Dr. Manish Raghuvanshi
Welcome to Dr Manish Raghuwanshi's Homeopathic Diabetes Reversal Programme. Protocol includes analysis, constitutional synthesis, and targeted correction.
Our programme uses scientific individualization to correct metabolic imbalance and restore health.
डॉक्टर से जानिए: डायबिटीज (शुगर) को नियंत्रित कैसे करें?”
Oral cancer full information
17/03/2023
Fight Cancer the right way!
30/01/2023
23/09/2022
21/01/2022
CANCER - GLOBAL KILLER
" The Homoeopathy "
(A Research Based Scientific Clinic)
विगत 15 वर्षों से The Homoeopathy के अनुभवी चिकित्सकों द्वारा सभी प्रकार के कैंसर में होम्योपैथी के ऑटोबायोटिक , हीमोडायनेमिक और कांस्टीट्यूशनल उपचार द्वारा सिम्प्टमैटिक मैनेजमेंट किया जा रहा है ।
Specialized Clinic For All Type Of Cancer 1st To Last Stage , Aplastic Anemia , MDS ( Myelodysplastic Syndrome ) , Sickle Cell Anemia , Thalassemia , Leukemias , ITP ( Thrombocytopenia ) and Other Blood Dyscracias .
Central India's 1st Center Dealing With Hemodynamic / Autobiotic Concept For Symptomatic management Of All Type Of Cancer .
UG-3 Mid-Town Plaza
Manik Baag Road, Indore
www.thehomoeopathyindore.com
9039127740
30/09/2021
23/09/2021
A Case Of Diffuse Adenomyosis ,
1.6cm×1.3cm size Subserosal Fibroid ( बच्चेदानी की गठानें ) , 1.8cm×7mm sized Fibrolipoma ( चर्बी की गठानें ) With Left Renal Concretion ( किडनी की पथरी ) approx 4.2mm ,
This Complicated Surgical Case Cured By Simple Magical Constitutional Homeopathic Remedy With Intercurrent Miasmatic Homeopathic Rx
Dr Manish Raghuwanshi
( MD Hom )
*The Homoeopathy*
(A Research Based Scientific Clinic)
UG-3 Mid-Town Plaza
Manik Baag Indore MP
9039127740
14/09/2021
लिपोमा या लाइपोमा चर्बी की गांठें
होम्योपैथी लाइपोमास को नेचुरली घोल देती है।
चर्बी की कोशिकाएं बढ़ने के कारण, मांसपेशी और स्किन के बीच में ये कोशिकाएं बडकर चर्बी की गांठ बन जाती हैं।
-स्किन में होने वाली सबसे कॉमन परेशानी है
-सारे लाइपोमा बेनाइन ट्यूमर होते हैं,
यानी ये कैंसर में नहीं बदलते
- सामान्यतः इनमें दर्द भी नहीं होता है
- पर एक या कई एक साथ हो सकते हैं
कारण -
- लाइपोमा होने का सही कारण अज्ञात है
- कुछ फैक्टर्स हैं जैसे जेनेटिक. अगर परिवार में लाइपोमा की हिस्ट्री रही है तो आपको हो सकता है
- चोट लगने पर भी लाइपोमा उस जगह पर हो सकता है, जिस जगह पर चोट लगी है,आमतौर पर ऐसा देखा गया है
- मेटाबॉलिक - अगर कोलेस्ट्रॉल बढ़ रहा हो, डायबिटीज़ हो, मोटापा हो,आप एक्सरसाइज़ नहीं करते हों, ज़्यादा चलते फिरते न हों तो भी लाइपोमा हो सकता है ।
लाइपोमा शरीर में कहीं भी हो सकता है, गर्दन, चेहरा, पीठ, हाथ, पांव, पेट कहीं भी
-ये शरीर के अंदर भी उग सकती हैं
-लाइपोमा छोटे, बड़े दोनों आकार के हो सकते हैं।
-लाइपोमा पुरुषों में ज़्यादा पाया जाता है।
इलाज:
इलाज में मुख्यत: सर्जरी बताई जाती है पर सर्जरी के बाद भी ये गाठें दोबारा हो सकती हैं और एक या दो गाठें हों तो ठीक है यदि बहुत सारी गठानें हो तो संभव नहीं होता सभी को निकालना ।
होम्योपैथिक उपचार - होम्योपैथी में बहुत सी दवाइयां हैं जो लाइपोमा को धीरे धीरे खत्म करने में सक्षम होती हैं ।
साथ ही जब ये गठानें होम्योपैथी से ठीक हो जाती हैं तो दोबारा होने के चांसेज न के बराबर होते हैं ।
होम्योपैथिक दवाएं गठानों को घोलने के साथ साथ ही कई बार कोलेस्ट्रॉल को और वजन को भी नियंत्रित कर देती हैं जिससे और भी बीमारियों से निजात मिलती है ।
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