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राजनैतिक और सामाजिक सरोकार के मुद्दे जो बाकी के मीडिया संस्थान राजनैतिक दबाव में आपसे छुपाते है
राजनैतिक और सामाजिक सरोकार के मुद्दों का ऐसा पहलू आप तक पहुंचाना जो बाकी के मीडिया संस्थान किसी राजनैतिक दबाव या मज़बूरीवश आपसे छुपाते है I
23/10/2024
हिसार जिले के किनाला गाँव का रितेश कुण्डू जर्मनी की भरेगा उड़ान
रितेश को जर्मनी फ्री पढ़ाई के साथ मिलेगी लाखों रुपए महीना स्कॉलरशिप
हरियाणा सरकार में पूर्व मंत्री रहे मनीष ग्रोवर और उनके बेटे पर हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार सुनील राहड़ को जान से मारने की धमकी देने का एक मामला सामने आया है. हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार सुनील राहड़ अपने फोटोग्राफर मनोज ढाका के साथ ग्रोवर के आवास पर अपॉइंटमेंट लेकर एक इंटरव्यू के लिए पहुंचे थे. जैसे ही सुनील पूर्व मंत्री के आवास पर पहुंचे तो ग्रोवर के बेटे ने उन्हें सबक सिखाने की धमकी दे डाली. ग्रोवर का बेटा अपने पिता के लिए सुनील द्वारा पूर्व में लिखी गई किसी एक खबर के संदर्भ में यह धमकी दे रहा था. कुछ समय बाद जब मनीष ग्रोवर घर पर पहुंचे तो उन्होंने भी इसी रवैए को आगे बढ़ाते हुए सुनील के साथ बदतमीजी की और धमकी दी.
जैसे तैसे करके HT का यह पत्रकार अपने कैमरामैन के साथ वहां से बाहर निकाला तो मंत्री के 10-12 गुंडो ने उन्हें बीच रास्ते में घेर लिया और गंदी-गंदी गालियां देने लगे. साथ ही पूर्व में पिता पुत्र द्वारा दी गई धमकी को भी उन्होंने भी कई बार दोहराया.
हरियाणा प्रदेश सियासत हो या संस्कृति, अदब के लिए जाना जाता है. यहां घर आए दुश्मन से भी ऊँची आवाज़ में बात नहीं की जाती लेकिन सरकार में रहे एक पूर्व मंत्री, उनके बेटे और समर्थक किसी अंग्रेजी अखबार के प्रतिष्ठित पत्रकार के साथ इस प्रकार का रवैया अपनाते हुए धमकी दे यह सरासर गलत है.
सत्ताधारी पार्टी बीजेपी और सूबे के मुख्यमंत्री को इस कुकृत्य पर कड़ा संज्ञान लेना चाहिए. लोकतंत्र के प्रहरियों को दबाव की राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि यह अछा होता कि कुछ सद्कर्म करें ताकि अवाम उनके लिए अच्छा सोचे… और जब सब जगह अच्छा दिखेगा तो पत्रकार भी अच्छे को अच्छा ही लिखेगा… क्योंकि पत्रकार समाज का आईना होता है जिसमे जो जैसा है वैसा ही दिखाई देता है.
- Rudra Rajesh Singh
06/03/2024
https://theuniquebharat.com/chankay-niti-story/
चाणक्य नीति: हमारे आस-पास मौजूद ऐसे नीच व्यक्तियों से बचना ही सही है, जानिए - The Unique Bharat चाणक्य नीति: हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग रहते हैं, जो बहुत ही नीच हरकत करते हैं। ऐसे लोग हमें परेशानी में डालने के अल....
20/12/2023
21/10/2023
Jat Trade Center मेले के स्टॉल नंबर 22 पर आपकी सेवा में मौजूद SkyTech Destination की पूरी टीम...
- Rajesh Kundu
थोड़ा लंबा है लेकिन पूरा लेख पढ़ने से पहले एक तारीख मार्क कर लें जो है 10 अक्टूबर 2023....
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हम आज तक सिर्फ यह पढ़ते आए हैं और पढ़ाई की उम्मीद मात्र इतनी रही है कि इसके बेसिस पर हमें कोई नौकरी मिल जाए. एक वक्त था जब मां-बाप यह कहा करते कि मैट्रिक पास कर जाओ नौकरी मिल जाएगी और यह सब सिर्फ बातें नहीं थी बल्कि उस भले वक्त में दसवीं पास कोई विरला ही गांव या शहर में ऐसा रहा होगा जिसे नौकरी न मिली हो.
बदलते समय के साथ यह योग्यता मैट्रिक से 10+2 हो गई, फिर ग्रेजुएशन को लेकर कयास लगाए जाने लगे... उसके बाद MA और B.Ed का बोलबाला रहा. कहा जाता था कि अगर बच्चे ने एमए और बीएड कर ली तो नौकरी मिल ही जाएगी, दसवीं-बाहरवीं पास तो दुनिया घूम रही है. फिर NET को लेकर खूब सारी मारामारी रही और उसके बाद कुछ गिने चुने लोग PHD तक के सफर को तय करते-करते 25 से 30 साल की उम्र के पायदान में कूदते रहे और उन्हें लगता था की एचडी और नेट करने से वो प्रोफेसर बन सकते हैं.
यह भागते वक्त का तकाजा ही था कि इस अंधी दौड़ में लोगों ने अपनी सुविधानुसार और उम्मीद से कुछ विषयों का चयन भी किया. कुछ को लगता था कि मैथ अगर आपके पास है तो आप इस में कामयाब हो सकते हैं वहीं कुछ लोग अपने बच्चों को किसी अन्य सब्जेक्ट की दौड़ में दौड़ा रहे थे.
यह दौड़ यही नहीं रुकी बल्कि कुछ प्रोफेशनल और टेक्निकल कोर्सेज भी इस रेस में कूदे. पहले वोकेशनल ट्रेनिंग आई, साथ में आईटीआई भी एक हुनरमंद बच्चों की प्लेसमेंट का सबसे बड़ा सेक्टर हुआ करता था. उसके बाद पॉलिटेक्निक का एक दौर आया और पॉलिटेक्निक में डिप्लोमा के लिए सैकड़ो की संख्या में हर राज्य में डिप्लोमा के इंस्टीटूट रूपी दुकान खुली जहां इस कोर्स में दाखिला की बोलियां लगा करती थी. फिर जमाना थोड़ा आगे बढ़ा तो इसकी जगह बीटेक ने ले ली.
इस कहानी का सार यह है कि इन तमाम एफर्ट का रिजल्ट आज जीरो है क्योंकि नौकरियां है ही नहीं. नौकरियां क्यों नहीं है उसका सीधा सा जवाब है कि सरकारी नौकरियां लगभग खत्म हो चुकी है और प्राइवेट सेक्टर को लेकर हमने डिग्रियां तो प्राइवेट संस्थानों मोटी फीस के साथ हासिल की लेकिन हम महंगी फीस देते देते वहां से हुनर लेना भूल गए. प्राइवेट इंडस्ट्री आप में योग्यता और प्रमाण पत्र दोनों मांगती हैं लेकिन हमारे पास सिर्फ सर्टिफिकेट हैं.
पूर्व में हम जिसके हिस्सा थे और वर्तमान में जो हमारा पड़ोसी सूबा है जिसको हम पंजाब कहते है. वहां से होते-होते एक नया रोजगार का माध्यम हम लोगों तक इस आधुनिक जमाने में थोड़ा लेट पहुंचा है जिसे हम विदेश में पढ़ाई के नाम पर जाकर नौकरियां करना कहते है लेकिन एक कड़वा सच है कि हमारे 99.99 प्रतिशत बच्चे नहीं जानते कि विदेश में जाकर रोजगार कैसे पाया जाए या फिर किस तरीके का रोजगार उन्हें वहां मिलेगा.
हमारे बच्चे सिर्फ सुनी सुनाई बातों का अनुसरण करते हुए अपने मां-बाप की जमीनों तक को बेचकर विदेश में जाने की जिद लगाते हुए बर्बाद हो रहे हैं. उन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि वह जिस देश में जा रहे हैं वहां की असल स्थिति क्या है. वो सिर्फ अपने यार दोस्तों से इस बारे में सुनकर आए हुए होते हैं या फिर गांव गुहांड से अगर कोई बच्चा विदेश गया है तो उसकी इंस्टाग्राम पर रील को देखकर आनंदित व उत्साहित होकर अपने मां-बाप को ब्लैकमेल कर रहे होते हैं कि मुझे तो वही जाना है.
इस सब का कारण ये है कि विदेश में बैठा गांव-गुहाण्ड का बच्चा शो ऑफ के लिए किसी महंगी गाड़ियों में बैकग्राउंड में बज रहे म्यूजिक के साथ रील डाल रहा होता है जिसे देखकर आपका बच्चा कहता है कि दो-चार-पांच महीने में ही भाई ने तो अपनी कमाई से लाखों-करोड़ों रुपए की गाड़ी ले ली है. यकीन मानिए यह किसी विज्ञापन को देखकर किसी प्रोडक्ट को खरीदने जैसा है. यह ठीक वैसा ही है की कोई सुप्रसिद्ध अभिनेत्री किसी साबुन से नहाते हुए टीवी पर प्रचार तो कर रही है लेकिन असल मायने में वह उसे यूज़ नहीं करती है.
ऊपर लिखी लंबी-चौड़ी बातों का सार आपको कोई आध्यात्मिक संदेश देने का बिल्कुल भी नहीं है बल्कि यह है कि आप या आपका अपना कोई बच्चा विदेश में या अपने देश मे पढ़ाई करने का सपना देख रहा है तो उसे उस क्षेत्र में पूरी खोजबीन करके ही डालें, उसे नौकरी की संभावना का सपना ना दिखाएं बल्कि पहले उसे नौकरी मिले और फिर उसे नौकरी के लिए आप या आपके बच्चे स्किल पैदा करें यही मौजूदा हालात में कामयाबी का एकमात्र सार है.
वैसे तो विदेश के काफी देश में बहुत सारी संभावनाएं हैं लेकिन जिन देशों के बारे में आप जानते हैं वहां बहुत ज्यादा भीड़ हो चुकी है क्योंकि विदेश जाने का यह ट्रेंड आप तक काफी लेट पहुंचा है. फिर भी काफी रिसर्च के बाद हम लोग इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि दुनिया के तमाम देशों में सबसे ज्यादा स्किल्ड प्रोफेशनल की शॉर्टेज को झेल रहा एक देश है जर्मनी... यह देश एक बूढ़ा देश कहलाता है क्योंकि यहां के लोगों की जनसंख्या में सर्वाधिक लोग 57 साल के है. हम सब जानते हैं कि युवा शक्ति के बगैर किसी का काम नही चल सकता और इस देश में युवाओं की सबसे ज्यादा कमी है.
हम सब इस कमी का फायदा उठा सकते हैं क्योंकि इन्होंने इसके अकॉर्डिंग ही अपनी पॉलिसीज डिजाइन की है. किसी भी बच्चों की अगर 18 से 28 साल के बीच में उम्र है और वह 10+2 पास है तो वो इस देश में सिर्फ जर्मन भाषा सीख कर यहां मूव हो सकता है. जर्मनी में जाने से पहले आपको नौकरी ऑफर की जाती है, फ्री ऑफ कॉस्ट एजुकेशन ऑफर की जाती है, रहने-खाने-पीने के लिए लाखों रुपए स्कॉलरशिप ऑफर की जाती है. उसके बाद वहां परमानेंट रेजिडेंसी पाना भी बेहद ही आसान है और बहुत कम समय में उसे पाया जा सकता है.
ऐसा माना जाता है कि यूरोप में जर्मनी का पासपोर्ट सबसे ज्यादा मजबूत है. ये लोग पहले आपको नौकरी देते हैं, उसके बाद फ्री में पढ़ाई करवाते हैं, रहने-खाने का खर्च देते हैं और PR भी देते हैं. मेरा यह सब लिखने का मकसद मात्र इतना है कि आप 20-30-40-50 लाख रुपए खर्च करके विदेश में अंधेरे में तीर ना मारे. अगर आप वहां जाने में कामयाब हो भी गए तो जाकर करनी मजदूरी ही पड़ती है. जर्मनी आपको Nursing, Hotel Management, Veterinary, Logistic, Retails and Sales, Agronomy जैसे बेहद सम्मानित प्रोफेशन में इनवाइट कर रहा है.
पूरे प्रदेश में लाखों बच्चे 12वीं पास करके गलियों में घूम रहे हैं, उन्हें सिर्फ एक भाषा सीखने की जरूरत है. जिसको सीखने में मात्र 6 महीने का वक्त लगता है और यह बहुत मुश्किल नहीं है. अगर आप या आपका कोई अपना इन तमाम पैरामीटर को पूरा करता है और जर्मनी में सेटल होना चाहता है तो हमारे कैंपस को विजिट कर सकता है.
जर्मनी में सेटल होने के लिए किसी भी कोर्स को चूज कर आप खुद को इनरोल कर सकते हैं और सितंबर 2024 इंटेक के लिए आखिरी तारीख 10 अक्टूबर 2023 है. वर्तमान वेकेंट पोजीशन का अगर सही आकलन करें तो अनुमान है कि इसके बाद आए हुए बच्चे जनवरी 2025 इंटेक में ही इनरोल हो पाएंगे.
- Rajesh Kundu
SkyTech Destination
#83-P, Sector - 15A
Hisar - 125001
Mobile - 8950000058
27/09/2023
जर्मनी से वेटेरनरी असिस्टेंट की निशुल्क 3 साल की डिग्री करके वहीं पर 36 लाख रुपए सालाना के पैकेज पर जॉब का एक अच्छा ऑफर है.
इस कोर्स में किसी भी संकाय से 10+2 पास स्टूडेंट दाखिला ले सकते है. 3 साल तक पढ़ाई निशुल्क रहने के साथ-साथ 1200 यूरो (लगभग एक लाख 10 हजार) रुपए स्कॉलरशिप भी स्टूडेंट को मिलेगी.
इस कोर्स की मात्र दो सीटें ही उपलब्ध है. अपनी सीट बुक करने या इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमारे कैंपस को विजिट करें.
SkyTech Destination
#83-P, Sector - 15A
Hisar
Mob. - 9312593126
हरियाणा का यह पत्रकार स्टूडेंट को जर्मनी में दिलवा रहा है फ्री एजुकेशन और एक लाख रुपए प्रति माह से अधिक स्कॉलरशिप...
एडमिशन के लिए कॉल करें - 9312593126
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03/07/2023
दसवीं कक्षा का एक छात्र जिसका नाम गुरसेवक पुत्र श्री कश्मीर सिंह, गांव कलोठा, रतिया (फतेहाबाद) है वो खारा खेड़ी गांव के जवाहर नवोदय विद्यालय से आज सुबह की पीटी के बाद अचानक निकल गया.
जिस किसी को भी इस छात्र के बारे में सूचना मिले तो 9802616555 पर कॉल कर स्कूल प्राचार्य श्री अनूप कुमार जी को सूचना देने का कष्ट करें.
आपसे अनुरोध है कि इस सूचना को अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स में साझा करें ताकि बच्चे को ढूंढा जा सके.
धन्यवाद
01/07/2023
⭕ क्या आप पढ़े-लिखे होने के बावजूद बेरोजगार है?
⭕ क्या आप स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, कंप्यूटर या फिर CSC सेंटर इत्यादि चलाते हैं?
तो फिर आपके लिए जीरो कॉस्ट पर Student VISA में फ्रैंचाइज़ी लेकर कैरियर को चुनने का ऑप्शन उपलब्ध है.
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Rudra Rajesh Singh - 93125 93126
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