Janma Rashi

Janma Rashi

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All kinds of Hindu pooja services available. Vedic Expert from Kashi. Hindu Pooja Path/ Priest Services. Categories:-

1.

Home and housing Pooja:

a) Grihpravesh/ House warming
b) Navgraha Pooja
c) Vaastu Shanti Pooja
d) Mahamrityunjaya Path
e) Rudrabhishek Pooja
f) Satyanarayan Pooja etc....

2. Astronomical Pooja

a) Kaalsarpdosh pooja
b) Mangaldosh pooja
c) Moolashanti pooja
d) Pitridosh pooja etc ....

3. Events and Festivals

a) Children and new borns: naming ceremo

08/08/2017

आपके किचन में छिपा है, समस्याओं का समाधान
यदि व्यक्ति का शरीर ही रोगों से घिरा हुआ होगा तो एक बिमार आत्मा, कभी भी आध्यात्मिक और मानसिक शांति को प्राप्त नहीं कर सकती है। इसीलिए वेदों में आयुर्वेद का जिक्र किया गया है ताकि व्यक्ति स्वस्थ रहे और आध्यात्मिक और मानसिक शांति को प्राप्त कर सके।

आज हर घर में एक या एक से ज्यादा व्यक्ति बिमार है। बिमारियों ने हमारे जीवन को नर्क बना दिया है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि घर की रसोई या किचन में कुछ अचूक आयुर्वेदिक दवायें, मौजूद होती हैं किन्तु अपने अल्प ज्ञान की वजह से हम उनका प्रयोग नहीं कर पाते हैं।

तो आइये जानते हैं उन्हीं आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में, जिनके नित्य प्रयोग से बिमारियों से बचा जा सकता

अदरक :-
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अदरक एक दर्द निवारक दवा के रूप में भी काम करती है। यदि सिरदर्द हो रहा हो तो सूखी अदरक को पानी के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे अपने माथे पर लगाएं। इसे लगाने पर हल्की जलन जरूर होगी लेकीन यह सिरदर्द दूर करने में मदद मिलेगी। साथ ही साथ अदरक को खाने में प्रयोग करने से मौसमी बिमारियों से भी व्यक्ति बच जाता है।

अजवायन :-
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अजवायन का प्रयोग पेट दर्द को दूर करने में किया जाता है। पेट दर्द होने पर आधा चम्मच अजवायन को पानी के साथ फांखने से पेट दर्द में राहत मिलती है। नियमित रुप से इस नुस्खों को अपनाने से आप पेट साफ रहेगा।

हल्दी :-
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हल्दी में एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक तत्व पाए गए हैं। ये तत्व चोट के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। घाव पर हल्दी का लेप लगाने से वह ठीक हो जाता है। चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है। हल्दी अगर अच्छी क्वालिटी की है तो दूध के साथ इसको प्रयोग करने से शारीरिक कमजोरी भी नहीं होती है।

तुलसी के पत्ते :-
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तुलसी में बहुत सारे औषधीय तत्व पाए जाते हैं। तुलसी की पत्तियों को पीसकर चंदन पाउडर में मिलाकर पेस्ट बना लें। दर्द होने पर प्रभावित जगह पर उस लेप को लगाने से दर्द में राहत मिलेगी। एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर हल्का गुनगुना करके खाने से गले की खराश और दर्द दूर हो जाता है।

मेथी :-
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एक चम्मच मेथी दाना में चुटकी भर पिसी हुई हींग मिलाकर पानी के साथ फांखने से पेट दर्द में आराम मिलता है। मेथी डायबिटीज में भी लाभदायक होती है। डायबिटीज की यह एक अचूक दवा भी है। मेथी के लड्डू खाने से जोडों के दर्द में लाभ मिलता है।

हींग :-
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हींग दर्द निवारक और पित्तवर्द्धक होती है। छाती और पेट दर्द में हींग का सेवन लाभकारी होता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर हींग को पानी में घोलकर पकाने और उसे बच्चो की नाभि के चारो ओर उसका लेप करने से दर्द में राहत मिलती है।

करेला :-
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करेले का रस पीने से पित्त में लाभ होता है। जोडों के दर्द में करेले का रस लगाने से काफी राहत मिलती है।

नींबू में छिपा है सिरदर्द का प्राकृतिक उपचार :-
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नींबू में प्रकृति ने ऐसा प्रभाव रखा है कि यदि बिना दूध की चाय में नींबू की कुछ बूँदें मिलाकर उसे पिया जाए तो सिर दर्द में तुरंत आराम आ जाता है। केवल यही नहीं बल्कि थकन के कारण भी होने वाले सिर दर्द के लिए नींबू के छिल्कों का पेस्ट बनाकर माथे पर मिलने से सिर दर्द में जल्दी आराम आ जाता है। नींबू का प्रयोग वजन कम करने में भी किया जा सकता है।

Janma Rashi 02/06/2017

Janma Rashi All kinds of Hindu pooja services available. Vedic Expert from Kashi.

Photos 02/06/2017

घर में पूजा के बाद रोज करें ये एक काम, दूर होगी नेगिटिविटी
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देवी-देवताओं की पूजा में घंटी बजाने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। हम जब भी घर में पूजा करते हैं तो उस समय में भी घंटी अनिवार्य रूप से बजानी चाहिए। घंटी बजाने के धार्मिक महत्व भी हैं और वैज्ञानिक महत्व भी हैं।

घर में घंटी बजाने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं और दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा
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घंटी से जो आवाज निकलती है, वह वातावरण को शुद्ध और पवित्र बनाती है। वातावरण में कई सूक्ष्म कीटाणु रहते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। घर में लगातार एक लय में घंटी बजने से जो ध्वनि निकलती है, वह इन सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट कर देती है। साथ ही, इस आवाज से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा भी बेअसर हो जाती है। इसी वजह सभी मंदिरों में घंटी लगाई जाती है और घंटियों की आवाज से ही मंदिर में सकारात्मकता महसूस होती है।

घंटी के बिना पूर्ण नहीं होती आरती
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देवी-देवताओं की आरती, घंटी के नाद के बिना पूर्ण नहीं हो सकती है। भगवान की आरती में कई प्रकार के वाद्य यंत्र बजाए जाते हैं, इनमें घंटी भी महत्वपूर्ण है। घंटी की ध्वनि मन, मस्तिष्क और शरीर को ऊर्जा प्रकार प्रदान करती है। इस ऊर्जा से बुद्धि तेज होती है। मंदिरों में जब भी आरती होती है तो घंटी की आवाज से वहां उपस्थित लोग खुद को तनाव मुक्त महसूस करते हैं।

Photos 16/05/2017

Good morning ... Varanasi

08/05/2017

बार-बार होता है अपमान तो रविवार से शुरू करें ये उपाय :-
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यदि किसी व्यक्ति को घर-परिवार या समाज में मान-सम्मान नहीं मिलता है तो इसके पीछे ज्योतिषीय दोष भी हो सकते हैं। कुंडली में सूर्य के कमजोर होने की वजह से व्यक्ति को अपमान का सामना करना पड़ता है। सूर्य के दोष दूर करने के लिए रविवार को विशेष उपाय किए जाते हैं, क्योंकि रविवार का कारक सूर्य ही है। यहां जानिए कुछ ऐसे उपाय जो रविवार को करने से सूर्य के दोष दूर हो सकते हैं...For consultation please whatsapp@9599009995

Photos 27/04/2017

Akshaya Tritiya Tithi Begins at 10:29 am on April 28, 2017.
Akshaya Tritiya Tithi Ends at 06:55 am on on April 29, 2017.

Akshaya Tritiya is among the auspicious three and a half muhurat’s of the year, the other being Gudi Padwa, Dussera and half a day of Balipratipada. Popularly known as ‘Akshaya Tritiya’ and ‘Akha Teej’ in several parts of India, the day is believed to bring a lot of prosperity and luck along with it. ‘Akshaya’ in Sanskrit means ‘inexhaustible’. The festival falls on the third day of the bright fortnight in the month of Vaishakha. The day is said to have great importance as it is the only day when is never absent from the lunar calendar. It is believed that deeds and rituals done during the day is permanent. Hence, the day is considered to be auspicious for marriages, starting a new venture or buying gold.

On this day, devotees worship Goddess Lakshmi and Kubera, the God of Wealth, to seek their great divine blessings. It is believed that Lord Kubera prayed to Goddess Lakshmi and was granted wealth and prosperity.

Doing these things on Akshaya Tritiya is considered auspicious.

Impress Lord Parshurama :-
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Among the many legends associated with the day, it is said that it marks the birth of Lord Parasurama, sixth incarnation of Lord Vishnu. It is the day when Parasurama destroyed the kings of Haideya dynasty. As stated in the Puranic scriptures, Parshurama reclaimed land from the sea. Chanting ‘Hare-Krishna’ mantra 108 times helps to impress the lord.

Buy gold :-
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Buying gold is the most popular thing people do on Akshaye Tritiya. As buying the metal adds to the asset value as well as offers best investment returns. As ‘Akshaye’ means ‘never diminishing’ buying gold on the day ensures eternal wealth.

Donation :-
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Here is the list of things to be donated along with its significance .............................

Water: Donating water with betel nuts to a Brahmin helps to get blessed with immense wealth.
K*m K*m: Donating K*m-K*m on the day gives long life to husband.
Chandan: Donating chandan (sandalwood) avoids accidents.
Coconut: Donating coconut helps seven generations to get relief of hell.
Buttermilk: Helps to achieve success in education.
Udakumbha Daanam: Donating water in a bronze or silver vessel along with camphor, saffron, tulsi leaves with betul nut is considered the most important offering for those who want to get married, get rid of past life sins and those who want to have children.
Clothes: Ensures long-life

Powerful mantras for increasing wealth on Akshaya Tritiya :-
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Chanting this powerful mantra seven times a day while worshiping Goddess Lakshmi will help you prosper :-

OM MAHALAKSHMI CHA VIDHMAHE
VISHNU PATHNI CHA DHEEMAHI
TANNO LAKSHMI PRACHODAYAT.

Photos 11/04/2017

श्री हनुमान जन्मोत्सव, चेत्र पूर्णिमा व्रत :-
हनुमान जयन्ती एक हिन्दू पर्व होता है। यह चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि चैत्र मास की पूर्णिमा को ही राम भक्त हनुमान ने माता अंजनी के गर्भ से जन्म लिया था। यह व्रत हनुमान जी की जन्मतिथि का है। प्रत्येक देवता की जन्मतिथि एक होती है, परन्तु हनुमान जी की दो मनाई जाती हैं। हनुमान जी की जन्मतिथि को लेकर मतभेद हैं। कुछ हनुमान जयन्ती की तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मानते हैं तो कुछ चैत्र शुक्ल पूर्णिमा। इस विषय में ग्रंथों में दोनों के ही उल्लेख मिलते हैं, किंतु इनके कारणों में भिन्नता है। पहला जन्मदिवस है और दूसरा विजय अभिनन्दन महोत्सव।

जन्म कथा :-
हनुमान जी के जन्म के बारे में एक कथा है कि- 'अंजनी के उदर से हनुमान जी उत्पन्न हुए। भूखे होने के कारण वे आकाश में उछल गए और उदय होते हुए सूर्य को फल समझकर उसके समीप चले गए। उस दिन पर्व तिथि होने से सूर्य को ग्रसने के लिए राहु आया हुआ था। परन्तु हनुमान जी को देखकर उसने उन्हें दूसरा राहु समझा और भागने लगा। तब इन्द्र ने अंजनीपुत्र पर वज्र का प्रहार किया। इससे उनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई, जिसके कारण उनका नाम हनुमान पड़ा। जिस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ वह दिन चैत्र मास की पूर्णिमा था। यही कारण है कि आज के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा-आराधना की जाती है तथा व्रत किया जाता है। साथ ही मूर्ति पर सिन्दूर चढ़ाकर हनुमान जी का विशेष शृंगार भी किया है। आज के दिन रामभक्तों द्वारा स्नान ध्यान, भजन-पूजन और सामूहिक पूजा में हनुमान चालीसा और हनुमान जी की आरती के विशेष आयोजन किये जाते हैं।

भक्ति और शक्ति का बेजोड़ संगम :-
मारुतिनंदन को चोला चढ़ाने से जहां सकारात्मक ऊर्जा मिलती है वहीं बाधाओं से मुक्ति भी मिलती है। पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए शनि को शांत करना चाहिए। जब हनुमानजी ने शनिदेव का घमंड तोड़ा था तब सूर्यपुत्र शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया कि उनकी भक्ति करने वालों की राशि पर आकर भी वे कभी उन्हें पीड़ा नहीं देंगे। कन्या, तुला, वृश्चिक और अढैया शनि वाले तथा कर्क, मीन राशि के जातकों को हनुमान जयंती पर विशेष आराधना करनी चाहिए। हनुमानजी को भक्ति और शक्ति का बेजोड़ संगम बताया गया है। हनुमानजी का शुमार अष्टचिरंजीवी में किया जाता है, यानी वे अजर-अमर देवता हैं। उन्होंने मृत्यु को प्राप्त नहीं किया। बजरंगबली की उपासना करने वाला भक्त कभी पराजित नहीं होता। हनुमानजी का जन्म सूर्योदय के समय बताया गया है इसलिए इसी काल में उनकी पूजा-अर्चना और आरती का विधान है।

Photos 25/03/2017

गायत्री मंत्र क्यों और कब ज़रूरी है

सुबह उठते वक़्त 8 बार ❕अष्ट कर्मों को जीतने के लिए !!

भोजन के समय 1 बार❕👆❕ अमृत समान भोजन प्राप्त होने के लिए !!

बाहर जाते समय 3 बार ❕✌👆❕समृद्धि सफलता और सिद्धि के लिए !!

👏 मन्दिर में 12 बार ❕👐✌❕
प्रभु के गुणों को याद करने के लिए !!

😢छींक आए तब गायत्री मंत्र उच्चारण ☝1 बार अमंगल दूर करने के लिए !!

सोते समय 🌙 7 बार ❕✋✌ ❕सात प्रकार के भय दूर करने के लिए !!

कृपया सभी बन्धुओं को प्रेषित करें 👏👏 !!!

ॐ , ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,

"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,

"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।

ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।

ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

जानीए

ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक
और
अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...

1. ॐ और थायराॅयडः-
ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

2. ॐ और घबराहटः-
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

3. ॐ और तनावः-
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

4. ॐ और खून का प्रवाहः-
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

5. ॐ और पाचनः-
ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

6. ॐ लाए स्फूर्तिः-
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

7. ॐ और थकान:-
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

8. ॐ और नींदः-
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

9. ॐ और फेफड़े:-
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है। अक्षय.....!!

10. ॐ और रीढ़ की हड्डी:-
ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

11. ॐ दूर करे तनावः-
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे।

Photos 19/03/2017

saturn and Mars conjunction ( शनि और मंगल ) :-
शनि और मंगल शनि और मंगल आपस में एक-दूसरे से शत्रुता का भाव रखते हैं। मौत का कारकतत्व शनि के पास है और खून का कारकतत्व मूल रूप से मंगल के पास है। जन्मपत्रिका में शनि और मंगल की युति जैसे एक ही भाव में दोनों का साथ बैठना, परस्पर का दृष्टि संबंध बनना, ष्डाष्टक योग बनाना दुर्घटनाओं का मूल कारण है। जब गोचर में शनि और मंगल की अशुभ युतियां बनती हैं जैसे एक ही भाव में दोनों ही एक साथ बैठते हैं अथवा आपस में ष्डाष्टक योग बनाते हैं, तब भी इन युतियों व योगों का अशुभ प्रभाव देखने को मिलता है। गोचर में जब ऐसे योग बनते हैं तो उस योग की अवधि में दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है। इस युति काल में दुर्घटनाओं में एक-दो नहीं, बल्कि समूह में मृत्यु होती है। प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। देशों में युद्ध की स्थिति बनती है। आतंकी घटनाओं में भी इस अवधि में जान-माल का ज्यादा नुकसान होता है।

Photos 13/03/2017

Happyholi...

Photos 24/02/2017

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