Aniket

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���कलमकार��� कविता नही भावना लिखता हूँ।

20/10/2023

किसकी मौत पर शोक मनाऊं,
किसके जन्म की खुशी मनाऊं।
काल चक्र की गति को समझो,
सब कुछ मायाजाल यहां पर।

जीवन पथ है पथिक है मानव।
मृत्यु, द्वार है नव जीवन का।।

@अनिकेत दुबे "गुरुजी"

19/08/2023

शशि श्याम रजनी के साथ साथ घूमता है
घूम घूम ढूंढता है धरती पर चांदनी

स्वर घूमे ताल पर थिरकन की चाल पर
गीतकार ढूंढे जैसे गीतों में रागनी

वन वन विचर कर तिल तिल मर कर
ढूंढे मणि जैसे कोई विचलित नागनी

ढूंढता है तुमको पण्डित भी ऐसे ही
भाग्य को ढूंढे जैसे कोई अभागनी

13/08/2023

कविता "राम पुनः रण क्षेत्र पधारो" का एक अंश

अक्षरजननी बनी कालिका, मानस राम समाए है।
हमने सदा विजय श्री पाई गीत क्रांति के गाए है।।
हम भगत सुभाष के सपने है गांधी की बिनाई है।
हम गुरुदेव के जन गण मन, बच्चन की रुबाई है।।
करते है करबद्ध निवेदन प्रभु हो प्रकट कल्याण करो।
हे राम पुनः रण क्षेत्र पधारो, पुनः शस्त्र संधान करो।।

@अनिकेत दुबे "गुरुजी"

#हिंदी #कविता 'sclub

05/08/2023

हम तुम्हें खोजते,
नही तो करते क्या ?
हमने जाना तभी
ज्यों तुमसे मिलना हुआ
कि हृदय के किसी
कौने में जीवित है
प्रेम।

30/07/2023

Not all the time but when you are with me, I am the strongest person.

23/07/2023

स्वयं की तलाश है।
निज प्राण की आहुतियां चल रही निज प्राण में
सुख समूचे है समिधा, होम है लोचन का जल

रथ व्यथा का मैं लिए और सारथी है स्वप्न सब
ढूंढने निकला हूं मैं तुमको अखिल ब्रह्मांड में

@अनिकेत दुबे "गुरुजी"

06/07/2023

बसंत के संयोग से लेकर
पतझड़ के वियोग तक
का क़िस्सा है बरसात का मौसम
गौर करो तो पाओगे
कितनी वेदना है गरजने है
तड़कती हुई दामिनी
उदाहरण है टूटते
संबंध की
कभी झर लगाकर
बरसने लगती है
जैसे बरस रहे हो
किसी वियोगी के नैन
कभी बरसती है रुक रुक कर
जैसे छुपा रही हो अपनी पीड़ा
पर नयन छलकजाते है
नदियां उफान पर होती है
जैसे वेदना की बाढ़ आ ही गई हो।
बढ़ने लगता है जलाशयों का स्तर
जैसे बढ़ती है पीड़ा धीरे धीरे।
ये बरसात प्रेम में वियोग की
पहचान है।
जो बताती है प्रेम में वियोग
की कहानी
और बरसने लगती है नयन से।
टप टप टप

@अनिकेत दुबे "गुरुजी"

21/06/2023

भाल चंदन सोहे अभिमान है,
शिखा बामन को होए विधान है।

17/06/2023

आदिगुरु भगवान शंकर के आदेश पर माता शारदा एवम् जगतपिता भगवान भूतनाथ की सेवा की सेवा के अत्यंत मंगल अवसर पर आप सभी सादर आमंत्रित है के अनावरण समारोह में यह संस्था गुडवर्क का अहोभाग्या है की संस्था अब भगवती माई की सेवा में लग गई है, एक संस्थापक एवम् अध्यक्ष के रूप में इससे गर्व की क्या बात हो सकती है की स्वयं बाबा महाकाल एवम् माता भगवती की सेवा का नित्य अवसर मिले।







vikashshukl

05/06/2023

ये आंखों बंजर हो गई,  ख़्वाब संजोए जो हमनें,
भरी बरसात में भी हम, बूंद बूंद पानी को तरसे।

02/06/2023
01/06/2023

गिराने में लगे है लोग जो,
वो ऊंचाई तले दब जाएंगे।

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