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08/06/2024
वो साल 1987 था। सिंथॉल साबुन के विज्ञापन में पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान नज़र आए। उस ज़माने में इमरान खान का जलवा हुआ करता था। इसलिए गोदरेज ने इमरान खान को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया। वो दौर कुछ ऐसा था कि अन्य ब्रांड्स और सिंथॉल साबुन के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। इसिलिए आदि गोदरेज की पत्नी परमेश्वर गोदरेज खुद सिंथॉल के विज्ञापनों पर अपनी नज़र रखती थी। परमेश्वर गोदरेज सिंथॉल के लिए एक बढ़िया सा विज्ञापन चाहती थी। और उनका टार्गेट कंज़्यूमर महिलाएं थी। उनकी ख्वाहिश के मुताबिक एक मॉडल के साथ सिंथॉल का एक विज्ञापन शूट किया गया। लेकिन वो विज्ञापन उन्हें पसंद नहीं आया।
परमेश्वर गोदरेज ने एड फिल्ममेकर शांतनु शौरी को बुलाया और उन्हें एड बनाने की ज़िम्मेदारी दी। परमेश्वर चाहती थी कि जो कंटेंट शूट हुआ है शांतनु उसे फिर से एडिट करके एक बढ़िया सा एड तैयार करें। लेकिन फुटेज देखने के बाद शांतनु ने हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि ये बहुत बुरी तरह से शूट हुआ है। इसलिए बेहतर होगा कि एड को फिर से शूट किया जाए। परमेश्वर गोदरेज को भी शांतनु का सुझाव सही लगा। फिर एक दिन परमेश्वर ने शांतुन को बताया कि एड में स्टार पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान को फीचर किया जाएगा। शांतनु को इमरान खान को एड में फीचर किया जाना अजीब लगा।
शांतनु ने परमेश्वर गोदरेज से इमरान खान के नाम पर फिर से विचार करने को कहा। पर चूंकि उन दिनों सभी को भारत और पाकिस्तान के रिश्ते थोड़े बेहतर होने की उम्मीद लग रही थी तो परमेश्वर गोदरेज का मानना था कि इमरान की लोकप्रियता का फायदा उठाया जा सकता है। उस ज़माने में इमरान की भारत में भी खासी फैन फॉलोइंग थी। विशेषकर महिलाओं के बीच। परमेश्वर गोदरेज की ख्वाहिश के मुताबिक शांतनु शौरी ने इमरान खान को सेंटर में रखकर एक स्क्रिप्ट लिखी। और वो स्क्रिप्ट परमेश्वर की तरफ से फाइनल भी कर दी गई।
1987 के अक्टूबर-नवंबर में हुआ क्रिकेट विश्वकप भारत और पाकिस्तान ने मिलकर आयोजित किया था। 26 अक्टूबर 1987 के दिन जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज़ के बीच मुकाबला होना था। पाकिस्तान के कप्तान इमरान खान भी ये मैच देखने भारत आए। हालांकि उनका मुख्य उद्देश्य था सिंथॉल का विज्ञापन शूट करना। परमेश्वर गोदरेज ने शांतनु शौरी को भी जयपुर बुला लिया। मैच सुबह साढ़े नौ बजे शुरू होना था। यानि एड शूट करने के लिए उन्हें सिर्फ एक घंटा मिला था। वो भी मैच से पहले। यानि हर हाल में सुबह साढ़े सात बजे शूट शुरू करके साढ़े आठ बजे तक खत्म करना था। अपने दो कैमरामैन को साथ लेकर शांतनु शौरी ने 45 मिनट में पूरा एड शूट कर लिया।
कुछ ही दिन बाद एड को तैयार करके दूरदर्शन पर रिलीज़ किया गया। एड पर सबकी नज़रें जमी। काफी चर्चाएं हुई। एड वाकई में पसंद किया गया। सिंथॉल साबुन की सेल में ज़बरदस्त उछाल आया। सिंथॉल के कॉम्पिटीटर्स ने भी एड को सीरियसली लिया। हिंदुस्तान यूनिलीवर का ब्रांड रैक्सोना भी उन दिनों ब़़ा मशहूर था। सुनने में आया कि रैक्सोना के नए एड पर तेज़ी से काम शुरू कर दिया गया है। मगर एड एजंसी के उस वक्त के जानकारों का मानना था कि इमरान खान की प्रज़ेंस ने सिंथॉल को बहुत ऊंचाईयों पर पहुंचा दिया है। फिलहाल उससे मुकाबला करना किसी दूसरे ब्रांड के लिए आसान नहीं होगा।
तभी भारत और पाकिस्तान के रिश्ते फिर से खराब होने शुरू हो गए। इमरान खान वाले एड का प्रसारण रोकना पड़ गया। परमेश्वर गोदरेज के लिए वो एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई। उन्हें किसी भी सूरत में एड कंटीन्यू करना था। लेकिन इमरान खान वाला एड तो अब खत्म हो चुका था। ऐसे में ज़रुरत थी एक नए एड शूट की। और उस नए एड में किसी ऐसे चेहरे की जो इमरान खान की टक्कर का लगे। एक विदेशी एड फिल्म कंपनी को नया एड बनाने की ज़िम्मेदारी देने पर विचार किया जाने लगा। उस कंपनी के लोगों से एक मीटिंग फिक्स की गई जो भारत में ही होनी थी।
परमेश्वर गोदरेज के साथ शांतनु शौरी भी उस मीटिंग में हिस्सा ले रहे थे। जबकी परमेश्वर गोदरेज के पति और गोदरेज ग्रुप के चेयरमैन आदि बुरोरजी गोदरेज भी मीटिंग में मौजूद थे। उस विदेशी कंपनी के लोगों ने आईडिया दिया कि एड की स्टोरी लाइन फैमिली बेस्ड होगी। मगर परमेश्वर गोदरेज को वो आईडिया पसंद नहीं आया। उन्होंने शांतनु शौरी की तरफ देखा। मानो वो उनसे पूछना चाह रही हों कि तुम्हारा क्या विचार है। शांतनु ने भी इशारों में बता दिया कि उन्हें भी आईडिया पसंद नहीं आया। शांतनु और परमेश्वर गोदरेज मीटिंग रुम से बाहर चले आए।
बाहर आकर परमेश्वर गोदरेज ने शांतनु से पूछा कि क्या तुम्हारे दिमाग में कोई आईडिया है? उस वक्त शांतनु शौरी ने परमेश्वर गोदरेज को विनोद खन्ना के नाम का सुझाव दिया था। विनोद खन्ना, जो कुछ साल पहले फिल्मों से संन्यास लेकर ओशो के अमेरिका वाले आश्रम चले गए थे, वो अब वापस लौट चुके थे। उन्होंने कुछ फिल्में साइन भी कर ली थी। और चर्चा थी कि विनोद खन्ना फिर से वही पहले जैसा स्टारडम हासिल कर लेगे। उस समय विनोद खन्ना के बारे में फिल्म इंडस्ट्री में हर तरफ बातें हो रही थी। शांतनु गोदरेज को भी विनोद खन्ना का नाम सही लगा।
परमेश्वर गोदरेज और शांतनु मीटिंग रूम में वापस गए और परमेश्वर गोदरेज ने रूम में घुसते ही अपने पति आदि गोदरेज से कहा कि शांतनु और मैं एक बहुत बढ़िया आईडिया लाए हैं। हमने विनोद खन्ना को एड में लेने के बारे में सोचा है। मीटिंग में बैठा हर इंसान ये सुनकर दंग रह गया। क्योंकि उनमें से किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि परमेश्वर गोदरेज विनोद खन्ना को एड में लेने की बात कर रही हैं। वो विनोद खन्ना जो कुछ साल पहले सबकुछ छोड़ छाड़कर संन्यासी बन गए थे। और उन लोगों का ऐसा सोचना लाज़िमी भी था। क्योंकि उन लोगों को नहीं पता था कि जब से विनोद खन्ना ने वापसी की है तब से वो गॉसिप्स का हॉट टॉपिक बने हुए हैं। परमेश्वर गोदरेज को विनोद खन्ना को ना लिए जाने की सलाह दी गई। लेकिन वो विनोद खन्ना के नाम पर मुहर लगा चुकी थी।
आखिरकार परमेश्वर गोदरेज की बात सबको माननी पड़ी। माननी ही पड़ती। मीटिंग खत्म होने के बाद विनोद खन्ना से संपर्क किया गया और उन्हें सिंथॉल के कमर्शियल में फीचर होने का ऑफर दिया गया। विनोद खन्ना ने भी फौरन वो ऑफस स्वीकार कर लिया। परमेश्वर ने शांतनु शौरी से पूछा कि शूट कैसे किया जाएगा? शांतनु ने आईडिया दिया कि विनोद खन्ना को नीली जींस व नीली शर्ट पहनाकर घुड़सवारी करते हुए फिल्माया जाएगा। और घोड़े पर सिर्फ लगाम होगी। घुड़सवारों के बैठने वाली सीट नहीं होगी।
परमेश्वर को भी ये आईडिया अच्छा लगा। तय हुआ कि जुहू बीच पर सुबह दिन निकलते ही शूट शुरू कर दिया जाएगा। शेड्यूल बना दिया गया और विनोद खन्ना जी को भी सूचना दे दी गई कि उन्हें फलां दिन फलां वक्त लोकेशन पर पहुंचना है। लेकिन शूट का पहला दिन बर्बाद हो गया। वो इसलिए क्योंकि विनोद खन्ना सुबह-सुबह पहुंचे ही नहीं। वो लगभग 10 बजे लोकेशन पर पहुंचे। जबकी शांतनु शौरी चाहते थे कि शॉट सूर्योदय के समय लिया जाए। शांतनु ने विनोद खन्ना से कहा कि अब तो शूट नहीं हो सकेगा। विनोद खन्ना ने शांतनु को उसी समय शूट करने के लिए मनाने की कोशिश की। लेकिन शांतनु नहीं माने। उन्हें सुबह का शॉट ही चाहिए था।
परमेश्वर गोदरेज ने भी शांतनु का समर्थन किया। और उन्होंने विनोद खन्ना से कहा कि तुम चाहो तो हमारे बीच हाउस में ही रात को रुक जाओ। सुबह जल्दी उठकर यहीं शूट कर लेना। विनोद खन्ना को ये आईडिया सही लगा। वो राज़ी हो गए। उस रात वो गोदरेज के बीच हाउस में ही रुके। अगले दिन विनोद खन्ना सुबह जल्दी उठ गए और शांतनु शौरी ने कुछ ही देर में शूट कंप्लीट कर लिया। शूटिंग के वक्त पूरी यूनिट मौजूद थी जिनमें कुछ कैमरामैन, घोड़ों के ट्रेनर्स व कुछ असिस्टेंट्स भी थे। शांतनु एक ऐसा शॉट भी फिल्माना चाहते थे जिसमें विनोद खन्ना घोड़े के साथ बीच किनारे फुल मस्ती में दौड़ते दिखें और फिर उछलकर घोड़े पर बैठ जाएं। उन्होंने विनोद खन्ना से इस सीन के बारे में बात की। विनोद खन्ना भी बेझिझक वो सीन शूट करने को राज़ी हो गए। और आठ से दस टेक में वो शॉट ओके हो गया।
अगर आपने विनोद खन्ना वाला सिंथॉल का वो एड देखा होगा तो आपने नोटिस किया होगा कि बीच के बाद विनोद खन्ना एक ब्लैक कलर का सूट पहनकर मर्सिडीज़ गाड़ी से एक बंगले से निकलते हुए नज़र आते हैं। वो सीन गोदरेज वालों के बीच हाउस में ही शूट किया गया था। और वो मर्सिडीज़ भी गोदरेज वालों की ही थी। अगर आपने ये एड नहीं देखा है तो यूट्यूब पर ये आपको मिल जाएगा। देखिएगा ज़रूर। इमरान खान वाला एड भी मिल जाएगा।
साल 1989 में विनोद खन्ना वाला सिंथॉल साबुन का एड दूरदर्शन पर रिलीज़ कर दिया गया। विनोद खन्ना को उस एड में बहुत पसंद किया गया। सबने माना कि अगर ये एड इमरान खान वाले एड की टक्कर का बना है तो उसकी वजह है विनोद खन्ना जी का उसमें फीचर होना। उस एड से सिर्फ गोदरेज कंपनी को ही नहीं, विनोद खन्ना को भी तगड़ा फायदा हुआ था। क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में भी विनोद खन्ना और उस एड की बहुत चर्चा हो रही थी।
अखबारों व मैगज़ीनों तथा पोस्टर्स व होर्डिंग्स के लिए भी विनोद खन्ना की कई तस्वीरें खींची गई थी। और वो तस्वीरें शांतनु शौरी ने खुद खींची थी। एड की टैगलाइन अंग्रेजी में दी गई जो थी "I use Cinthol. Do You?" विनोद खन्ना उस एड में छा गए। कस्टमर्स को किराना स्टोर्स पर ये कहते हुए काफी सुना जाता था कि वो विनोद खन्ना वाला साबुन चाहिए।
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27/04/2024
आज किस्सा कहा जाएगा उस दौर का। जब इंटरनेट और सोशल मीडिया का तो लोग नाम भी नहीं जानते थे। और तो और, टीवी भी भारत के उन घरों में ही होते थे जो सभ्रांत माने जाते थे। जी हां, ये कहानी है 70 के दशक के मध्य की यानि मिड सैवनटीज़ के दौर की। और ये कहानी है लिरिल साबुन के उस एडवर्टाइज़मेंट की जिसने भारत में इस इंडस्ट्री का स्वरूप पूरी तरह से बदलकर रख दिया। लिरिल साबुन के विज्ञापन की कहानी इसके बनने से भी पहले शुरू होती है।
उन दिनों सपनों के शहर मुंबई में बारिश का मौसम था। कैलाश सुरेंद्रनाथ नाम का एक नौजवान अपनी कार से मुंबई के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज जा रहे थे। रास्ते में उनकी मुलाकात एक महिला से हुई जो टैक्सी का इंतज़ार कर रही थी। वो महिला लिंटास नाम की एडवरटाइज़िंग एजेंसी पहुंचना चाहती थी। चूंकि लिंटास कंपनी रास्ते में ही थी तो कैलाश ने उस महिला को लिफ्ट ऑफर की। वो महिला कैलाश की गाड़ी में बैठ गई।
रास्ते में बातचीत के दौरान सुरेंद्रनाथ ने उस महिला को बताया कि एडवर्टाइज़िंग इंडस्ट्री में उनका करियर हाल ही में शुरू हुआ है। उस महिला ने कैलाश से उनका पोर्टफोलियो दिखाने को कहा। दरअसल, वो महिला लिंटास कंपनी की फिल्म चीफ मुबी इस्माइल थी। ये वही दौर था जब HUL यानि हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड अपना एक नया साबुन बाज़ार में लॉन्च करने की प्लानिंग कर रहा था। उस साबुन का नाम था लिरिल।
जी हां वही लिरिल जिसे भारत का पहला लाइम सोप भी कहा जाता है। HUL इस साबुन को हर हाल में हिट कराना चाहता था। यही वजह है कि उन्होंने इस साबुन का विज्ञापन बनाने की ज़िम्मेदारी लिंटास कंपनी को दी। यूं तो लिंटास अपने फील्ड का स्थापित नाम थी। लेकिन लिरिल साबुन का विज्ञापन बनाना इस कंपनी के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण काम था। HUL ने लिरिल साबुन की थीम रखी थी ताज़गी, तो ज़ाहिर है इसके विज्ञापन में ऐसे ही किसी चेहरे की ज़रूरत थी जिसे देखकर ताजगी का अहसास होता हो।
सो मुबी इस्माइल ने कैलाश सुरेंद्रनाथ को इस विज्ञापन को बनाने की ज़िम्मेदारी दी। यानि कैलाश सुरेंद्रनाथ को पता ही नहीं था कि उस दिन वो किसी अंजान महिला को नहीं बल्कि अपनी किस्मत को लिफ्ट दे रहे हैं। बहरहाल, जहां एक तरफ मुबी इस्माइल का ये ऑफर कैलाश सुरेंद्रनाथ के लिए एक शानदार ऑपोर्च्युनिटी था। तो वहीं एक बड़ी चुनौती भी था। लेकिन कैलाश सुरेंद्र नाथ ने इस चुनौती का सफलता के साथ सामना किया और इसे निपटाया भी। कैसे? चलिए जान लेते हैं।
कैलाश सुरेंद्रनाथ को लिंटास की तरफ से ज़िम्मेदारी दी गई थी कि उन्हें इस साबुन के लिए किसी बढ़िया से फेस को तलाशना है और एड को शूट करने के लिए एक खूबसूरत लोकेशन भी ढूंढनी है। उन्होंने तुरंत अपना काम शुरू कर दिया और ऑडिशन स्टार्ट कर दिए। कैलाश ने 25-30 लड़कियों को एक साथ जुहू बीच पर बुलाया और उनसे समुद्र की लहरों में अठखेलियां करने को कहा। उन्होंने उस पूरे इवेंट को शूट भी किया। लेकिन उन्हें किसी भी लड़की में वो स्पार्क नहीं दिखा जो उनकी नज़रें ढूंढ रही थी।
उसी दिन शाम को वो मुंबई के यूएस क्लब में गए थे। वहीं पर कैलाश सुरेंद्रनाथ की मुलाकात हुई करेन लुनेल से जो उस वक्त महज़ 18 साल की थी और डिप्पीज़ नाम के एक जूस ब्रांड के लिए मॉडलिंग कर चुकी थी। उस जूस ब्रांड के विज्ञापन में करेन लुनेल ने बिकनी पहनी थी। सुरेंद्रनाथ को लिरिल साबुन के एड के लिए करेन लुनेल एकदम पर्फेक्ट लगी। उन्होंने करेन लुनेल को लिरिल एड में काम करने का ऑफर दिया और करेन ने भी तुरंत कैलाश सुरेंद्रनाथ का ऑफर स्वीकार कर लिया।
एड के डायरेक्शन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई उस दौर के नामी एड फिल्म डायरेक्टर एलीक पदमसी को, जो कि उस वक्त लिंटास के सीईओ भी थे। एलीक पदमसी तो समुद्र किनारे ही एड को शूट करना चाहते थे। पर चूंकि लिरिल साबुन की थीम थी ताज़गी और समुद्र का पानी ताज़ा नहीं होता तो कैलाश सुरेंद्रनाथ ने आइडिया दिया कि क्यों ना किसी झरने के नीचे एड को शूट किया जाए। कैलाश का आइडिया एलीक पदमसी को भी पसंद आया। लेकिन अब चुनौती थी किसी ऐसे झरने की तलाश करना जहां बिना किसी परेशानी के एड को शूट किया जा सके।
कैलाश सुरेंद्रनाथ अपनी टीम के साथ भारत भ्रमण पर निकल पड़े। उन्होंने देश के कई झरनों का मुआयना किया। और फाइनली उनकी तलाश खत्म हुई तमिलनाड्डू के कोडाईकनाल इलाके में मौजूद पम्बर फॉल्स पर जिसे लोग टाइगर फॉल्स के नाम से भी जानते हैं। पहली नज़र में ही कैलाश सुरेंद्रनाथ को ये लोकेशन पसंद आ गई और उन्होंने इसे फाइनल कर दिया। लेकिन इस जगह की कुछ दिक्कतें भी थी। एक तो ये कि ये झरना केवल दिसंबर और जनवरी के मौसम में चलता है। और दूसरे ये कि यहां सूरज भी सिर्फ दो तीन घंटे के लिए ही नज़र आता है। यानि बढि़या ठंड।
कोडाइकनाल के पम्बर फॉल पर जिस वक्त लिरिल के एड की शूटिंग की गई थी उस वक्त वहां काफी ठंड थी। करेन लुनेल के लिए उस मौसम में शूट करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। वो ठंड में बिकनी पहनकर झरने के नीचे दो तीन टेक देती और फिर बाहर निकलकर ठंड के मारे कंपकंपाने लगती। यूनिट के मेंबर्स उन्हें तुरंत कंबल ओढ़ाते और थोड़ी सी ब्रांडी पीने के लिए दे देते। कई सारे टेक्स करने की वजह से करेन को काफी ब्रांडी पीनी पड़ी और वो बढ़िया नशे में हो गई।
और केवल ठंड ही नहीं, सांप और कीड़ों-मकोड़ों का डर भी उस पानी में था। सांप देखकर तो कई दफा करेन लुनेल की हिम्मत ने जवाब दिया। लेकिन प्रोड्यूसर कैलाश सुरेंद्रनाथ और डायरेक्टर एलीक पदमसी ऐसे वक्त पर करेन की हौंसलाअफज़ाई करते थे। किसी तरह एक ही दिन में इस एड की सारी शूटिंग कंप्लीट कर ली गई। एड का म्यूज़िक तैयार किया वनराज भाटिया ने और जिंगल गाया प्रीति सागर ने।
फिर फाइनल एडिटिंग के बाद लिरिल साबुन का ये एड दिखाया जाने लगा सिनेमाघरों में। उस वक्त फिल्म शुरू होने से पहले और इंटरवल के दौरान लिरिल का ये एड दिखाया जाता था। ये वो ज़माना था जब भारत में हर किसी के घर में टीवी नहीं था। लिरिल का ये एड दर्शकों पर भी गहरा प्रभाव छोड़ने लगा। इंटरवल में लोग इस एड को पूरा देखकर ही वॉशरूम या पॉपकॉर्न लेने जाते थे। और इस तरह लिरिल के इस एड ने इतिहास रच दिया।
तो साथियों ये तो थी लिरिल साबुन के उस क्लासिक एड के बनने की कहानी। लिरिल का ये एड इतना पॉप्युलर हुआ कि HUL ने सालों तक इस एड को कन्टीन्यू किया और करेन लुनेल के बाद इसमें और भी कई चेहरे नज़र आए। हालांकि जो पॉप्युलैरिटी करेन लुनेल को मिली थी वो फिर कभी किसी और को नहीं मिल सकी। लेकिन बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि करेन लुनेल लिरिल के इस एड के बाद कहां चली गई? क्या सच में उनकी मौत हो गई थी या वो सिर्फ एक अफवाह थी? इस सीरीज़ की अगली कढ़ी में हम करेन लुनेल के बारे में ही बात करेंगे। इसलिए किस्सा टीवी पर अगर पहली दफा आए हैं तो इसे फॉलो कर लीजिए। और इस पोस्ट को लाइक-शेयर भी कीजिए। यहां आपको ऐसी बहुत सी पोस्ट्स पढ़ने के लिए मिलती रहेंगी।
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श्री राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
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