Creative Point
आज फिर एक कहानी लिखूंगा
तुम्हारी नहीं अपनी जुबानी लिखूंगा
मन तूने मारा है बेवफाई का खंजर
फिर वी आज मैं खुदको बेवफा लिखूंगा 💔
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मेरी निगाहों में एक ख्वाब आवारा हैं
चांद भी देखूं तो चेहरा तुम्हारा hi pyara है
मेरी आंखों के सदा सुनते हैं सारे मौसम
तुम कहो तो कड़ी धूप को बादल कर दूं...!!
इस क़दर इश्क़ चमकता है मेरी आंखों में
आंख भर के अगर मैं तुम्हें देखूं तो पागल कर दूं...!!
जब रूह में उतर जाता है बेपनाह इश्क का समंदर
लोग जिंदा तो होते हैं मगर किसी और के अंदर
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