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14/01/2026
ठीक है — इसे मैं स्पष्ट, सुसंगठित और प्रभावशाली तरीके से दोबारा बना रहा हूँ, ताकि यह लेख/पोस्ट/पैम्फलेट या इमेज के साथ लगाने लायक हो 👇
मानसिक कारणों से होने वाली नपुंसकता
(Psychological Erectile Dysfunction)
आज के समय में मानसिक कारणों से होने वाली नपुंसकता तेजी से बढ़ रही है। कई पुरुष शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होते हैं, फिर भी यौन क्रिया के समय स्तंभन नहीं हो पाता या टिक नहीं पाता। ऐसी स्थिति में समस्या शरीर में नहीं, मन में होती है। आयुर्वेद और आधुनिक मनोविज्ञान दोनों मानते हैं कि मन और यौन शक्ति का गहरा संबंध है।
प्रमुख मानसिक कारण
1. तनाव
काम का दबाव, आर्थिक चिंता, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और भविष्य की असुरक्षा मन को अशांत रखती हैं। तनाव की अवस्था में शरीर “रिलैक्स मोड” में नहीं जा पाता, जबकि स्तंभन के लिए शांत मन आवश्यक है।
2. चिंता और डर (Performance Anxiety)
पहली असफलता के बाद असफल होने का डर बैठ जाता है। यही डर बार-बार दोहराकर एक दुष्चक्र बना देता है—डर से असफलता और असफलता से डर।
3. अवसाद
अवसाद में उत्साह, आनंद और यौन इच्छा कम हो जाती है। कई बार अवसाद की दवाएँ भी यौन क्षमता को प्रभावित करती हैं।
4. आत्मविश्वास की कमी
खुद को कमजोर, अयोग्य या आकर्षणहीन मानना पुरुषत्व पर चोट करता है। जब व्यक्ति खुद पर भरोसा नहीं करता, तो शरीर भी प्रतिक्रिया देना बंद कर देता है।
5. दांपत्य तनाव
पति-पत्नी के बीच संवाद की कमी, भावनात्मक दूरी, पुराने झगड़े और अविश्वास यौन संबंधों को प्रभावित करते हैं। कई बार समस्या यौन नहीं, बल्कि भावनात्मक होती है।
6. अतीत के नकारात्मक अनुभव
बचपन या युवावस्था के अपमान, गलत शिक्षा, भय या यौन शोषण अवचेतन मन में डर और अपराधबोध पैदा कर सकते हैं।
7. पोर्नोग्राफी की लत
अत्यधिक पोर्न देखने से मस्तिष्क वास्तविक संबंधों में वही उत्तेजना महसूस नहीं कर पाता। कल्पना और वास्तविकता के बीच अंतर बढ़ जाता है।
पहचान की खास बात
मानसिक नपुंसकता में अक्सर नींद या स्वप्न के दौरान स्तंभन हो जाता है। यह संकेत है कि शरीर सक्षम है, बाधा मन में है। इसलिए केवल दवाओं से स्थायी समाधान संभव नहीं होता।
समाधान का सही मार्ग
✔ समस्या को स्वीकार करना
✔ खुला संवाद और तनाव प्रबंधन
✔ ध्यान, योग और काउंसलिंग
✔ आयुर्वेदिक सहयोग – अश्वगंधा, ब्राह्मी, शंखपुष्पी
13/01/2026
आपदा में अवसर और मदद
1998 में जब खन्ना-केहरी ट्रेन एक्सीडेंट हुआ, तो सैकड़ों पैसेंजर मारे गए। केरल का एक हिंदू आर्मी ऑफिसर उसी ट्रेन में सफर कर रहा था और उसकी जान बच गई। वह लिखता है, “मैंने सुना था कि पंजाब के लोग बहुत दयालु होते हैं, वे सबकी भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन आज मैंने यह अपनी आँखों से देखा।”
वह लिखता है कि जब एक्सीडेंट हुआ तो रात हो चुकी थी। आस-पास के गाँवों के लोग अपने ट्रैक्टर, ट्रॉली, गाड़ियाँ और कारों में भरकर घायल पैसेंजर को हॉस्पिटल ले गए, अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेनों के मलबे से लाशें निकालीं, और जैसे ही दिन निकला, एक्सीडेंट वाली जगह पर ही गुरु का लंगर शुरू कर दिया गया।
जिस जगह पर दो सौ से ज़्यादा लोग मारे गए थे, वहाँ लाशें निकालने वालों और उनकी पहचान करने आए लोगों के लिए प्रसाद का इंतज़ाम देखकर मैं रो पड़ा और बोला…
ये देवी-देवता इसी धरती पर रहते हैं। धन्य हैं उनके सतगुरु जिन्होंने उन पर इतनी कृपा की, उन्हें इतना बड़ा काम सौंपा जो वे सदियों बाद भी कर रहे हैं।
मैं अक्सर सोचता हूँ कि दूसरी तरफ़, इसी भारत में ऐसे लोग भी हैं जो कुदरती आफ़तों और हादसों के समय बेबस लोगों को लूटते हैं। याद कीजिए तीन साल पहले उत्तराखंड में कुदरती आफ़त और बाढ़ के समय, वहाँ के लोगों ने एक प्लेट चावल तीन सौ रुपये में, पाँच रुपये का बिस्किट का पैकेट सौ रुपये में बेचा था। घायलों के हाथों से सोने के गहने उतार लिए... उत्तराखंड जैसा दूसरे राज्यों में भी होता है. यही फ़र्क है सिक्खों में और दूसरे लोगो में...
07/01/2026
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कुछ लोग हमारे जीवन की दहलीज़ पर इतनी ख़ामोशी से आते हैं
कि हमें लगता है—सब ठीक है, सब सहज है।
कोई शोर नहीं, कोई टकराव नहीं।
पर उनके आने के कुछ समय बाद,
मन के किसी अनजान कोने में
एक महीन-सी बेचैनी जन्म लेने लगती है।
वे दुश्मन नहीं होते,
इसलिए उनसे सावधान होना हमें सिखाया ही नहीं गया।
वे विरोधी नहीं होते,
इसलिए उनसे बचने का कोई कारण भी नहीं दिखता।
फिर भी, उनकी संगति में
रूह पर एक अनकहा बोझ उतर आता है—
जैसे मुस्कराते हुए कोई भीतर पत्थर रख दे।
यह पीड़ा शोर नहीं मचाती।
यह धीरे-धीरे फैलती है।
परत दर परत।
ठीक वैसे ही जैसे सर्द रातों में कोहरा
रास्तों को नहीं,
दिशाओं को निगल जाता है।
ये लोग शब्दों से कम,
अपने दृष्टिकोण से ज़्यादा चोट करते हैं।
आपकी साफ़ सोच में वे संदेह बोते हैं,
आपके मजबूत निर्णयों पर
सिर्फ़ “एक सवाल” रख देते हैं,
और आपकी शांति को
तर्क की सूली पर चढ़ा देते हैं।
उनके पास शिकायतों का पुराना संग्रह होता है
और अधूरे सच की ऐसी धुंध,
जिसमें आप कब उलझ गए—
आपको पता ही नहीं चलता।
धीरे-धीरे आपकी स्पष्टता धुंधली होने लगती है।
आत्मविश्वास
रेत की तरह उँगलियों से फिसलता है।
और फिर आता है वह सबसे ख़तरनाक मोड़—
जब आप खुद से पूछने लगते हैं:
“कहीं गलती मुझमें तो नहीं?”
“क्या मेरी संवेदनशीलता ही मेरी कमज़ोरी है?”
वे आपका आत्मविश्वास तोड़ते नहीं,
बस इतना कमज़ोर कर देते हैं
कि आप अपनी ही परछाईं से डरने लगते हैं।
वे ‘सच’ और ‘हकीकत’ के नाम पर
आपको एक ऐसा आईना दिखाते हैं
जो पूरी तरह विकृत होता है—
जहाँ आपकी खूबियाँ धूल बन जाती हैं
और आपकी कमियाँ पहाड़।
उनके साथ ज़िंदगी शायद चलती रहती है,
पर मन हर दिन थोड़ा-थोड़ा
लहूलुहान होता जाता है।
जैसे धड़कती रूह पर
किसी ने लगातार
एक भारी पत्थर रख छोड़ा हो।
अक्सर वे ऐसा जान-बूझकर नहीं करते।
वे खुद अपने भीतर
डर, नाकामी और अधूरी हसरतों के
भंवर में फँसे होते हैं।
अपनी अशांति को वे “सावधानी” कहते हैं,
और अपनी निराशा को “हकीकत”।
लेकिन सच्चाई यह है—
उनकी नकारात्मकता
धीरे-धीरे आपकी रगों में
स्याही की तरह घुलने लगती है।
और जिन छोटी-छोटी खुशियों पर
कभी आपका मन खिल उठता था,
अब उन्हीं से आप सिहरने लगते हैं।
याद रखिए—
हर हाथ थामने वाला
आपके सफ़र का हमसफ़र नहीं होता।
कुछ लोग सिर्फ़ यह सिखाने आते हैं
कि
𝙏𝙝𝙤𝙪𝙜𝙝𝙩 𝙍𝙚𝙫𝙤𝙡𝙪𝙩𝙞𝙤𝙣 – WhatsApp channel
Follow 𝙏𝙝𝙤𝙪𝙜𝙝𝙩 𝙍𝙚𝙫𝙤𝙡𝙪𝙩𝙞𝙤𝙣's WhatsApp channel. एक विचार वो जो जिंदगी तबाह कर दे वहीं एक विचार वह जो जिंदगी को एक नई उड़ान भरने के लिए मौका है पता नहीं कब कौन सा विचार आपकी तरक्की व सफलता के द्वार खोल दे तो बने रहिए अच्छे विचारों के साथ।
धन्यवाद......🙏🙃. Join 41 followers for the latest updates.
ईश्वर के रंगमंच पर आया हूँ,
एक किरदार निभाने को।
डर-संकोच को छोड़ आज,
खुद को पूरी तरह अपनाने को।
हर दृश्य में सच्चाई होगी,
हर संवाद में आत्मसम्मान।
हँसी भी होगी, आँसू भी,
यही तो जीवन की पहचान।
जहाँ मिले खुशियों की आहट,
वहाँ उमंग से भर जाऊँगा।
मौज-मस्ती, आनंद के संग,
मैं श्रेष्ठ कलाकार बन जाऊँगा।
अंत भले ही निश्चित हो,
पर अभिनय रहेगा लाजवाब।
ईश्वर के इस रंगमंच पर,
मेरा जीवन बने एक यादगार ख़्वाब। 🌼
23/12/2025
ना कोई पद की लालसा, ना नाम बढ़ाई का शोक
बस समाज हित में एक पहल,, बस एक पहल,,,🙏
17/09/2025
🎉🎉🎉🎉🎉
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं!💐
प्रिय प्रधानमंत्री जी,🙏
आज आपके जन्मदिन के अवसर पर, हम आपको ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं। आपकी नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शिता और देश के प्रति आपकी समर्पण भावना को हम सभी सलाम करते हैं।
आपकी सरकार ने देश में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए हैं, जिनसे देश की तस्वीर बदली है। आपके नेतृत्व में देश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है।
हम आपके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सदा स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं। आपकी सेवाएं और समर्पण देश के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेंगी।
एक बार फिर से जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं!
🎂🍫🎂🍫🎂🍫
30/04/2024
आजकल जो ट्रेंड चल रहा है समाज में, जल्द ही सुहागरात भी चौराहे पर मनाना आधुनिकता कहलाएगा। ये पश्चिमी आधुनिकता ले डूबेगी। क्योंकि फटी जीन्स में आपको वही लोग नही देखना चाहते जो आपके शुभचिंतक है।
बाकी दुनिया तो आपको आपकी बहन बेटियो को नंगा देखना चाहती ही है।
एक समय था जब कपड़े उतारने पर महाभारत हुई थी और आज किसी ने कपड़े पहनने के लिए बोल दिया तो महाभारत हो रही है।
आओ जड़ो की ओर लौट चले। क्योंकि जड़ो से कटने के बाद वृक्ष कहीं का नही रहता।
जागो और मर्यादा का पालन करो मॉडर्न थीम के चक्कर में विवाह जैसे पवित्र रिश्तों एवं सामाजिक वातावरण को मत बिगाड़ो।
सभी से विनम्र निवेदन🙏
This Talk
30/04/2024
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चल रही इन reels को देखकर अहसास हो रहा है कि आखिर क्यों हमारे बजुर्गों ने औरत को पर्दे में रखा था....
अरे ये माँस के लोथड़े हैं जो प्रकृति ने पुरुषों को कम और स्त्री को थोड़े ज्यादा दे दिए हैं।
नीचता कि इतनी हद कि तुम चंद likes और views पाने के लिए कभी वक्षस्थलों और नितंबों को हिला रही हो तो कभी जांघों को खोलकर अपने जननांग की तरफ भद्दा इशारा कर रही हो....
तुम्हारी इन reels को देखकर कुछ युवा उन reels को तुम्हारे व्यक्तित्व के साथ जोड़ कर देखने लगते हैं जिसके चलते कई बार तुम्हारे साथ दुराचार हो जाता है ।
और फिर किसी टेलीविजन चैनल पर उस मुद्दे पर चर्चा में कुछ तथाकथित नारी संरक्षण संस्थाएं समस्त पुरुष जाति की मानसिकता और चरित्र को लेकर उल जलूल शब्दावली का इस्तेमाल करती हैं तो यकीन मानिए हम अपनी ही लाड़ी और बेटी के सामने खुद को उस गुनाह के लिए शर्मिंदा महसूस करते हैं जो हमने किया ही नहीं......
चलो ठीक है...आपने कैसे कपड़े पहनने हैं हमें इससे कोई वास्ता नहीं लेकिन अगर आप अपने वक्षस्थलों और नितंबों को हिला-हिला कर reels डालोगे तो हमें आपत्ति है क्योंकि यदा-कदा हमारा फोन हमारे बच्चों के पास भी होता है और आपकी इन कामुक reels से उनके दिमाग पर नकरात्मक प्रभाव पड़ सकता है .....
मुझे उम्मीद है कि चन्द औरतों की इन हरकतों के कारण हो रहे समस्त नारी जाति के अपमान को रोकने के लिए भी कोई नारी संरक्षण संस्था मुहिम छेड़ेगी....
12/03/2024
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