Kitabghar Prakashan
मिलिए किताबों से उनके अपने घर किताबघर में।
11/02/2026
यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि मनुष्य की चेतना, संघर्ष और विकास की अद्भुत गाथा है।
वैज्ञानिक दृष्टि और सांस्कृतिक पुनर्व्याख्या के साथ रची गई कालजयी कृति — जो अतीत के काल-कुहासे को हटाकर सच का उजास दिखाती है।
हर विचारशील पाठक के लिए अनिवार्य संग्रह! 📕📕
https://www.amazon.in/dp/9380707932
10/02/2026
सावरकर—विवादों की धुंध के पार एक वैचारिक योद्धा।
राजनीति-प्रेरित मिथकों से मुक्त, उनके राष्ट्रनिर्माण में तात्विक योगदान का वस्तुपरक और निर्भीक मूल्यांकन।
स्वतंत्रता आंदोलन की अनकही रिक्तियों और विभाजन की त्रासदी के मूल कारणों पर एक विचारोत्तेजक दृष्टि।
यह पुस्तक आपको इतिहास को नए संदर्भ में समझने के लिए विवश करती है।
https://www.amazon.in/dp/9389663849
09/02/2026
अख़बारी सनसनी से अलग, यह पुस्तक साहित्यिक साक्षात्कार को उसकी असली गरिमा में प्रस्तुत करती है। इन साक्षात्कारों में मोहन राकेश का व्यक्तित्व, कृतित्व, संघर्ष और सपने गहराई से उद्घाटित होते हैं। नई कहानी आंदोलन और आधुनिक हिंदी रंगमंच के एक पूरे दौर का यह जीवंत, प्रामाणिक दस्तावेज़ है।
गंभीर पाठकों, शोधार्थियों और रंगकर्मियों के लिए एक अनिवार्य पुस्तक।
https://www.amazon.in/dp/8170166063
09/02/2026
यह किताब सिर्फ़ शिक्षा पर चर्चा नहीं करती,
बल्कि मूल्यों के क्षरण, गुणवत्ता के ह्रास और संस्थाओं की गिरती साख पर सीधा सवाल उठाती है।
अध्यापकों, छात्रों और प्रशासकों के वास्तविक अनुभवों से उपजा यह विमर्श शिक्षा को फिर से मानवीय, सार्थक और प्रभावी बनाने का आग्रह करता है।
जो शिक्षा को शांति, सद्भाव और समेकित विकास का मार्ग मानते हैं—उनके लिए यह पुस्तक एक ज़रूरी दस्तावेज है।
https://www.amazon.in/Shiksha-Sarthakta-Jagmohan-Singh-Rajput/dp/B0DJW57C5G/ref=tmm_pap_swatch_0
07/02/2026
06/02/2026
“फालतू औरत” — जब स्त्री हर रिश्ते में होते हुए भी बेदख़ल कर दी जाती है…
पंजाबी साहित्य की प्रख्यात लेखिका अजीत कौर की कहानियाँ किसी नारेबाज़ी की नहीं, बल्कि संवेदना और सच्चाई की आवाज़ हैं।
यहाँ स्त्री पत्नी, प्रेमिका, माँ या बेटी भर नहीं—
वह उस पुरुषवादी समाज में जी रही है जहाँ उसे अक्सर ‘फालतू औरत’ बना दिया जाता है।
इन कहानियों में है स्त्री का दर्द, संघर्ष और अपने लिए एक मुकम्मल स्पेस की तलाश—
जो पाठक को बहते दरिया की तरह अपने साथ बहा ले जाती हैं।
📖 एक जरूरी किताब — हर उस पाठक के लिए जो समाज को स्त्री की आँखों से देखना चाहता है।
https://www.amazon.in/dp/819373260X
05/02/2026
04/02/2026
03/02/2026
नरेन्द्र कोहली व्यंग्य साहित्य में कथात्मकता, वैचारिक उदारता और संवेदनात्मक सघनता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने विभिन्न विधाओं के साथ हिंदी व्यंग्य को भी समृद्ध किया है। उनके व्यंग्य लेखन की बहुत बड़ी शक्ति है घटना को अनुभव में रूपांतरित कर लेने की क्षमता। निजी सुख-दुःख से लेकर देश-दुनिया के जाने कितने पक्षों पर उन्होंने लिखा है। वे संप्रेषण का महत्त्व जानते हैं, इसलिए उनकी रचनाएं पाठकों में पर्याप्त लोकप्रिय हैं। कई बार वैचारिक पक्षध्रता या जड़ता एक लेखक को सीमित कर देती हैं। नरेन्द्र कोहली जड़ता को ‘रचनात्मक दृढ़ता’ से अपदस्थ करने वाले विवेकशील लेखक हैं। राजनीति से जुड़े विषयों में उनका विवेक विशेष रूप से देखा जा सकता है। वे असंगति पर आक्रमण करते हुए भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्यों को बचाने का प्रस्ताव रखते हैं। ‘व्यंग्य समय’ में नरेन्द्र कोहली के चयनित व्यंग्य उनके विस्तृत व्यंग्य लेखन से कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। रचनाकार को समग्रता में पढ़ने और पुनः पाठ के लिए प्रेरित करने का उद्देश्य भी इस उपक्रम में निहित है।
https://www.amazon.in/dp/8193372867
02/02/2026
प्रस्तुत पुस्तक के विषय-व्यक्तित्व मैंने बिना कसी तरतीब के चुने है । इनमें भी वे महिलाएँ और पुरुष विशेष है, जिनसे कि 60 और 70 के दशकों में मेरी दोस्ती हुई । अपने बारे में मेरे इन उद्गारों को पाकर कुछ तो इतने नाराज हुए कि उनसे बोलचाल ही बंद हो गई, पर कुछ खुश भी हुए । उन्होंने माना के उनके प्रति मैंने अपने स्नेह का ही इजहार किया है । कुछ ऐसे भी है, जिन्होंने अपने बारे में मेरे लिखे को पढ़ने की जहमत उठाना भी गवारा नहीं किया और कहा कि मैं उनके बारे में चाहे जो सोचता रहूँ उससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है । पर अब आप ही बताएं कि उनके बारे में मेरा यह लिखना किसी काम का है या नहीं । -खुशवंत सिंह
https://www.amazon.in/dp/9385054651
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04/02/2026