Astro Varun Gupta
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सूर्य की बीमारी :
* व्यक्ति अपना विवेक खो बैठता है।
* दिमाग समेत शरीर का दायां भाग सूर्य से प्रभावित होता है।
* सूर्य के अशुभ होने पर शरीर में अकड़न आ जाती है।
* मुंह में थूक बना रहता है।
* दिल का रोग हो जाता है, जैसे धड़कन का कम-ज्यादा होना।
* मुंह और दांतों में तकलीफ हो जाती है।
* बेहोशी का रोग हो जाता है।
* सिरदर्द बना रहता है।
01/02/2018
शुभ ग्रह हमेशा शुभ नहीं होते। शुभ ग्रह हमेशा शुभ नहीं होते ज्योतिषीय नियम है कि कुंडली में अशुभ ग्रहों से अधिष्ठित भाव के बल का ह्वास और शुभ ग्रह....
बसंत पंचमी 22 जनवरी 2018.
बसंत पंचमी विद्या की देवी मॉं सरस्वती की आराधना का दिन है, इसे श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। यह समृद्धि और सद्भाव का पर्व है। बसंत पंचमी माघ माह की पंचमी तिथि पर मनाया जाने वाला पर्व है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह पर्व इस साल 22 जनवरी को मनाया जा रहा है। प्राकृतिक रूप से बसंत पंचमी का बड़ा महत्व है क्योंकि इस पर्व से ही बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है और सर्दी कम होने लगती है। बसंत पंचमी पर हिन्दू धर्म के अनुनायी कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इस दिन देवी सरस्वती की पूजन का विशेष विधान है। हिन्दू धर्म में माता सरस्वती को ज्ञान, कला, संस्कृति और संगीत की देवी कहा जाता है।
हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व देवी सरस्वती को समर्पित है। क्योंकि इस दिन ही उनका जन्म हुआ था। पौराणिक मान्यता के अनुसार देवी सरस्वती को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री कहा गया है। वहीं एक अन्य मत के अनुसार उन्हें ब्रह्मा जी की स्त्री भी कहा जाता है। माता सरस्वती को विद्या की देवी कहते हैं। इनके आशीर्वाद से ज्ञान, विवेक, संगीत और कला में निपुणता मिलती है। इसलिए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का विशेष विधान है। इस दिन प्रातःकाल से लेकर अपराह्न काल के बीच सरस्वती पूजा की जाती है। इस दौरान विधि विधान से देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए।
बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजन के कई ज्योतिषीय लाभ हैं। कहते हैं कि जो मनुष्य बसंत पंचमी पर मॉं सरस्वती की आराधना करता है, उसे चंद्र, बृहस्पति, बुध और शुक्र के बुरे प्रभाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही वे लोग जिन पर चंद्रमा, बृहस्पति, बुध और शुक्र की महादशा व अंतर्दशा चल रही है उन्हें भी सरस्वती पूजन से लाभ मिलता है। वे व्यक्ति जो ज्ञान और शांति का कामना करते हैं उन्हें सरस्वती स्त्रोत का पाठ अवश्य करना चाहिए। वे छात्र जिन्हें पढ़ाई में बाधा का सामना करना पड़ रहा है उन्हें देवी सरस्वती की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
किस उम्र में शादी?
बुध शीघ ही शादी करवाता है | सातवें घर में बुध हो तो शादी जल्दी होने के योग होते हैं | बीस वर्ष की उम्र में शादी होती है यदि बुध पर कोई किसी अन्य ग्रह का प्रभाव न हो | बुध यदि सातवें घर में हो तो सूर्य भी एक स्थान पीछे या आगे होगा या फिर बुध के साथ सूर्य के होने की संभावना रहती है | सूर्य साथ हो तो दो साल का विलम्ब शादी में अवश्य होगा | इस तरह उम्र बाईस में शादी का योग बनता है | यदि सूर्य के अंश क्षीण हों तो शादी केवल बीस से इक्कीस वर्ष की उम्र में हो जाती है | अभिप्राय यह है कि बीस से चौबीस की उम्र में शादी का योग बनता है जब बुध सातवें घर में हो |
21/10/2017
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31/05/2021