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10/10/2019

BrajSeth.com *जरा सोचिये हमने क्या किया*

*1.* चोटियां छोड़ी ,
*2.* टोपी, पगडी छोड़ी ,
*3.* तिलक, चंदन छोड़ा
*4.* कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी ,
*5.* यज्ञोपवीत छोड़ा ,
*6.* संध्या वंदन छोड़ा ।
*7.* रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा ,
*8.* महिलाओं, लडकियों ने साड़ी छोड़ी , बिछिया छोड़े , चूड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी , मांग बिन्दी छोड़ी ।
*9.* पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है)
*10.* संस्कृत छोड़ी , हिन्दी छोड़ी ,
*11.* श्लोक छोडे, लोरी छोड़ी ।
*12.* बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े ,
*13.* सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी ,
*14.* पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छुना छोड़े ,
*15.* घर परिवार छोड़े ( अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)।

Brajseth.com अब कोई रीति या परंपरा बची है ?* ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो

* BrajSeth.com कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैनें ऐसे जीवित रखा हैं*
जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे।*

* बौद्धों ने कभी सर मुंडाना नहीं छोड़ा!*

* सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया!*

मुसलमान ने न दाढ़ी छोडी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना!*

BrajSeth.com ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है!*
फिर हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ ?

* कहाँ लुप्त हो गये * - * गुरुकुल की शिक्षा*, * यज्ञ शस्त्र-शास्त्र नित्य मंदिर जाने का संस्कार ?

* BrajSeth.com हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं।*

अपनी पहचान बनाओ! अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ!!!*

* BrajSeth.com दिन मे कम से कम एक बार तो बच्चों के साथ मन्दिर जाना शुरु करो*।

04/10/2019

BrajSeth.com रहस्यमयी एकमुखी रुद्राक्ष की तलाश, नेपाल से लाए गए हैं ...

BrajSeth.com ग्वालियर.कम्पू स्थित शासकीय आयुर्वेद कॉलेज परिसर में चिकित्सकों को रहस्यमयी एकमुखी रुद्राक्ष की तलाश है। यहां लगे 17 रुद्राक्ष के वृक्षों में फल आ गए हैं। अब स्टाफ स्व. इंदिरा गांधी सहित अन्य हस्तियों द्वारा धारण किए जा चुके एकमुखी रुद्राक्ष की खोज कर उसे कॉलेज की प्रयोगशाला में लाना चाहता है। वृक्षों को नेपाल से आए छात्रों ने लगाया था। रुद्राक्ष के पेड़ ज्यादातर जावा, मलेशिया, ताइवान, नेपाल की तराई में लगते हैं। वर्ष 2009 में विदेशी कोटे से शासकीय आयुर्वेद कॉलेज में नेपाल के छह छात्रों ने प्रवेश लिया। जड़ी-बूटियों पर हो रही परिचर्चा के दौरान नेपाली छात्रों ने अपने देश में होने वाले रुद्राक्ष के पेड़ों की बात बताई, तो टीचर्स ने उनसे कुछ पौधे कॉलेज में लाने को कहा। छुटि्टयों से लौटते समय यह छात्र 17 पौधे व कुछ बोरे मिट्‌टी नेपाल से लेकर आए। द्रव्य गुण विभाग के प्रोफेसर डॉ. केएल शर्मा ने इन पौधों को कॉलेज परिसर में लगवा दिया। कॉलेज स्टाफ व माली ने पौधों के विकास व सुरक्षा के लिए सभी उपाय किए गए। इसी मेहनत का नतीजा है कि रुद्राक्ष के पौधों ने छह साल में पेड़ों का रूप ले लिया और इस सीजन में उन पर फल भी आने लगे हैं। क्या है रुद्राक्ष प्राचीन ग्रंथों के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रिय तथा शिव भक्तों का आराध्य दिव्य वृक्ष है। रुद्राक्ष बीज है, जिसकी माला का उपयोग पूजा के लिए किया जाता है।

BrajSeth.com रुद्राक्ष की माला को सभी मालाओं में श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा बताया जाता है कि इसे धारण करने से मनुष्य को काल का भी भय नहीं रहता। दिव्य और अलौकिक रुद्राक्ष

BrajSeth.com एकमुखी रुद्राक्ष को दिव्य और अलौकिक माना जाता है। एकमुखी रुद्राक्ष को बहुत पवित्र माना जाता है। इसे धारण करने वाले व्यक्ति को असीमित शक्तियां व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस रुद्राक्ष के बारे में यहां कहा जाता है कि एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति का काल भी कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। इसके अलावा यह रुद्राक्ष कई रोगों में भी फायदा करता है। इस कारण इसकी कीमत भी बहुत अधिक होती है। हमें तलाश है एक मुखी रुद्राक्ष की नेपाल के छात्रों ने 2009 में पांच साल की आयु के 17

01/10/2019

BrajSeth.com गुरु जी कहते है कि अगर किसी के साथ रिश्ता बनाना हो तो उसके लिये समय निकालना पड़ता है उस से प्यार करना पड़ता है तब जा कर कहीं एक रिश्ता बनता है💫✨💥♾
फिर हमने कैसे सोच लिया कि मंदिर गये घण्टी बजाया और प्रसाद लिया चलो भगवान से रिशता बन गया
नहीं
उस से रिश्ता बनना है तो उस परमात्मा के लिये समय निकालना पडेगा उसे याद करना पडेगा उस से प्यार करना पडे़गा तब जा के वो मिलेगा….
जब हम कोई कपड़ा धोते है तो बगैर इस्त्री (ironing) किये नहीं पहनते।
BrajSeth.com अगर कपडे में ज्यादा सिलवटे हो तो इस्त्री ज्यादा गर्म करनी पड़ती है और अगर सिलवटे फिर भी ना निकले तो हम पानी का छिड़काव करते है जिससे इस्त्री की गर्मायीश और जयादा हो जाती है और सिलवटे निकल जाती है।
इसी तरह मालिक हमारी रुह को जब इस्त्री करते है तो उसपर से कर्म रूपी सिलवटे हटाने के लिए अलग अलग degree की गर्मायीश देते है। अगर आप बहुत ज्यादा परेशानी में हैं तो समझ लेना कोई सिलवट गहरी होगी जिसे निकालने के लिए उस मालिक ने इस्त्री की गर्मी बढ़ाई है।
BrajSeth.com इस कठिन घड़ी के बाद हमारी रुह उस कुल मालिक के लायक बन जाएगी....
💐💐🙏🙏BrajSeth.com ..जय जय श्री राधे.. 🙏🙏💐💐💫✨💥♾

29/09/2019

BrajSeth.com HAPPY NAVRATRI
Meaning Of Navratra :
N – नवचेतना
A – अखंड ज्योति
V – विघन नाशक
R – राजराजेश्वरी
A – आनन्ददायी
T – त्रिकाल द्रिष्टि
R – रक्षण करती
A – आनन्ददायी नवरात्री

24/09/2019

BrajSeth.com इस नवरात्रि बन रहा है दुर्लभ संयोग,

BrajSeth.com पूरे नौ दिन रहेंगे नवरात्र-

इस बार माता के भक्तों को मां की उपासना करने के लिए पूरे नौ दिनों का समय मिलेगा। जिसमें 2 दिन सोमवार पड़ेगा जो कि बेहद शुभ माना जा रहा है। माना जाता है कि सोमवार के दिन मां दुर्गा की उपासना करने से साधक को उसके द्वारा की गई पूजा का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इसके अलावा नवरात्र के इन नौ दिनों में से 6 दिन विशेष योग बनने वाले हैं। जो भक्तों के लिए बेहद शुभ और फलदायी रहने वाले हैं।

BrajSeth.com विजयादशमी भी है बेहद शुभ-

इस बार 7 अक्टूबर को दोपहर 12:38 बजे तक नवमी मनाई जाएगी। जिसके बाद दशमी अगले दिन 8 अक्टूबर दोपहर 2:1 मिनट तक रहने वाली है। ज्योतिष के अनुसार यह बेहद शुभ माना गया है।

BrajSeth.com कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-

मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 29 सितंबर, रविवार सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 40 मिनट तक रहने वाला है। इसके अलावा जो भक्त सुबह कलश स्थापना न कर पा रहे हो उनके लिए दिन में 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक का समय कलश स्थापना के लिए शुभ रहने वाला है।

BrajSeth.com ये है कलश स्थापना का सही तरीका-

नवरात्रि के पहले दिन जो घट स्थापना की जाती है उसे ही कलश स्थापना भी कहा जाता है। कलश स्थापना करने के लिए व्यक्ति को नदी की रेत का उपयोग करना चाहिए। इस रेत में जौ डालने के बाद कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें। इसके बाद 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को 7 अनाज के साथ रेत के ऊपर स्थापित कर दें। कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलते रहें।

23/09/2019

BrajSeth.com नवरात्रि कलश स्थापना कैसे करें,

1. BrajSeth.com देवी को लाल रंग के वस्त्र, रोली, लाल चंदन, सिन्दूर, लाल साड़ी, लाल चुनरी, आभूषण तथा खाने-पीने के सभी पदार्थ जो लाल रंग के होते हैं, वही अर्पित किए जाते हैं।

2 .BrajSeth.com माता का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रों के दौरान रोज ही इस श्लोक की स्तुति करना शुभ होता है-

3.BrajSeth.com इस मंत्र के साथ नवरात्र के पहले दिन अपराह्न में घटस्थापन यानी पूजा स्थल में तांबे या मिट्टी का कलश स्थापन किया जाता है, जो लगातार 9 दिनों तक एक ही स्थान पर रखा जाता है।

4. BrajSeth.com घटस्थापना के लिए दुर्गाजी की स्वर्ण अथवा चांदी की मूर्ति या ताम्र मूर्ति उत्तम है। अगर ये भी उपलब्ध न हो सके तो मिट्टी की मूर्ति अवश्य होनी चाहिए जिसको रंग आदि से चित्रित किया गया हो।

5.BrajSeth.com घटस्थापन हेतु गंगाजल, नारियल, लाल कपड़ा, मौली, रोली, चंदन, पान, सुपारी, धूपबत्ती, घी का दीपक, ताजे फल, फल माला, बेलपत्रों की माला, एक थाली में साफ चावल रखें।

6. BrajSeth.com घटस्थापन के स्थान पर केले का खंभा, घर के दरवाजे पर बंदनवार के लिए आम के पत्ते, तांबे या मिट्टी का एक घड़ा, चंदन की लकड़ी, हल्दी की गांठ, 5 प्रकार के रत्न रखें। दिव्य आभूषण देवी को स्नान के उपरांत पहनाने चाहिए।

7. BrajSeth.com देवी की मूर्ति के अनुसार लाल कपड़े, मिठाई, बताशा, सुगंधित तेल, सिन्दूर, कंघा, दर्पण, आरती के लिए कपूर, 5 प्रकार के फल, पंचामृत (जिसमें दूध, दही शहद चीनी और गंगाजल हो), साथ ही पंचगव्य (जिसमें गाय का गोबर, गाय का मूत्र, गाय का दूध, गाय का दही, गाय का घी) पूजा सामग्री में रखना आवश्यक है।

21/09/2019

BrajSeth.com वरदान है तुलसी,

1. BrajSeth.com यौन रोगों के इलाज में
पुरुषों में शारीरिक कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. इसके अलावा यौन-दुर्बलता और नपुंसकता में भी इसके बीज का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद रहता है.

2. BrajSeth.com अनियमित पीरियड्स की समस्या में
अक्सर महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता की शिकायत हो जाती है. ऐसे में तुलसी के बीज का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. मासिक चक्र की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का भी नियमित किया जा सकता है.

3. BrajSeth.com सर्दी में खास
अगर आपको सर्दी या फिर हल्का बुखार है तो मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से पकाकर उसका काढ़ा पीने से फायदा होता है. आप चाहें तो इसकी गोलियां बनाकर भी खा सकते हैं.

4. BrajSeth.com दस्त होने पर
अगर आप दस्त से परेशान हैं तो तुलसी के पत्तों का इलाज आपको फायदा देगा. तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर पीस लें. इसके बाद उसे दिन में 3-4 बार चाटते रहें. ऐसा करने से दस्त रुक जाती है.

5. BrajSeth.com सांस की दुर्गंध दूर करने के लिए
सांस की दु्र्गंध को दूर करने में भी तुलसी के पत्ते काफी फायदेमंद होते हैं और नेचुरल होने की वजह से इसका कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता है. अगर आपके मुंह से बदबू आ रही हो तो तुलसी के कुछ पत्तों को चबा लें. ऐसा करने से दुर्गंध चली जाती है.

6. BrajSeth.com चोट लग जाने पर
अगर आपको कहीं चोट लग गई हो तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है. तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देता है. इसके अलावा तुलसी के पत्ते को तेल में मिलाकर लगाने से जलन भी कम होती है.

7. BrajSeth.com चेहरे की चमक के लिए
त्वचा संबंधी रोगों में तुलसी खासकर फायदेमंद है. इसके इस्तेमाल से कील-मुहांसे खत्म हो जाते हैं और चेहरा साफ होता है.

8.BrajSeth.com कैंसर के इलाज में
कई शोधों में तुलसी के बीज को कैंसर के इलाज में भी कारगर बताया गया है . हालांकि अभी तक इसकी पुष्ट‍ि नहीं हुई है.

20/09/2019

BrajSeth.com कौन थीं तुलसी, क्यों दिया तुलसी ने विष्णु को पत्थर होने का शाप

BrajSeth.com पौराणिक काल में एक थी लड़की। नाम था वृंदा। राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था। वृंदा बचपन से ही भगवान विष्णु जी की परम भक्त थी। बड़े ही प्रेम से भगवान की पूजा किया करती थी। जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया,जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था। वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी।

BrajSeth.com एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा -स्वामी आप युद्ध पर जा रहे हैं आप जब तक युद्ध में रहेगें में पूजा में बैठकर आपकी जीत के लिए अनुष्ठान करुंगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते मैं अपना संकल्प नही छोडूगीं। जलंधर तो युद्ध में चले गए और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गई। उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके सारे देवता जब हारने लगे तो भगवान विष्णु जी के पास गए।

BrajSeth.com सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि-वृंदा मेरी परम भक्त है मैं उसके साथ छल नहीं कर सकता पर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते हैं।

BrajSeth.com भगवान ने जलंधर का रूप रखा और वृंदा के महल में पहुंच गए जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा,वे तुरंत पूजा में से उठ गई और उनके चरण छू लिए। जैसे ही उनका संकल्प टूटा,युद्ध में देवताओं ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काटकर अलग कर दिया। उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पड़ा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?

BrajSeth.com उन्होंने पूछा - आप कौन हैं जिसका स्पर्श मैंने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गए पर वे कुछ ना बोल सके, वृंदा सारी बात समझ गई। उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, भगवान तुंरत पत्थर के हो गए। सभी देवता हाहाकार करने लगे। लक्ष्मी जी रोने लगीं और प्रार्थना करने लगीं तब वृंदा जी ने भगवान का शाप विमोचन किया और अपने पति का सिर लेकर वे सती हो गई।

BrajSeth.com उनकी राख से एक पौधा निकला तब भगवान विष्णु जी ने कहा- आज से इनका नाम तुलसी है,और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा

19/09/2019

BrajSeth.com नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। Brajपौष, चैत्र,आषाढ,अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है।

BrajSeth.com नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों - महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दुर्गा का मतलब जीवन के दुख कॊ हटानेवाली होता है। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।

BrajSeth.com नवरात्रिआधिकारिक नामनवरात्रिअन्य नामनराते, नवरात्रअनुयायीहिन्दू, भारतीय, भारतीय प्रवासीप्रकारHinduआरम्भचैत्र माह और अश्विन माह[1]तिथिप्रतिपदा से नवमी तिथि तकसमान पर्वशिवरात्रि

18/09/2019

💫✨💥♾BrajSeth.com ।।दानें दानें पर लिखा हैं खाने वाले का नाम।।

BrajSeth.com 'एक' सेठ "कृष्ण" जी का परम भक्त था, निरंतर उनका जाप, और सदैव उनको अपने दिल में बसाए रखता था,
वो रोज स्वादिष्ट पकवान बना कर कृष्ण जी की मंदिर निकलता पर रास्तें में ही उसे नींद आ जाती और उसके पकवान चोरी हो जाते,
वहाँ बहुत दुखी होता और कान्हा से शिकायत करते हुये कहता हे_राधे
ऐसा क्यूँ होता हैं
मैं आपको भोग क्यू नही लगा पाता हूँ
कान्हा कहते हे_वत्स दानें_दानें पे लिखा हैं खाने वाले का नाम, वो मेरे नसीब में नही हैं, इसलिए मुज तक नही पहुंचता,
सेठ थोड़ा गुस्सें से कहता हैं ऐसा नही हैं, प्रभु कल मैं आपको भोग लगाकर ही रहूंगा आप देख लेना, और सेठ चला जाता हैं...

BrBrajSeth.com..दूसरे दिन सेठ सुबह_सुबह जल्दी नहा धोकर तैयार हो जाता हैं, और अपनी पत्नी से चार डब्बें भर बढिया_बढिया स्वादिष्ट पकवान बनाता हैं, और उसे लेकर मंदिर के लिए निकल पड़ता हैं, और रास्तें भर सोचता हैं, आज जो भी हो जाए सोऊगा नही कान्हा को भोग लगाकर रहूंगा,

BrajSeth.com ...मंदिर के रास्तें में ही उसे एक भूखा बच्चा दिखाई देता हैं, और वो सेठ के पास आकर हाथ फैलातें हुये कुछ देने की गुहार लगाता हैं, सेठ उसे ऊपर से नीचे तक देखता हैं एक 5_6 साल का बच्चा हड्डियों का ढाँचा उसे उस पर तरस आ जाता हैं और वो एक लड्डू निकाल के उस बच्चें को दे देता हैं,
जैसे ही वहाँ उस बच्चें को लड्डू देता हैं, बहुत से बच्चों की भीड़ लग जाती हैं, ना जाने कितने दिनो के खाए पीए नही, सेठ को उन पर करूणा आ जाती है उन सब को पकवान बाँटने लगता हैं, देखते ही देखते वो सारे पकवान बाँट देता हैं, फिर उसे याद आता हैं, आज तो मैंने राधें को भोग लगाने का वादा किया था, पर मंदिर पहुंचने से पहले ही मैंने भोग खत्म कर दिया, अधूरा सा मन लेकर वहाँ मंदिर पहुँच जाता हैं, और कान्हा की मूर्ति के सामने हाथ जोड़े बैठ जाता हैं...

"BrajSeth.com कान्हा प्रकट होते हैं और सेठ को चिढ़ाते हुये कहते हैं, लाओ जल्दी लाओ मेरा भोग मुजे बहुत भूख लगी हैं, मुजे पकवान खिलाओं,
सेठ सारा कम्र कान्हा को बता देता हैं, कान्हा मुस्कुराते हुये कहते हैं, मैंने तुमसे कहा था ना, दानें_दानें पर लिखा हैं खानें वाले का नाम,

18/09/2019

BrajSeth.com कान्हा और कुम्हार की रोचक पौराणिक कथा

एक बार की बात है कि यशोदा मैया प्रभु श्री कृष्ण के उलाहनों से तंग आ गई और छड़ी लेकर श्री कृष्ण की ओर दौड़ी। जब प्रभु ने अपनी मैया को क्रोध में देखा तो वह अपना बचाव करने के लिए भागने लगे।

BrajSeth.com भागते-भागते श्री कृष्ण एक कुम्हार के पास पहुंचे। कुम्हार तो अपने मिट्टी के घड़े बनाने में व्यस्त था। लेकिन जैसे ही कुम्हार ने श्री कृष्ण को देखा तो वह बहुत प्रसन्न हुआ। कुम्हार जानता था कि श्री कृष्ण साक्षात् परमेश्वर हैं। तब प्रभु ने कुम्हार से कहा कि 'कुम्हार जी, आज मेरी मैया मुझ पर बहुत क्रोधित है। मैया छड़ी लेकर मेरे पीछे आ रही है। भैया, मुझे कहीं छुपा लो।'

BrajSeth.com तब कुम्हार ने श्री कृष्ण को एक बडे से मटके के नीचे छिपा दिया। कुछ ही क्षणों में मैया यशोदा भी वहां आ गईं और कुम्हार से पूछने लगी - 'क्यूं रे,कुम्हार! तूने मेरे कन्हैया को कहीं देखा है, क्या?'

BrajSeth.com कुम्हार ने कह दिया - 'नहीं, मैया ! मैंने कन्हैया को नहीं देखा।' श्री कृष्ण यह सब बातें बड़े से घड़े के नीचे छुपकर सुन रहे थे। मैया तो वहां से चली गयीं।

BrajSeth.com अब प्रभु श्री कृष्ण कुम्हार से कहते हैं - 'कुम्हार जी, यदि मैया चली गई हो तो मुझे इस घड़े से बाहर निकालो।'

कुम्हार बोला - 'ऐसे नहीं, प्रभु जी ! पहले मुझे चौरासी लाख यानियों के बन्धन से मुक्त करने का वचन दो।'

भगवान मुस्कुराये और कहा - 'ठीक है, मैं तुम्हें चौरासी लाख योनियों से मुक्त करने का वचन देता हूं। अब तो मुझे बाहर निकाल दो।'

कुम्हार कहने लगा - 'मुझे अकेले नहीं, प्रभु जी ! मेरे परिवार के सभी लोगों को भी चौरासी लाख योनियों के बन्धन से मुक्त करने का वचन दोगे तो मैं आपको इस घड़े से बाहर निकालूंगा।'

BrajSeth.com प्रभु जी कहते हैं - 'चलो ठीक है, उनको भी चौरासी लाख योनियों के बन्धन से मुक्त होने का मैं वचन देता हूं। अब तो मुझे घड़े से बाहर निकाल दो।'

अब कुम्हार कहता है - 'बस, प्रभु जी ! एक विनती और है। उसे भी पूरा करने का वचन दे दो तो मैं आपको घड़े से बाहर निकाल दूंगा।'

भगवान बोले - 'वो भी बता दे, क्या कहना चाहते हो ?'

कुम्हार कहने लगा - 'प्रभु जी ! जिस घड़े के नीचे आप छुपे हो, उसकी मिट्टी मेरे बैलों के ऊपर लाद के लाई गई है । मेरे इन बैलों को भी चौरासी के बन्धन से मु

ब्रज सेठ – पूजन सामग्री और भगवन का श्रृंगार Hello world! Welcome to WordPress. This is your first post. Edit or delete it, then start writing! Posted bypaadminSeptember 5, 2019Posted inUncategorized1 Comment on Hello world!

17/09/2019

BrajSeth.com कैसे करें माता की चौकी की स्थापना, पढ़ें पूजा विधि..

*BrajSeth.com लकड़ी की एक चौकी को गंगाजल और शुद्ध जल से धोकर पवित्र करें।

* साफ कपड़े से पोंछकर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।


* इसे कलश के दाईं तरफ रखें।

* चौकी पर मां दुर्गा की मूर्ति अथवा फ्रेमयुक्त फोटो रखें।

* मां को चुनरी ओढ़ाएं।

* धूप, दीपक आदि जलाएं।

* 9 दिन तक जलने वाली माता की अखंड ज्योत जलाएं।

* देवी मां को तिलक लगाएं।

* मां दुर्गा को वस्त्र, चंदन, सुहाग के सामान यानी हल्दी, कुमकुम, सिन्दूर, अष्टगंध आदि अर्पित करें।

* काजल लगाएं।

* BrajSeth.com मंगलसूत्र, हरी चूड़ियां, फूल माला, इत्र, फल, मिठाई आदि अर्पित करें।

* श्रद्धानुसार दुर्गा सप्तशती के पाठ, देवी मां के स्तोत्र, सहस्रनाम आदि का पाठ करें।

* देवी मां की आरती करें।

* पूजन के उपरांत वेदी पर बोए अनाज पर जल छिड़कें।

* BrajSeth.com रोजाना देवी मां का पूजन करें तथा जौ वाले पात्र में जल का हल्का छिड़काव करें। जल बहुत अधिक या कम न छिड़कें। जल इतना हो कि जौ अंकुरित हो सके। ये अंकुरित जौ शुभ माने जाते हैं। यदि इनमें से किसी अंकुर का रंग सफेद हो तो उसे बहुत अच्छा माना जाता है। यह दुर्लभ होता है।

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