ASUR
ASUR
अंतिम सहमति स्वयं से रखना। अंतिम प्रशंसा स्वयं की करना। स्वयं को तभी खोना जब पाने के लिए स्वयं से बेहतर कुछ मिले।
टाटा समूह की जितनी कंपनियां हैं उनका मालिस टाटा सन्स है। लेकिन टाटा सन्स भी सिर्फ कंपनियों के काम काज को देखता है। उस टाटा सन्स में लगभग 66 प्रतिशत शेयर टाटा के अलग अलग ट्रस्ट के पास है।
ये जो ट्रस्ट हैं वहीं टाटा के असली मालिक हैं। टाटा समूह जो कुछ लाभ कमाता है उसका दो तिहाई हिस्सा अंतत: इन्हीं ट्रस्ट के पास चला जाता है और ट्रस्ट वह पैसा स्वास्थ, शिक्षा, स्वच्छता, आपदा राहत, खेल, कला संस्कृति, सामाजिक समरसता, जीवनयापन, स्किल डेवलपेन्ट, डिजिटल एजूकेशन और सामाजिक संस्थानों पर खर्च करता है।
व्यापार होता है बिल्कुल व्यापार की तरह लेकिन उस व्यापार से जो लाभ कमाया जाता है उसका दो तिहाई हिस्सा समाज की सेवा में खर्च कर दिया जाता है। जो एक तिहाई बचता है उसी में टाटा परिवार के सदस्यों का शेयर है और सबसे बड़ा शेयर शपूरजी पलोनजी एण्ड कंपनी का है जिसके साइरस मिस्त्री कुछ समय के लिए टाटा के चेयरमैन भी बने थे।
साइरस के निर्णय अत्यधिक लाभ की मानसिकता से ग्रस्त थी और वो टाटा समूह के मूल उद्देश्य से उसे भटकाने की कोशिश कर रहे थे जो रतन टाटा को पसंद नहीं आई। उस समय रतन टाटा ने व्यक्तिगत रूप से पहल करके साइरस को टाटा समूह से बाहर करवा दिया और स्वयं टाटा सन्स के दोबारा चेयरमैन बन गये।
और रतन टाटा का खुद का शेयर कितना था? 0.8 प्रतिशत। अब वह शेयर भी टाटा ट्रस्ट के पास चला जाएगा क्योंकि रतन टाटा अविवाहित थे।
व्यापार का ऐसे उच्च आदर्श मात्र टाटा समूह में ही दिखता है जिनके व्यापार के मूल में लोगों का हित है। फिर वो कंपनी के कर्मचारी हों कि समाज के सामान्य लोग। टाटा समूह का चेयरमैन कभी अरबपतियों खरबपतियों की रेस में शामिल नहीं होता। वह इसलिए क्योंकि वहां लाभ निजी खाते में जाने की बजाय समाज को वापस किया जा रहा है।
रतन टाटा ने टाटा समूह के उन्हीं मूल्यों को पूरी तरह निभाया जिसको जमशेदजी टाटा और सर रतन टाटा जैसे उच्च आदर्शों वाले व्यापारियों ने स्थापित किया था। रतन टाटा ने एक और साहसिक निर्णय लेते हुए पहली बार टाटा सन्स के चेयरमैन पद के लिए किसी गैर पारसी का चयन किया। एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाकर उन्होंने टाटा समूह से जुड़ा एक बड़ा मिथक तोड़ दिया।
निश्चय ही रतन टाटा जैसे व्यापारी और टाटा समूह जैसे व्यावसायिक घराने लोक समाज के सर्वोच्च सम्मान के अधिकारी हैं।
इडली के साथ खाई जाने वाली नारियल की चटनी की रेसिपी😋👌
सामग्री
👉 नारियल (कसा हुआ) – 1 कप
👉 हरी मिर्च – 2-3 (स्वादानुसार)
👉 धनिया पता – 2 टेबलस्पून (वैकल्पिक)
👉 तामरिंद (इमली का पेस्ट) – 1/2 टीस्पून (स्वादानुसार)
👉 भुनी हुई चना दाल – 2 टेबलस्पून
👉लहसुन की कलियां – 2-3 (वैकल्पिक)
👉 अदरक – 1/2 इंच टुकड़ा (वैकल्पिक)
👉 नमक – स्वादानुसार
👉 पानी – आवश्यकतानुसार
तड़के के लिए सामग्री
👉 राई (सरसों के दाने) – 1 टीस्पून,
👉 उड़द दाल – 1 टीस्पून
👉 करी पत्ते – 8-10 पत्ते
👉 सूखी लाल मिर्च – 1-2 (वैकल्पिक)
👉 हींग – 1 चुटकी
👉 तेल – 1 टेबलस्पून
👉 चटनी की तैयारी - नारियल, हरी मिर्च, धनिया पत्ता, तामरिंद (इमली), भुनी हुई चना दाल, लहसुन और अदरक को मिक्सर में डालें इसमें नमक और थोड़ा पानी डालें और इसे अच्छी तरह से पीस लें.जब तक आपको पतली या गाढ़ी चटनी की आवश्यकता हो, तब तक पानी मिलाकर इसे पीसते रहें तैयार चटनी को एक बाउल में निकाल लें।
👉 तड़का लगाएं - एक छोटी कड़ाही में तेल गरम करें गरम तेल में राई डालें जब राई चटकने लगे, तब इसमें उड़द दाल डालें और उसे सुनहरा भूरा होने तक भूनें अब इसमें करी पत्ते, सूखी लाल मिर्च और हींग.डालें। इन्हें कुछ सेकंड तक भूनें तैयार तड़के को चटनी के ऊपर डाल दें और अच्छे से मिला दें अब आपकी चटपटी नारियल की चटनी तैयार है। इसे गरमागरम इडली, डोसा, वड़ा या किसी भी दक्षिण भारतीय व्यंजन के साथ परोसें।बनाने की विधि
"गेम्स ऑफ थ्रोन्स" में मर्सिनरीज (भाड़े के लड़ाके) की एक किस्म दिखाई गई है । इन्हें बचपन में ही बधिया कर दिया जाता है । ताकि ये हनी ट्रेप में नही फंसें ।
इसके वाबजूद ये वेश्याओं के पास जाते थे । सेक्स नही करते थे बस लिपट कर लेटे रहते थे ।
स्पर्श की क्रेविंग । एक उम्र सामान्य इंसान के जीवन में भी आता है जब वह किसी औरत के साथ - जिसकी शक्ल और देह उसे आकर्षित करे, लुभाए - उसके साथ सेक्स नही करना चाहता है । बस उसे स्पर्श करना चाहता है । उसके गोद में लेटना चाहता है । उससे चिपक कर कुछ घण्टे सुकून पाना चाहता है ।
यह बेहद स्वाभाविक है । जिंदगी इस तरह से निचोड़ लेती है इंसान को कि वह कुछ घण्टे सुकून के चाहता है । औरत के बाहों से अधिक सुकून भरा जगह और कहाँ हो सकता है ।
कुछ विकसित देशों मसलन जापान में कडल-पार्लर हैं । जहां हर घण्टे के हिसाब से पैसा चुका कर कोई भी यह सुकून पा सकता है । यह होना चाहिए ।
स्पर्श बहुत ही खूबसूरत एहसास है । बस अपने मनपसंद चेहरे/जिस्म के आगोश में लेटे रहना कुछ देर पुनर्जीवित कर देता है , पुनःयुवनित कर देता है थके टूटे मन को । स्पर्श जादू है । पर दुर्भाग्य है करोड़ों का कि उन्हें यह स्पर्श नही मिल पाता है !
कहीं तो ये तमन्ना है कि किसी की गोद मिल जाये
कभी ये ख़्याल है कि यूँ तन्हा ही मर जायें
Hi friends
Like My Page
Like my page
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Address
Delhi