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31/07/2023

“Run wild and free like a waterfall”

Photos from Pillar points's post 24/07/2023

धरती सुनहरी अंबर नीला🌾
हर मौसम रंगीला, रंगीला, रंगीला...🌼
🌱🌾

Photos from Pillar points's post 17/06/2023

🌼 राधे राधे 🌼

Photos from Pillar points's post 03/06/2023

Smile Bhaiya ji...🙂

Photos from Pillar points's post 27/05/2023

कितना सरल हो जाता है जीवन,
जब विकल्प नहीं होते...🤞🏻

Photos from Pillar points's post 17/05/2023

...😎
दुनिया एक ही है,
फिर भी सब की अलग-अलग है। #

Photos from Pillar points's post 01/04/2023

मंजर...✍🏻

मौत की बावड़ी के आसपास खाकी, नीली, ऑरेंज वर्दी में सरकारी मुलाजिमों पर हर किसी की नजर थी। पथरीली आंखों को एक ही इंतजार था कि कब हाइड्रोलिक से अपने सही सलामत उपर आ जाएं, लेकिन बावड़ी रह रहकर लाशें उगल रही थी। दोपहर से रात और कब सुबह हुई पता नहीं चला, लेकिन हर पल मानो कलेजा चीरने में लगा था। जो कभी अपनो की जान थे आज वो बेजान होकर निकल रहे थे। जैसे-जैसे लाशें उपर आ रही थी वैसे-वैसे हर कोई शिनाख्त के लिए भीड़ से लड़ रहा था। फूला चेहरा देखकर किसी के आंसू तेज हुए तो किसी की आखों ने फिर से बावड़ी का रूख कर लिया। इस बीच रिर्पोटिंग करते वक्त मन मेरा भी दुखा। अपने पत्रकारिता के कॅरियर में 24 घंटे में इतनी लाशें निकलती नहीं देखी कुछ पल ऐसे थे जो आंखों को नम कर गए। पीड़ितों की तरह मुझ में भी लचर सरकारी ढर्रें के लिए आक्रोश था। मन में बस एक ही बात थी मैं तो अपनी कलम से बेकसूरों को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोडूंगा लेकिन उन बेबसों का क्या कसूर था जो बेवक्त काल की बावड़ी में समा गए। जिन्होंने अपने खोऐ उनके पास रोने के अलावा कुछ नहीं बचा था। कही गोद सूनी थी तो किसी का सात फेरो का बंधन टूट गया। मां से बेटा तो बेटी से पिता का बिछड़ना कभी ना भूलाने वाला गम बन गया। इन मौतों का बोझ उठा सके इतने कंधे किसी के मजबूत नहीं हो सकते। दर्दनाक हादसे के बाद अब जिम्मेदारों को कटघरे से सजा के अंजाम तक पहुंचाना जरूरी है यहीं दिवंगतों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Photos from Pillar points's post 21/03/2023

🤟🏻🍁😎

Photos from Pillar points's post 22/07/2020

ए जाते हुए लम्हों...✨🌠
जरा ठहरो जरा ठहरो...🌠✨
💝🍁💝
PC

❣️😎❣️ @ Smart city indore

04/06/2020

कसूर इतना था कि उसने इंसानों पर भरोसा किया।
केरल जिसे हम सब शिक्षित राज्य के नाम से जानते है वहां के पड़े लिखे सो कॉल्ड युवा जिन्होंने सड़कों पर खाने कि तलाश में निकली एक गर्भवती हथिनी को अनान्नास दिया लेकिन इन मनुष्य रूपी जानवरों ने उस हथिनी को पटाख़ों से भरा अनन्नास दे दिया फिर पटाख़े उसके मुँह में फटते हैं। उसका मुँह और जीभ बुरी तरह जल जाते हैं।
यह शरारत हो या जानबूझकर किया गया कृत्य, इस हरकत से जो पीड़ा उस गर्भवती हथिनी ने झेली होगी उसका अंदाज़ा हम भी शायद नहीं लगा सकते, गर्भ के समय भूख भी अधिक लगती है इस समय उसे स्वयं के साथ-साथ अपने बच्चे के लिए भी खाने की जरूरत थी,
लेकिन मुँह में ज़ख्म की वजह से वह कुछ खा नहीं पा रही थी,भूख से बेहाल सड़कों पर दो जीवन साथ लेकर खाने के लिए तड़पती रही लेकिन इस बीच उसने न तो किसी इंसान को नुकसान पहुंचाया ओर न ही किसी घर या वस्तु को,अंत में वह अपनी आग बुझाने के लिए पानी खोजते हुए नदी के नजदीक पहुंची और कुछ घंटों बाद नदी में खड़े-खड़े ही वह दम तोड़ देती है।
पढ़े-लिखे मनुष्यों की सारी मानवीयता क्या सिर्फ मनुष्य के लिए ही हैं? ख़ैर पूरी तरह तो मनुष्यों के लिए भी नहीं। हमारी प्रजाति में तो गर्भवती स्त्री को भी मार देना कोई नई बात नहीं।
इन पढ़े-लिखे लोगों से बेहतर तो वे आदिवासी हैं जो जंगलों को बचाने के लिए अपनी जान लगा देते हैं। जंगलों से प्रेम करना जानते हैं। जानवरों से प्रेम करना जानते हैं।
कोरोना ने हम इंसानों का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। यह बता दिया है कि हमने प्रकृति के दोहन में हर सीमा लाँघ दी है। लेकिन अब भी हमें अकल नहीं आई। हमारी क्रूरता नहीं गई। मनुष्य इस धरती का सबसे क्रूर और स्वार्थी प्राणी है।
अमेरिका में एक जाहिल पुलिस वाले की पत्नी एक अश्वेत व्यक्ति के प्रति उसके निर्मम व्यवहार के कारण उसे उसी वक्त सार्वजनिक तौर पर तलाक दे सकती है तो क्या हम ऐसे नर-पशुओं को ढूँढ-ढूँढकर उनका सार्वजनिक बहिष्कार नहीं कर सकते ?
आज जानवर जंगल में ही नहीं बल्कि हमारे समाज के इर्द गिर्द भी पनप रहे हैं जिन्हें हमें पनपने से रोकना होगा।
🙏

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Photos from Pillar points's post 13/05/2020

👉🏻हाल ही में, पालघर में दो साधुओं एवम् उनके ड्राइवर की हत्या, फिर इस लिंचिंग के बाद मेवात में महंत रामदास पर हमला हुआ।साथ ही, बुलंदशहर में भी उन्हीं दिनों में दो सोते साधुओं की हत्या कर दी गई थी.
इन सब घिनौने कृत्यों के घाव अभी भरे ही नहीं थे कि फिर यह वृंदावन की घटना हिंदुओं के अन्तर मन पर फिर से घात कर गई।
मामला जानिए__
मथुरा वृंदावन के इमलीताला मंदिर के मुख्य पुजारी वैष्णव संत श्री तमाल कृष्ण दास पर कुछ गुंडों ने निर्दयता और बेरहमी से हमला किया। दो गुंडों के बारे में कहा जा रहा है कि वो बांग्लादेशी थे, बाकी बाहरी लोग। सारे गुंडे फरार हैं पुलिस थाने पर शिकायत करने पर पता चल रहा है कि मथुरा पुलिस इस मामले को रफा-दफा करना चाहती है। उनका कहना है कि यह साधु और हमलावरों का आपसी मामला है।
कहा यह भी जा रहा है कि वृन्दावन थाना क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी सदर ने कहा कि जिस साधु के साथ मारपीट हुई, वो इस मठ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वर्तमान में इस मठ के अध्यक्ष बीपी साधु हैं, जो फिलहाल बाहर गए हुए हैं। पुलिस ने बताया कि बीपी साधु के अनुयायियों और शिष्यों ने ही तमाल दास के साथ मारपीट की थी।
ऐसी तस्वीरें इसलिए किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के हृदय पर चोट करती है क्योंकि पीड़ित एक साधु है जो किसी का कुछ नहीं बिगाड़ता। आखिर कैसे निम्न कोटि के गुंडे होंगे जो साधुओं पर हमला बोलते हैं? एक बुजुर्ग पुजारी किसी व्यक्ति को किस तरह का नुकसान पहुँचा सकता है कि उन्हें इस तरह से पीटा गया? (आप तस्वीरों में देख सकते हैं)
मीडिया भी इस संकट काल में भारत-पाकिस्तान, हिंदू मुस्लिम और राजनीति के बीच के चक्कर में ऐसे जरूरतमंद मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है।
PC-
page- ‘Vrindavan Homeless Cows Seva And Care’
# -19 ...
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11/05/2020

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेल हादसे में मरने वाले 16 मजदूरों को श्रद्धांजलि 💐
देश के नेताओं को तो श्रद्धांजलि देने की आदत सी हो गई होगी औरंगाबाद में मजदूरों के मरने का हादसा झकझोर देने वाला है
पटरी पर पड़ी हुई मजदूरों की वह रोटियां चीख चीख कर सरकार से जवाब मांग रही है कि कहां है वह गरीबों, मजदूरों की सरकार और चौकीदार, जो कहते हैं सारी सुविधाएं कर दी गई है सिर्फ कागजों पर ट्रेन दौड़ाना देश के मजदूरों के साथ धोखा है इस हादसे का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ दोनों राज्यों की सरकारें हैं यह हादसा टाला जा सकता था अगर दोनों राज्यो की सरकारें अपना काम जिम्मेदारी से करती।
और अब सरकार मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख देकर सांत्वना दे रही हैं अच्छा होता उन्हें जीवित ही घर पहुंचा दिया जाता तो उनके परिवार के लिए सच्ची सांत्वना होती।
आए दिन मजदूरों को सड़कों पर हजारों किलोमीटर पैदल चलते देख रहे हैं कुछ मजदूर ऐसे हादसों में मर रहे हैं तो कुछ पैदल चलकर अपना दम तोड़ रहे हैं यह वही मजदूर है जिन्होंने महाराष्ट्र में कई ऊंची ऊंची इमारतें खड़ी की है लेकिन वहां की सरकारें उन इमारतों में रहने के लिए एक छोटा सा कोना भी न दे सकी और इस संकट में रोड पर मरने के लिए छोड़ दिया। यह मजबूर मजदूर सब देख रहा है इसके अंदर की आत्मा रो रही है शायद वह मरने वाला मजदूर और उसका परिवार कभी माफ नहीं कर पाएगा।
यह हादसा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार के दावों की पोल खोल रहा है अगर इन राज्यों में मजदूरों को पर्याप्त खाना और रहने के लिए जगह मिलती तो यह सड़कों पर पैदल चलकर अपने घर की ओर पलायन करने के लिए मजबुर नहीं होते।
कहां है पीएम केयर फंड के करोड़ों रुपए...?
जो नेता इस हादसे के बाद आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रहे हैं और मजदूरों कि मौत पर भी राजनीति कर रहे हैं वही नेता चुनाव आने पर इन मजदूरों की झोपड़ी में जाकर साथ में बैठकर खाना खाएंगे लेकिन इस संकट में नेता गण दुम दबाए बैठे हैं और अपनी नाकामी का ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ रहे हैं।

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