Kumar skumar
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जय जय श्री सीताराम
श्री गुरुदेवाय नमः श्री सरस्वतयै नमः श्री गणेशाय नमः
30/09/2025
मेरी भव बाधा हरो राधा नागरा सोई ।
जा तन की झाई परे श्याम हरित द्विति होई ।।
गीध देह तजि धरि हरि रुपा।
भूषन बहु पट पीत अनूपा ।।
श्री राम भगवान ने गीधराज जटायू का उद्धार किया।
उसके बाद कवनध का उद्धार, बाद में भगवान माता सबरी के आश्रम में जाते हैं
ताहि देय गति राम उदारा।
सबरी के आश्रम पग धारा।।
मानस में वर्णन आया है।
कंद मूल फल सुरषि अति दिये राम कहुं आनि।
प्रेम सहित प्रभु खाएं बारम्बार बखानि ।।
बोलिए राजा रामचन्द्र भगवान की जय 🙏 🚩 🇮🇳
29/09/2025
नौवीं तिथि को श्री राम का अवतार हुआ था अवतार की श्रंखला में अठारहवां अवतार है भगवान श्री राम का।
पहला - सनकादिक
दूसरा - बाराह अवतार
तीसरा - नारद
चौथा - नर नारायण
पांचवां - कपिल
छठवां - दत्तात्रेय
सातवां - यज्ञ
आठवां - ऋषभदेव
नौवां - पृथू ,पृथू महाराज ने अपने धनुष से पृथ्वी को बराबर किया था राजा पृथु के नाम से ही धरती का नाम पृथ्वी हो गया।
दशवां - मत्स्य अवतार
ग्यारहवां - कुर्म अवतार
बारहवां - धन्वंतरि
तेरहवां - मोहिनी
चौदहवां - भगवान नरसिंह
पन्द्रहवां - वामन अवतार
सोलहवां - परशुराम
सत्रहवां - भगवान वेदव्यास
अठारहवां भगवान श्री राम का , त्रेता युग के अन्तिम चरण में इसी पृथ्वी पर हुआ ।
बोलो राजा रामचन्द्र भगवान की जय ।
28/09/2025
गीध देह तजि धरि हरि रुपा।
भूषन बहु पट पीत अनूपा ।।
श्री राम भगवान ने गीधराज जटायू का उद्धार किया।
उसके बाद कवनध का उद्धार, बाद में भगवान माता सबरी के आश्रम में जाते हैं
ताहि देय गति राम उदारा।
सबरी के आश्रम पग धारा।।
मानस में वर्णन आया है।
कंद मूल फल सुरषि अति दिये राम कहुं आनि।
प्रेम सहित प्रभु खाएं बारम्बार बखानि ।।
भगवान श्री राम ने माना शबरी के बेरों को बड़े ही प्रेम से खाया और खाने बाद बार बार बखान किया है प्रशंसा की है।।
जय जय श्री राम
श्री हनुमान जी महाराज की जय 🙏🚩🇮🇳
26/09/2025
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् ।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जय मुदीरयेत।।
मनुष्यों में सर्व श्रेष्ठ भगवान के नर नारायण के अवतार रिषीयों को, माता सरस्वती को, श्री व्यास जी को नमस्कार करता हूं तव संसार और अन्तःकरण के समस्त विकारों पर विजय प्राप्त कराने वाले श्रीमद् भागवत महापुराण का पाठ करुंगा।
श्री सीताराम जी महाराज की जय।
श्री ज्ञान यज्ञ भगवान की जय 🙏🚩🇮🇳
25/09/2025
भगवान शिव के घर में सब खाने वाले ही हैं। कमाने वाला कोई नहीं है भोलेनाथ भिक्षा करते हैं और भिक्षा का अन्न सबसे पवित्र बताया गया है। बहुत ही सुन्दर छ्न्द है।
काहे न मांगत भीख फिरे,घर में नहिं एकहु अंन अधेला।
जो मुख एक ते पूर परे,मुख ही मुख कौ घर मांहि झमेला।।
सीस चढे सहसानन है और गोद गजानन बैल तवेला।
चतुरानन बाप पंचानन आप षडानन पूत दशानन चेला।।
हरि हर महादेव 🔱 ❤️
24/09/2025
Big thanks to Mahendar Mishra, Ramsajivanyadav Ramsajivanyadav
for all your support! Congrats for being top fans on a streak 🔥!
24/09/2025
चतुर्थ अध्याय प्रथम स्कंध श्लोक 20
रिग यजु: सामाथर्वाख्या वेदाशचत्त्वार उदधृता।
इतिहास पुराणं च पंचमो वेद उच्यते।।
भगवान वेदव्यास द्वारा चारों वेदों का उद्धार ( प्रथककरण ) किया गया है इतिहास और पुराणों को पंचम वेद के रूप में स्वीकार किया है।।
जय जय श्री सीताराम जी महाराज
24/09/2025
अयोध्या को किसने बसाया था ?
श्री राम के पूर्वज वैवस्वत मनु के वंश में वैवस्वतो मनुरनाम
मानवीयो मणिषणां जैसे कोई भी मंत्र ओंकार के बिना शुरू नहीं होता
वैसे ही विद्वानों की सभा वैवस्वत मनु के बिना शुरू नहीं होती थी
इतने विद्वान थे मनु महाराज, ऐसे श्री महात्मां वैवस्वत मनु के वंश में
श्रीमद बाल्मीकि रामायण के बालकांड के पांचवें सर्ग के छठवे
श्लोक में
अयोध्या नाम नगरी तत्रासीत लोक विश्वरूता ।
मानवेन्द्रेण मनुना या पुरी निर्मिता स्वयं ।।
मानवेन्द्र महा मानव मनु ने अयोध्या नाम की नगरी को बसाया था । बाद में राजा विक्रमादित्य ने संबोधित किया है यह तो बहुत जल्दी ही कलयुग की बात है।
बोलिए श्री सीताराम जी महाराज की जय
23/09/2025
गोस्वामी तुलसीदास जी ने बहुत ही सुन्दर पद लिखा है।
जिनके पद पंकज के परसे , मुनि नारि बनी पत्थरा तरिगे ।
जिनके चरणामृत पान किए , केवट के दुखवा हरिगे।
जिनका सब देव बखान करें, जन मानस मानस में बसि गए ।
जिन पावन राम कथा लिखके हुलसी के लला तुलसी बन गए ।।
जय जय श्री सीताराम।
20/09/2025
भागवत जी के दो दो लाभ :-
श्री सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत इसी समय में सुनाई।
दूसरा लाभ :- आप कभी बद्रीनाथ गये है ?
बद्रीनाथ में बद्रीकाश्रम है जहां पर व्यास जी की गुफा है, जिसे व्यास गुफा कहते हैं। सरस्वती नदी के किनारे पर है
श्री भागवत जी को श्री गणेश जी महाराज की सहायता से लिखा गया ।
श्री गणेश जी लेखक हैं और श्री व्यास जी महाराज वाणी के द्वारा श्लोक बोल रहे हैं और गणेश जी लिखते जा रहे हैं श्री गणेश जी महाराज दस दिनों तक लगातार लिखते रहे हैं।
गणेश चतुर्थी को शुभारम्भ हुआ और अनंत चतुर्दशी तक भागवत जी को लिखा गया।
पुराणों की कथा मैं आपको बता रहा हूं।
लिखते लिखते जब गणेश जी के ऊपर धूल जम गई तो गणेश जी विचार करने लगे कि अब क्या किया जाए तो गणेश जी ने सरस्वती नदी में अनंत चतुर्दशी के दिन डुबकी लगाई और उस धूल को धोया।
इस लिये हमारे सनातन में दस दिन का गणेश पूजा का बड़ा ही सुन्दर विधान बताया गया है ।।
जब हम लोग अपने घरों में कोई भी शुभ कार्य करते हैं तो सबसे पहले किसका पूजन किया जाता है ?
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरपप्रियाये लम्बोदराय शुकलाय जगतपिताय ।
सबसे पहले किसी भी शुभ कार्य का श्री गणेश श्री गणेश पूजन से ही शुरू होता है।
कथा में प्रवेश करने से पहले भगवान का नाम संकीर्तन।
भगवान का नाम संकीर्तन क्यों करना चाहिए। एक बहुत ही सुन्दर श्लोक है।
सतं विहाय भोगतवयं, सहस्रं स्नानाचरेत ।
लक्षं विहाय दातव्यं, कोटि जप्ता हरिं भजेत ।।
सतं विहाय भोगतवयं :- सौ काम छोड़कर के पहले भोजन करना चाहिए ।
सहस्रं स्नानाचरेत :- और हजार काम छोड़कर के नहाना चाहिए स्नान करना चाहिये।
लक्षं विहाय दातव्यं :- और लाखों काम छोड़कर के अगर कहीं दान करने का मौका मिल रहा है तो सबसे पहले दान करना चाहिये।
जय जय श्री सीताराम।
श्री हनुमान जी महाराज की जय 🙏 🚩 🇮🇳
श्री गुरुदेव भगवान की जय हो 🙏 🚩 ❤️ 🔱
16/09/2025
कबीर दास जी कहते हैं कि
मन के मारे बन गये, मन तजि बस्ती मांहि।
कह कबीर मन लालची, यह कहूं ठहरत नाहि।।
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
मन ही मिलावत राम ते, मन ही करत फजीत।।
यह तो गति है अटपटी, झटपट लखे न कोय।
जो मन की खटपट मिटे, तो चटपट दर्शन होय ।।
आदमी का मन बड़ा ही प्रबल है बड़ा ही चंचल है चलायमान है कहीं एक भाव में नहीं ठहरता है।
तो, भाव बिना संसार की वस्तु मिले नहीं मोल।
भाव बिना हरि क्यों मिले तो राधे राधे बोल।।
इस लिये ,
एकहि साधे सब सधे सब साधे सब सून।
अंक गये कछू ना रहे तो अंक रहे दस गून।।
जय जय श्री सीताराम।
श्री हनुमान जी महाराज की जय 🙏🚩🇮🇳🔱
श्री गुरुदेव भगवान की जय 🙏🚩❤️🔱
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