Hindi Story

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06/06/2025

सरकारी नोकरी वाली मेडम को चोद डाला

दोस्तो, मेरा नाम अवधेश कश्यप है. मैं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर का निवासी हूं.

सबसे पहले तो गीली चूत वाली कमसिन लड़कियों आंटियों और भाभियों को मेरे खड़े लंड का सादर प्रणाम!

मेरे प्यारे भाईयो, मेरे जैसे काले मोटे लंड वाले भाइयों को मुठ मारने की दावत और मेरे हथियार की तरफ से तुम सभी को लंडवत प्रणाम.

ये ऑफिसर सेक्स कहानी उन दिनों की है जब मैं कोई भी काम नहीं करता था और काम की तलाश में इधर-उधर भटकता रहता था.
मेरी उम्र लगभग उस समय 19 साल की रही होगी.

इसी बीच मेरी मुलाकात एक सामाजिक कार्यकर्ता से हुई.
उसने कहा- कि आप मेरे साथ सामाजिक हित में सामाजिक कार्य कीजिए. इसी के साथ मैं आपको अच्छी आमदनी भी कराता रहूंगा.

मैं उस आदमी के साथ सामाजिक कार्य करने में लग गया.

एक दिन की बात है, मैं कुछ काम से अपने नजदीकी ब्लॉक में किसी का काम कराने गया था.
उस समय पंचायत चुनाव का काम चल रहा था इसलिए ब्लॉक के सारे अधिकारी पंचायत चुनाव के काम में व्यस्त थे.

ब्लॉक में एक अधिकारी थी ताहिरा … जो बहुत ही गजब की खूबसूरत और मस्त चूचियों की मालकिन थी.

मैं उसे देखते ही मन ही मन सोचने लगा काश इसकी चूत मुझे चोदने मिल जाती तो मजा आ जाता.

उसके बारे में सभी को मालूम था कि ये पक्की छिनाल औरत है. किसी का भी लंड अपनी चूत गांड में ले लेती है.

मैं लोगों की लाइन में खड़ा यही सब सोच रहा था कि मुझे पता ही नहीं लगा कि मेरा नंबर कब आ गया.
मैं खड़ा रहा.

मैडम कुछ काम में बिजी थी.
जब मैडम का काम हो गया, तो मैडम ने मेरी तरफ देखा और बोली- क्या काम है … जल्दी बोलो?

लेकिन मैं तो उसकी चुदाई के ख्वाब में मस्त था. मैं उसे रंगीन ख्वाबों में देख रहा था.
मेरे मुँह से आवाज ही नहीं निकल सकी.

ऑफिसर मैडम ने फिर मुझे टोका- जल्दी बोलें.
अब मैं मैडम की तरफ झुका और मैंने उनके सामने अपने पेपर रख दिए.

मैंने कहा- इन पर आपके हस्ताक्षर कराने हैं.
मैडम बोली- मैं इतनी देर से आपको बुला रही हूं, आपको सुनाई नहीं देता क्या?

मैं बोला- नहीं, ऐसी बात नहीं है. मैं कुछ सोच रहा था.
मैडम ने मेरे पेपर अपने पास रख लिए और बोली- शाम को 4:00 बजे ले जाना.

ठीक 4:00 बजे मैं ब्लॉक में पहुंच गया तो मैडम कुछ काम में बिजी थी.
मैं मैडम के सामने खड़ा हो गया.

ऑफिसर मैडम ने मेरी तरफ देखा और हम्म कहा.
मैंने कहा- मेरे पेपर दे दो.

मैडम ने कहा- अच्छा वो … कुछ समय ठहरो देती हूं.
मुझे वहां बैठे लगभग आधा घंटा हो चुका था.

मैंने मैडम से फिर से कहा- मैडम मेरे पेपर दे दो.
मैडम ने मेरी तरफ देखा और बोली- तुझे बड़ी जल्दी है?

मैंने कहा- हां मैडम जल्दी है.
वो बोली- किस बात की जल्दी है?

मैंने कहा- घर जाना है.
वो बोली- घर पर क्या तेरी बीवी तेरा इंतजार कर रही है?

मैंने कहा- अभी मेरी शादी नहीं हुई है.
मैडम मुस्कुरा दी और बोली- काम कराने के लिए कुछ लाया है.

मैंने कहा- क्या लाना था?
मैडम चटक गई और बोली- साले हाथ भर का हथियार लिए घूम रहा है और तुझे मालूम नहीं है कि क्या लाना पड़ता है.

मैंने अपने हथियार पर हाथ फेरा और कहा- आपको मैं क्या दे सकता हूँ.
मैडम को मेरी मासूमियत पर हंसी आ गई.

वो धीरे से बोली- अपने हथियार से मेरी गांड मार सकता है!
मैं शान्ति से बोला- हां मैडम, मैं गांड भी बड़ी आसानी से मार लेता हूं. आप जब चाहें बता दीजिएगा.

मैडम हंस पड़ी और बोली- साले इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी बात कर रहा है?
मैं बोला- मैडम आप मौका तो दो.

मैडम मेरे लंड को घूरती हुई बोली- ठीक है … कल 4:00 बजे आ जाना.
मैं घर गया और रात भर मैडम के ख्यालों में खोया रहा.

पूरी रात में मैंने चार बार मुठ मारी.
लंड से 4 बार पानी गिराने के बाद मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि मुझसे चला भी नहीं जा रहा था.

फिर भी मैं अगले दिन 4:00 बजे का इंतजार करता रहा.
जैसे ही 4:00 बजे का टाइम हुआ, मैं ब्लॉक में पहुंच गया.

मैडम के कमरे में कोई नहीं था. मैडम अकेली ही बैठी कुछ लिख रही थी.

मुझे देखते ही मैडम खड़ी हो गई और बोली- अन्दर आ जाओ.

मैं अन्दर आ गया.
मैडम ने मुझसे मेरा नाम पूछा.

मैंने बताया- मेरा नाम अवधेश है.
मैडम बोली- शिट … कितना पुराना नाम है तुम्हारा … आज मैं तुम्हारा नाम दूसरा रख देती हूँ. आज से तुम्हारा नाम विपुल है.

मैंने कहा- कोई बात नहीं मैडम … नाम में क्या रखा है. आप मिल जाओ तो मैं यह शहर गांव सब छोड़ दूंगा. आपकी मस्त सेवा करूंगा.
वो बोली- क्या क्या सेवा कर लेता है?

मैंने कहा- आपकी चूत चुदाई और गांड मारने का काम तो करता ही हूँ … बाकी आप जिसकी भी लेने की कहोगी, उसकी भी चोद दूँगा.
मैडम बोली- हूँ … बातें अच्छी कर लेते हो.

मैं बोला- सिर्फ बातें नहीं, मैं सब कुछ अच्छा कर लेता हूं.
मैडम की निगाहें मेरे उभरे हुए पैंट पर थीं, जो कि मेरे पैंट के अन्दर से झांकते हुए लंड को देख रही थीं.

मेरी भी निगाह मैडम की चूची से हट नहीं रही थी. मैं मैडम की दूधघाटी को बार-बार ताके जा रहा था.

मैडम बोली- क्या मुझे देखते ही रहोगे या मुझे भी कुछ दिखाओगे?
मैं बोला- क्या देखना है आपको?

मैडम बोली- मुझे तेरा चेतक देखना है.
मुझे चेतक शब्द सुनकर बहुत हंसी आई.

मैडम बोली- हंस क्यों रहे हो?
मैंने कहा- आपके शब्दों पर.

मैडम बोली- मुझे तुम्हारे चेतक पर सवार होना है.
बस फिर क्या था.

मैंने मैडम की पजामी के ऊपर से ही उनकी चूत पर हाथ फिराना चालू कर दिया, एक उंगली से उनकी चूत के दाने को रगड़ना शुरू कर दिया.

मैडम कराह उठी और बोली- मेरे प्यारे चेतक के मालिक … जल्दी से अपना चेतक मेरे हवाले कर दो. मैं इस पर बैठकर चांद की सैर करने जाऊंगी.

मैंने कहा- ओके मैडम जी, मेरे इस चेतक पर अब आप ही का अधिकार है.
मैडम बोली- प्यारे जानू, कमरे का दरवाजा बंद कर दो.

मैंने ऑफिस का गेट बंद कर दिया और मैडम अपनी टेबल पर बैठ गई.

वो मुझसे बोली- अपना चेतक बाहर निकालो.
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और मैडम के हाथ में दे दिया.

मैडम ने मेरे प्यार से सहलाया. वो मेरे लंड को मुँह में लेना चाहती थी पर ले नहीं पा रही थी.
मैंने मैडम का सर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर और अपने लंड के ऊपर रख दिया.

पहले तो मैडम ने ना कहा, फिर मेरे लंड का सुपारा मुँह अपने मुँह में डाल लिया और मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया.
मैडम मेरे लंड को चूसे जा रही थी और मैं कामोत्तेजना के चरम को पहली बार महसूस कर रहा था.

मैडम मेरे लंड को जोर-जोर चूस रही थी, मेरे हाथ मैडम के सर पर रखे थे.
मैं उसके मुँह को बार-बार अपने लंड में आगे पीछे कर रहा था.

मैडम मेरे अंडकोष को बार-बार अपने दोनों कोमल कोमल हाथों से सहला रही थी.

इस बीच मैं भी अपनी दो उंगलियों को मैडम की पजामी के ऊपर से ही चूत के ऊपर फेर रहा था.

मैडम की रसीली चूत से पानी निकल रहा था.
उस पानी के कारण मैडम की पजामी तक भीग गई थी.

फिर मैडम खड़ी हुई और अपनी टेबल पर लेट गई.
वो मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.

मैं समझ गया कि मैडम अपनी चूत को मुझसे चटवाना चाहती है.

तो मैं खड़ा हुआ और मैंने मैडम की पजामी को उतारकर फेंक दिया.

मैं मैडम की चूत को चाटने लगा और मैडम के दाने को रगड़ रगड़ कर मैंने लाल कर दिया.

इसी बीच मैडम की चूत से पानी निकलने लगा.
मैं मैडम का सारा पानी पी गया.

फिर मैंने मैडम को उसी टेबल पर सीधा लिटा दिया और अपने लंड पर टोपा उसकी चूत पर रगड़ने लगा.

मैडम आह उह की आवाज निकालने लगी और बोली- अब घुसेड़ भी दो मेरी जान … जल्दी से मेरी बुर का भोसड़ा बना दो.
मैंने कहा- मेरी जान चिंता मत करो; आज मैं तुम्हारी बुर में घुस जाऊंगा और तुम्हारी बुर को फाड़ दूंगा.

अब मैंने मैडम की चूत पर धीरे से धक्का लगाया.
मैडम मोटा लंड लेते ही चिल्ला उठी.

थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने जोरदार शॉट लगाया और पूरा का पूरा लंड नंगी चूत में समा गया.
कुछ देर रुकने के बाद मैंने धक्के लगाने शुरू कर दिए.

मैं मैडम की चूत में धक्के लगा रहा था और मैडम गांड उठा उठा कर लंड का स्वागत कर रही थी.

मैडम- आह उफ़ ओह डार्लिंग और अन्दर घुसा दो … मेरी छोटी चूत को चौड़ा कर दो … आह इसका भोसड़ा बना दो.
मैं- हां मेरी जान, मैं तुम्हारी चूत को फाड़ दूंगा … मेरा भूखा लंड तुम्हारी चूत का प्यासा है.

मैडम- आंह … मेरी गांड में भी घुसाओ अपना मोटा लंड.
मैं- हां मेरी जान … मैं तुम्हारी गांड भी मारूंगा.

कुछ देर बाद मैंने एक झटके से मैडम की चूत से अपना मोटा लंड निकालकर उनकी गांड के छेद पर सैट कर दिया.
फिर धीरे से धक्का मारा तो मैडम की मां चुद गई और उसकी चीख निकलने लगी.

मैंने झट से मैडम की मुँह पर अपना हाथ रखा और उनकी चीख दबा दी.
मैडम बोली- आंह मेरी फट रही है … धीरे धीरे से करो.

मैडम को थोड़ा आराम मिलने के बाद मैंने फिर से एक जोरदार झटका दे दिया.
इस बार मेरा पूरा का पूरा लंड मैडम की गांड में समा गया.

मैडम फिर से चिल्ला उठी.
मगर उसके मुँह पर मेरा हाथ लगा था तो मैडम की आवाज घुट कर रह गई.
मैडम जी आंखों से आंसू आ गए.

मैंने कहा- बस जरा देर का दर्द सह लो मेरी जान … फिर गांड में मीठा मजा आएगा.
मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और बाद में झटके देने लगा.
अब मैडम मस्ती में अपनी मोटी गांड को मेरे लंड पर एक फुटबॉल की तरह उछालने लगी थी.

मैंने मैडम को सीधा किया और उसकी चूट पर ऐसे टूट पड़ा मानो कितने दिनों से प्यासा था.
मैं मैडम की चूत में लगातार धक्के लगा रहा था.

कुछ देर बाद मैडम अकड़ गई, मैं समझ गया कि मैडम का पानी निकलने को है.

मैंने उसे पेलना तेज कर दिया और मैडम झड़ गई.
इस चुदाई में मैडम अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी.

दस मिनट बाद मेरा भी पानी निकलने वाला था. मैंने मैडम से पूछा- कहां निकालूं?
मैडम बोली- मेरे मुँह में छोड़ो.

मैडम ने मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
मेरे लंड ने मैडम के मुँह में पिचकारी छोड़ दी और मैडम का पूरा मुँह मेरे वीर्य से भर गया.

फिर हम दोनों ने एक दूसरे को साफ़ किया और मैं अपने घर आ गया.

ऑफिस की जूनियर चुदी उसके फ्लेट में - Office junior fu**ed in her flat 06/06/2025

ऑफिस की जूनियर चुदी उसके फ्लेट में - Office junior fu**ed in her flat अनसुनी कहानियां रोमांस, साहसिकता, रहस्य और नैतिक कहानियों का समृद्ध संग्रह,जो सभी उम्र के पाठकों के लिए उपयुक्त है...

ऑफिस की नयी माल की पार्किंग लोट में चुदाई - Fu***ng the new office girl in the parking lot 06/06/2025

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06/06/2025

अंकल जी ने चोद दिया ऑफिस में

मेरा फिगर 40-34-42 है. मेरी ऊंचाई 5.5 इंच है और वजन थोड़ा ज्यादा होने के कारण मेरा शरीर काफी गदराया हुआ दिखता है.
केवल मेरे मम्मे देखकर ही काफी आदमियों का पैंट में ही पानी निकल चुका है.

यह हॉट कॉलेज गर्ल अंकल सेक्स कहानी उस वक्त की है जब मैं अपनी पढ़ाई के लिए कॉलेज के हॉस्टल में रहा करती थी.
वहा मैंने काफी लड़कों से चुदवाया था.

मैंने अपने कॉलेज के कई सारे गार्ड्स से भी चुदवा रखा था.
और इसलिए वो लोग भी मुझे कॉलेज में ब्रा में नहीं आने देते थे.
ताकि जब भी चांस मिले वो मेरे तरबूज दबा कर आनंद ले सकें.
और मुझे भी ब्रा पहनना कभी अच्छा नहीं लगता था.

कॉलेज होने की वजह से कई जगह कैपंस के लिए भी जाना पड़ता था.
यह कहानी ऐसे ही एक हॉट कॉलेज गर्ल के कैंप से लौटने के वक्त की है.

सुबह अपने हॉस्टल से तयार होकर हम सब लोग कैंप की जगह जाने के लिए बस स्टॉप पर इकट्ठा हुए व बस का इंतजार करने लगे.

थोड़ी देर में वहाँ बस आई और हम बस में बैठकर कैंप वाले जगह पर जाने लगे.
3 घंटे का रास्ता था पर हम वहा आराम से पहुँच गए और कैंप शुरू हुआ.

कैंप करते वक्त मुझे वहा एक लड़का मिला जो वहा कैंप की सारी तैयारियां देख रहा था.
वो बार बार हमें चाय नाश्ते के लिए पूछ रहा था.

मुझे वो लड़का काफी पसंद आया था और उसे देखकर मेरे चूत में खुजली होने लगी थी.
वो लड़का काफी हैंडसम ऊंचा था और उसने बॉडी बनाई हुई थी.

मैंने उस कैंप वाले लड़के से उसी के घर पर चुदवाया.
कैंप वाले लड़के से चुदाई की कहानी मैं अलग से बाद में लिखूँगी.

इस लड़के से चोदते चोदते कब शाम हो गई, पता ही नहीं चला.
मैं जैसे तैसे सामान बांधकर जाने लगी और कैंप वाली जगह पर जाकर देखा तो सब बंद हो गया था और सब जा चुके थे.

मैंने अपने दोस्तों को कॉल करना चाहा तो पता चला कि मेरे मोबाइल में कुछ भी सिगनल नहीं है जिसके कारण कोई मुझे कॉन्टैक्ट नहीं कर पाया होगा और मेरे बिना ही चले गए होंगे.

इस सारी पंचायत में अंधेरा हो गया था.
अब उस लड़के ने मुझे वापस जाने के लिए बस में बिठा दिया.

मुझे खिड़की वाली सीट मिल गई और मैंने अपना सारा सामान एडजस्ट करके वहां बैठ गईं.

मेरी बाजू वाली सीट खाली थी तो वहा एक अंकल जी आकर बैठ गए.
अंकल दिखने में एकदम दुबले पतले आदमी थे.

बैठे बैठे हमारी बातें शुरू हो गई और बातों बातों में पता चला कि उनको भी उसी शहर जाना है जहाँ मुझे जाना है.

इधर उधर की बातें करते करते बस में काफी अंधेरा हो गया था और बस की लाइट्स भी बंद थी.

तो मैं अपने मोबाइल में कोरियन सीरीज लगाकर देखने लग गई.
कुछ देर बाद उन अंकल ने कहा- मैं ऐसे अकेले बोर हो रहा हूँ, तुम जो देख रही हो वो मुझे भी दिखाओ.

मैंने एक हेडफोन निकालकर अंकल को दे दिया.
अब हम दोनों सीरीज देखने लग गए.

उस बस की सीटें छोटी थी तो अंकल और मेरे बदन एक दूसरे को छू रहे थे.

उस छुअन से मैं गर्म हो रही थी और शायद अंकल भी!
मैं उनके बदन से सटी हुई थी, उनके हाथ से मेरा हाथ लग रहा था.

और अचानक उन्होंने अपना हाथ मेरे हाथ पर फिराना शुरू कर दिया.
मुझे अच्छा लग रहा था तो मैंने मना नहीं की.

उससे उनकी हिम्मत बढ़ी और वो मेरे बड़े बड़े मम्मों को अपनी कोहनी से दबाने लगे.
और चूंकि मैं ब्रा नहीं पहनती, उन्हें इस बात का पता चल गया; वो अपनी कोहनी से और जोर जोर से मेरे मम्मे दबाने लगाने.

मैंने स्लीवलेस और गहरे गले का टॉप पहना था.
उन्होंने पहले शर्ट के ऊपर से ही मेरे मम्मे हाथ में लिए.
मेरा खरबूजा उनके एक हाथ में पूरा नहीं आ रहा था, फिर भी उन्होंने कस के मसल दिया.

मैं कराह उठी.
पर बस में होने के कारण किसी ने गौर नहीं किया.

यह देख कर उनकी हिम्मत और बढ़ गई और वो एक मम्मे को एक हाथ में और दूसरा अपने मुंह में लेकर चूसने लगे.
मैं अभी तक बहुत गर्म हो चुकी थी.

उन्होंने मेरा एक हाथ लेकर अपने पैंट के ऊपर रख लिया.
उनकी पैंट में बना तंबू देखकर में गीली होने लगी और अपना दूसरा हाथ मैंने अपने पैंट में डालकर मेरी चूत को सहलाने लगी.

यह देखकर अंकल जी को और जोश आया और वो मेरा चूचा छोड़कर मेरी चूत पर टूट पड़े.

उन्होंने एकदम से मेरी चूत में उंगली डाली तो मैं और गीली होने लगी.
वो वैसे ही मेरी चूत में उंगली अंदर बाहर कर के मुझे मजा दे रहे थे.
कभी 2 कभी 3 कभी 4 उंगली डालकर वो मुझे उंगलियों से चोद रहे थे.
और साथ ही मेरे मम्मे भी मसल रहे थे, चूस भी रहे थे.

इतने में कोई बस स्टॉप आया और कंडक्टर जोर से चिल्लाते हुए लाइट लगाने के लिए बढ़ने लगा.
हम एक दूसरे से अलग होकर बैठ गए.
उनका स्टॉप मेरे स्टॉप से पहले था.

जगह के कमी के वजह कुछ न कर पाने से उन अंकल ने अपना विजिटिंग कार्ड मुझे दिया और चोदने की इच्छा जाहिर करके अपने ऑफिस में बुलाया.
फिर वे अगले ही स्टॉप पर उतर गए.

मैंने उनका कार्ड तो ले लिया पर मुझे मौका कब मिलेगा ये सोचते सोचते मेरा स्टॉप आ गया और मैं उतर गई.

इसके बाद कॉलेज में शिक्षकों और गार्ड्स से चुदवाते चुदवाते मैं इस घटना के बारे में भूल गई.

मुझे अगली बार जब फिर कैंप के लिए जाना पड़ा. तब अचानक से मुझे उन अंकल की याद आई और मैंने उनका नंबर घुमाया.

वो उनकी ऑफिस का था.
उनकी सेक्रेटरी ने फोन उठाया- हेलो, विराज आर्किटेक्ट्स! जी मैं आपकी कैसे मदद कर सकती हूँ?
मैं- क्या मैं देवेन जी से बात कर सकती हूं?

सेक्रेटरी- सर अभी जरूरी मीटिंग में हैं. अगर कुछ मैसेज हो तो आप यहां छोड़ सकती हैं.
मैं- नहीं शुक्रिया. कब तक फ्री होंगे देवेन जी?
सेक्रेटरी- आधे घंटे में सर फ्री हो जायेंगे.
मैं- ठीक है. वो जैसे ही फ्री होते हैं, आप मुझे तुरंत कॉल करिए प्लीज!

सेक्रेटरी- ओके ठीक है … आपका नाम?
मैं- मिस मधु … उनसे कहिए कि नागपुर से लौटते हुए बस में की हुई डील के बारे में बात करनी है.

कॉल होने के बाद मैं उनके कॉल का वेट कर रही थी.
और वेट करते करते मुझे कब नींद लग गई पता ही नहीं चला.

काफी देर बाद जब नींद खुली तो देखा कि मेरे मोबाइल पर देवेन जी के काफी सारे मैसेजेस और मिस्ड कॉल्स हैं.
मैंने तुरंत उन्हे ऑफिस के नंबर पर कॉल किया.

यह कॉल देवेन जी ने उठाया.
मैंने अपना परिचय दिया- हेलो देवेन जी.
देवेन- अरे डार्लिंग, तुम कहां थी? कब से तुम्हारी कॉल का इंतजार कर रहा था मैं!

मैं- मिस्टर देवेन, बस आप ही के बारे में सोच कर अपनी चूत को उंगली किए जा रही थी. क्या मुझे चोदने का ऑफर अभी भी चालू है?

देवेन- अरे मेरी रानी, तुम्हें चोदने के लिए तो कब से बेताब हूं. तुम्हारे नर्म नर्म मम्मे जोर जोर से दबाना चाहता हूं. तुम्हारी चूत में अपना लौड़ा देकर जमकर चोदना चाहता हूँ.
तुम्हारे रसीले होठों से मेरा लौड़ा चुसवाना भी चाहता हूं. बोलो डार्लिंग कब मिलोगी?

मैं- आज मिलें? वैसे भी मुझे चुदे काफी समय हो गया है.
देवेन- ठीक है, मेरे ऑफिस में आ जाओ. 10 बजे तक मेरी एक मीटिंग है. उसके बाद हम खूब मजे करेंगे. तुम 10 बजे तक मेरी ऑफिस में पहुंच जाना. मैं तुम्हें लेने के लिए तुम्हारे हॉस्टल पर कार भेज दूंगा.
मैं- ओके देवेन जी, मिलते हैं रात में!

अब चूंकि मैं हॉस्टल में रहती थी, मुझे रात में बाहर रहने में कोई आपत्ति नहीं थी.
और साथ ही मैंने अपने रूम मेट को इस बारे में बता दिया था तो किसी भी चीज की कोई दिक्कत नहीं थी.

मैं रात को मस्त सेक्सी सा लाल रंग का टॉप और ब्लैक स्कर्ट पहनकर तैयार हो गई और कार का इंतजार करने लगी.
समय काटने के लिए फोन चलाने लगी.

थोड़ी देर में गाड़ी आ गई और मैं उसमें बैठकर अंकल के ऑफिस के तरफ जाने लगी.
उस गाड़ी का ड्राइवर कुछ 30 साल का होगा.

आदत से मजबूर कहो या चुदने ही जा रही थी इस कारण बोलो मैंने अपनी ब्रा नहीं पहनी थी.
रास्ते में गड्ढे होने के कारण गाड़ी बहुत उछल रही थी. उसी के साथ मेरे मम्मे भी उछल कूद कर रहे थे.

और इतने बड़े तरबूजों की उछलकूद को भला कौन नजरंदाज कर सकता था?
वो मुझे हवस भरी नजरो से देखने लगा.

अपनी किसी अन्य कहानी में लिखूंगी कि कैसे अंकल से चुदने जाते जाते गाड़ी में ही चुद गई लेकिन अभी इसी कहानी को आगे बढ़ाते हैं.

तो 2 बार चोदने के बाद ड्राइवर भैया ने मुझे अंकल के ऑफिस के बाहर छोड़ दिया और मुझे सुबह वापस ले जाने के लिए आने का वादा करके चले गये.

अब मैं अंकल के ऑफिस में पहुंच गई.
मैं वक्त से पहले वहा पहुंच गई थी.
देखा तो वहा कोई नहीं था.

पर केवल एक कमरे की लाइट्स जल रही थी और वहा से कुछ बातों की आवाजें भी आ रही थी.

मैंने सोचा क्यों न यूं ही झांक कर देखा जाए कि क्या हो रहा है?
जैसे ही मैंने उस कमरे में देखा तो मेरे अंदर करेंट सा दौड़ गया.

अंकल की सेक्रेटरी उनके कॉन्फ्रेंस टेबल पर पैर फैलाकर बैठी थी और अंकल उसकी चूत चाट रहे थे.

एक और उन्ही के उम्र के आदमी उसके मम्मे मसल रहे थे और उसे किस भी कर रहे थे.
मुझे भी काफी मजा आने लगा और मैं अनजाने में अपने स्कर्ट को उठाकर अपनी चूत को घिसने लगी और उसमे उंगली डालने लगी.

क्या मस्त चूत थी उसकी … और क्या मस्त चूस रहे थे अंकल उसकी चूत को.
वो सेक्रेटरी ‘आआ ह्हह मेरे राजा … चूसो इसे … इसका पूरा पानी निकल दो … आह्ह्ह्ह …’ करके सिसकार रही थी और अंकल मजे में उसे चूसे जा रहे थे.

दूसरे अंकल उसके मम्मे दबा कर उसका दूध पी रहे थे.

इधर मेरी हालत खराब हो गई थी.

और उधर वो सेक्रेटरी भी निहाल होने को थी.
तो मैंने अपने आप को ठंडा करके वहाँ से जाना ठीक समझा.

मैं वाशरूम गई.
वहाँ अपने आप को ठीक किया और अंकल को कॉल किया- हेलो देवेन जी, मैं आपके ऑफिस में आ गई हूं. मुझे कहां आना है?
देवेन- तुम रिसेप्शन में वेट करो. मीटिंग अभी बस थोड़े देर में खत्म हो जायेगी.
मैं- ठीक है जल्दी आइए, मैं आपका इंतजार कर रही हूं.
देवेन- ठीक है.

अंदर हो रही मीटिंग के बारे में सोच कर मेरी चूत गीली हो रही थी तो मैं उंगली डालकर उसे सहला रही थी और वहा पड़ी मैगजीन उठाकर पढ़ने लगी.

थोड़ी देर बाद वो सब लोग वहाँ से निकले.
अंकल मेरे पास आए और बोले- ये मेरे जर्मनी के क्लायंट हैं. इन्हें बाहर तक छोड़ कर आता हूं, तब तक तुम कॉन्फ्रेंस रूम में वेट करो.
मैं वहाँ जाकर अंकल का इंतजार करने लगी.

10 मिनट बाद वो अंकल आए और आते ही अपना लौड़ा दिखाने लगे.
उनका लौड़ा काफी सख्त हो चुका था.
वे बोले- देखो इसे क्या हो गया है. तुम्हें देखकर बिलकुल बैठ ही नहीं रहा है.

यह सुनकर मैं उनके लन्ड पर लपक पड़ी और भूखे की तरह उसे चूसने लगी.
अंकल के मुंह से सिसकारियां छूटने लगी- हाए मेरी रानी … क्या मस्त लन्ड चूसती हो तुम! आआअ ह्ह्ह मजा आ गया. और जोर से चूसो इसे, चूस कर सारी मस्ती निकल दो इसकी! आआह ह्ह मेरी रानी … क्या मजा आ रहा है उह्ह उम्मम्म!

कहते ही जोर से पिचकारी मेरे मुंह में छोड़ दी.
मैं पूरा पानी पी गई.

अब उन्होंने मुझे उस टेबल पर बिठाया और मुझे किस करने लगे.
हम दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे.

साथ ही अंकल मेरे मम्मे भी दबाने लगे.
उन्होंने मेरे कपड़े उतार कर एक कोने में फेंक दिए और मुझे फिर से चूमने लगे.

मैं भी एक हाथ से अंकल का लन्ड ऊपर नीचे कर रही थी और उनका साथ दे रही थी.

अब तक मैं बहुत गर्म हो चुकी थी और अब मुझे मेरी चूत में लन्ड चाहिए था.
मैंने अंकल से कहा- प्लीज, मेरी चूत चोद दो आज! ओ मेरे अंकल जी … तुम्हारी इस प्यासी रण्डी की चूत की प्यास बुझा दो.

पर अंकल को मुझे छेड़ने में मजा आ रहा था; बोले- चुप कर रण्डी … साली इतने लोगों से अपनी चूत चुदवाती है … फिर भी प्यास नहीं बुझती तेरी? कितने लौड़े चाहिए तुझे प्यास बुझाने को? ले साली चूस इसे, चूस चूस कर पहले गीला कर!

और मेरे मुंह में अपना लन्ड पेल दिया.
मैं उसे फिर चूसने लगी.
अंकल आहें भरे जा रहे थे और मेरा सिर अपने लौड़े पर दबाते जा रहे थे.

फिर उन्होंने अपना लन्ड निकाला, मुझे टेबल पर लिटाया, लन्ड मेरी चूत पर रखा और जोर से धक्का मार दिया.
मैं चिल्ला उठी.
उनका आधा ही लंड मेरी चूत में घुसा था.

उन्होंने मुझे किस करना शुरू किया और फिर से धक्का मारकर पूरा लौड़ा घुसा दिया.
मेरी आंखों से पानी निकल रहा था.

वो थोड़ी देर रुके और फिर धीरे धीरे अपना लन्ड अंदर बाहर करने लगे.
थोड़ी देर के बाद मुझे भी मजा आने लगा और मैं भी अपनी गांड उठा उठा कर उनका साथ देने लगी.

अंकल धीरे धीरे रफ्तार बढ़ा रहे थे.
मुझे इतने बड़े लन्ड की आदत नहीं थी तो मुझे बहुत मजा आने लगा था और अंकल भी खूब तबियत से मुझे चोद रहे थे मानो बरसों से किसी को चोदा न हो.

इस चुदाई में हमें सुबह हो गई थी. मैं सुबह तक 4 बार और अंकल सेक्स में 2 बार झड़ चुके थे.

अब ऑफिस के एम्पलाइज का आना भी शुरू होने वाला था तो हमने एक दूसरे को लंबी किस करते हुए विदा किया और फिर मिलने का वादा करके वहाँ से बाहर आ गई.

अंकल ने रात वाले ड्राइवर को कॉल करके बुलाया और उसके साथ मैं अपने हॉस्टल वापस चली गई.
मेरी उस दिन इतनी चुदाई हुई थी कि मैं रूम पर जाकर सो गई.

05/06/2025

हैलो, मेरा नाम शालू वर्मा है. मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ. मेरा स्कूल टाइम में ही एक ब्वॉयफ्रेंड बन गया था. हम दोनों अपने फ्रेंड्स के साथ पार्टी करते और बहुत बार रात को एक दूसरे के घर भी रहते. मेरे माता-पिता ने मुझे कभी इन चीजों के लिए मना नहीं किया.

मेरे फ्रेंड्स ग्रुप में लड़के-लड़कियां सभी दारू पीते थे लेकिन मैंने कभी ट्राय नहीं किया था.
मेरे ब्वॉयफ्रेंड के साथ मेरा शारिरिक संबंध भी हो चुका था. वह मुझसे अक्सर ही पैसे की मांग करता रहता तो मैं उसे दे भी देती थी.

एक बार पैसों को लेकर हमारा बहुत झगड़ा हुआ और हमारा ब्रेकअप हो गया.

कुछ समय बाद मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब के लिए दिल्ली आ गयी.
वहीं मुझे एक लड़का भा गया. उसका नाम अमित था. हम दोनों में बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी.

अमित मुझे एक दिन एक बार में ले गया और उधर उसने अपने लिए व्हिस्की मंगाई.
मैं तो पीती नहीं थी, फिर भी उसके कहने पर मैंने बियर पी ली.

अमित ने चार पैग पी लिए थे और उसे नशा हो गया था.
वो बहुत भावुक हो गया और नशे में उसने मुझे बताया कि जिस लड़की से उसका रिलेशनशिप था, उसके मां-बाप ने उसकी शादी कहीं और कर दी थी.

मैंने अमित को सांत्वना दी और उसके साथ ऐसे व्यवहार किया, जिससे उसे मुझमें अपनी प्रेमिका दिखाई देने लगी.
मुझे भी अमित पसंद था.

उस दिन के बाद से हम दोनों और भी खुल कर बात करने लगे.
उसे मैंने बता दिया था कि मेरा ब्वॉयफ्रेंड भी था, उससे मेरा झगड़ा हो गया था, जिस वजह से मेरा उससे ब्रेकअप हो गया था.

उसने मुझसे पूछा- क्या तुमने अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ सेक्स किया था?
मैंने उसे बताया कि हां किया है, लेकिन वो बस मुझे भोगना चाहता था. उसे मुझसे मुहब्बत थी ही नहीं. वो आकर सीधे मेरी सलवार खोल कर लग जाता था. मुझे उसके साथ सेक्स करने में कभी भी मज़ा नहीं आया.

उसने भी बताया कि मैंने भी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ तीन बार सेक्स किया था, लेकिन फिर हम दोनों ने और सेक्स न करने के लिए तय कर लिया था. मैंने अपनी गर्ल फ्रेंड के कहने पर कि शादी के बाद ही अच्छे से सेक्स करेंगे, ये फैसला कर लिया था.

अब मेरे और अमित के बीच जब ये सब बातें हुईं तो अमित और मैं एक दूसरे से मुहब्बत करने लगे क्योंकि हम दोनों ही चोट खाए हुए थे.

हमारे बीच प्रेम की बातें होने लगी थीं मगर अब तक हम दोनों ने एक दूसरे के साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाए थे; हालांकि मैं उससे चुदने के लिए मन बना चुकी थी.

एक दिन हम दोनों को कंपनी के काम से दो दिन के लिए हैदराबाद जाना पड़ा.
अमित ने हम दोनों के लिए एक ही रूम बुक कर दिया, मुझे कोई आपत्ति नहीं थी.

दिन में सारा काम निपटा कर हम घूमने निकले.

वापस आते समय अमित ने एक बोतल वोडका और सोडा की कुछ बोतलें ले लीं.
उसने कहा- आज तुम बियर नहीं वोडका ही पी लेना.

मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी बात से राजी हो गई.

हम दोनों होटल के अपने कमरे में आए और चिली चिकन आर्डर कर दिया.

आने के बाद मैं शॉवर लेने चली गई. मैंने नहा कर एक बेबीडॉल पहन ली थी और ये पारदर्शी नाइटी थी.

अमित ने मुझे देखा और वो मेरी खूबसूरत जवानी की तारीफ़ करने लगा.
मैंने उसे थैंक्स कहा और बोली- अब तुम नहा आओ, फिर ड्रिंक एन्जॉय करते हैं.

अब अमित भी नहा लिया और वो सिर्फ एक बॉक्सर पहन कर बाहर आ गया.
उसकी चौड़ी छाती देख कर मेरे दिल में हेनू हेनू होने लगा और चुत में चींटियां रेंगने लगी.

हम दोनों ने वोडका पीना शुरू कर दी.
पीते पीते हमें 10 बज गए. चूंकि खाना हमने पहले ही आर्डर कर दिया था.
जब तक खाना नहीं आ गया, हम दोनों पीते रहे.

तीन पैग पीने के बाद मुझे नशा होने लगा और मैं थोड़ा भावुक होने लगी.

उसने मेरे पहले ब्वॉयफ्रेंड के साथ बिताए पल की चर्चा छेड़ दी.
मैंने भी उसे अपने ब्वॉयफ्रेंड के बारे में सब बताना शुरू किया और रोने भी लगी.

उसने मेरी बांह सहलाते हुए कहा- शालू, पिछली बातें सब भूल जाओ और आगे की लाइफ एन्जॉय करो.
इतना कह कर उसने मुझे गले से लगा लिया और मुझे किस करने लगा.
मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया.

उसने मुझसे और पीने को कहा लेकिन तीन पैग के बाद तो मुझसे खड़ा भी नहीं रहा जा रहा था.
मैंने उसे मना किया तो वह मान गया.

अब मैं बिस्तर पर लेट चुकी थी और मुझे अलग सा ही अहसास हो रहा था.

उसने मेरे साथ लेट कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया और धीरे धीरे मेरी बेबी डॉल उतारने लगा.
मुझे अच्छा भी लग रहा था तो मैंने उसे इजाजत दे दी.

अब उसने मुझे अपनी तरफ घुमा कर मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

मुझे पहले पहल तो उसके होंठों का स्वाद कुछ अजीब सा लगा मगर एक गर्म मर्द के होंठों से जब मेरे होंठों को चूसा गया, तो मुझे बहुत ही आनन्द आने लगा.
मैं भी उसे पागलों की तरह चूमने लगी.

उसने मेरी ब्रा भी निकाल दी और मेरे स्तनों को चूसने लगा.
मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था. मैंने दोनों हाथों से उसके सिर को पकड़ लिया और मादक सिसकारियां भरने लगी.

फिर वो नीचे की तरफ बढ़ा और मेरी नाभि में अपनी जीभ घुमा कर चाटने लगा.
इससे मैं पागल होने लगी.

अब वो मेरी नाभि के छेद में अपनी जीभ की नोक से मुझे गर्म करने लगा था.
मैंने भी अपनी कमर उठा कर उससे अपनी नाभि को चूसने दे दी.

नीचे मैं एक पैंटी में थी, जो मेरी चूत के रस से भीग चुकी थी.
उसने मेरी पैंटी भी उतार दी और अपने होंठों को जैसे ही मेरी चूत पर रखा, मेरी आह निकल गयी.
वो लपालप मेरी चूत चाट रहा था और मेरा हाल बुरा होता जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मैंने उसे रोका और लेटने को बोला.

वो लेट गया तो मैंने एक ही बार में उसके बॉक्सर को उतार दिया.

उसे बिल्कुल नंगा करके मैं उसके निप्पलों को चूसने लगी.

मैं धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ी. फिर मैं बेड से नीचे उतर आई और घुटनों के बल बैठकर उसके लंड को हाथ में ले लिया.

उसका लंड बहुत कड़क हो गया था. कुछ देर बाद मैं अमित के लंड को मुँह से चूसने लगी. मैं उसके आंडों को भी चाटने लगी.
वो भी मादक सिसकारियां भरने लगा.

फिर मैंने उसकी गांड के छेद में उंगली की और उसी के साथ आंड चाटने लगी.
मैं अमित का पूरा लंड हलक तक लेने लगी थी.

उसके जिस्म की अकड़न बता रही थी कि उसे लंड चुसवाने में बेहद मजा आ रहा था.

वो मेरे सर पर हाथ रख कर कह रहा था- आह आह शालू … यू आर अमेजिंग डार्लिंग … आह सक माय टूल!

मैंने हाथ में उसका लंड पकड़ा और उसे ऊपर करके उसकी गांड के छेद को चाटने लगी.

फिर उसने मुझे खींचा और अपने ऊपर लिटा लिया.
कुछ ही पलों में हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए. वो मेरी चूत चाट रहा था और मैं उसका लंड चूस रही थी.

उसने मेरी गांड के छेद पर अपनी जीभ रखी, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए.

यूं ही दस मिनट तक हमने एक दूसरे के लंड चुत को चूस चाट कर बेहद गर्म कर दिया था.

मैंने उससे कहा- अब तुम मुझे चोद दो अमित मुझसे रहा नहीं जाता.

ये सुनकर उसने मुझे अपने नीचे लिटाया और लंड पर कंडोम चढ़ाकर धीरे धीरे मेरी चूत में लंड डालने लगा.
मेरी चूत तो इतनी गीली हो चुकी थी कि लंड अपने आप ही फिसल कर अन्दर जा रहा था.

मैंने काफी दिनों से लंड नहीं लिया था, तो मुझे अपनी चुत में हल्की हल्की जलन हो रही थी.

लेकिन कुछ ही देर में उसका लंड मुझे मजा देने लगा.

अब उसने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ा दी और मेरी चुत चुदाई के साथ मेरे स्तनों को चूसने लगा.

कभी अमित मेरे होंठों को चूसता, तो कभी मेरे स्तनों को चूसता. मुझे आज तक इतना मजा कभी नहीं आया था.

मैं आह आह करती रही.
मेरी कामुक आवाजों से वो उत्साहित होकर मेरी चूत फाड़ता रहा.

थोड़ी देर बाद उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा.
मैं झट से चौपाया बन गई और अपनी गांड हिलाने लगी.

अमित पीछे से मेरी चूत और गांड को चाटने लगा.
उसके बाद लंड को चूत पर सैट करके अमित ने एक जोरदार झटका दे मारा और एक बार में ही अपना पूरा लंड चुत के अन्दर ठांस दिया.
मेरी तो चीख ही निकल गयी.

फिर तो अमित के हर एक झटके पर मेरी चीख और आह निकलती रही और वो बेदर्दी से मुझे चोदता रहा.

इतनी देर में मैं दो बार झड़ चुकी थी.

करीब आधे घण्टे बाद उसने एक जोर की आह भरी और मेरी चुत में ही झड़ गया. उसके वीर्य से कंडोम भर गया था.

फिर अमित ने कंडोम निकाल कर डस्टबिन में फेंक दिया और हम दोनों नंगे ही लिपट कर लेट गए.

करीब बीस मिनट बाद उसने मुझसे कहा- शालू, एक बार और मजा दोगी?
मैंने कहा- मुझे खुद भी इच्छा हो रही है.

अब वो उठ कर बैठ गया और उसने एक पैग बना लिया, तो मैंने कहा- मेरे लिए भी बना दो.
वो बोला- एक में ही हम दोनों मजा लेंगे.

मैंने मुस्कुरा कर हां कर दी.

उसने घूंट भरा और मेरे होंठों को अपने होंठों से लगा लिया.

मैंने भी उसकी चाह समझ ली और अपने मुँह में उसके मुँह में भरा घूंट पी लिया.
फिर उसने मुझे इशारा किया तो मैंने घूंट भर कर उसी तरह से अमित को अपने मुँह से शराब पिला दी.

इस तरह से हम दोनों को ही मजा आने लगा था.
एक पैग के बाद दूसरा पैग भी इसी तरह से चला और अब उसने बोतल उठाई और मेरे मम्मों पर वोडका गिरा कर पीना शुरू कर दिया.

मैंने उसके हाथ से बोतल ले ली और उसे अपने दूध पर वोडका टपकाते हुए पिलाना शुरू कर दी.

फिर ऐसा ही उसने मेरी चुत के साथ किया.
मैं अपनी चुत पर वोडका टपकाती गई और वो मेरी चुत को चूसता गया.

अब मेरी बारी आ गई थी.

उसने मुझे घुटनों के बल बैठने के लिए कहा और अपने खड़े लौड़े पर वोडका टपकाई और मैंने अमित का नशीला लंड चूस कर वोडका का मजा लिया.

कुछ देर बाद मैंने अमित को धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और उसके ऊपर से चढ़ गई.
उसने मेरी कमर पकड़ ली और मैं अमित के लंड को पकड़ कर अपनी चुत में सैट करने लगी.

कुछ ही पलों बाद अमित का पूरा लंड मेरी चुत में घुस गया था. उसने मेरी चूचियां पकड़ लीं और नीचे से गांड उठा कर मुझे चोदना शुरू कर दिया.

मैं दस मिनट तक लौड़े की सवारी करती रही … फिर मैं झड़ गई, तो उसने मुझे अपने नीचे ले लिया और मेरी चुत को चोदते हुए आह आह की आवाजें निकालने लगा.

कुछ ही क्षण बाद उसके लंड का लावा मेरी चुत में निकल गया.

जब हम दोनों की सांसें थमी, तो मुझे होश आया कि दारू के नशे में अमित ने बिना कंडोम लगाए ही मुझे चोद दिया था.

अमित को भी अपनी गलती का अहसास हुआ.

मगर मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उससे दवा लेने की कह कर, उसके साथ ही गहरी नींद में सो गई.

दूसरे दिन से हम दोनों ने अपने इस टूर को हर दिन बिना कंडोम के चुदाई करके सेलिब्रेट किया.

बरसात में भीगे ऑफिस के माल को चोद दिया - Fu**ed the office girl who got wet in the rain 05/06/2025

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बीवी को चुदवा के पति ने प्रोमोशन लिया - The husband got a promotion after fu***ng his wife 05/06/2025

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05/06/2025

छत पर खुली हवा में बीवी को चोदा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम कुमार है. आज मैं आपके लिए एक नयी चुदाई वाली कहानी लेकर आया हूं. कई लोग पूछते हैं कि मेरी सेक्स कहानी सच्ची होती या कल्पना होती है. दोस्तो, मेरी सभी सेक्स कहानी एकदम सच्ची घटना पर आधारित होती हैं, बस इसमें आपकी मस्ती को बढ़ाने के लिए कुछ मसाला डाला जाता है.

ये पिछले साल की बात है, मेरी बेटी की छुट्टियां चल रही थीं, तो मेरी बीवी और बेटी मेरी साली के पास मुंबई चले गए. मैं ही घर में अकेला रह गया था.

एक हफ्ते के बाद 24 तारीख को हमारी शादी की वर्षगांठ थी. इस वजह से मेरी साली ने मुझसे कहा कि इस बार एनिवर्सरी यहीं मनाएंगे.

मैं 23 तारीख को रात वाली ट्रेन पकड़कर 24 को सुबह साली के घर पहुंच गया. मुझसे मिलते ही मेरी वाईफ मुझसे लिपट गयी, बेटी भी आकर मेरे गले लग गयी. फिर बीवी ने कहा- आप जल्दी से तैयार हो जाओ, वाटर पार्क जाना है.

वाटर पार्क में हम पति पत्नी ने जमकर मस्ती की. मैंने उसके साथ पानी में सब कुछ किया, सिर्फ बीवी की चूत में लंड डालकर उसे चोदना ही बाकी रह गया था.

शाम 7 बजे घर पहुंच कर हमने केक काटा, फिर खाना खाया.

मेरी बीवी ने मुझसे कहा- हम दोनों सोने के लिए टैरेस पर जाएंगे.
मैं समझ गया कि आज तो जमकर चुदाई होगी. हम दोनों ने हफ्ते भर से चुदाई जो नहीं की थी.

हम दोनों बिस्तर लेकर छत पहुंच गए. जमीन पर बिस्तर डालकर बीवी नीचे चली गयी और फिर पानी लेकर आ गयी. मैं अपने कपड़े निकाल कर नंगा होकर उसके आने की राह देख रहा था.

मैंने देखा वो साड़ी निकाल कर नाईट गाउन पहन कर आ गई थी. मुझे नंगा देख कर उसने पानी की बोतल नीचे रख दी और झट से मुझसे लिपट गयी. वो मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी और एक हाथ में मेरा लंड लेकर मसलने लगी.

मैं भी धीरे धीरे उसका गाउन ऊपर उठाने लगा. अन्दर पेटीकोट तो था नहीं … मुझे लगा कि पक्के में वो एकदम नंगी ही आई होगी. मैंने चैक करने के लिए उसकी गांड पर हाथ फेरा, तो वो नीचे पैंटी नहीं पहने थी. मैं उसकी चिकनी गांड को कभी दबाता … कभी सहलाता.

वो भी एकदम से चिपकी हुई मुझे चूस रही थी.

मैं अपने एक हाथ से बीवी की गांड दबाते हुए दूसरा हाथ ऊपर मम्मों की तरफ ले गया. पट्ठी ने वहां भी ब्रेजियर नहीं पहनी थी. मतलब वो अन्दर के सारे कपड़े उतार कर सिर्फ गाउन पहन कर आई थी.

मैंने उसे आंख भर कर वासना से देखा, तो उसने अपने दोनों हाथ ऊपर कर दिए.

अगले ही पल मैंने उसका गाऊन ऊपर से निकाल कर अपनी बीवी को पूरी नंगी कर दिया. उसका गोरा बदन चांद की रोशनी में बहुत ही खूबसूरत दिख रहा था.
मैं थोड़ा सा नीचे झुककर उसका एक निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा. साथ ही उसके दूसरे निप्पल को अपनी दो उंगलियों में दबा कर हल्का हल्का सा मींजने लगा.

वो मस्त होने लगी और उसके मुँह से धीरे धीरे आवाज निकलने लगी- आंह … उंहह … पी लो मेरा दूध … आंह मेरी चूत के राजा … आंह … थोड़ा जोर से मम्मे दबाओ न … इस्स … आं…ह … मेरी चूत हफ्ते भर से तुम्हारे लंड के लिए तरस रही है … आज मुझे खूब चुदवाना है.

मैंने भी कहा- हां मेरे लंड की रानी … आज तेरी चूत जमकर चोदूंगा. जरा लंड चूस दे मेरी जान.
ये सुनकर वो झट से नीचे बैठ गयी और मेरा तना हुआ लंड अपने मुँह में भर कर चूसने लगी.

हफ्ते भर से चूत न चोदने के कारण मेरा लंड मानो रॉड की तरह तन गया था.
वो लंड चूसते हुए कह रही थी- आंह … बहुत कड़क हो गया है … आज तो मैं बहुत मस्ती से चुदवाऊंगी, आज मेरी चूत बहुत खुश हो जाएगी.

मैं उसके दूध मसलने लगा, तो वो फिर से लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

मैंने कहा- नीचे देख … तेरी चूत गर्म हो गई है या देर है?
उसने अपनी चूत को हाथ लगाकर देखा तो उसकी चूत पूरी गीली हो गयी थी.
बीवी ने कहा- आ जा … मेरे सैयां … मुनिया रेडी है.

यह कह कर वो छत पर बिछे बिस्तर पर लेट गयी और उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया. उसने एक हाथ से मेरे सिर के पीछे के बाल पकड़े और दूसरे हाथ से अपना एक दूध पकड़ कर कड़क निप्पल को मेरे मुँह में दे दिया.

मैं उसका दूध चूसते हुए पीने लगा. उसने मेरे दूसरे हाथ को पकड़ कर अपने दूसरे मम्मे पर रखा और मम्मे को दबाने का इशारा किया. मैं अब दो काम एक साथ कर रहा था. उसका दूध चूस भी रहा था और मसल भी रहा था.

कुछ देर बाद मेरे बीवी ने मेरा बांया हाथ पकड़ कर अपने खूबसूरत फूली हुई चूत पर रखकर मेरा हाथ चूत पर दबा दिया.

मेरा और एक काम बढ़ गया. मैं अपनी मुट्ठी में उसकी चूत पूरी भर कर दबाने लगा. उसकी आह निकल गई.

वो बहुत गर्म हो गयी थी और लगातार आंह. … उन्ह इ..स्स…’ की आवाजें निकाल रही थी.

मैंने एक उंगली से चूत के दाने को हल्का सा छेड़ा और उसी उंगली को अंगूठे की सहायता से दाने को पकड़ लिया. वो दाने को छेड़ने से ही चिहुंक उठी थी, जब मैंने दाने को दो उंगलियों की मदद से मींजा, तो उसकी वासना चरम पर पहुंच गई. वो कसमसाने लगी. मैं उसकी चूत को भड़काने के लिए दाने को हल्के से मसलने लगा. मैं उसकी दाने को अंगूठे से रगड़ता और दो उंगलियों से पकड़ कर खींचता, इससे वो बहुत तेज सीत्कार करने लगती. अब वो बेकाबू होकर जोर जोर से कराहने लगी थी और अपनी गांड ऊपर उठाने लगी थी.

मैं लगातार अपनी दोनों उंगलियों से उसकी चूत का दाना रगड़ रहा था.

वो हद से ज्यादा बेकाबू होकर बिस्तर पर तड़पने लगी और हाथ पैर मारने लगी.

जब मैंने उसे छेड़ना नहीं छोड़ा, तो वो भी मेरा तगड़ा लंड हाथ में लेकर मसलने लगी. लंड मसलने से मुझे भी मजा आने लगा था और मैंने भी उसकी चूत के दाने को रगड़ने की स्पीड बढ़ा दी. उसने बिस्तर पर तड़पते हुए पूरा बिस्तर अस्त व्यस्त कर दिया. वो मेरा सर पकड़ कर अपने मम्मे पर दबाने लगी. उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और पूरी चूत गीली हो गयी थी.

एक पल रुकने के बाद उसने घूमकर मेरा लंड मुँह में लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मैं उसकी झड़ी हुई चूत के दाने को अभी भी जोर जोर से रगड़ रहा था.

फिर अचानक मेरी बीवी ने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे नीचे गिरा दिया और गुर्राते हुए मेरे ऊपर चढ़ गई. वो मेरे ऊपर दोनों तरफ पैर रखकर बैठ गयी थी और मेरा लंड अपनी मुट्ठी में पकड़ कर चूत की फांकों में घिसने लगी थी. मैंने हाथ हटा लिया था. वो लंड को चूत की दरार में सैट करके धीरे धीरे से लंड पर बैठने लगी.

मेरा खड़ा लंड भी बीवी के गीली हुई गर्म चूत में घुसने लगा. वो मेरा पूरा लंड चूत में लेकर बैठ गयी. एक पल के लिए उसने लंड की गर्मी को महसूस किया और एक आह निकाल कर खुद की तृप्ति को जाहिर किया. अब उसने थोड़ा सा नीचे झुककर अपने एक निप्पल को मेरे मुँह में दे दिया.

मैं किसी छोटे बच्चे की तरह निप्पल चूसने लगा. उसने मेरा हाथ अपने दूसरे मम्मे पर रखकर दबाने को कहा.

अब मेरे मुँह में एक निप्पल था और दूसरे हाथ में एक मम्मा दबा था. नीचे चूत में लंड गर्मी ले रहा था.

हल्की चांदनी की रोशनी में हमारे दोनों के नंगे बदन खूबसूरत लग रहे थे. वो मुझे ऊपर से दनादन चोद रही थी. सब तरफ शांति का माहौल था, बस हमारी चुदाई की पचपच, खचपच, पचर पचर, फटफट की आवाज गूंज रही थीं.

कोई दो मिनट बाद ही उसकी चुदाई की स्पीड बहुत तेज हो गई थी.

वो अपने चूतड़ों को जोर जोर से ऊपर नीचे करके मेरा लंड अपनी चूत में जड़ तक ले रही थी.

“आह … मेरी जान … मजा आ रहा है … तुम्हारा लंड तो मेरी चूत की बैंड बजा रहा है … इस्स … मेरी चूत में कुछ कुछ हो रहा है … ऊई मां … तुम्हारा लंड तो मेरे पेट घुस रहा है … अब दोनों निप्पल एक साथ चूसो … आह … मेरी जान आग लगा दी है.”

मैं समझ गया कि अब इसकी चूत तो पानी छोड़ने वाली हो गई है.

बस फिर क्या था. उसके दोनों मम्मों को हाथ में लेकर मैंने उसके दोनों निप्पलों एक साथ मुँह में भरा और मस्ती से चूसने लगा. जैसे ही मैं उसके दोनों निप्पलों को चूसने लगा, उसने मेरे सर के बाल अपने दोनों हाथों से पकड़ कर गांड उठा उठा कर मुझे चोदना शुरू कर दिया.

वो चीखते हुए दस बारह बार जोर जोर से उछली और लंड पर धक्के मारते मारते ही उसकी चूत का फव्वारा छूट गया. वो एकदम से तेज आह … भरते हुए मेरे ऊपर गिरने लगी.

मेरी बीवी ने अपनी चूत को मेरे लंड पर जोर से दबा दिया. झड़ने के बाद वो मेरे ऊपर बेहोश सी होकर गिर गयी. वो पांच मिनट तक मेरे ऊपर ही लम्बी लम्बी सांसें भरते हुए पड़ी रही.

मगर अब भी मेरा लंड किसी योद्धा की तरह मेरी बीवी की चूत में अड़ा था.

पांच मिनट के बाद वो उठकर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी. फिर मेरे होंठों अपने होंठों में लेकर चूसने लगी. फिर मेरी गर्दन के पीछे दोनों हाथ डालकर मुझसे लिपट कर मेरे ऊपर ही सो गयी.

मैंने पूछा- कैसा लगा?
उसने हांफते हुए कहा- बहुत अच्छा … तुम्हारे लंड ने तो आज मेरी चूत की मस्ती ही निकाल दी, बहुत तड़प रही थी. बहुत खुश है तुम्हारी चूत रानी, इसने तीन बार पानी छोड़ा है. अब तुम्हारी बारी है … जैसा चोदना चाहो, वैसे चोद लो.

मैंने बीवी को नीचे लिटाया, उसके पैर घुटनों से मोड़कर फैला दिए और मैं बीवी के चूत के सामने घुटनों के बल बैठ गया.

बीवी की गांड के नीचे एक तकिया रख दिया. उसके पैर फैलाने की वजह से चिकनी चूत ने अपना मुँह खोल दिया था. उसकी चूत मानो कह रही थी कि अब मेरे अन्दर तुम अपना लंड डाल दो.

मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और बीवी की खुली हुई गांड पर रख दिया. मेरी बीवी ने अपने हाथों से दोनों कूल्हे फैला दिए. मेरे लंड का सुपारा अपनी गांड के छेद में रखकर दबा दिया. इधर मैंने गांड के छेद का अहसास करते ही दबाव बना दिया, तो मेरा सुपारा बीवी की गांड के अन्दर प्रवेश कर गया. उसकी उंह की आवाज आई, तो मैंने थोड़ा सा और जोर लगाकर धक्का दे मारा.

मेरा आधा लंड बीवी की गांड में विराजमान हो गया. उसकी सिसकारी निकल गई. अब मैं आधा लंड ही अन्दर बाहर करके चोदने लगा. बीवी को हल्का सा दर्द हो रहा था, इसलिए वो कराह रही थी.

कुछ देर बाद मैंने अपना लंड गांड से बाहर निकालकर गांड में थूक दिया और फिर से लंड को गांड में डाला, तो मेरा आधा लंड आराम से अन्दर चला गया.

मैंने फिर से चार पांच झटके दिए और अपना लंड थोड़ा बाहर निकाल कर जोर का धक्का लगा कर एक ही बार में पूरा लंड गांड की जड़ में पेल दिया.

गांड में पूरा लंड जाते ही बीवी के मुँह से चीख निकल गई. वो कहने लगी- धक्का मारने से पहले बोलना तो था.
मैंने कहा- अगर बोलकर धक्का मारता, तो तू चीखती ही नहीं. मुझे मजा ही नहीं आता.
वो कराहते हुए हंस दी.

अब मैं अपना लंड गांड में अन्दर बाहर करके आराम से बीवी की गांड चोदने लगा. गांड चोदते हुए कभी मैं बीवी के चुचे पी रहा था, तो कभी प्यारी बीवी के होंठों चूसने लगता.

आधे घंटे तक मैं अपनी प्यारी बीवी की गांड चोदता रहा. हम दोनों भी थक गए थे.

मेरी प्यारी बीवी ने पूछा- पानी कहां डालोगे? गांड में या चूत में?
मैंने कहा- तुम्हारी चूत की प्यास बुझाऊंगा.

ये कहते हुए मैंने अपना लंड गांड से निकाल कर खूबसूरत गीली चूत में घुसा दिया. बीवी ने अपने दोनों हाथ गर्दन के पीछे डालकर मुझे पकड़ लिया. अब मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा.

मेरे धक्कों से वो हिल रही थी, उसके मोटे मोटे मम्मे भी थिरक रहे थे. मेरी प्यारी बीवी नीचे से गांड उठाते हुए मेरा हौसला बढ़ा रही थी- आंह और जोर से … और जोर से, बहुत अच्छा लग रहा है … तुम्हारे जैसा तगड़ा लंड मुझे मेरी चूत चोदने को मिला है … आह बहुत खुशनसीब हूं मैं … आ … हा.

मैंने अपनी चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी, मुझे महसूस हुआ कि अब मेरा लंड पिचकारी छोड़ेगा, तो चार पांच तगड़े धक्के मारकर मैंने पूरा लंड बीवी की चूत में जड़ तक घुसा दिया और मेरे गर्म वीर्य की धार प्यारी बीवी के चूत में गिरने लगी.

बीवी ने मुझे कसकर गले लगा लिया. मेरा पूरा वीर्य चूत में गिरने के बाद पांच मिनट तक मैंने लंड को अपनी प्यारी बीवी की चूत में ही रखा. मैं उसके ऊपर ही ढेर हो गया था.

मेरी बीवी मेरे बालों में उंगली घुमा रही थी. वो बहुत खुश थी.

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