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वित्त वर्ष 2023-24 (कर निर्धारण वर्ष 2024-25) अर्थात् 01 अप्रैल, 2023 से 31 मार्च, 2024 तक के वित्त वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म जारी कर दिए गए हैं।
अपना आयकर रिटर्न अभी दाखिल करें, अंतिम तिथियों का इंतजार ना करें।
Regards
CA Rohit Bansal
Rohit And co
Opp. Union Bank of India, Railway Road Narwana
📱75030-87674
✉️ [email protected]
28/02/2018
होली के इस शुभ अवसर पर
आपको और आपके परिवार को हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनायें.....
01/01/2018
Wish a Very-2 Happy New Year
04/08/2017
RB AIRLINES- A NEW SERVICE LAUNCH BY RB GROUP.....
Wish to a Very-2 Happy New Year 2017 To All My Dear Friends & Relatives
Wish to Very-2 New Year 2017 to All My Dear Friends & Relatives
20/09/2016
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एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही । पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और
वह धनी सेठ बन गया । सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई । पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी और जहाज में बैठ गया । उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी मन से बैठा था ।
सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है । मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर कोई लेने को तैयार नहीं है । सेठ ने सोचा 'इस देश में मैने बहुत धन कमाया है, और यह मेरी कर्मभूमि है, इसका मान रखना चाहिए !' उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई । उस व्यक्ति ने कहा- मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है ।
सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था.. लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए
500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी । व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया- कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रूककर सोच लेना । सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया । कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय सेठ अपने नगर को पहुँचा ।
उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ । घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के नीचे की जमीन खिसक गई । पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक युवक सोया हुआ था । अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और ये यहां अन्य पुरुष के साथ है ।दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ । क्रोध में तलवार निकाल ली । वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही
उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त ज्ञान सूत्र याद आया-कि कोई भी कार्य करने से
पहले दो मिनट सोच लेना । सोचने के लिए रूका । तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई । बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई । जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी वह ख़ुश हो गई और बोली- आपके बिना जीवन सूना सूना था ।इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले यह मैं ही जानती हूँ । सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष कोदेखकर कुपित था । पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग । तेरे पिता आए हैं । युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई ।उसके लम्बे बाल बिखर गए । सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये आपकी बेटी है ।
पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए
इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही
पालन पोषण और संस्कार दिए हैं ।
यह सुनकर सेठ की आँखों से
अश्रुधारा बह निकली ।
पत्नी और बेटी को गले लगाकर
सोचने लगा कि यदि
आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता
तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता ।
मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता ।
ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा
लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो
500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं ।
'ज्ञान तो अनमोल है '
इस कहानी का सार यह है कि
जीवन के दो मिनट जो दुःखों से बचाकर
सुख की बरसात कर सकते हैं ।
वे हैं - 'क्रोध के दो मिनट'
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प्रेरित कर सकता है
कर्म भोग
एक गाँव मे एक किसान रहता था उसके परिवार
मे उसकी पत्नी और एक लड़का था।कुछ सालो के बाद पत्नी मृत्यु हो गई उस समय लड़के की उम्र दस साल थी किसान ने दुसरी शादी कर ली।
उस दुसरी पत्नी से भी किसान को एक पुत्र प्राप्त हुआ।किसान की दुसरी पत्नी की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।
किसान का बड़ा बेटा जो पहली पत्नी से प्राप्त हुआ था जब शादी के योग्य हुआ तब किसान ने बड़े बेटे की शादी कर दी।फिर किसान की भी कुछ समय बाद मृत्यु हो गई।
किसान का छोटा बेटा जो दुसरी पत्नी से प्राप्त हुआ था और पहली पत्नी से प्राप्त बड़ा बेटा दोनो साथ साथ रहते थे।
कुछ टाईम बाद किसान के छोटे लड़के की तबयीत खराब रहने लगी।
बड़े भाई ने कुछ आस पास के वैदो से ईलाज करवाया पर कोई राहत ना मिली।छोटे भाई की दिनभर तबीयत बिगड़ी जा रही थी और बहुत खर्च भी हो रहा था।
एक दिन बड़े भाई ने अपनी पत्नी से सलाह की यदि ये छोटा भाई मर जाऐ तो हमे इसके ईलाज के लिऐ पैसा खर्च ना करना पड़ेगा।
तब उसकी पत्नी ने कहाँ की क्यो न किसी वैद से बात करके इसे जहर दे दिया जाऐ किसी को पता भी ना चलेगा कोई रिस्तेदारी मे भी कोई शक ना करेगा कि बिमार था बिमारी से मृत्यु हो गई।
बड़े भाई ने ऐसे ही किया एक वैद से बात की आप अपनी फिस बताऔ ऐसा करना मेरे छोटे भाई को जहर देना है !
वैद ने बात मान ली और लड़के को जहर दे दिया और लड़के की मृत्यु हो गई।उसके भाई भाभी ने खुशी मनाई की रास्ते का काँटा निकल गया अब सारी सम्पति अपनी हो गई।
उसका अतिँम संस्कार कर दिया।कुछ महीनो पश्चात उस किसान के बड़े लड़के की पत्नी को लड़का हुआ !
उन पति पत्नी ने खुब खुशी मनाई,बड़े ही लाड प्यार से लड़के की परवरिश की गिने दिनो मे लड़का जवान हो गया।उन्होने अपने लड़के की शादी कर दी!
शादी के कुछ समय बाद अचानक लड़का बीमार रहने लगा।माँ बाप ने उसके ईलाज के लिऐ बहुत वैदो से ईलाज करवाया।जिसने जितना पैसा माँगा दिया सब दिया की लड़का ठीक हो जाऐ।
अपने लड़के के ईलाज मे अपनी आधी सम्पति तक बेच दी पर लड़का बिमारी के कारण मरने की कागार पर आ गया। शरीर इतना ज्यादा कमजोर हो गया की अस्थि पिजंर शेष रह गया था।
एक दिन लड़के को चारपाई पर लेटा रखा था और उसका पिता साथ मे बैठा अपने पुत्र की ये दयनीय हालत देख कर दुःखी होकर उसकी और देख रहा था!
तभी लड़का अपने पिता से बोला की भाई अपना सब हिसाब हो गया बस अब कफन और लकड़ी का हिसाब बाकी है उसकी तैयारी कर लो।
ये सुनकर उसके पिता ने सोचा की लड़के का दिमाग भी काम ना कर रहा बीमारी के कारण और बोला बेटा मै तेरा बाप हुँ भाई नही।
तब लड़का बोला मै आपका वही भाई हुँ जो आप ने जहर खिलाकर मरवाया था जिस सम्पति के लिऐ आप ने मरवाया था मुझे अब वो मेरे ईलाज के लिऐ आधी बिक चुकी है आपकी की शेष है हमारा हिसाब हो गया !
तब उसका पिता फुट-फुट कर रोते हुवे बोला की मेरा तो कुल नाश हो गया जो किया मेरे आगे आ गया पर तेरी पत्नी का क्या दोष है जो इस बेचारी को जिन्दा जलाया जाऐगा(उस समय सतीप्रथा थी जिसमे पति के मरने के बाद पत्नी को पति की चिता के साथ जला दिया जाता था)।
तब वो लड़का बोला की वो वैद कहा जिसने मुझे जहर खिलाया था तब उसके पिता ने कहा की आप की मृत्यु के तीन साल बाद वो मर गया था।
तब लड़के ने कहा की ये वही दुष्ट वैद आज मेरी पत्नी रुप मे है मेरे मरने पर इसे जिन्दा जलाया जाऐगा।
बन्दी छोड़ परमेश्वर कहते है कि
तुमने उस दरगाह का ,
महल ना देखा धर्मराय लेगा ,
तील तील का लेखा।।
एक लेवा एक देवा दुतम ,
कोई किसी का पिता ना पुतम ।
ऋण सबंध जुड़ा है ठाडा ,
अंत समय सब बारह बाटा ।।
किसी के साथ कभी ऐसी बहस मत करो ,कि बहस तो जीत जाओ मगर रिश्ता हार जाओ...।
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कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे
हम तो दरिया है समंदर में उतर जायेंगे
वो तरस जायेंगे प्यार की एक बून्द के लिए
हम तो बादल है प्यार के…किसी और पर बरस जायेंगे|
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