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24/12/2022

मोदी सरकार चलाएगी 4 नौसेना अधिकारियों पर केस, पनडुब्बी की जानकारी बेच रहे थे

इंडियन नेवी के 4 अधिकारियों पर CBI भ्रष्टाचार का मुकदमा चलाएगी. CBI ने पिछले साल चार्जशीट दायर की थी. जिसमें 4 अधिकारियों पर रशियन किलो-क्लास पनडुब्बियों के स्पेयर पार्ट्स खरीदने में भ्रष्टाचार का आरोप था. अब भारत सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. सरकार ने जिन 4 अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी है उसमें 1 रिटायर्ड और 3 सेवारत अधिकारी शामिल है.

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कानपुर में मनी हाइस्ट जैसे स्टेट बैंक से करोड़ों का सोना चुराया, वीडियो देख सब भौचक्के रह गए!

कानपुर में भारतीय स्टेट बैंक की भुटी शाखा में सुरंग खोदकर चोरों ने एक करोड़ से अधिक कीमत का 1.8 किलो सोना चोरी कर लिया. चोरों ने सुरंग खोदी जो सीधे बैंक के सोने के स्ट्रांग रूम में खुलती थी

कानपुर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की भौती ब्रांच में ये सुरंग खोदी गई थी. यहीं से चोरों ने बैंक का 1 किलो 800 ग्राम सोना पार कर दिया. एकदम फिल्मी स्टाइल में. उससे भी आगे बढ़कर बोलें तो स्पैनिश क्राइम ड्रामा टीवी सीरीज ‘मनी हाइस्ट’ की तरह. वो भी उस बैंक से जिसके अंदर CCTV कैमरा नहीं लगा था.

आश्चर्य की बात ये है कि चोरों ने सिर्फ सोना ही चुराया. जिस स्ट्रांग रूम में कैश रखा था, चोरों ने उसे छुआ तक नहीं. आजतक से जुड़े रंजय सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक चोरों ने बाकायदा बैंक के पीछे से एक सुरंग खोदा. 4 फीट चौड़ी और 8 फीट लंबी सुरंग. रात भर बैंक के पीछे सुरंग खोदी जाती रही और किसी को भी इसकी भनक नहीं लगी. सुरंग से अंदर घुसे चोरों ने गोल्ड रूम का दरवाजा तोड़ा और अंदर जितना भी सोना था सब उड़ा ले गए.

19/12/2022

8वीं पास बना फर्जी IPS, तगड़ी ठगी की, UPSC वाले लड़कों को देख आया था आइडिया!

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने ठगी के आरोप में ‘IPS विकास यादव’ को गिरफ्तार किया है. दिल्ली की एक महिला डॉक्टर ने विकास यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. पहले आपको बता दें कि विकास यादव असल में कोई IPS अधिकारी नहीं है. पुलिस का कहना है कि विकास फर्जी IPS बनकर लोगों को ठगा करता था. उसने बाकायदा सोशल मीडिया पर अपना फर्जी अकाउंट भी बना रखा है. 'IPS Vikash Yadav' के नाम से.

आजतक के अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, विकास यादव मध्य प्रदेश के ग्वालियर का रहने वाला है. पुलिस ने बताया कि उसने आठवीं तक पढ़ाई की है. लेकिन अपने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट पर जानकारी दी है कि वो कंप्यूटर साइंस में IIT कानपुर से पास आउट है. इसके अलावा उसने खुद को यूपी कैडर का IPS अधिकारी बताया है. एसिस्टेंड सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस, ये उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, विकास यादव सोशल मीडिया पर खुद के बारे में फर्जी जानकारी देकर लोगों को फंसाता था. खासकर महिलाओं को और फिर उनके साथ ठगी किया करता था. आरोपी के खिलाफ यूपी और मध्य प्रदेश में इसी तरह के ठगी के कुछ मामले पहले से दर्ज हैं.

10/12/2022

congress ke purv अध्यक्ष Rahul gandhi Bharath जोड़ो yatra ke तहत 29 November को ujjain पहुँचे यहाँ उन्होंने कुछ छात्राओं से मुलाक़ात की थी sheetal अंतिमा और girija उसमें से थी इस दौरान Rahul लड़कियों से उनके सपने ke bare में बात की थी  तब इन तीनों लड़कियों ne बोला कि उनका sapna हवाई yatra करने का है तभी Rahul gandhi ne वह उनसे vada kiya कि आपका sapna जल्द ही पूरा हो जाएगा और फिर Rahul gandhi ujjain से चले गए और Bharath जोड़ो yatra rajasthan पहुँच गई तो logon ne सोचा कि bade neta है शायद भूल गए हो गए vada करके किन किन को याद रखता है

तीनों अचानक बूंदी चले गये
गुरुवार 8 DECEMBER को RAHUL GANDHI की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान के बूंदी जिले मैं पहुची Rahul सीधे gudli में बनाए गए हेलीपैड par पहुँचे आगे जो बतायेगे सुनकर जरा हैरानी तो होयेगी helipad पर MP के ujjain की शीतल , अंतिमा और girija bethi थी वे इंतज़ार कर रही थी rahul gandhi का जो उन्हें सामने खड़े हेलीकॉप्टर की ride करवाने वाले थे यानी राहुल ने 10 दिन मैं ही अपना वादा पूरा किया rahul ने तीनों बेटियो के साथ 20 minute की ride की तीनों betiya हेलीकॉप्टर् से उतरी तो उनको चॉकलेट दी

Photos from VPQ 's post 10/12/2022

2018 में Iron main movie release हुई इस film ne poori दुनिया में तहलका macha diya लड़के और लड़कियाँ Iron main ke दीवाने हो गए film का मुख्य किरदार है Iron main jo कि Tony stark है jo कि एक सफल बिजनसमैन भी है और साथ ही साथ एक genius भी है Robert Downey इस किरदार में ढलने ke लिए एक आदमी ke pass गए थे ये आदमी एक space मैं rocket भेजने वाली ज़बरदस्त company चलाता है iski ek और company शानदार electric car बनाती है ये आदमी बढ़े शहरो के नीचे बढ़ी सुरंग बना रहा है इसे असल दुनिया का iron man kha जाता है इस आदमी का नाम है elon musk दुनिया के सबसे अमीर आदमी मैं से एक है
1971 मैं bharat पाकिस्तान युध हुआ और बांग्लादेश बना इसी साल elon musk का जन्म हुआ साउथ अफ़्रीका के प्रिटोरिया मैं elon musk जन्मे इनकी ममी एक मॉडल थी और पापा erol musk इंजीनियर थे

इंटरनेट की लहर पर सवार

जब 17 के हुए को साउथ अफ्रीका छोड़ने का मन बना लिया. साउथ अफ्रीका में मिलिटरी सर्विस कंपलसरी हुआ करती थी. इससे बचने के लिए इलॉन कैनेडा चले गए. यहां क्वीन्स यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. लेकिन इलॉन अमेरिका जाना चाहते थे. कैनेडा वहां जाने का ज़रिया भर था. मस्क ने बाद में यूनिर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया में ट्रांसफर करा लिया. जब यहां से पास हुए, तो उनके हाथ में दो डिग्री थी. फिज़िक्स और इकॉनमिक्स.
इसके बाद इलॉन मस्क पीएचडी करने स्टैनफर्ड यूनिर्सिटी पहुंचे. लेकिन मन में कुछ और ही चल रहा था. दो दिन बाद पीएचडी छोड़ दी. दुनिया में उस वक्त इंटरनेट अपने पांव जमा रहा था. इलॉन अपने छोटे भाई किंबल मस्क के साथ इंटरनेट की दुनिया में कूद गए. इसके लिए मस्क ने पापा से पैसे लिए और अपने छोटे भाई के साथ मिलकर Zip2 नाम की सॉफ्टवेयर कंपनी बनाई. इस कंपनी को कॉम्पेक ने खरीद लिया. मस्क को 22 मिलियन डॉलर (अभी के हिसाब से करीब 161 करोड़ रुपये) मिले.

इंटरनेट की लहर पर सवार

जब 17 के हुए को साउथ अफ्रीका छोड़ने का मन बना लिया. साउथ अफ्रीका में मिलिटरी सर्विस कंपलसरी हुआ करती थी. इससे बचने के लिए इलॉन कैनेडा चले गए. यहां क्वीन्स यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. लेकिन इलॉन अमेरिका जाना चाहते थे. कैनेडा वहां जाने का ज़रिया भर था. मस्क ने बाद में यूनिर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया में ट्रांसफर करा लिया. जब यहां से पास हुए, तो उनके हाथ में दो डिग्री थी. फिज़िक्स और इकॉनमिक्स.
इसके बाद इलॉन मस्क पीएचडी करने स्टैनफर्ड यूनिर्सिटी पहुंचे. लेकिन मन में कुछ और ही चल रहा था. दो दिन बाद पीएचडी छोड़ दी. दुनिया में उस वक्त इंटरनेट अपने पांव जमा रहा था. इलॉन अपने छोटे भाई किंबल मस्क के साथ इंटरनेट की दुनिया में कूद गए. इसके लिए मस्क ने पापा से पैसे लिए और अपने छोटे भाई के साथ मिलकर Zip2 नाम की सॉफ्टवेयर कंपनी बनाई. इस कंपनी को कॉम्पेक ने खरीद लिया. मस्क को 22 मिलियन डॉलर (अभी के हिसाब से करीब 161 करोड़ रुपये) मिले.

इस पैसे से इन्होंने X.com नाम की कंपनी शुरू कर दी. ये तब की शुरुआती ऑनलाइन बैंकिंग कंपनियों में से थीं. यही कंपनी बाद में चलकर Paypal बनी. 2002 में इस कंपनी को eBay को बेच दिया. इससे मस्क को US$165 million (अभी के हिसाब से करीब 1200 करोड़ रुपये) मिले. इस पैसे को लेकर मस्क अय्याशी से रह सकते थे, लेकिन इनका दिमाग मंगल की परिक्रमा करने लगा. इलॉन को हमेशा से ही साइंस-फिक्शन बहुत पसंद थे. अब वो इन कल्पनाओं को हकीकत बनाने की तरफ चल दिए

बड़े-बडे़ सपने

2001 में मार्स ओएसिस का आइडिया आया. प्रयोग के तौर पर पृथ्वी से मंगल ग्रह पर ग्रीनहाउस भेजा जाए. वहां पौधे उगाए जाएं. लेकिन अंतरिक्ष में कूच करने के लिए रॉकेट की ज़रूरत होती है. मस्क को पता चला कि रूस से सस्ते रॉकेट जुगाड़े जा सकते हैं. इसी सिलसिले में वो 2001 में में रूस गए. लेकिन वहां मस्क को नए लौंडे की तरह देखा गया. और हल्के में ले लिया.

साइंस फिक्शन पढ़ने से स्पेस में गहरी रुचि जागी.

2002 में मस्क दोबारा रशिया पहुंचे. तीन ICBM खरीदने के मकसद से. इंटर कॉन्टिनेंट बैलेस्टिक मिसाइल. इन पुरानी मिसाइलों को रॉकेट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता था. लेकिन रूस के ठेकेदारों ने एक मिसाइल की कीमत आठ मिलियन डॉलर (करीब 58 करोड़ रुपये, अभी के हिसाब से) बताई. मस्क को ये पैसा बहुत ज़्यादा लगा और वो मीटिंग छोड़ के निकल लिए. उन्हें लगा कि वो खुद इससे कम पैसे में रॉकेट बना सकते हैं.
इसके बाद इलॉन मस्क की कहानी उनकी बनाई कंपनियां बयां करती हैं.
स्पेसऐक्स - अंतरिक्ष में छलांग

इलॉन मस्क को लगता है कि एक ग्रह पर रहना थोड़ा रिस्की मामला है. हो सकता है कल को तृतीय विश्व युद्ध छिड़ जाए और न्यूलीयर धमाकों से ये दुनिया खत्म हो जाए. या हो सकता है जैसे एक ऐस्टेरॉइड ने पृथ्वी से डायनासौर्स को खत्म कर दिया, वैसे ही मनुष्यों का निशान भी मिट जाए. तो हमारी सभ्यता की ऐक्सपायरी डेट आगे बढ़ाने के लिए हमें दूसरे ग्रहों पर भी अपना डेरा जमाना होगा.
2002 में इलॉन मस्क ने स्पेस ऐक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजीज़ नाम की कंपनी बनाई. आगे चलकर यही कंपनी स्पेसऐक्स के नाम से पॉपुलर हुई. इलॉन अंतरिक्ष में होने वाली यात्रा को आसान और सस्ता बनाना चाहते थे. स्पेसऐक्स का मकसद है मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बनाना. इलॉन चाहते हैं कि इंसान सिर्फ एक ग्रह तक सीमित न रहकर मल्टिप्लानेटरी स्पीशीज़ बनें. यानी अनेक ग्रहों पर रहने वाली प्रजाति.

मंगल ग्रह को पृथ्वी जैसा बनाने

स्पेसऐक्स की शुरुआत तो हो गई लेकिन इसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. 2006 में कंपनी का पहला रॉकेट लॉन्च के 33 सेकंड बाद ही फेल हो गया. इसके बाद 2007 और 2008 में हुए दूसरे और तीसरे रॉकेट लॉन्च भी फेल हो गए. तीसरे फेलियर के बाद कंपनी बंद होने की कगार पर आ गई.
स्पेसएक्स के पहले तीन रॉकेट लॉन्च लगातार फेल हुए. अब इलॉन मस्क के पास सिर्फ इतना पैसा बचा कि सिर्फ एक और रॉकेट लॉन्च ट्राय किया जा सकता था. इस बार सब ठीक रहा. 28 सितंबर, 2008 को फैल्कन-1 रॉकेट अपने चौथे लॉन्च में सफलतापूर्वक अर्थ ऑर्बिट में पहुंच गया.

तीन लॉन्च फेल होने के बाद फैल्कन 1 का पहला सफल लॉन्च.

इलॉन मस्क के मुताबिक, 2008 उनकी ज़िंदगी का सबसे बुरा साल था. बड़ी मुश्किल से स्पेसऐक्स का पहला रॉकेट लॉन्च हो पाया. इनकी दूसरी कंपनी टेस्ला लगातार घाटे में चल रही थी. इलॉक मस्क लगभग कंगाल होने की कगार पर आ गए. इन्हें कंगाल होने से किसने बाचाया ये आगे जानेंगे. पहले टेस्ला और सोलर सिटी की बात कर लेते हैं.
टेस्ला और सोलर सिटी - साफ ऊर्जा की दुनिया

मस्क को इलेक्ट्रिक कार में बहुत संभावनाएं नज़र आती थीं. 2003 में टेस्ला मोटर्स नाम की एक इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी शुरू हुई. इसे मस्क ने शुरू नहीं किया था. लेकिन 2004 में मस्क ने टेस्ला मोटर्स को सबसे ज़्यादा फंडिंग दी और कंपनी जॉइन कर ली. मस्क ने टेस्ला की पहली कार बनाने में अहम भूमिका निभाई.
2006 में टेस्ला मोटर्स ने रोडस्टर नाम की अपनी पहली कार लॉन्च की. इस वक्त इलॉन मस्क टेस्ला के चेयरमेन बन चुके थे. लेकिन 2007 आते-आते टेस्ला बैंकरप्ट होने वाली थी. इलॉन ने अपनी जेब से पैसा लगाकर इस कंपनी को बचाया. और 2008 में मस्क इस कंपनी के सीईओ भी बन गए. टेस्ला ने आगे जाकर इलेक्ट्रिक कारों के बेहद आधुनिक मॉडल बनाए. और लोगों का भरोसा जीत लिया.

टेस्ला मॉडल X के साथ मस्क.

मस्क दुनिया से ऊर्जा की समस्या हल करना चाहते हैं. उनकी कार ईधन से तो नहीं चलतीं, लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली बिजली तो फॉसिल फ्यूल का इस्तेमाल करती थी. और फॉसिल फ्यूल के भंडार एक न एक दिन दुनिया से खत्म हो जाएंगे. ऐसे में दुनिया से एनर्जी की प्रॉब्लम का हल कैसे निकलेगा? इसलिए इलॉन मस्क दुनिया को रिन्यूएबल एनर्जी की ओर ले जाना चाहते हैं.
स्पेस और ऑटोमोबाइल के बाद मस्क को एक ऐनर्जी कंपनी का आइडिया आया. सोलर सिटी. ये एक सोलर एनर्जी कंपनी है जिसकी शुरुआत 2006 में हुई. मस्क ने अपने कज़िन पीटर और लिंडन राइव इसे शुरू करने के लिए कहा. इसके लिए पैसे और बाकी मदद इलॉन मस्क ने की.

सोलर सिटी तेज़ी से रिन्यूएबल ऐनर्जी सेक्टर में आगे बढ़ी.

2013 में सोलर सिटी अमेरिका में घरेलू सोलर पैनल लगाने वाली लीडिंग कंपनी बनी. 2016 में टेस्ला ने सोलर सिटी को खरीद लिया. फिर इनकी कहानी साथ ही आगे बढ़ी.
डूबने के बाद की उड़ान

वापस 2008 पर चलते हैं. स्पेसऐक्स, टेस्ला और सोलरसिटी के साथ इलॉन मस्क दीवालिए होने वाले थे. मस्क ने अपना पूरा पैसा चौथे रॉकेट लॉन्च में लगा दिया था. किस्मत से ये सफल रहा. दिसंबर 2008 में स्पेसऐक्स को नासा की तरफ से 1.5 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रेक्ट मिल गया. नासा ने स्पेसऐक्स को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में अपना सामान भेजने का काम दिया.
धीरे-धीरे टेस्ला ही हालत भी सुधरने लगी. टेस्ला को बड़े इनवेस्टर मिलने लगे. रोडस्टर के बाद टेस्ला मॉडल S का प्रोटोटाइप लेकर आई. कई लोग इससे इंप्रेस हुए. कंपनी को अमेरिका की सरकार से लोन मिल गया. 2010 में टेस्ला मोटर्स IPO लेकर आई और पब्लिक हो गई. इससे जुटाई राशि के बाद मॉडल S का प्रोडक्शन चालू हुआ. 2012 में ये कार मार्केट में आ गई.

नितिन गडकरी ने बताया कि टेस्ला इस साल इंडिया भी आने वाली है.

2013 में टेस्ला ने अमरीकी सरकार को सूद समेत पूरा लोन चुका दिया. इसके बाद टेस्ला ने कई और लग्ज़री और आधुनिक वाहन बनाए. और ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक बहुत बड़ी कंपनी बनकर उभरी.
2012 में स्पेसऐक्स ISS सामान भेजने वाली पहली प्राइवेट कंपनी बनी. इसके बाद इस कंपनी ने रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़े.
दिसंबर 2015 में इतिहास में पहली बार किसी रॉकेट को ऑर्बिटल लॉन्च के बाद पृथ्वी पर लैंड कराया गया. ये स्पेसऐक्स का फैल्कन 9 रॉकेट था. अप्रैल 2016 में इसी रॉकेट को लॉन्च के बाद ऐटलांटिक महासागर में तैनात एक जहाज़ पर लैंड कराया गया. स्पेसऐक्स रीयूज़ेबल रॉकेट से नए कीर्तिमान स्थापित करने लगी. जो रॉकेट लॉन्च के बाद किसी काम का नहीं रहता था, अब उसे दोबारा इस्तेमाल किया जाने लगा. इससे उनका बहुत सारा पैसा बचने लगा

मई, 2020 में स्पेसऐक्स नासा के दो ऐस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष में लेकर गई. इस मिशन का नाम था डेमो-2. इस डेमॉन्स्ट्रेशन के बाद स्पेसऐक्स ने ऐस्ट्रोनॉट्स भेजने के लिए नासा का भरोसा हासिल किया. और इसके साथ स्पेसऐक्स इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाली पहली प्राइवेट कंपनी बनी. अब नासा और स्पेसऐक्स साथ मिलकर आगे के मिशन्स की तैयारी कर रहे हैं.
कितना काम करोगे भैया?

टेस्ला और स्पेसऐक्स मस्क की दो सबसे बड़ी कंपनी हैं लेकिन उनका मन इतने में शांत बैठने वाला नहीं था. इलॉन मस्क इसके अलावा कई और क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. इनके बारे में बहुत ब्रीफली जान लीजिए.
स्टारलिंक
स्पेसऐक्स का बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है स्टारलिंक. स्टारलिंक के ज़रिए इलॉन मस्क दुनिया के हर कोने में इंटरनेट की पहुंच बनाना चाहते हैं. अब तक जिस इंटरनेट पर दुनिया चल रही है, वो मुख्यत: ज़मीन के भीतर बिछी फाइबर केबल्स से चलता है. लेकिन इनकी पहुंच हर जगह नहीं है. इलॉन मस्क की कंपनी सैटेलाइट के ज़रिए तेज़ और ज़्यादा कवरेज वाला इंटरनेट लॉन्च करने की तैयारी में है. इसके हज़ारों सैटेलाइट्स को लॉन्च किया जा रहा है. इन सैटेलाइट्स का नेटवर्क स्टारलिंक पूरी दुनिया में तेज़ इंटरनेट उपलब्ध कराएगा. अब तक स्टारलिंक की 955 से ज़्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च भी हो चुकी है.

स्टारलिंक की 12000 सैटेलाइट लगभग पूरे रिहायशी इलाके कवर कर लेंगी.

हाइपरलूप
2012 में इलॉन मस्क ने पहली बार हाइपरलूप का ज़िक्र किया. ये एक पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिस पर पर कई दूसरी कंपनियां भी काम कर रही हैं. इसका कॉन्सेप्ट स्पेसऐक्स और टेस्ला ने साथ मिलकर तैयार किया है. लगभग वैक्यूम जैसे ट्यूब्स के अंदर प्रेशराइज़्ड पॉड्स को चलाया जाएगा. इसके लिए इलैक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स का सहारा लेना होगा. चूंकि वैक्यूम ट्यूब के अंदर हवा का घर्षण रुकावट पैदा नहीं करेगा, इसलिए ये एक हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम होगा.

हाइपरलूप ज़मीनी ट्रांसपोर्ट का सबसे फास्ट ज़रिया होगा.

बोरिंग कंपनी
इलॉन मस्क की ये कंपनी ट्रैफिक की समस्या सुलझाने के लिए बनी है. सड़क पर गाड़ियां बढ़ती ही जा रही हैं और उनके लिए जगह कम होती जा रही है. इसलिए मस्क ने ज़मीन के नीचे टनल बनाने की ठान ली. बोरिंग कंपनी शहरों के नीचे कई सुरंगें बनाएगी, जिससे शहर के ट्रांसपोर्ट को नीचे शिफ्ट किया जा सके. बोरिंग कंपनी हाइपरलूप प्रोजेक्ट के लिए एक सपोर्ट का काम भी करेगी.
ओपन AI
AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. ये टेक्नॉलजी हर दिन अपने पैर पसारते जा रही है. जहां एक ओर ये बहुत मददगार है, वहीं भविष्य में इसके खतरनाक साबित होने का डर भी है. कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि मशीन सीखते-सीखते हमसे ज़्यादा पावरफुल हो जाएगी और हमारे खात्मे का कारण भी बन सकती हैं. इलॉन मस्क लंबे अरसे से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों को लेकर वोकल हैं. इसी चिंता के चलते मस्क ने 2015 में ओपन AI की शुरुआत की. ये कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर रिसर्च करती है. इसका मकसद है कि AI मानवता के लिए दोस्ताना और लाभकारी साबित हो.
न्यूरालिंक
इलॉन मस्क आपके दिमाग को मशीन से जोड़ना चाहते हैं. अभी हम या तो हाथ से मशीन कंट्रोल करते हैं या आवाज़ से. मस्क को लगता है कि मशीन से संवाद करने का ये धीमा तरीका है. हम सीधे अपने दिमाग से ही मशीन कंट्रोल कर सकते हैं. इसके लिए मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ब्रेन-मशीन इंटरफेस तैयार कर रही है. यानी ऐसी टेक्नोलॉजी कि एक चिप आपके सिर पर लगाने के बाद आपका दिमाग मोबाइल, कंप्यूटर या अन्य मशीनों से जुड़ जाएगा.

एक रोबॉटिक सर्जिकल मशीन द्वारा दिमाग में चिप लगाई जाएगी.

कॉन्ट्रोवर्सी का चुंबक

मस्क को असल दुनिया का आयरन मैन तो कहा जाता है, लेकिन ये कॉन्ट्रोवर्सी-रहित रहना पसंद नहीं करते.
2018 में इलॉन मस्क ने एक ट्वीट में टेस्ला को प्राइवेट करने की बात लिखी थी. इसके बाद टेस्ला के स्टॉक्स में उथल पुथल मच गई. इसके बाद अमेरिका की सिक्योरिटीज़ एंड ऐक्सचेंज कमिशन (SEC) ने इलॉन मस्क पर मुकदमा चला दिया. इलॉन मस्क पर शेयरधारकों को धोखा देने का आरोप लगा. इसके लिए उन्हें भारी जुर्माना चुकाना पड़ा. और तीन साल के लिए टेस्ला का सीईओ पद छोड़ना पड़ा.
इसके बाद एक और बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी तब हुई जब इलॉन मस्क ने गांजा फूंक लिया. इलॉन मस्क जो रोगन के पॉडकास्ट में बैठे थे. जो रोगन ने एक जॉइंट चलाया और इलॉन मस्क ने उसमें से एक कश मार लिया. और ये मोमेंट कैमरे में रिकॉर्ड हो गया. फिर क्या? हो गया बवाल. इत्ती बड़ी-बड़ी कंपनियों का मालिक और ऑन-कैमरा गांजा फूंक रहा है. कुछ ने सीरियसली लिया, कुछ ने मजे लिए. लेकिन इलॉन मस्क की कंपनियों के स्टॉक उस दिन धड़ाम से गिर गए.

ये तस्वीर अंतत: एक मीम मटेरियल बनकर रह गई.

2020 में कोरोनावायरस के चलते इलॉन मस्क एक ताजी कॉन्ट्रोवर्सी में घिर गए. इन्होंने इसे बिलकुल सीरियसली नहीं लिया. हल्की बायनबाज़ी से लेकर लॉकडाउन के दौरान अपनी कंपनी खोलने फैसलों ने इन्हें विवादों में रखा.
इन सबके बावजूद इलॉन मस्क कई लोगों के लिए एक इंसपिरेशनल फिगर हैं. कुछ के लिए आयरनमैन हैं. कुछ के लिए सुपरह्यूमन हैं. और कई लोग कहते हैं कि ये इंसान नहीं एलियन है. जो भी हो, लेकिन ये बंदा बहुत पोटास वाला है.

09/12/2022
09/12/2022

हरियाणा (Haryana) के रेवाड़ी में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर पहले अपनी प्रेमिका की गोली मारकर हत्या (Rewari Murder Case) कर दी, फिर खुद को भी गोली मार ली. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. सूचना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू की. ये मामला रेवाड़ी के बावल थाने के दुल्हेड़ा खुर्द गांव का है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार नूंह जिले का रहना वाला जगदीश मंगलवार, 6 दिसंबर की रात दुल्हेड़ा खुर्द में अपनी ससुराल पहुंचा. रात साढे 11 बजे वो अपने साले महेश की पत्नी शीतल के कमरे में गया. कमरे में जाकर उसने कमरा अंदर से बंद कर लिया. इसके बाद उसने पहले शीतल को गोली मारी, फिर खुद को गोली मार ली

09/12/2022

झारखंड के बोकारो में शादी से ठीक पहले लड़की को पता चला कि उसका होने वाला पति कथित तौर पर दूसरे धर्म का है इतना ही नहीं खुद को पुलिसकर्मी बताने वाला ये शख्स पहले जेल भी जा चुका है. आरोप है कि 50 साल के असलम ने नाबालिग हिंदू लड़की के परिवार को धोखा देकर उससे शादी करने की कोशिश की. फिलहाल आरोपी फरार है. उसकी गाड़ी से पुलिस की वर्दी भी मिली है.

09/12/2022

चलती ट्रेन में गर्दन में लोहे की रॉड लगने से मरने वाले व्यक्ति के पिता ने रेलवे के 15000 रुपये के मुआवजे को लेने से इनकार कर दिया। रेल मंत्री ने बाद में 5 लाख रुपये की पेशकश की।

आगरा: कथित रूप से रेलवे की लापरवाही के कारण हुई एक दुखद घटना में दिल्ली के एक 32 वर्षीय यात्री हरिकेश कुमार दुबे के गले में पांच फुट लंबी और 1.5 इंच मोटी लोहे की रॉड घुस गई. '12876' नीलाचल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहा था और घटना के समय उसकी सीट पर ही मौत हो गई। रॉड चलती ट्रेन का शीशा तोड़ते हुए उस डिब्बे में घुस गया जहां दुबे बैठा था। घटना के बाद, रेलवे ने मृतक यात्री के परिवार को 15000 रुपये का मुआवजा देने की पेशकश की लेकिन उसके पिता संतराम ने इसे लेने से इनकार कर दिया और कहा, "मुझसे 50,000 रुपये ले लो।"
झटका देने वाला हादसा शुक्रवार सुबह करीब 8:45 बजे हुआ जब ट्रेन यूपी में उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल के दानवार (बुलंदशहर) और सोमना (अलीगढ़) रेलवे स्टेशन के बीच चल रही थी। रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक, ट्रेन करीब 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी।

रेलवे की लापरवाही से पति, पिता और भाई को खोया
दुबे के परिवार के अनुसार, वह अपनी पत्नी शालिनी दुबे और दो बच्चों - सात साल की बेटी और चार साल के बेटे - के साथ आठ साल से अधिक समय से उत्तर-पूर्वी दिल्ली के उपनगर सोनिया विहार में रह रहे थे। महामारी के कारण एक साल से अधिक समय तक बेरोजगार रहने के बाद, उन्होंने हाल ही में एक निजी फर्म में टावर तकनीशियन के रूप में काम करना शुरू किया था। उनकी बहन बबिता त्रिपाठी ने कहा, “चार बहनों सहित आठ भाई-बहनों में वह सबसे छोटे थे। उनका जन्मदिन 5 दिसंबर को था और हम इसे मनाने की योजना बना रहे थे। रेलवे की लापरवाही के कारण हमने उन्हें हमेशा के लिए खो दिया।

रेलवे ने मृतक के परिवार को 15,000 रुपये के मुआवजे की पेशकश की थी। हालांकि, पिता संतराम ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बदले उन्होंने कहा, 'मुझसे 50 हजार रुपए ले लो।' शनिवार देर शाम रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की.
संतराम ने कहा, 'रेलवे प्रशासन की लापरवाही के कारण मेरे बेटे की जान चली गई है। अब रेलवे मुझे 15 हजार रुपये का मुआवजा देकर मेरे बेटे की मौत का मजाक उड़ा रहा है। इस बीच रेलवे अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और अपने बेटे का शव लेकर लौट गए.
संतराम ने मृतक की बहू व पत्नी को नौकरी व मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने बताया कि मृतक हरिकेश के दो छोटे बच्चे हैं। अब वे कैसे जीवित रहेंगे?

डीएम कार्यालय का दौरा करेंगे
मृतक के पिता संतराम ने पहले तो शव लेने से इनकार कर दिया और बेटे की मौत के लिए न्याय की मांग की. इसके बाद जीआरपी और आरपीएफ की फोर्स मौके पर पहुंचकर शोकाकुल पिता को रेलवे द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा स्वीकार करने के लिए मना लिया, लेकिन उसने मना कर दिया और कहा कि वह न्याय की मांग करने के लिए सुल्तानपुर में डीएम कार्यालय का दौरा करेगा.
संतराम का कहना है कि रेलवे की लापरवाही के कारण उनके बेटे की जान गई है। वह सुल्तानपुर जाएंगे और डीएम कार्यालय पर धरना देंगे। जब तक बेटे और परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा। यह सब शाम तक चलता रहा, जिसके बाद पीड़िता के परिजन शव लेकर लौट गए।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चलती ट्रेन में रॉड कैसे घुसा
हादसे के वक्त नीलांचल एक्सप्रेस जिस रेलवे ट्रैक से गुजरी थी, उसे सुबह 9 बजे से ब्लॉक किया जाना था. इस दौरान यहां से गुजरने वाली ट्रेनों की गति को नियंत्रित करना होगा। इनका रूट भी बदल दिया जाता, लेकिन साइट पर निर्माण कार्य सुबह 8:35 बजे शुरू हुआ। इसी बीच नीलांचल एक्सप्रेस 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इलाके से गुजरी.
जीआरपी इंस्पेक्टर सुबोध यादव ने बताया कि सब्बल के ट्रेन के अंदर जाने की गुत्थी पूरी तरह से नहीं सुलझी है. लेकिन, शुरुआती जांच में पता चला है कि मजदूर ट्रैक को उठाने के लिए सब का इस्तेमाल कर रहे थे. तभी वह मजदूर के हाथ से फिसल कर घटनास्थल से गुजर रही ट्रेन के अंदर जा गिरी जिससे हरिकेश की मौत हो गयी.

06/12/2022

चेक बाउंस मामले में दोषी को एक साल की कैद
न्यायधीश हरजोत कौर की अदालत ने चेक बाउंस मामले में एक व्यक्ति को एक साल व चेक अमाउंट की सजा सुनाई है। श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के एडवोकेट दीपक बराड़ व ब्रांच कलेक्शन मैनेजर विनोद कुमार ने बताया कि उनकी कंपनी ने सदलपुर निवासी जगदीश को वाहन खरीदने के लिए वर्ष 2015 में लोन दिया था, जिसकी एवज में जगदीश ने कंपनी को 359666 रुपये के दो चेक दिए थे।
एडवोकेट दीपक बराड़ ने बताया कि जब जगदीश द्वारा दिए गए चेक को कंपनी ने बैंक में लगाया तो चेक बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी द्वारा ये मामला कोर्ट में डाला गया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई में दोनों पक्षों के पक्ष सुनने के बाद जगदीश को चेक बाउंस मामले में दोषी करार देते हुए एक साल व चेक अमाउंट की सजा सुनाई है।

06/12/2022

Hisar News: 5 माह की गर्भवती महिला से दुष्कर्म के प्रयास के दोषी को तीन साल की सजा

हिसार। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश महता की अदालत ने पांच माह की गर्भवती महिला के साथ दुष्कर्म प्रयास और मारपीट करने के दोषी को 3 साल की सजा सुनाई है। दोषी पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस संबंध में पीड़िता ने 11 जुलाई 2018 को हांसी महिला थाना पुलिस में शिकायत दी थी। पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार पुलिस को दी गई शिकायत में हांसी की रहने वाली पीड़िता का कहना है था कि वह 12वीं पास है और पांच महीने की गर्भवती है। 11 जुलाई 2018 को सुबह आठ बजे घर की छत पर कपड़े सूखाने गई थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला युवक छत पर आया और मुझे बुरी नीयत से पकड़ लिया और मेरे साथ दुष्कर्म का प्रयास करने लगा। जब विरोध किया तो मारपीट और धक्का देकर जाल पर फेंक दिया। जिस कारण चोटें आई। बाद में आरोपी मौके से फरार हो गया। उक्त मामले में अदालत ने दोषी को 3 साल की सजा सुनाई

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