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देव उठनी एकादशी (या देवउठान एकादशी) उत्तर भारत — विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, बिहार आदि राज्यों में बड़ी श्रद्धा से मनाई जाती है। इस दिन यह माना जाता है कि भगवान विष्णु चार महीने के शयन (चातुर्मास) के बादक्षीरसागर से जागते हैं, और उसी के साथ शुभ विवाह, मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी होती है।
इस दिन गाँवों और घरों में लोग भगवान विष्णु और तुलसी माता की पूजा करते हैं, और पारंपरिक भजन या गीत गाते हैं।
बृहस्पति खाना नंबर 10 (नीच)
दसवें घर का नीच बृहस्पति चौथे सूर्य से संचालित होता है —
वह मिट्टी (ख़ाक) से सोना बनता है, लेकिन चौथे शनि से वह गल (नष्ट) जाता है।सूखा पीपल, धन का नुकसान, शिक्षा का अंत —
जब बुरा असर हो, तो नदी या दरिया में तांबे के सिक्के प्रवाहित करना लाभकारी उपाय है।)
जब गुरु दसवें घर में होता है, तो वह स्वर्ग लोक के कामों से जुड़ा होता है।
लेकिन यदि व्यक्ति लालच में फँस जाए, तो उसे न धन मिलता है, न शांति (माया भी नहीं, राम भी नहीं)।
जब गुरु शनि के घर (मकर) में आता है, तो उसकी सांस तक शनि पर निर्भर हो जाती है —
कोई ग्रह उसका साथ नहीं देता, केवल शनि ही उसका सहारा होता है।
ऐसे व्यक्ति का वस्त्र गंदा, जीवन राख-भरे भंडार जैसा हो जाता है।
गुरु की इज़्ज़त और संसार का सुख – दोनों शनि की इच्छा पर निर्भर रहते हैं।
अगर चौथे, पाँचवें घर में शनि, रवि (सूर्य), बुध, शुक्र या राहु हो,
तो व्यक्ति के कर्म और बुध्दि पर नकारात्मक असर पड़ता है — सुध (सुधार) की गुंजाइश नहीं रहती।
दसवें घर का नीच बृहस्पति चौथे सूर्य से संचालित होता है —
वह मिट्टी (ख़ाक) से सोना बनता है, लेकिन चौथे शनि से वह गल (नष्ट) जाता है।
यदि गुरु और सूर्य दोनों किसी घर में साथ बैठे हों,
और पाँचवें घर में उसका मित्र (या उसकी बुद्धि) शत्रु बन जाए —
तो यह व्यक्ति अपने ही कर्मों से संघर्ष करता रहता है।
आयु फल
यदि शुक्र (शुभ ग्रह) का साथ न हो, तो व्यक्ति की उम्र कम होती है।
लेकिन यदि शुक्र या शुभ ग्रह साथ हों, तो लंबी उम्र प्राप्त होती है।
जीवन कथा
ऐसा व्यक्ति अक्सर निर्धन पिता का पुत्र या यतीम (अनाथ) होता है।
वह अपने बच्चों को भी निर्धनता में छोड़ जाता है।
उसने सपनों में महल देखे, लेकिन वास्तविक जीवन में टूटी हुई चारपाई पर ही सोया।
जीवन का आरंभ भी दुःख में और अंत भी दुःख में —
उसने केवल अफ़सोस देखा, सुख केवल स्वप्न में ही पाया।
27 से 36 वर्ष की उम्र तक जीवन बहुत कठिन रहता है,
लेकिन 28 के बाद यदि भाई का सहयोग मिले या किसी मंदिर/गणेश जी की पूजा में भाग ले,
तो भाग्य में सुधार होता है।
यह व्यक्ति जीवनभर संघर्ष करता है —
गरीबों पर दया करता है, लेकिन बदले में उसे अपमान या मार सहनी पड़ती है।
दूसरों की छोटी चीज़ें भी रोशनी दे जाती हैं,
लेकिन इसका तो शुद्ध तेल भी पेशाब से कम कीमत का समझा जाता है।
भावार्थ:
दसवें घर में नीच बृहस्पति व्यक्ति को कर्मफल के कठोर अनुभव कराता है।
वह ज्ञानवान तो होता है, पर परिस्थितियों के कारण उसका ज्ञान और परिश्रम फल नहीं देते।
जीवन में देर से सफलता, लेकिन पहले बहुत संघर्ष और अपमान झेलना पड़ता है।
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“बृहस्पति का रहस्य – “बृहस्पति का आठवां घर – सोने का भंडार या संघर्ष?
Jupiter in 8th House
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बृहस्पति जब आठवें घर में होता है,
तो यह स्थान अफवाहों, नकारात्मक लोगों, और फकीरी (त्याग या गरीबी) से जुड़ा माना जाता है।आठवां घर “खोपड़ी” या जीवन-मृत्यु, रहस्य और गुप्त बातों से जुड़ा होता है।
यह साधुओं का प्याला (अर्थात तपस्या और गूढ़ ज्ञान का घर) है।
जब इस घर में शनि और मंगल का प्रभाव हो, तो वे सबको जलाते हैं (अर्थात कष्ट देते हैं),
लेकिन अगर बृहस्पति यहाँ अच्छा फल दे, तो उसका असर बहुत निराला होता है —
वह सोने का भंडार दिला सकता है (अर्थात बहुत धन और योग्यता)।
अगर शनि और मंगल चौथे घर में हों, तो व्यक्ति दुखी और संघर्षपूर्ण जीवन जीता है।
बुज़ुर्गों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति की उम्र लंबी होती है।
उसका परिवार बढ़ता है, और किस्मत जागती रहती है।
वह कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहता है —
यहाँ तक कि “सिर की खोपड़ी उड़ जाने तक” यानी आख़िरी दम तक संघर्ष करता है।
उसमें इतनी हिम्मत होती है कि “खोपड़ी हाथ में लेकर” (अर्थात डर के बिना) जीवन का सामना करता है।
ऐसा व्यक्ति चाहे सब कुछ खो दे और जंगल में अकेला रह जाए,
फिर भी वह वहां भी सोने की खान (अर्थात अवसर और सफलता) खोज लेता है।
वह बंजर जगह को भी हरा-भरा बना सकता है —
लेकिन, वह कभी भी पूर्ण फकीर (त्यागी या निर्लिप्त) नहीं बनता।
👉 संक्षेप में अर्थ:
आठवें घर का बृहस्पति व्यक्ति को रहस्यमय, साहसी, और कठिनाइयों में भी अवसर खोजने वाला बनाता है।
वह संकट में भी सफल होता है, लेकिन पूर्ण त्याग या साधु जीवन उसके स्वभाव में नहीं होता।
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गुरु) सातवें घर में बैठता है, तो यह व्यक्ति के संबंधों, विवाह, साझेदारी और धार्मिक दृष्टिकोण को प्रभावित करता है। यहाँ गुरु कभी-कभी दिखावटी धर्म या झूठे ज्ञान से भी प्रभावित हो सकता है।
When Jupiter sits in the seventh house, it influences a person’s relationships, marriage, partnerships, and religious outlook.
In this position, Jupiter may sometimes be influenced by pretentious religiosity or false knowledge.
बृहस्पति खाना नंबर 6 (राशिफल का घर)
यह घर शत्रु, रोग, कर्ज और सेवा से जुड़ा होता है।
जब बृहस्पति (गुरु) छठे घर में बैठता है,
तो वह व्यक्ति को संघर्षों के बीच भी जीतने की शक्ति देता है।
बृहस्पति (गुरु) पाँचवें घर में.
यह स्थान विद्या, संतान, बुद्धि और भाग्य से जुड़ा माना जाता है।
पाँचवें घर में बृहस्पति मोती की तरह चमकता है
दुश्मन 2-9-11 बैठे डूबती बेड़ी होती है।
लाल किताब का सिद्धांत
“जिस ग्रह से लाभ मिल रहा हो, उसकी वस्तु का दान या नाश करना अपने भाग्य का नुकसान करना है।”
बृहस्पति खाना नंबर 3 (तीसरा भाव – साहस, तालीम, भाई-बहन, प्रयास)
जब बृहस्पति तीसरे घर में बैठा हो तो वह त्रिलोकी (तीनों लोकों) का मालिक कहलाता है।Jupiter in the 3rd House (Third House – Courage, Learning, Siblings, Efforts)
When Jupiter is positioned in the third house, it is said to become the lord of the three worlds (Triloki) — symbolizing great power, wisdom, and authority over all realms.
Jupiter in the 2nd House (Guru in Gausathan – House of Wealth, Speech & Grace)
लाल किताब शैली में सारांश व्याख्या (Guru in 2nd House – बृहस्पति दूसरे घर में फल
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