Inbedwithwords
A page to make ur bed time filled with love thoughts, read it when you can and let me know if you li
Everyone’s life has a phase like this…
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कसक दिल की मिटाने में ज़रा सी देर लगती है
किसी का ग़म भुलाने में ज़रा सी देर लगती है
किसी को चाह कर अपना बनाना ठीक है लेकिन
मोहब्बत आज़माने में ज़रा सी देर लगती है
तुम्हें पाने की ख़्वाहिश में हुआ एहसास ये मुझ को
मुक़द्दर आज़माने में ज़रा सी देर लगती है
ग़ज़ल पढ़ कर तो आसानी से महफ़िल लूट सकते हो
मगर इज़्ज़त कमाने में ज़रा सी देर लगती है
कुछ रिश्ते खत्म नहीं होते, बस उम्मीदें खत्म हो जाती हैं…
उसकी यादों का हरजाना अच्छा है,
आँखों में आँसू भर जाना अच्छा है।
अब जब उसको ही कोई परवाह नहीं रही,
अब उम्मीदों का मर जाना ही अच्छा है।
वो अच्छा था या नहीं था,
ये बात पुरानी हुई।
तेरे खुद के लिए अच्छा हो जाना ही अच्छा है।
-RV
ख़त के छोटे से तराशे में नहीं आएँगे
ग़म ज़ियादा हैं लिफ़ाफ़े में नहीं आएँगे
हम न मजनूँ हैं न फ़रहाद के कुछ लगते हैं
हम किसी दश्त तमाशे में नहीं आएँगे
मुख़्तसर वक़्त में ये बात नहीं हो सकती
दर्द इतने हैं ख़ुलासे में नहीं आएँगे
उस की कुछ ख़ैर-ख़बर हो तो बताओ यारो
हम किसी और दिलासे में नहीं आएँगे
जिस तरह आप ने बीमार से रुख़्सत ली है
साफ़ लगता है जनाज़े में नहीं आएँगे
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उस ने यूँ रास्ता दिया मुझ को
रास्ते से हटा दिया मुझ को
दूर करने के वास्ते ख़ुद से
ख़ुद का ही वास्ता दिया मुझ को
मौत ही कुछ सुकून दे शायद
ज़िंदगी ने थका दिया मुझ को
जिस हवा ने मुझे जलाए रखा
फिर उसी ने बुझा दिया मुझ को
मेरी इक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए
बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए
रेत मेरी उम्र मैं बच्चा निराले मेरे खेल
मैं ने दीवारें उठाई हैं गिराने के लिए
आसमाँ ऐसा भी क्या ख़तरा था दिल की आग से
इतनी बारिश एक शोले को बुझाने के लिए
मैं ‘ज़फ़र’ ता-ज़िंदगी बिकता रहा परदेस में
अपनी घर-वाली को इक कंगन दिलाने के लिए
#ʜɪɴᴅɪᴘᴏᴇᴛʀʏ
वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता
मगर इन एहतियातों से तअ’ल्लुक़ मर नहीं जाता
बुरे अच्छे हों जैसे भी हों सब रिश्ते यहीं के हैं
किसी को साथ दुनिया से कोई ले कर नहीं जाता
मोहब्बत के ये आँसू हैं उन्हें आँखों में रहने दो
शरीफ़ों के घरों का मसअला बाहर नहीं जाता
❤️
लोग जल जातें हैं, मेरी मुस्कान पर क्यूंकि, मैंने कभी दर्द की नुमाइश नहीं की !
जिंदगी से जो मिला, कबूल किया, किसी चीज़ की फरमाइश नहीं की !!
मुश्किल है समझ पाना मुझे क्यूंकि, जीने के अलग है अंदाज़ मेरे !
जब जहाँ जो मिला अपना लिया, ना मिला उनकी ख्वाहिश नहीं की !!
माना कि औरों के मुकाबले, कुछ ज्यादा पाया नहीं मैंने !
पर खुश हूँ कि खुद को गिरा कर कुछ उठाया नहीं मैंने !!
रख हौसला वो मंज़र भी आयेगा …
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