IAS PCS
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20/09/2021
06/08/2021
दैनिक समाचार डाइजेस्ट
IAS PCS News and Articles
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, एमएसएफ रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 4 प्रतिशत पर बरकार रखा है.
आरबीआई के गवर्नर शशिकांत दास ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने मौद्रिक नीति के मामले में उदार रुख बनाये रखने का निर्णय किया है. हमारे कदम का उद्देश्य वृद्धि को गति देना और अर्थव्यवस्था में संकट को दूर करना है. आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है.
Reserve Bank of India keeps repo rate unchanged at 4%, maintains accommodative stance pic.twitter.com/fAhHBio4OR
रेपो रेट: भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, रेपो रेट बिना किसी बदलाव के साथ 4 प्रतिशत रहेगा. रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है.
रिवर्स रेपो रेट: रिवर्स रेपो रेट भी बिना किसी बदलाव के साथ 3.35 फीसदी पर रहेगा. यह वह दर होती है जिसपर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है. रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है.
एमएसएफ रेट: एमएसएफ रेट बिना किसी बदलाव के 4.25 फीसदी रहेगा. आरबीआई ने पहली बार वित्त वर्ष 2011-12 में सालाना मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में एमएसएफ का जिक्र किया था.
बैंक रेट: बैंक रेट वह दर है जिस पर आरबीआई व्यापारिक बैंको को प्रथम श्रेणी की प्रतिभूतियों पर कर्ज प्रदान करता है. बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह ही 4.25 फीसदी है.
आरबीआई के मुताबिक साल 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. जो कि उसके पहले के अनुमान के अनुसार है. अर्थव्यवस्था में रिकवरी के संकेत को देखते हुए ही आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती से दूरी बनाई है. हालांकि आरबीआई गवर्नर ने अर्थव्यवस्था में असमान रिकवरी पर चिंता जताई है. वहीं कुछ सेक्टर में उम्मीद के अनुसार रिकवरी नहीं हो रही है.
आरबीआई गवर्नर ने पॉलिसी का घोषणा करते हुए कहा कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है. ऐसे में हमें सतर्क रहने की जरूरत है. खास तौर से तीसरी लहर पर सतर्क रहना होगा. आज की मौद्रिक समीक्षा नीति पर कमेटी के 6 सदस्यों में से 5 सदस्यों ने रेपो रेट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं करने के पक्ष में अपना मत दिया.
आरबीआई ने ब्याज दर में किसी भी तरह का बदलाव ना करके किसी भी तरह के अर्थव्यस्था में बदलाव से बचने की कोशिश की है. देश में कोरोना संक्रमण का खतरा पूरी तरह नहीं टला है. कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका तेज है. वैक्सीनेशन की रफ्तार में तेजी के साथ अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा रही है.
22/04/2020
Model Question for IAS Exam
✍एक्ट ईस्ट नीति क्या है? भारत व मलेशिया के बीच सहयोग के क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए बताएँ कि भारत की समुद्री सुरक्षा की दृष्टि से मलेशिया क्यों आवश्यक है।
✍Editorial ... The Hindu, The Indian Express, Business Line
एडिटोरियल ✍✍✍✍ अंतर्राष्ट्रीय संबंध
🎯 बदलते परिदृश्य में भारत-मलेशिया संबंध
🔶टैग्स: सामान्य अध्ययन-II भारत और इसके पड़ोसीलुक ईस्ट से एक्ट ईस्ट नीति
✍संदर्भ
बीते दिनों मलेशिया में मोहिउद्दीन यासीन के नेतृत्व वाली सरकार ने अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। मोहिउद्दीन यासीन को मलेशिया का नया प्रधानमंत्री नामित करने के साथ ही पूर्व सत्तारूढ़ गठबंधन के टूटने और महातिर मोहम्मद के इस्तीफे के बाद एक सप्ताह से चल रहा राजनीतिक संकट समाप्त हो गया। मलेशिया की नई सरकार भारत के साथ संबंधों पर ज़मीं बर्फ को पिघलाना चाहती है। हालाँकि भारत और मलेशिया के बीच संबंधों में गर्मजोशी की बहाली काफी हद तक भारत-पाकिस्तान विवादों में तटस्थता बनाए रखने की नई सरकार की क्षमता पर निर्भर करती है।
इसके अलावा यासीन सरकार को अपनी विदेश नीति में इस्लामिक बयानबाज़ी का विरोध करने की आवश्यकता होगी, क्योंकि ऐसा न करने से भारत जैसे अन्य देशों के साथ उसके संबंध जटिल हो सकते हैं। इससे पहले मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद द्वारा जम्मू-कश्मीर और नागरिकता कानून को लेकर विवादित टिप्पणी करने से दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ गई थी। परिणामस्वरूप भारत ने मलेशिया से पाम आयल के आयात पर प्रतिबंध भी लगा दिया था।
इस आलेख में भारत-मलेशिया के संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ, संबंधों में खटास के कारण तथा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विमर्श करने का प्रयास किया जाएगा।
✍✍ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इतिहास पर नज़र डालें तो पाएंगे कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में मलेशिया अकेला ऐसा दक्षिण-पूर्वी देश था जिसने न सिर्फ खुलकर भारत का साथ दिया था, बल्कि भारत को युद्ध में सहायता देने के लिये एक आर्थिक कोष की भी स्थापना की थी।
वहीं, भारत ने भी वर्ष 1965 में इंडोनेशिया-मलेशिया विवाद में मलेशिया का साथ दिया था। इसके चलते भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में खटास आ गई थी।
शीत युद्ध के दौरान दोनों ही देश गुटनिरपेक्ष देशों के दल के साथ रहे और इन्होंने पारस्परिक संबंधों को मज़बूत बनाए रखा। एक मुस्लिम बहुल देश होने और पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद मलेशिया और भारत के संबंध मधुर बने रहे।
भारत सरकार के वर्ष 1992 में ‘लुक ईस्ट नीति’ के अनावरण ने संबंधों को नए आयाम दिये।
वर्ष 2014 में चुनी गई नई सरकार ने कूटनीति के अगले चरण में मलेशिया समेत अन्य पूर्वी एशियाई देशों में पहल करते हुए लुक ईस्ट नीति को ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में तब्दील कर दिया। मलेशिया भारत सरकार की एक्ट ईस्ट नीति के केंद्र में है।
✍✍राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक तथा सामाजिक-सांस्कृतिक स्तंभों पर भारत और मलेशिया का आपस में सहयोग काफी महत्त्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि मलेशिया आसियान समूह का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सदस्य है और आसियान दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देशों का एक समूह है। आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार और इस दस सदस्यों के समूह में भारत छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
इसके अलावा मलेशिया में भारतीय मूल के करीब 24 लाख लोग हैं जो वहाँ की कुल जनसंख्या का 8 प्रतिशत हैं।
पिछले कई सालों के दौरान, भारत और मलेशिया ने द्विपक्षीय सहयोग के कई समझौतों को अंजाम दिया जिनमें मलेशिया-इंडिया कोम्प्रेहेंसिवे इकॉनोमिक को-ऑपरेशन एग्रीमेंट (2011) और इनहेंस्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप (2016) प्रमुख हैं।
एक्ट ईस्ट नीति
भारत की वर्तमान विदेश नीति के बारे में कहा जा रहा है कि भारत इस मोर्चे पर आज जितना मज़बूत है उतना कभी नहीं था। यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ रिश्तों को मज़बूत आधार देने के बाद भारत सरकार ने कूटनीति के अगले चरण में पूर्वी एशियाई देश में पहल करते हुए वर्ष 2014 में लुक ईस्ट नीति को एक्ट ईस्ट नीति में तब्दील कर दिया।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी ने बुनियादी ढाँचे, विनिर्माण, व्यापार, कौशल, शहरी नवीकरण, स्मार्ट सिटीज़, मेक इन इंडिया और अन्य पहलों पर हमारे घरेलू एजेंडे में भारत-आसियान सहयोग पर ज़ोर दिया है।
✍✍एक्ट ईस्ट पॉलिसी का उद्देश्य आर्थिक, सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय स्तरों पर निरंतर जुड़ाव के माध्यम से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ रणनीतिक संबंध विकसित करना है, ताकि भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को उन्नत कनेक्टिविटी प्रदान की जा सके।
विवाद के कारण
भारत में टेरर फाइनेंस के आरोपी जाकिर नाइक के मलेशिया भाग जाने और भारत सरकार की तमाम कोशिशों और दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि होने के बावजूद मलेशियाई सरकार के उसे भारत नहीं भेजने के निर्णय ने राजनयिक स्तर पर पिछले कुछ सालों से एक तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।
वर्ष 2018 में महातिर मोहम्मद के सत्ता पर काबिज़ होने के बाद से भारत के लिये खासतौर पर परिस्थितियाँ कुछ कठिन हुई हैं। उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय विदेश मंत्रालय की गुज़ारिश के बावजूद महातिर ने जाकिर नाइक को यह कहकर भारत भेजने से मना कर दिया था कि वहाँ उसकी जान को खतरा हो सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2011 में दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि और वर्ष 2012 में आपराधिक मामलों में एक-दूसरे की कानूनी सहायता संबंधी समझौता होने के बावजूद मलेशिया ने जाकिर नाइक को भारत को सौंपने से इनकार कर दिया।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर पर बयान देकर मलेशिया ने पाकिस्तान से बढ़ती करीबी और भारत से संबंधों पर पड़ते इसके असर को उजागर कर दिया।
महातिर ने संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में अप्रत्याशित रूप से कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ‘भारत ने कश्मीर पर आक्रमण कर उसे कब्ज़े में कर रखा है, जो संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के उलट है।’
✍✍पाम तेल और भारत
मलेशिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पाम आयल के कारोबार पर निर्भर है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत में खाने में इस्तेमाल किये जाने वाले तेलों में पाम तेल का हिस्सा दो-तिहाई है।
भारत पाम आयल के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हुआ है। भारत को पाम आयल की अपनी ज़रूरत को पूरा करने के लिये आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। देश में खपत होने वाले कुल पाम आयल का लगभग 60-70 प्रतिशत तेल विदेशों से आयात होता है।
भारत हर साल लगभग 90 लाख टन पाम तेल आयात करता है और यह मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से आयातित होता है।
भारत और मलेशिया के बीच सहयोग के क्षेत्र
भारत मलेशिया के पाम आयल का सबसे बड़ा खरीददार देश है। भारत और मलेशिया के बीच कुल 17.2 बिलियन डॉलर का व्यापार है, जिसमें से भारत 10.8 बिलियन डॉलर का आयात करता है।
हाल के वर्षों में मलेशियाई कंपनियों और निवेशकों द्वारा भारत में कई परियोजनाओं, विशेष रूप से बुनियादी ढाँचे और निर्माण क्षेत्रों में निवेश किया गया है। साथ ही निवेश के नए क्षेत्रों का पता भी लगाया गया।
मलेशियाई कंपनियाँ भारत के विभिन्न राज्यों में कई बुनियादी ढाँचागत परियोजनाओं में काम कर रही हैं। भारतीय कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर मलेशिया की अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है।
रॉयल मलेशियाई वायु सेना और भारतीय वायु सेना प्रशिक्षण, रख-रखाव, तकनीकी सहायता और सुरक्षा संबंधी मुद्दों में सहयोग के लिये विमान सुरक्षा और रख-रखाव मंच की स्थापना के संदर्भ में काम कर रहे हैं।
दोनों देश आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय अपराध का मुकाबला करने में सहयोग कर रहे हैं। साथ ही, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर मलेशियाई और भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान, विकास तथा तकनीकी जानकारी और दस्तावेज़ों के पारस्परिक आदान-प्रदान में सहयोग कर रहे हैं।
मलेशिया में भारतीय मूल के समुदाय के योगदान का उत्सव मनाने के लिये कुआलालंपुर में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र का नाम ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय सांस्कृतिक केंद्र’ के रूप में नामित किया गया है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय सांस्कृतिक केंद्र, भारत और मलेशिया के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक संगोष्ठियों, कार्यशालाओं का आयोजन करके भारतीय शास्त्राीय संगीत और भारतीय नृत्य जैसे कि कत्थक और मणिपुरी के लिये भारतीय पेशेवरों और प्रशिक्षकों को नियुक्त करके द्विपक्षीय सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देता है।
इसके अलावा खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल के नियम व प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के आदान-प्रदान के ज़रिये खेल के क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए हैं। इंटरप्रेन्योरशिप डवलपमेंट इंस्टीट्यूट अहमदाबाद तथा मलेशियन ह्यूमन रिसोर्स फंड के बीच प्रशिक्षण तथा अन्य क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को अंजाम एक देने पर एक समझौता हुआ।
मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटीज़ और कौशल विकास जैसे भारत द्वारा उठाए गए नए विकास और व्यापारिक पहलों में मलेशियाई व्यापारियों के लिये निवेश के महत्त्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
आयुर्वेद एवं भारतीय परंपरा की अन्य पारंपरिक चिकित्साओं में दोनों देशों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने की ज़रूरत को स्वीकार करते हुए मलेशिया ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के तहत भारत से एक आयुर्वेद के चिकित्सक और दो थेरेपिस्ट की प्रतिनियुक्ति की है।
टिकाऊ ऊर्जा विकास, भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा अर्जित करने की दिशा में एक प्रमुख तत्त्व रहा है और भारत तथा मलेशिया दोनों ही देश बेहतर ऊर्जा सुविधाओं के साथ अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ाने पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दोनों ही पक्षों ने जल्द से जल्द नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा पर एक संयुक्त कार्य समूह के गठन पर सहमति जताई है।
✍✍आसियान देशों से भारत का संबंध
दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत का संबंध 2000 वर्ष से भी पुराना है। भारत के कंबोडिया, मलेशिया एवं थाइलैंड जैसे देशों के बीच प्राचीन व्यापार का पूरा दस्तावेज़ मौजूद है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की संस्कृतियों, परंपराओं एवं भाषाओं पर इन शुरुआती संपर्कों का पूरा प्रभाव पड़ा है। कंबोडिया में अंगकोरवाट मंदिर परिसर, इंडोनेशिया में योग्याकर्त्ता के निकट बोरोबुदूर एवं प्रमबन मंदिर एवं मलेशिया में प्राचीन कैंडिस जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भारतीय हिन्दू-बौद्ध प्रभाव दिखते हैं।
इसके अलावा भारत सरकार की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति एवं आसियान के साथ संबंधों को मज़बूत बनाने के लिये 3-सी (कॉमर्स, कनेक्टिविटी और कल्चर) हमारे व्यापक सहयोग के ज्वलंत उदाहरण हैं।
सामाजिक सांस्कृतिक मोर्चे पर, आसियान-भारत छात्र विनिमय कार्यक्रम एवं वार्षिक दिल्ली संवाद जैसे कार्यक्रम लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मज़बूत बनाते हैं। इन मंचों के ज़रिये आसियान देशों व भारत के युवा, शिक्षाविद एवं उद्योगपति आपस में मिलते हैं, एक दूसरे से सीखते हैं तथा रिश्तों को प्रगाढ़ बनाते हैं।
भारत हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक बड़े समुद्री लेनों के साथ रणनीतिक रूप से अवस्थित है। ये समुद्री लेन आसियान के कई सदस्य देशों के लिये महत्त्वपूर्ण व्यापार रास्ते भी हैं।
✍✍आगे की राह
एक ऐसे देश के रूप में जहाँ लगभग 8 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है, मलेशिया भारत की विदेश नीति में एक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर से घिरा हुआ मलेशिया भारत की पूर्व की ओर देखो नीति का एक प्रमुख स्तंभ है तथा भारत की समुद्री संपर्क रणनीतियों के लिये महत्त्वपूर्ण है।
ऐसे में भारत को धैर्य का परिचय देते हुए मलेशिया के साथ अपने संबंधों को परिभाषित करना होगा। वहीं मलेशिया को यह प्रयास करना होगा कि उनकी घरेलू राजनीति भारत जैसे पड़ोसी देश के साथ खराब संबंधों की नींव पर न स्थापित हो।
Ram Kumar Jha
15/01/2020
Top 89⃣ दैनिक समसामयिकी 🏆 IAS PCS Exam Specific 👉 15 January )
✍✍ 1⃣ रायसीना डायलॉग में यूएस-ईरान तनाव का मुद्दा उठा
• वैश्विक कूटनीति पर आयोजित होने वाले एशिया के बेहद अनूठे कार्यक्रम ‘रायसीना डायलॉग-2020’ में हिस्सा लेने वाले कई राजनेताओं ने भारत को विश्व मंच पर और सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही है।
• विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डॉयलाग के शुरुआती सत्र को संबोधित करते हुए कहा भी कि भारत अब सिर्फ दुनिया में होने वाले इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं बनना चाहता। वह इसके केंद्र के तौर पर स्थापित होना चाहता है। यही नहीं जिस तरह से बहुध्रुवीय विश्व बन रहा है, उसमें अपने हितों की रक्षा करने के लिए भी इस तरह का आयोजन जरूरी है, ताकि एक मंच पर सभी पक्षों की राय जानी जा सके।
• जयशंकर जब भाषण दे रहे थे, तब उनके सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) हमदुल्लाह मोहिब, दुनिया के आठ देशों के पूर्व प्रमुख और तकरीबन एक दर्जन देशों के वर्तमान विदेश मंत्री उपस्थित थे।
• अगले दो दिनों के दौरान रायसीना डायलॉग-2020 के तहत 80 सत्रों का आयोजन होगा, जिसमें दुनियाभर से आए तकरीबन 700 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।पहले दिन के उद्घाटन सत्र में अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक कारोबार की दिक्कतें और जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली समस्याओं पर खास तौर पर चर्चा हुई।
• डेनमार्क के पूर्व पीएम व नाटो के पूर्व महासचिव एंड्रेस रासमुसेन ने कहा कि अभी जिस तरह से कई देशों में तानाशाहों का कब्जा है उसे देखते हुए दुनिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों को एक होना चाहिए। भारत इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।
• उन्होंने पीएम मोदी की भूरि-भूरि प्रशंसा की। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि हंिदू प्रशांत क्षेत्र में भारत एक अहम शक्ति है और आगे भी बना रहेगा।
• उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि भारत अब इस क्षेत्र में ज्यादा क्रियाशील हो गया है। बताते चलें कि मौरिसन को ही इस कार्यक्रम का उद्घाटन करना था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग लगने से उन्होंने अपना दौरा रद कर दिया। रायसीना डायलॉग उस समय हो रहा है जब कूटनीतिक तौर पर दुनिया में काफी अस्थिरता है।
• कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आए विदेशी प्रतिनिधियों के साथ भारत के बेहद महत्वपूर्ण संबंध हैं। जैसे ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ इस कार्यक्रम में होंगे। अभी अमेरिका के साथ बेहद तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद उनका इस कार्यक्रम में शिरकत करना इसकी अहमियत को बताता है।
• यहां यह भी बता दें कि मोदी की ईरान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी होगी। कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले 12 विदेश मंत्रियों में से मोदी सिर्फ जरीफ और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ अलग से बैठक करेंगे।
• माना जा रहा है कि अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से ईरान से तेल खरीदना बंद कर चुका भारत अब उसके साथ रिश्तों को लेकर ज्यादा मुखर होने का मन बना चुका है। यही वजह है कि ईरान व अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने पर जयशंकर ने पहले ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर बात की।
✍✍ 2⃣ केरल सरकार ने CAA को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, ऐसा करने वाला पहला राज्य
• नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इससे पहले 59 और अर्जियां दाखिल कर इस कानून को पहले से चुनौती दी जा चुकी है। मंगलवार को केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सीएए को चुनौती देते हुए कहा है कि ये संविधान के समानता, स्वतंत्रता और धर्म निरपेक्ष सिद्धांत के खिलाफ है।
• सीपीएम की अगुवाई वाली केरल में सरकार है। केरल सरकार के तौर पर पहली बार किसी राज्य सरकार ने सीएए को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। केरल सरकार ने ही पहली बार विधानसभा में इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था।
• सुप्रीम कोर्ट ने 26 दिसंबर 2019 को सुनवाई के दौरान इस मामले की जांच का फैसला किया था। इस मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था।
✍✍3. फरवरी के आखिर में भारत आ सकते हैं डॉनल्ड ट्रंप
• अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का भारत दौरा जल्द हो सकता है। 7 जनवरी को पीएम नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत के बाद अब इसके लिए संभावित तारीख पर काम भी शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार ट्रंप 20 से 28 फरवरी के बीच भारत के दौरे पर आ सकते हैं और इसका औपचारिक ऐलान जल्द हो सकता है।
• दोनों देशों के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में कार्यक्रम की रूपरेखा तय करना शुरू कर दिया है। अगर ट्रंप भारत आते हैं तो बतौर राष्ट्रपति उनका पहला दौरा होगा। अमेरिका में इसी साल के अंत में राष्ट्रपति का चुनाव होना है। पिछले एक साल के अंदर उनके भारतीय दौरे की पहल कई बार हुई लेकिन वह मुमकिन नहीं सकी।
• मोदी के पिछले साल अमेरिकी दौरे के बाद भी नवंबर-दिसंबर में उनके भारतीय दौरे की चर्चा हुई लेकिन अमेरिका में चल रहे हालात की वजह से दौरा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार इस बार भी जिस तरह से कार्यक्रम बन रहा है उसके अनुसार वे सिर्फ भारत आएंगे। पाकिस्तान का दौरा नहीं करेंगे। यह पाकिस्तान के लिए करारा झटका हो सकता है।
• किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का भारतीय दौरा जनवरी 2015 में हुआ था जब तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा गणतंत्र दिवस पर खास मेहमान बने थे।
✍✍4. अमेरिका ने चीन को करेंसी मैनीपुलेटर की सूची से हटाया
• अमेरिका और चीन के बीच होने जा रहे पहले दौर के कारोबारी समझौते से पहले अमेरिका ने चीन को करेंसी से छेड़छाड़ करने वाले (करेंसी मैनीपुलेटेर) देशों की सूची से हटा दिया है। उसने चीन को पिछले वर्ष इस सूची में डाला था। समझौते पर हस्ताक्षर से ठीक पहले वित्त मंत्रालय ने अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा है कि चीन का यूआन मजबूत हुआ है, इसलिए उसे अब करेंसी मैनीपुलेटर माना जाना ठीक नहीं है। इस कदम को समझौते से पहले गुडविल संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
• पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर जानबूझकर करेंसी को कमजोर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि चीन ने अपनी करेंसी को कमजोर करके अमेरिकी कारोबार और फैक्टरियों को हड़पने की कोशिश की है।
• पिछले वर्ष चीन ने अपनी करेंसी यूआन को प्रति डॉलर सात के स्तर तक गिरा दिया था। यह बाद में सुधरकर एक डॉलर के मुकाबले 6.93 यूआन के स्तर तक आ गई।
• कम हुआ चीन का ट्रेड सरप्लस : चीन और अमेरिका में लगभग दो वर्ष तक चले ट्रेड-वार के चलते चीन के ट्रेड सरप्लस में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल चीन के ट्रेड सरप्लस में 8.5 परसेंट की गिरावट आई। इस दौरान चीन का ट्रेड सरप्लस करीब 29,580 करोड़ डॉलर रहा।
• 2018 में चीन का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस 32,330 करोड़ डॉलर रहा था। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनातनी के चलते शुल्क में कई बार इजाफा किया गया था।
✍✍5. भारत-चीन के बीच व्यापार 3 अरब डॉलर घटा, 2018 में था 58.04 अरब डॉलर
• भारत-चीन के बीच व्यापार एक साल पहले की तुलना में करीब 3 अरब डॉलर कम रहा। दोनों देशों में आर्थिक नरमी से व्यापार प्रभावित हुआ है।
• व्यापार में गिरावट के बावजूद वर्ष 2019 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा (चीन को निर्यात की तुलना में वहां से आयात का आधिक्य) 56.77 अरब डॉलर के साथ ऊंचा बना रहा।
• चीन के सीमाशुल्क सामान्य विभाग (जीएसीसी) के मंगलवार को जारी आंकड़े के अनुसार भारत के साथ व्यापार में चीनी मुद्रा-आरएमबी-युआन के हिसाब से 1.6 प्रतिशत की हल्की वृद्धि हुई है जबकि डॉलर के हिसाब से व्यापार 3 अरब डॉलर घटा है।
• जीएसीसी के उप-मंत्री जोऊ झिवु ने कहा कि चीन-भारत का द्विपक्षीय व्यापार पिछले साल 639.52 अरब युआन (करीब 92.68 अरब डॉलर) रहा।
• यह सालाना आधार पर 1.6 प्रतिशत अधिक है। वर्ष-2019 में चीन से भारत को निर्यात 74.72 अरब डॉलर रहा। 2018 में चीन ने भारत को 76.87 अरब डॉलर का निर्यात किया था। इसी दौरान भारत का चीन को निर्यात घट कर 17.95 अरब डॉलर के बराबर रहा।
• यह इससे पिछले वर्ष 18.83 अरब डॉलर था। वर्ष 2019 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 56.77 अरब डॉलर रहा। यह 2018 में 58.04 अरब डॉलर था।
✍✍6. डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की सुनवाई को सीनेट में भेजने के लिए निचले सदन में आज होगी वोटिंग
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की सुनवाई को संसद के ऊपरी सदन सीनेट में भेजने के लिए निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज मतदान होगा। विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने यह जानकारी दी। 435 सदस्यीय चिनले सदन में डेमोक्रेट्स बहुमत में हैं।
• सदन में एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जांच करने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाने के मामले में ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाते हुए पिछले महीने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की। सदन की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने अपनी पार्टी को एक बैठक के दौरान मतदान की जानकारी दी। सांसद हैरी क्यूलर ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि मतदान कल होगा।
• बता दें कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोलान्ड ट्रंप के खिलाफ हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में महाभियोग प्रस्ताव पास हो चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग चलाने के लिए लंबी बहस चली और फिर मतदान हुआ।
• हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने के पक्ष में मतदान किया है।
• समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सत्ता के दुरुपयोग के लिए महाभियोग का प्रस्ताव अमेरिकी हाउस में 197 के मुकाबले 230 मतों से पास हुआ। जिसके बाद अब सुनवाई को सीनेट में भेजने के लिए आज निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज मतदान होगा
• डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ पहला आरोप सत्ता का दुरुपयोग है जिसमें ट्रंप पर यूक्रेन पर 2020 के आम चुनावों में उनके संभावित राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन को बदनाम करने के लिए दबाव बनाने का आरोप है। जबकि दूसरा आरोप ट्रंप पर महाभियोग मामले में सदन की जांच में सहयोग नहीं करने का है।
ECONOMY
✍✍7. माइकल पात्रा बने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए डिप्टी गवर्नर
• माइकल पात्रा (Michael Patra) को रिजर्व बैंक (RBI) का नया डिप्टी गवर्नर (Deputy Governor) नियुक्त किया गया है। वह अगले 3 साल तक इस पद पर रहेंगे। RBI के मौजूदा कार्यकारी निदेशक व मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य माइकल पात्रा को यह पद विरल आचार्य के इस्तीफा देने के बाद से खाली पड़ा हुआ था।
• आचार्य से पहले उर्जित पटेल इस पद पर रहे थे। बता दें डॉ. विरल आचार्य ने व्यक्तिगत कारणों से 23 जुलाई के बाद सेवाएं देने में असमर्थता जताते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
• 2017 में आरबीआई के साथ करियर शुरू करने वाले माइकल पात्रा की मौद्रिक नीति को लेकर सोच आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास से मेल खाती है। दास के दिसंबर 2018 में पद संभालने के बाद से रेपो रेट में लगातार तीन बार हुई कटौती में पात्रा ने हमेशा पक्ष में मतदान दिया है।
• बता दें इस पद पर परंपरागत रूप से केंद्रीय बैंक के बाहर के अर्थशास्त्रियों का चयन होता रहा है। डिप्टी गर्वनर का यह पद विरल आचार्य के इस्तीफा देने के बाद से खाली पड़ा हुआ है।
✍✍8. SBI रिपोर्ट: स्लोडाउन से इस साल घटेंगी 16 लाख नौकरियां
• देश की अर्थव्यवस्था में सुस्ती से रोजगार सृजन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। चालू वित्त वर्ष में नई नौकरियों के अवसर एक साल पहले की तुलना में 16 लाख कम सृजन होने का अनुमान है। एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट इकोरैप से यह जानकारी मिली है।
• रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 में इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में 16 लाख कम नौकरियों का सृजन होने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में कुल 89.7 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए थे।
• कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के आंकड़ों के अनुसार 2018-19 में 89.7 लाख नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए थे। चालू वित्त वर्ष में इसमें 15.8 लाख की कमी आने का अनुमान है। ईपीएफओ के आंकड़े में मुख्य रूप से कम वेतन वाली नौकरियां शामिल होती हैं जिनमें वेतन की अधिकत सीमा 15,000 रुपये मासिक है।
• रिपोर्ट में की गई गणना के अनुसार अप्रैल-अक्तूबर के दौरान शुद्ध रूप से ईपीएफओ के साथ 43.1 लाख नए अंशधारक जुड़े। सालाना आधार पर यह आंकड़ा 73.9 लाख बैठेगा।
• सरकारी नौकरियों में भी कमी : ईपीएफओ में केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों और निजी काम-धंधे में लगे लोगों के आंकड़े शामिल नहीं है। 2004 से ये आंकड़े राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत स्थानांतरित कर दिए गए हैं।
• रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार के एनपीएस की श्रेणी के आंकड़ों में भी राज्य और केंद्र सरकार में भी मौजूदा रुझानों के अनुसार 2018-19 की तुलना में चालू वित्त वर्ष में 39,000 कम अवसर श्रृजित होने का अनुमान है।
• रिपोर्ट के अनुसार, निजी कंपनियों की ओर से श्रमिकों के वेतन में कम बढ़ोतरी भी चिंता का विषय है। इस कदम से अधिक कर्ज लेने की दर बढ़ने का खतरा है, जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय तंत्र के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
• गौरतलब है कि मई, 2019 में केंद्र सरकार ने माना था कि भारत में बेरोजगारी दर 45 साल में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई और जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच बेरोजगारी 6.1 प्रतिशत थी। वहीं 7.8 प्रतिशत शहरी युवाओं के पास नौकरी नहीं थी।
उद्योगों में श्रमिकों की मांग घटी
• रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत में छाई सुस्ती की वजह से नए श्रमिकों की मांग घटी है। कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं, जिनके समाधान में देरी की वजह से ठेके पर श्रमिकों की भर्ती में बड़ी गिरावट आई है।
यूपी-बिहार के श्रमिकों ने कम पैसे भेजे
• रिपोर्ट के अनुसार असम, बिहार, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में नौकरी मजदूरी के लिए बाहर गए व्यक्तियों की ओर से घर भेजे जाने वाले धन में कमी आई है। यह दर्शाता है कि ठेका श्रमिकों की संख्या कम हुई है। इन राज्यों के लिए मजदूरी के लिए पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाते हैं और वहां से घर पैसा भेजते रहते हैं।
• आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में इन पैसों की औसत वृद्धि 9.4 से 9.9 प्रतिशत पर टिकी है। यह दर्शाता है कि श्रमिकों की वेतन वृद्धि काफी धीमी हो रही है। नए रोजगार में ज्यादा बढ़ोतरी भी नहीं हुई है।
SCIENCE
✍✍9. गगनयान के बाद भारत का अपना स्पेस स्टेशन बनाएगा इसरो : सिवन
• इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन 2022 तक अपना पहला स्पेस मिशन गगनयान भेजने की तैयारियों में जुटा है, लेकिन उसकी नजर उससे कहीं आगे है। इसरो के चेयरमैन के. सिवन का कहना है कि गगनयान के बाद और भी मिशन भेजे जाएंगे और उसके बाद अंतरिक्ष में भारत का स्पेस स्टेशन भी बनाया जाएगा।
• सिवन ने बताया, 'स्वतंत्रता दिवस 2022 से पहले हम पहला मिशन भेजेंगे जिसमें इंसान होंगे। इसरो ने तीन सदस्यों वाले क्रू को ले जाने के लिए 3.7 टन का स्पेसक्राफ्ट डिजाइन किया है लेकिन पहली फ्लाइट में सिर्फ एक ऐस्ट्रनॉट को भेजे जाने की संभावना है।
• ऐस्ट्रनॉट्स को ट्रेन करने के लिए और क्रू कैप्सूल में लाइफ सपॉर्ट सिस्टम बनाने के लिए रूस की मदद ली गई है। ऐस्ट्रनॉट्स के स्पेस सूट भी रूस में सिले जाएंगे।
• भारत इस साल एक ह्यूमनॉइड भेजेगा जिसका रॉकेट इंसानों के लिहाज से बनाया जाएगा। इसमें ऐसे सिस्टम होंगे जो इंसानों के हिसाब से काम करेंगे।
Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan
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केन्या की राजधानी नैरोबी में पहले सस्टेनेबल ब्लू इकोनॉमी सम्मेलन का आयोजन किया गया।
ये सम्मेलन केन्या द्वारा आयोजित और जापान-कनाडा द्वारा सह-आयोजित था।
यह सम्मलेन सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र के 2030 अजेंडा, पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मलेन और संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन 2017 'कॉल टू एक्शन' गति पर आयोजित किया गया था।
इस सम्मेलन में 184 देशों के 17,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
महत्वपूर्ण जानकारी ➡️ Exam Oriented
➖➖➖सविनय अवज्ञा आंदोलन➖➖➖
• 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के बाद, गांधीजी ने सरकार को कई मांग सौंपे और उन्हें चेतावनी दी कि इन मांगों को स्वीकार न करने की स्थिति में वे आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर हो जाएँगे।
• चूंकि सरकार ने उनके प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं दिया, इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार को कोई कर नहीं देने, सैन्य व्यय के खिलाफ तथा नमक कर के विरोध के कार्यक्रम, के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया।
• 12 मार्च 1930 को, गांधीजी गुजरात में अपने 79 सहयोगियों के साथ नमक कानून तोड़ने के लिए समुद्र के दांडी तट की ओर बढ़े। यह साबरमती आश्रम से 200 मील दूर था और पैदल दांडी पहुंचने में 24 दिन लग गए थे।
• इस यात्रा में सरदार पटेल उनके साथ हो गए थे। वे 5 अप्रैल 1930 को वह वहां पहुंचे और 6 अप्रैल 1930 को सुबह की प्रार्थना के बाद, उन्होंने समुद्र किनारे पर नमक बनाना शुरू कर दिया। इस प्रकार उन्होंने नमक कानून तोड़ा।
• सुभाष चंद्र बोस ने उनके दांडी मार्च की तुलना नेपोलियन के पेरिस मार्च और मुसोलिनी के रोम मार्च के साथ की।
सविनय अवज्ञा आंदोलन के कार्यक्रम:
(i) भारतीयों को नमक कानून तोड़ना चाहिए।
(ii) विदेशी कपड़े का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
(iii) शराब की दुकानों को लूटा जाना चाहिए और बंद किया जाना चाहिए।
(iv) सरकारी कर्मचारी द्वारा काम नहीं करना चाहिए।
(v) छात्रों को सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार करना चाहिए।
• 5 मई 1930 को गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया।
• आंदोलनोंकारियों ने इस कार्यक्रम में 'कोई कर नहीं अभियान' को शामिल कर लिया।
Brought to you by Ram Kumar Jha
05/04/2018
छात्रहित सर्वोपरि :: 🖋️🖋️ताकत जीतने से नहीं आती. आपके संघर्ष आपकी ताकत पैदा करते हैं. जब आप मुसीबतों से गुजरते हैं और हार नहीं मानते हैं, वही ताकत है.
सदैव स्मरण रखें ↪️↪️ आप जीतने के लिए पैदा हुए हैं, लेकिन एक विजेता बनने के लिए, आपको जीतने के लिए प्लान करना होगा, जीतने के लिए तैयारी करनी होगी और जीतने की उम्मीद करनी होगी.
💯 बातों की एक बात ➡️➡️ हमेशा भूखा रहें कभी भी अपनी मौजूदा उपलब्धियों से संतुष्ट होकर रूकना नहीं ....
अपने विरोधियों को अपनी सफलता से मारो और मुस्कुराहट से दफना दो.🙂🙂🙂
जानना जरूरी है 📝📝
जीवन में सफलता पाने के ६ नियम. १. खुद पर भरोसा करो. २. कुछ नियम तोड़ो. ३. नाकामयाब होने से डरो मत. ४. नकारात्मक लोगों को नजरंदाज़ करो. ५. कड़ी मेहनत करो ६. कुछ वापस दो समाज को , जरूरतमंदों को, प्रकृति को
Ram Kumar Jha
29/03/2018
जानना जरूरी है ➡➡ भारत के संविधान में लिखा है कि भारत एक राज्यों का संघ है. इस समय भारत में 29 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं. इन सभी राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से हर 5 साल के अन्तराल पर गठित किये जाने वाले वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र के करों में हिस्सा दिया जाता है; जिसे राज्य अपने विकास कार्यों और राज्य मशीनरी को ठीक से चलाने के लिए खर्च करता है.
वित्त आयोग द्वारा दिए जाने वाले हिस्से से अलग केंद्र सरकार किसी राज्य को और अधिक वित्तीय सहायता देता है. वर्तमान में भारत के 29 राज्यों में से 11 राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है और 5 अन्य राज्य इस दर्जे की मांग कर रहे हैं.
विशेष राज्य का दर्जा कैसे दिया जाता है?
वर्ष 1969 में पांचवे वित्त आयोग (अध्यक्ष महावीर त्यागी) ने गाडगिल फोर्मुले के आधार पर 3 राज्यों (जम्मू & कश्मीर, असम और नागालैंड) को विशेष राज्य का दर्जा दिया था. इन तीनों ही राज्यों को विशेष दर्जा देने का कारण इन राज्यों का सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक पिछड़ापन था. राष्ट्रीय विकास परिषद् ने राज्यों को विशेष दर्जा देने के लिए निम्न मापदंडों को बनाया है.
जिस प्रदेश में संसाधनों की कमी हो
कम प्रति व्यक्ति आय हो
राज्य की आय कम हो
जनजातीय आबादी का बड़ा हिस्सा हो
पहाड़ी और दुर्गम इलाके में स्थित हो
कम जनसंख्या घनत्व
प्रतिकूल स्थान
अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित होना
विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर क्या फायदा मिलता है?
किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर निम्न लाभ केंद्र सरकार की तरफ से प्राप्त होते हैं.
#राजनीति_विज्ञान By Dr. Manjesh Kumar
1. विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को उत्पादन कर (Excise duty), सीमा कर(Custom duty), निगम कर (Corporation tax), आयकर (Income tax) के साथ अन्य करों में भी छूट दी जाती है.
जिन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है उनको जितनी राशि केंद्र सरकार द्वारा दी जाती है उसका 90% अनुदान (grant) के रूप में और बकाया 10% बिना ब्याज के कर्ज के रूप में दिया जाता है. इसके अलावा अन्य राज्यों को केंद्र की आर्थिक सहायता का 70% हिस्सा कर्ज के रूप में (इस धन पर ब्याज देना पड़ता है) और बकाया का 30% अनुदान के रूप में दिया जाता है.
यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि जो राशि केंद्र सरकार से राज्य सरकार को अनुदान के रूप में दी जाती है उस राशि को केंद्र सरकार को वापस लौटाना नही पड़ता है, लेकिन जो राशि उधार के तौर पर राज्यों को दी जाती है उस पर राज्य सरकार को ब्याज देना पड़ता है.
केन्द्र के सकल बजट में नियोजित खर्च (planned expenditure) का लगभग 30% हिस्सा उन राज्यों को दिया जाता है जिनको विशेष श्रेणी के राज्यों में रखा गया है.
विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को ऋण स्वैपिंग स्कीम और ऋण राहत योजनाओं का लाभ भी मिलता है.
विशेष दर्जा प्राप्त जो राज्य; एक वित्त वर्ष में पूरा आवंटित पैसा खर्च नही कर पाते हैं उनको यह पैसा अगले वित्त वर्ष के लिए जारी कर दिया जाता है.
वर्तमान में किन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है?
मणिपुर , मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, असम, जम्मू & कश्मीर, नागालैंड
निम्न 5 राज्य विशेष राज्य के दर्जे को लेकर आंदोलित हैं:
1. बिहार, आन्ध्र प्रदेश ,राजस्थान, गोवा, ओडिशा
अन्य राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा क्यों नही मिल रहा है.
वित्त मंत्री अरुण जेटली का तर्क है कि 14 वें वित्त आयोग (Y.V रेड्डी के अध्यक्षता में गठित) की सिफारिशें सौंपी जा चुकी हैं; इसलिए अब इसकी सिफारिशें में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नही किया जा सकता है. इस कारण अब विशेष राज्य का किसी अन्य राज्य को नही दिया जा सकता है.
उम्मीद है कि लेख को पढने के बाद आप समझ गए होंगे कि विशेष राज्य का दर्जा किन राज्यों को दिया गया है, किस आधार पर दिया जाता है और जिन राज्यों के पास यह दर्जा है उनको क्या-क्या सुविधाएँ मिल रही हैं जो कि अन्य राज्यों को नही मिल रहीं हैं?
by Dr. Manjesh Kumar
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