Jitendra kumar

Jitendra kumar

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पत्रकार हूं लिखूंगा बही जो है सही। जय श्री राम

16/04/2026

समय आ गया है कि हम सिर्फ सरकार पर निर्भर न रहें, बल्कि खुद भी पहल करें। हर व्यक्ति अपने घर के आसपास, खाली पड़ी जमीन या छोटे से प्लॉट में जैविक खेती शुरू कर सकता है। यह न केवल हमारे परिवार को शुद्ध और सुरक्षित भोजन देगा, बल्कि धीरे-धीरे एक बड़े बदलाव की शुरुआत भी बनेगा। अगर हर नागरिक छोटा कदम उठाए, तो पूरा देश मिलकर एक स्वस्थ, स्वच्छ और ऑर्गेनिक भारत बना सकता है।

28/01/2026

🎓 हम छात्र हैं, कोई आंकड़ा नहीं!

UGC के फ़ैसले
हमारे सपनों, मेहनत और भविष्य को प्रभावित करते हैं।
बिना संवाद के थोपे गए नियम
हमें स्वीकार नहीं।

आज आवाज़ उठाएंगे
तभी कल बेहतर शिक्षा मिलेगी।

✊ छात्रों की एकता ज़िंदाबाद ✊






— जितेंद्र कुमार

03/12/2025

भुख, भय और भ्रष्टाचार: समाज की तीन सबसे बड़ी बेड़ियाँ

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विकास की अनगिनत कहानियाँ लिखी जा रही हैं, लेकिन इसी चमक के पीछे तीन अंधेरे सच आज भी हमारे समाज की जड़ों को खोखला कर रहे हैं—भुख, भय और भ्रष्टाचार। ये तीनों न केवल एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं, बल्कि एक-दूसरे को बढ़ावा भी देते हैं। जब तक इनका अंत नहीं होगा, तब तक कोई भी सभ्यता, कोई भी सरकार और कोई भी नीति वास्तविक अर्थों में सफल नहीं हो सकती।
भुख केवल पेट की जरूरत नहीं है, यह इंसान की गरिमा, उसके अस्तित्व और उसकी उम्मीदों से जुड़ी लड़ाई है। आज भी लाखों लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
गरीबी और भूख दोनों एक-दूसरे का चक्र बनाकर आगे बढ़ते हैं—
• भूख शिक्षा छीन लेती है,
• शिक्षा की कमी रोजगार छीन लेती है,
• और रोजगार की कमी फिर भूख को जन्म देती है।

सरकारें योजनाएँ बनाती हैं, घोषणाएँ होती हैं, लेकिन जब तक व्यवस्था की नीयत में ईमानदारी नहीं होगी, तब तक भूख मिटने के बजाय बढ़ती जाएगी। भूख एक ऐसी चोट है जो शरीर पर नहीं, आत्मा पर पड़ती है।
भय किसी भी समाज की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह भय कई रूपों में मौजूद है—
• सत्ता का भय,
• समाज का भय,
• गरीबी का भय,
• भविष्य का भय,
• और सबसे खतरनाक, सत्य बोलने का भय।

जब नागरिक डरकर चुप हो जाते हैं, तब गलत लोग और ताकतवर हो जाते हैं। भय सिर्फ़ लोगों की आवाज़ को नहीं दबाता, बल्कि उनके अधिकारों को भी छीन लेता है। एक डराया हुआ समाज कभी परिवर्तन की दिशा में आगे नहीं बढ़ सकता।
भ्रष्टाचार वह ज़हर है जो ऊपर से नीचे तक हर व्यवस्था को कमजोर करता है। यह सिर्फ़ रिश्वत लेने या देने तक सीमित नहीं है—
• भ्रष्टाचार नीयत में होता है,
• निर्णयों में होता है,
• नीतियों में होता है,
• और कभी-कभी चुप्पी में भी होता है।

जब भ्रष्टाचार मजबूत होता है, तो उसका सबसे बड़ा शिकार गरीब, कमजोर और भूखे लोग होते हैं। योजनाओं का पैसा बीच रास्ते गायब हो जाता है, सुविधाएँ कागज़ों में पूरी हो जाती हैं, और जनता समस्याओं के साथ अकेली छोड़ दी जाती है।



निष्कर्ष
इन तीनों समस्याओं से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है जागरूकता और एकजुटता।
• जब लोग भूख को अपराध नहीं, अधिकार समझकर आवाज़ उठाएँगे,
• जब भय के खिलाफ सच बोलने वाले लोग बढ़ेंगे,
• और जब भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता समाज की आदत बन जाएगी,

तभी असली परिवर्तन संभव है।
भुख शरीर को तोड़ती है, भय मन को तोड़ता है और भ्रष्टाचार देश को।
यह तीनों मिलकर समाज की दिशा तय करते हैं।
अगर हम एक न्यायपूर्ण, सुरक्षित और विकसित भारत चाहते हैं, तो इन बेड़ियों को तोड़ना ही होगा।
jitdndra gautam

27/04/2025

अनुराग कश्यप, आप ब्राह्मणों पर मूत सकते हो! आसान है ब्राह्मण पर मूतना! कोई ऐसा कानून नहीं जो आपको ब्राह्मण पर मूतने से रोके! ब्राह्मण के लिए कोई प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट नहीं है। मूतने की पूरी आजादी है आपको!
लेकिन किस ब्राह्मण पर मूतोगे? आपके इंडस्ट्री वाले ब्राह्मण नायकों और निर्देशकों पर ! या सेंसर बोर्ड के ब्राह्मण सदस्यों पर ? सत्ता पक्ष के ब्राह्मण मंत्रियों पर या विपक्ष के ब्राह्मण नेताओं पर। या देश के सभी ब्राह्मणों पर अपने मूत्र का छिड़काव करोगे ?
गनीमत है कि ब्राह्मणों पर मूतने की इच्छा व्यक्त किए हो! किसी और जाति पर मूतने की बात किए होते तो अबतक लोग आप की मूत्र नलिका काटकर, मलद्वार में भूसा भर दिए होते!

15/08/2024

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

जय हिंद🇮🇳🇮🇳

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