M. Kumar
Empowering youth through positive motivation
Deoghar
Heartiest Welcome both of you
24/07/2025
सत्य तो सत्य होता है 🙆
23/07/2025
आय दिन सड़क हादसा बहुत ही आहत कर रही है 🥺
एक🤔 बात जो मेरे दिमाग़ में है अगर किसी को पता हो तो बताए ?
क्या कोई संस्था भारत में है जहाँ की लोगों को ट्रक, बस, या भारी मालवाहक/ यात्रिवाहक (सड़क पर गतिमान ) गाड़ियां चलाने का प्रशिक्षण देता है ?
यादी देता है, तो क्या ये सरकार के द्वारा निशुल्क है या सहशुल्क ?
यादी नहीं तो इतने बाहनो को जो चला रहा है इनमें से अधिकांश या तो अकुशल है या आम सड़को को ही अपनी प्रयोगशाला समझते है ।
स्थिति गंभीर होने की पुरी संभावनाएं हैं , कृपया ये बात सरकार तक पहुंचाए , की इन भारी वाहनों की प्रशिक्षण केंद्र हर राज्य में हो और बिना प्रशिक्षित किसी को भी लाइसेंस न दिया जाय ।
ुमार
04/06/2025
भरतीय🚂 ट्रैन की वो बाते सो हमें पता होनी चाइए
#भारत_में_ट्रेन लाने का श्रेय किसको प्राप्त है, अंग्रेज? बिलकुल नहीं, नाना जगन्नाथ शंकर सेठ वो पहले व्यक्ति है जिन्होंने इसके लिए पहल शुरू की थी
नाना स्वर्णकार परिवार में जन्मे थे और व्यवसाई घराना होने के कारण वे धन संपदा से काफी संपन्न भी थे
इंग्लैंड में जब ट्रेन पहली बार चली तो ये पूरी दुनिया की हेडलाइन बन जाती है, ये खबर जब नाना तक पहुंची तो उन्हे लगा ये ट्रेन उनके गांव, शहर में भी चलनी चाहिए
अब नाना जी कोई आम व्यक्ति तो थे नहीं उनका व्यवसाय बहुत बड़ा था, उनका प्रभाव इससे समझ सकते है कि कई अंग्रेज अफसर उनके सानिध्य में रहते थे
उन्होंने कई विश्वविद्यालय खोले थे जिसमे कई महान क्रांतिकारियों ने बाद में इसमें शिक्षा को ग्रहण किया, उन्होंने लड़कियों के लिए मुंबई में पहला स्कूल खोला। नानाजी अपने स्कूलों में अंग्रेजी के साथ संस्कृत पढ़ाने की भी व्यवस्था की थी
1843 में वे अपने पिता के दोस्त जमशेद जीजोभोय उर्फ जेजे के पास गए और इंडियन रेलवे का अपना आइडिया उन्हे बताया, भारत में ट्रेन चलने के आइडिया से सुप्रीम कोर्ट के जज थॉमस और ब्रिटिश अधिकारी स्किन पैरी काफी खुश थे
सबको नाना का आइडिया शानदार लगा इसके बाद तीनो ने मिलकर इंडियन रेलवे एसोसिएशन को बनाया, उससे पहले अंग्रेजो का रेलवे के प्रति ऐसी कोई योजना नहीं थी
जब नाना और जेजे जैसे प्रभावी व्यक्तियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को अपना सुझाव दिया, तो उन्होंने काफी सोच विचार के बाद सरकार को इसमें काम करने के लिए कहा।
इन्होंने मुंबई के बड़े बड़े व्यापारियों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ते हुए ग्रेट इंडियन रेलवेज नाम की कंपनी बनाई
ये सपना 1853 में पूरा हुआ, जब मुंबई से थाणे की ट्रेन चली, इसमें नाना जी और जेजे भी यात्री के रूप में सवार रहे
वास्तव में हम दूसरो की एक एक बात जानते है पर अपनो के योगदान को जानने की दूर की बात है सुनना भी पसंद नही करते।
19/04/2025
वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों के नाम याद रखने के लिए ये श्लोक देखें 👇
मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम् ।
अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते ॥
म-2, भ-2, ब्र-3, व-4 ।
अ-1,ना-1, प-1, लिं-1, ग-1, कू-1, स्क-1 ॥
विष्णु पुराण के अनुसार उनके नाम ये हैं—विष्णु, पद्म, ब्रह्म, वायु(शिव), भागवत, नारद, मार्कण्डेय, अग्नि, ब्रह्मवैवर्त, लिंग, वाराह, स्कंद, वामन, कूर्म, मत्स्य, गरुड, ब्रह्मांड और भविष्य।
मत्स्य पुराण
मार्कण्डेय पुराण
भागवत पुराण -- (देवीभागवत पुराण)
भविष्य पुराण
ब्रह्म पुराण
ब्रह्माण्ड पुराण
ब्रह्म वैवर्त पुराण
विष्णु पुराण
वायु पुराण -- (शिव पुराण)
वाराह पुराण
वामन पुराण
अग्नि पुराण
नारद पुराण
पद्म पुराण
लिङ्ग पुराण
गरुड़ पुराण
कूर्म पुराण
स्कन्द पुराण
04/03/2024
Just for flowers crazy people
13/10/2023
कोई बताएगा इनमें से कौन किस धर्म या जाति से है ?
🙏आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार 🙏
इस पोस्ट के साथ जो मैने तस्वीर लगाई है ये बहुत बार आपके सम्मुख आया हो और कुछ इसी तरह के सवालों के साथ भी । ये सच में एक बहुत ही सही है की जाति धर्म ये आज समाज के नाशुर बन बैठे हैं, ये भी सच है की जीवन के शुरवात में ऐसी कोई भी चीज नही होगी । अगर हम डार्विन के प्रगतिवाद शिधांत से ही चले तो ये सत- प्रतिशत सही है।
लेकिन जरा सोचिए जब मानवों ने प्रगति को अपना आधार बनाया तो ये बात भी सत्य है की लोगो को उनकी क्षमता के आधार पर कार्य की जिमेवारी दी गई और लोग राजी खुशी अपनी क्षमता के आधार पर प्रगति करते गए ।
फिर एक दौर आया जब कर्म प्रधानता को लोगो ने अपने स्वार्थ पूर्ति हेतु जन्म प्रधानता बना लिया । इसकी पुष्टि आप सनातन संस्कृति की ग्रंथो एवम पुस्तको से कर सकते हैं।
लेकिन आज फिर भी हम जानकर भी इस दलदल में क्यों है ,आगे करेंगे इस मुद्दे पर विचार इस पोस्ट में बस इतना ही।
धन्यवाद 🙏
✍️ मिथिलेश मैथिल
04/09/2023
ये तस्वीर आज के तथाकथित सेक्युलर नेता और नारी हितेषियों की बात करने वाले के गाल पर एक तमाचा है जिसने कहा कि अंग्रेजो ने नारी शिक्षा और दलितों को समाज में जगह दिया । आज इनके कुनवे ही ह्यूमन राइट्स एवम विमेन इंपावरमेंट की बात करते हैं।
ये याद रखें कि आज अगर नारी सम्मान में और मानवता का कोई मतलब सिखाया है तो उनमें सिर्फ दयानंद सरस्वती, विवेकानंद स्वामी, ज्योतिबा फुले और केवल भगवान बिरसा मुंडा का नाम आता है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Contact the business
Telephone
Website
Address
Deoghar
04/06/2025