Filmi mood

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05/10/2025

मेरा सभी से विनम्र अनुरोध है कि 2 मिनट का समय निकालकर जरूर पढ़ें।

जब जीरो दिया मेरे भारत ने....
हम केवल यह जानते हैं और वो भी एक फिल्म के गाने से कि भारत का विश्व को दिया गया एकमात्र योगदान जीरो है। उसके आगे की बात पर मस्तिष्क जड़ हो जाता है। मैं यहां जीरो और दशमलव के अलावा भारत में हुए आविष्कार/ खोज की लिस्ट बनाकर दे रहा हूं;
1. गुरुत्व का सिद्धांत
2. कैलकुलस यानि अवकलन
3. थियरी ऑफ स्पेस वैक्यूम
4. प्रकाश का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में गति
5. कपड़ा बुनना और रंगना
6. बटन
7. फ्लश टॉयलेट
8. नागरिक सभ्यता
9. सीवेज सिस्टम
11. मिठाई बनाना
12. बेतार का तार यानि वायरलेस
13. हिग्स बोसोन थियरी
14. केस्कोग्राफ
15. प्रकाश प्रकीर्णन सिद्धांत
16. फ्रैक्शन
17. बीजगणित
18. मॉस लिमिट ऑफ व्हाइट ड्वार्फ
19. वूट्ज स्टील
20. रस्टलेस आयरन
21. ईमेल
22. ऑप्टिक फाइबर
23. यूपीआई
24. चंद्रमा पर पानी
25. समकोण त्रिभुज के वर्ग प्रमेय
26. द्विघात समीकरण
27. कैलेंडर यानी पंचांग
28. क्लाउड फॉर्मेशन
29. शिप
30. पहिया
31. शतरंज
32. लूडो
33. गेंद
34. लोकतंत्र
35. सभ्य संस्कृति
36. ग्रह गोल और अंतरिक्ष
37. धरती का मैप
38. परमाणु
39. शल्य चिकित्सा
40. वास्तु
41. न्यूक्लियोटाइड जीनोम
42. योग
43. कलरीपायट्टु
44. ज्यामिति
45. हाइड्रोलिक सिस्टम
धुन, व्याकरण, साहित्य, दर्शन के प्राथमिक सिद्धांत के साथ रामानुजन के प्रमेय इसमें शामिल नहीं है।
बावजूद इसके बहुत कुछ छूट गया है, आपको ध्यान आए तो जोड़ते चलिए बाकी साझा भी कर सकते हैं।
प्रत्येक हिंदू को अपने पूर्वजों पर धर्म पर गर्व करना चाहिए.. हमारा धर्म, डीएनए, सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, इतिहास सबसे पूरानी है.. विचार करना चाहिए कि यह आज तक दुनिया में कैसे टिका हुआ है जबकि सभी ज्ञात धर्म जो कोई 2500 वर्ष पहले से उत्पत्ति हुआ और समाप्त भी हो गया जिसमें दो का मुख्य रुप से अभी अस्तित्व में है, जिनका कहना है धरती चपटी है और जो आत्म उड़ान में चांद-तारे तक भी ठीक-ठीक पूरा-पूरा पहूंच नहीं पाएं हैं, जाहिर है ऐसे धर्म का लंबा भविष्य भी नहीं होगा.

गूगल सर्च से मिला एक आर्टिकल।

04/10/2025

एक अद्भुत संयोग देखिए, विजयदशमी और गांधी जयंती एक ही दिन पड़ रही है। मेरी गांधी जी से कोई शिकायत नहीं है, मेरी शिकायत है उन भोले-भाले हिंदुओं से जिन्होंने राम और कृष्ण को छोड़कर 1947 में एक नया पिता जी ढूंढ़ लिया और तब से वही उनके आदर्श बन गए। इस देश में भगवान राम पर चर्चा हो सकती है, भगवान कृष्ण पर चर्चा हो सकती है, लेकिन गांधी पर प्रश्न उठाना पाप समझा जाता है। जैसे ही गांधी के बारे में कुछ बोलो, पूरा देश अपॉलोजेटिक क्यों हो जाता है।
गांधी का चेहरा जैसा हमें दिखाया गया, उसके पीछे की सच्चाई बेहद कटु और कड़वी है। दक्षिण अफ्रीका में गांधी ने अपनी पत्नी कस्तूरबा से शौचालय की गंदगी साफ करवानी चाही। जब कस्तूरबा ने मना किया तो गांधी ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें घर से बाहर खड़ा कर दिया और कहा—चुड़ैल, तू घर में नहीं घुस सकती। जो आदमी अपनी पत्नी की असहमति नहीं झेल पाया, वही हमें अहिंसा और त्याग का पाठ पढ़ा रहा है। यही हमारे राष्ट्र का पिता है?
गांधी की वजह से ही खिलाफत आंदोलन खड़ा हुआ। तुर्की के खलीफा को बचाने के लिए गांधी ने भारत के हिंदुओं को मुसलमानों के पीछे खड़ा कर दिया। इसका नतीजा निकला मालाबार का मोपला विद्रोह—हज़ारों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ, औरतों की अस्मिता लूटी गई, जबरन धर्मांतरण हुआ। लेकिन गांधी का आंदोलन चलता रहा, जैसे हिंदुओं की जान की कोई कीमत ही न हो।
फिर आया डायरेक्ट एक्शन डे। जिन्ना के आदेश पर कलकत्ता की गलियों में हिंदुओं को दिनदहाड़े काटा गया। हज़ारों हिंदुओं का कत्लेआम हुआ, लाशें सड़कों पर बिछीं। जब तक हिंदू मरते रहे, गांधी मौन बैठे रहे। लेकिन जैसे ही हिंदुओं ने गोपाल पाठा की अगुवाई में पलटवार किया और अपनी रक्षा के लिए तलवार उठाई, गांधी वहीं पहुँच गए और धरना देकर हिंदुओं को रोकने लगे। तो क्या अहिंसा का ठेका केवल हिंदुओं के लिए था और मुसलमानों को खुला लाइसेंस था कि जितना चाहे हिंदुओं को काटते रहें?
नोआखली का नरसंहार भी इसी पाखंड का उदाहरण है। हिंदू गांव जलाए गए, बेटियों की इज़्ज़त लूटी गई, हजारों हिंदू उजाड़ दिए गए। गांधी वहाँ पहुँचे तो हिंदुओं का दुख बाँटने के बजाय मुसलमानों को मनाने और समझाने में लगे रहे। हिंदुओं के लिए एक शब्द तक नहीं बोले। और कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष एनी बेसेंट ने तब गांधी को लताड़ लगाते हुए कहा था—गांधी ने खिलाफत आंदोलन चलाकर भारत को पचास साल पीछे धकेल दिया, उन्होंने हिंदुओं को बलिदान की आग में झोंक दिया और मुसलमानों को तुष्टिकरण का नशा पिला दिया। लेकिन फिर भी गांधी का महात्म्य चलता रहा।
स्वामी श्रद्धानंद की हत्या अब्दुल रशीद ने की क्योंकि वे मुसलमान बने हिंदुओं को वापस सनातन में ला रहे थे। लेकिन गांधी ने कहा—हमें अब्दुल रशीद को माफ कर देना चाहिए। यानी एक धर्मयोद्धा की गर्दन कटे तो भी गांधी मौन, बल्कि हत्यारे के पक्ष में खड़े। यही थे उनके दोहरे मापदंड।
और फिर आया बंटवारे का दौर। गांधी कहते थे भारत का बंटवारा मेरी लाश पर होगा, लेकिन बंटवारा हुआ और उनकी लाश कहीं नहीं दिखी। बल्कि वे तब भी मुसलमानों को रोकने में लगे रहे कि पाकिस्तान मत जाओ, यहीं रहो। नतीजा—पंजाब और बंगाल में खून की नदियाँ बह गईं। 21 लाख हिंदू और सिखों का कत्लेआम हुआ। लेकिन गांधी की अहिंसा का ढोंग जारी रहा।
इतिहास हिंसा से भरा पड़ा है। हिंसा हमेशा तलवार से नहीं होती, निर्णयों और शब्दों से भी होती है। गांधी के निर्णयों ने हिंदुओं को हर बार बलिदान के कटघरे में खड़ा किया।
आज तक कोई यह नहीं बता सका कि किसने गांधी को महात्मा कहा, किसने उन्हें राष्ट्रपिता घोषित किया। यह उपाधि नेताओं ने अपने फायदे के लिए गढ़ी ताकि नकली गांधीवाद चलता रहे और सत्ता उनके हाथों में बनी रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि खिलाफत से लेकर मोपला, डायरेक्ट एक्शन डे से लेकर नोआखली और बंटवारे तक, जब-जब हिंदुओं की लाशें गिरीं, तब-तब गांधी मौन क्यों रहे? मुसलमानों को मनाने के लिए हर बार गांधी क्यों खड़े हो जाते थे? और 21 लाख निर्दोष हिंदुओं की हत्या की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
गांधी की झूठी महात्मा वाली छवि ही इस राष्ट्र के सबसे बड़े छल की जड़ है। और विजयदशमी का यह दिन हमें याद दिलाता है कि अधर्म के खिलाफ बोलना ही सच्चा धर्म है।

02/10/2025

जो आदमी कहते हैं न कि बीवियां तो 10 आ जाएंगी,
लेकिन मां दूसरी नहीं आएगी,
तो 1 बात बताइए अगर यही बात आपके पापा भी कहते
तो आज आपकी कितनी सारी मां होती|
दोनों बराबर ही होती है, चाहे मां हो या पत्नी
जिस तरीके से मां का फ़र्ज़ पत्नी नहीं निभा सकती
उसी तरह पत्नी का फ़र्ज़ मां नहीं निभा सकती।
एक तुम्हे दुनिया में लाई है,तो दूसरी अपना सब कुछ छोड़कर तुम्हारे लिए तुम्हारे घर आई है।
इसलिए दोनों को बराबर का हक दिया करो🙏🏻🙏🙏👇👇 🤘💎🥰👀💯

24/10/2024
26/08/2024

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