
01/11/2013
Deepawali ki bahut-bahut Shubh kaamnayein........
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