Garhwal Express
Updates About Garhwal Uttarakhad, India
बस बचा खुचा हमारे पास एक
आसमान है
जिसको रोज रात देखकर ये तसल्ली कर लेते हैं की
वो वहीँ आसमान है जो तुम्हारे ऊपर है
मुट्ठियों में भर लेते है हर रात
तुम्हारे शहर से आने वाली हवा
वो हवा, जो उतरने से मना कर देती है मेरे फेफड़ों में
तुम्हारी तरह ये कहते हुए की
"मुझे सिगरेट की गंध से नफरत है"
कुछ बासी उखड़ी बेढब सी कवितायेँ हैं
जिनमे तुमको तुमसे चुराकर रक्खा है हमने
शाम किसी छत पर बैठकर खुदको सुनाने के लिए
अलमारियों के बीच, कहीं किसी कोने में
जिन्दा है एक ओल्ड मोंक की बोतल
जिसको तय करना है मेरे हलक से एक रास्ता
आंसू बन ने के लिए
हथेलियों में बाकी है
अभी मेरे किस्मत की बागी केंचुलियाँ
जिनके टुकड़े ढूँढ ढूंढ कर शायद तुम्हारी किस्मत
मिल जाये मुझसे
बस बचा खुचा इतना ही हैं मेरे पास
और हाँ तुम्हारी दी हुई एक डायरी भी
जिसमे दर्ज है मेरी बर्बादी का अफसाना... :)
एक क्वार्टर पी के अभी तक नाली के पास पड़ा है वो,
जो 4 बोतल वोडका काम मेरा रोज का पे रात भर नाचा था ;)
:)
जो बस चले तो तेरी यादें
सिरहाने रख लूँ
सोचता रहूँ, सहेजता रहूँ
जो बस चले तो
बस नासमझियों में जियूं
बेफिक्र, बेपरवाह रहूँ
जो बस चले तो
तेरा नाम चीख कर
फिजाओं में गूंजा दूँ
बेशर्मी से ज़माने को बता दूँ
बदनामी के डर को डरा दूँ
जो बस चले तो
तुझे मेरे रंग में रंग लूँ
सबकी नज़रों से ओझल हो जाऊं
बस रहे तेरा मेरा प्यार
वोही हो मेरा संसार
जो बस चले तो
बस शाम की मद्धम रौशनी रहे
इतनी की बस तेरा
चेहरा साफ़ दिखे
जो बस चले तो
कहलवा दूँ तुझसे की
बस..अब आ जाओ
दुनिया को रखकर परे
चले जहा हो सपने खरे
मेरा बस चले और इक बार तुम कह दो तो........
:)
"कभी जो तेरे दुपट्टे से
हाथ पोछा
तो नाराजगी,
और कभी
खुद ही आंचल दिया
की पोछ लो..
हरपल तेरे मिजाज ने
इक नया मोड़ लिया,
तेरी अनगिनत अनसमझी अदाओं में
चलो एक और हमने जोड़ लिया." :) :)
अपनी यादों से कह दो ढाई दिन छुट्टी दे दें मुझे,
आखिर इश्क के हिस्से में भी वीकेंड होना चाहिए !! :)
एक रंग तेरा और एक रंग मेरा
इतनी तरह से बाँट ली दुनिया अपनी ..
एक हंसी तेरी और एक हंसी मेरी
इस तरह से बाँट ली खुशियाँ अपनी ..
एक राह तेरी और एक राह मेरी
इस तरह से बाँट ली दूरियाँ अपनी ..
एक ख्वाब तेरा और एक ख्वाब मेरा
इस तरह से बाँट ली मजबूरियाँ अपनी ..
एक बात तेरी और एक बात मेरी
इस तरह से बाँट ली खामोशियाँ अपनी .. :)
जैसे जैसे ठंड बढ़ रही हैं, रह-रह कर मन मे ख़्याल आता है कि अब शादी कर ही लेनी चाहिए, ये सर्दियाँ सिर्फ कम्बल-रज़ाई के सहारे तो निकलने से रहीं। ;) :)
बड़ा complicated था...
design इस इश्क़ के sweater का...
पहले हिम्मत की सिलाई लेकर...
निगाहों के ऊन से फंदे डाले...
फिर बनाया proposal का border ...
फिर डाले दोनों के ख्वाबों के कुछ ऊपर कुछ नीचे के फंदे...
आधा ही बना तो सोचा
ज़माने को दिखा लें...
उसने पकड़ लिया खुला सिरा...
और खींचता रहा...
कम्बख़्त ने उधेड़ के रख दिया...
गुज़र रही है ये सर्दी...
अब बिना किसी sweater के...
वो नहीं करती थी कुछ भी तरीके से,
उसकी बातों में उसकी हँसी उलझती थी,
वो नाराज़ भी हो तो सताती नहीं थी,
वो लड़ती भी तो ज़रा सी बात पे हँस देती थी,
तवील मुलाक़ातों के बाद भी कहती,
लो मैंने ये तो बताया ही नहीं तुमको।
वो मिले तो कहना उसे नहीं आया
छोड़ के जाना भी मुझे। :)
शाम होते ही थोड़ी सी जिंदगी खींच ली मैंने,
इसी बहाने तेरी यादों कि जमीन सींच ली मैंने ;)
-=-=bolo ChEErs$$=-=-
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Kotdwar
Garhwal
246149