Anil Rajora
Anil Rajora - Together, we will build a better society. Digital Salesman | Part-Time Journalist | Social Media Influencer | True Commentator | Life Motivator|
22/05/2026
धन्यवाद #मोदीजी उत्तराखंड के चौमुखी विकास के लिए, अगर आपकी सरकार ना होती तो शायद चार धाम यात्रा इतनी सुगम कभी नहीं होती और ना ही इतने धर्मप्रेमी कभी बाबा भोलेनाथ के सर्वोच्च दरबार ना जा पाते।
अब समझ आया कि ये विकास कांग्रेस ने इतना धीमा क्यों रख रखा था क्योंकि पिछली सरकारें बाबली थीं, उन्हें पता था कि पहाड़ों पर अत्यधिक विकास पहाड़ो के लिए कितना घातक होगा, और शायद वो ईश्वर के वास्तविक करीब थी क्योंकि शायद उन्हें ये भी पता था कि जो #भोले बाबा स्वयं जानबूझकर इतनी दूर, दुर्गम इलाकों में, शांति में, ठंडे और प्राकृतिक वातावरण में जाकर बैठे हैं, उनके आस पास के वातावरण में ज्यादा विकास विघ्न ही डालेगा, और उनका पावन वातावरण दूषित हो जाएगा।
#केदारनाथ यात्रा एक यात्रा नहीं जीवन का एक अनुभव है जिसे जीवन में एक बार जीना ही स्वर्ग के रास्ते पर जीने के समान है।
विकास की इस भयावह और डरावनी तस्वीर के लिए #मोदी जी का कोटि कोटि धन्यवाद।
मोहल्ले का मैदान – असली समझदारी कौन?
एक मोहल्ले में दो बच्चे थे – “नरेंद्र” और “राहुल”।
दोनों की सोच अलग थी, और पूरा मोहल्ला धीरे-धीरे उनकी बातों से प्रभावित होने लगा।
नरेंद्र बहुत आत्मविश्वास से बातें करता था।
वो रोज नए-नए वादे करता –
“मैं मैदान को स्टेडियम बना दूँगा”,
“हर बच्चे को नई साइकिल दिलवाऊँगा”,
“हमारा मोहल्ला सबसे आगे होगा!”
मोहल्ले के बच्चे उसकी बातों में जोश महसूस करते थे।
तालियाँ बजती थीं, और हर दिन नए सपने दिखाए जाते थे।
लेकिन राहुल थोड़ा अलग था।
वो कहता,
“जो कहा जा रहा है, वो कैसे होगा? पैसे कहाँ से आएंगे? सबको बराबर फायदा मिलेगा या नहीं?”
शुरू में बच्चों को राहुल की बातें भारी लगती थीं।
उन्हें लगा ये तो बस सवाल करता है, मज़ा खराब करता है।
धीरे-धीरे समय बीता…
मैदान का काम शुरू तो हुआ, लेकिन अधूरा रह गया।
कुछ जगह सफाई हुई, कुछ जगह गंदगी जस की तस रही।
साइकिल का वादा आया, पर बहुत कम बच्चों तक पहुँचा।
और हर बार नए वादों से पुराने सवाल दबा दिए गए।
तब कुछ बच्चों ने ध्यान देना शुरू किया—
“जो बातें हो रही थीं, वो पूरी क्यों नहीं हो रहीं?”
“हर बार नई बात, लेकिन पुरानी अधूरी क्यों?”
अब राहुल की बातों का मतलब समझ आने लगा।
वो सिर्फ सवाल नहीं कर रहा था,
बल्कि ये सुनिश्चित करना चाहता था कि जो भी हो – सही तरीके से, सबके लिए हो।
धीरे-धीरे मोहल्ले में बदलाव आया।
अब बच्चे सिर्फ जोश में नहीं, समझदारी से सुनने लगे।
वादों के साथ-साथ सवाल भी जरूरी समझने लगे।
सीख:
केवल बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है,
लेकिन सही सवाल पूछना और जवाबदेही तय करना ही असली समझदारी है।
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#सोच_समझकर_चुनें
#जवाबदेही_जरूरी_है
#सवाल_पूछना_सीखें
#विकास_और_जिम्मेदारी
#समझदार_मतदाता
#जागरूक_समाज
#विचार_की_ताकत
#संतुलित_सोच
#लोकतंत्र
#विकास हो रहा है या #मजाक
जितना वासी परेशान है ये केवल वो ही जानता है, उनका दर्द ना तो कोई सुनने वाला है और ना कोई समझने वाला।
योजना में बदइंतजामी इस कदर हावी है कि ऐसा लगता है मानो आम जनता की किसी को कोई फिक्र ही नहीं है, ना कोई #नियम है ना #कायदे जिसका जैसा मन कर रहा है वो वैसे खुदाई कर रहा है, ऐसा लग रहा है ये #विकास नहीं #विनाश हो रहा है।
इस देश में वास्तव में किसी की जान, किसी की परेशानी, या किसी की जिम्मेदारी की किसी को कोई परवाह नहीं है, बस मेज पर रखे हुए उठाओ, जैसे टेंडर की #नुमाइश हो रही हो, और बिना तैयारी या बिना योग्यता के #काम पर लग जाओ।
Its highly
Narendra Modi Donald J. Trump
सरकारी और प्राइवेट मुजरिम में अंतर क्यों ?
18/12/2025
क्या आप जानते हैं कि भारत में लगभग 25 से 30 करोड़ लोग आज भी Feature Phone (की-पैड वाला फोन) इस्तेमाल करते हैं? इनके लिए मोबाइल का मतलब सिर्फ 'संपर्क' है, 'इंटरनेट' नहीं। लेकिन आज की हकीकत यह है कि रिचार्ज के दाम 20% तक और बढ़ने की राह पर हैं।
📊 कड़वा सच और आंकड़े:
अनिवार्य रिचार्ज: पहले जो वैलिडिटी ₹10-20 में मिल जाती थी, आज उसके लिए न्यूनतम ₹150-200 खर्च करने पड़ रहे हैं।
आमदनी vs खर्च: एक दिहाड़ी मजदूर या ग्रामीण नागरिक के लिए साल भर का मोबाइल खर्च अब उसकी एक महीने की बचत के बराबर होता जा रहा है।
सीमित विकल्प: निजी कंपनियां ( , , ) प्रतिस्पर्धा के नाम पर प्लान्स को लगभग एक जैसा और महंगा रखती हैं।
💡 वैलिडिटी' का अधिकार
सरकार को दूरसंचार कंपनियों के लिए कुछ नियम अनिवार्य करने चाहिए:
₹1 प्रतिदिन की वैलिडिटी: केवल इनकमिंग चालू रखने के लिए सस्ता विकल्प हो।
टॉकटाइम कूपन की वापसी: जैसे पहले ₹10, ₹20 या ₹50 के फुल टॉकटाइम कूपन मिलते थे, वैसी व्यवस्था फिर से शुरू हो।
जबरन डेटा का बोझ नहीं: जिसे इंटरनेट नहीं चाहिए, उसे 'अनलिमिटेड डेटा' के नाम पर महंगे प्लान के लिए मजबूर न किया जाए।
सुविधाएं जनता के लिए होनी चाहिए, न कि केवल व्यापारियों के मुनाफे ( ) के लिए। यह समय है कि भारतीय मध्यम वर्ग और गरीब तबका अपनी आवाज उठाए ताकि इस डिजिटल युग में 'संपर्क का अधिकार' महंगा न हो जाए।
जय हिंद, जय भारत! 🇮🇳
सुखी जीवन का मंत्र
02/09/2025
क्या आपको भी #मोदीजी की मीटिंग में भारतीय #मीडिया द्वारा दिखाई जाने वाली तस्वीरें बचकानी हरकत और एक खराब #इंटरनेशनल व्यवहार जैसी ही प्रतीत हो रही हैं।
मोदी जी कितनी अपरिपक्वता कर रहे हैं, कल तक फ्रेंड कहकर सार्वजनिक मंच साझा करने वाले मोदीजी यदि इसी प्रकार बालकों वाला #व्यवहार करेंगे तो कहीं ऐसा ना हो कि ना घर के रहे ना घाट के।
क्योंकि #भारतीय #मीडिया ने तो मीडिया की परिभाषा ही बदल दी है , कल तक के कुर्सी खींचकर #मोदीजी को बिठाने वाले पलो को #विश्वशक्ति का झुकना बताकर दर्शकों को परोसने वाली मीडिया आज उसी #ट्रंप के खिलाफ जिस प्रकार को दोस्त बताकर प्रदर्शित कर रहा है उससे यही पता चलता है कि आज मीडिया का नेतृत्व कितने अदूरदर्शी और अपरिपक्व लोग कर रहे हैं।
बाकी रही सही कसर मोदीजी ने फालतू में हंस हंस कर पूरी कर दी है, कितनी घटिया रही इस पूरी मीटिंग में , जैसे इस फोटो में ये उंगली दिखाकर क्या कहना चाह रहें हैं ? (और इस फोटो को अपने X अकाउंट से साझा भी कर रहे हैं, क्योंकि अंधभक्ति में डूबे लोगों को भी थोड़ा सुकून मिल जाएगा)
विकसित भारत 2047, Step 04/50 - जनसंख्या नियंत्रण
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में जनसंख्या नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है, यदि भारत ने समय रहते जनसंख्या नियंत्रण के ऊपर प्रभावी कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना एक कठिन चुनौती होगा।
India is the most populous country in the world with a of over 1.4 billion people in 2025. The rate, rising population, and in India are key factors shaping the nation’s future. With like in India, population , and impact on , , , and , the need for effective population in India is urgent. Understanding the India population 2025 data, demographics, and comparison with China population and is crucial for development and building a Viksit Bharat 2047.
#जनसंख्या_नियंत्रण
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