Civil Minds

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16/05/2026

Benefits of Getting a Government Job in India.

16/05/2026

भारत में शिक्षा विभाग कैसे काम करता है।

16/05/2026

भारतीय राजनीति।

15/05/2026

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14/05/2026

Vintage image of ganga field.

14/05/2026

A heartbreaking, ultra-realistic 4K historical documentary photo from 1979 at Marichjhapi Island in the Sundarbans. A group of impoverished Dalit refugees from East Pakistan, including women holding infants, sit huddled inside makeshift bamboo huts along the muddy riverbank. Their faces show extreme starvation and fear under a grim, overcast sky. The image has the raw look of a 1970s newspaper press photograph with desaturated colors, heavy analog film grain, vignettes, and chemical water stains. [ON-SCREEN TEXT: At the bottom 35–40% of the image, in LARGE BOLD WHITE HINDI SERIF FONT WITH SUBTLE SHADOW, the text reads: "सुंदरबन के द्वीपों में दफन एक अनसुनी चीख। मारीचझापी, 1979"]

14/05/2026

19वीं सदी का कलकत्ता... जिसे ब्रिटिश साम्राज्य का 'महलों का शहर' कहा जाता था। लेकिन इन आलीशान इमारतों और बाबू संस्कृति (भद्रसमाज) की चकाचौंध के पीछे एक और कलकत्ता भी सांस ले रहा था।एक तरफ जहाँ आलीशान हवेलियों में महफ़िलें सजती थीं, विदेशी शराब बहती थी और पुनर्जागरण की बातें होती थीं, वहीं दूसरी तरफ उसी शहर की सड़कों पर नंगे पैर रिक्शा खींचते मजदूर और सुबह से रात तक पसीना बहाते आम लोग थे। इस औपनिवेशिक राजधानी की तरक्की की नींव में इन गुमनाम चेहरों का खून-पसीना शामिल था, जो कभी इतिहास की मुख्यधारा के पन्नों में जगह नहीं पा सके।तस्वीर में दिख रही यह गहरी खाई सिर्फ बीते कल की कहानी नहीं है, बल्कि आज के आधुनिक शहरों का भी एक कड़वा सच है। इस पुरानी तस्वीर को देखकर आपको क्या महसूस होता है

14/05/2026

13 अप्रैल 1919 के उस काले दिन की कहानी हम सबने सुनी है, लेकिन सोचिए उस रात अमृतसर के उन घरों में क्या गुजरा होगा जहाँ से लोग हंसते-खेलते बैसाखी के मेले और सभा में गए थे, लेकिन कभी लौटकर नहीं आए।कर्नल डायर के आदेश पर चली 1650 राउंड गोलियों ने सिर्फ मासूमों की जान नहीं ली, बल्कि भारत के इतिहास का रुख हमेशा के लिए बदल दिया। बाग के संकरे रास्ते जब बंद हुए, तो बुज़ुर्गों, महिलाओं और बच्चों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं था। उस शाम जब सूरज ढला, तो पूरे शहर में सिर्फ चीखें और अपनों को ढूंढते बेबस परिवारों का रोना गूंज रहा था।

13/05/2026
24/03/2026

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