Raitech Farming
Agriculture was the key development in the rise of ,whereby farming of species created food that enabled people to live in cities.
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धान की खेती (Rice Farming) ki niche step leke ek banner bnao
धान की खेती: मुख्य चरण (Step-by-Step Guide)
1. नर्सरी की तैयारी (Nursery Preparation)
* बीज चयन: उन्नत और रोगमुक्त बीजों का चुनाव करें।
* बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को कवकनाशी (Fungicide) से उपचारित करें।
* क्यारियाँ बनाना: गीली या सूखी क्यारियों में बीज डालें।
2. खेत की तैयारी (Land Preparation)
* जुताई: खेत की 2-3 बार अच्छी जुताई करें।
* पडलिंग (Puddling): खेत में पानी भरकर मिट्टी को कीचड़ जैसा बनाएँ, ताकि पानी रुक सके।
3. रोपाई (Transplanting)
* जब पौध (Saplings) 21-25 दिन की हो जाए, तब उन्हें मुख्य खेत में लगाएँ।
* पौधों के बीच 20x15 सेमी की दूरी रखें।
4. खाद और उर्वरक (Fertilizers)
* मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का उपयोग करें।
* जिंक सल्फेट का प्रयोग धान की फसल के लिए बहुत लाभकारी होता है।
5. जल प्रबंधन (Water Management)
* रोपाई के शुरुआती 15-20 दिनों तक खेत में 2-5 सेमी पानी भरकर रखें।
* कल्ले फूटते समय और दाना बनते समय पानी की कमी न होने दें।
6. खरपतवार और कीट नियंत्रण (W**d & Pest Control)
* रोपाई के 3-4 दिनों के भीतर खरपतवार नाशक का छिड़काव करें।
* तना छेदक या भूरा फुदका जैसे कीटों से बचाव के लिए उचित कीटनाशक अपनाएँ।
7. कटाई और मड़ाई (Harvesting)
* जब बालियाँ सुनहरी पीली हो जाएँ और दानों में 20% नमी बचे, तब कटाई करें।
* मड़ाई के बाद दानों को अच्छी तरह सुखाकर भंडारण करें।
05/07/2022
मानसून आ गया ,धान की खेती करिए !
19/04/2022
जिप्सम का सही मात्रा में प्रयोग
20/03/2022
लहसुन की खेती
अप्रैल माह में फल व सब्जियों को रोग से बचने के उपाय:>>>>>
अरबी, परवल, कुंदरू, चौलाई की बौनी करें। भिण्डी, कद्दध्वर्गीय सब्जियों पर चूर्ण फफूंद की रोकथाम हेतु साल्फेक्स 2 वाम/लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें । रेडपम्पकिन विटल की रोकथाम हेतु कीटनाशक दवा का छिडकाव करें।
आम में भुनगा तथा रिकनेस कीट की रोकथाम के लिए कीलेक्स काबोरिल 2 ग्राम/प्रतिलीटर या इण्डोसल्फान 5 मि.ली. तथा खर् रोग एवं एन्उाोक्नोज की रोकथाम हेतु 2 ग्राम ब्लाइटाक्स 50 एवं 40 पी.पी.एम.एन.ए.ए. का मिलाकर छिडकाव करें।
आम फल के उपलक्षय रोग की रोकथाम के लिए 8 गाम बोरेक्स प्र्रति लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें। दीमक की रोकथाम के लिए 300 ग्राम एल्ड्रेक्स 5 प्रतिशत धूल मिट्टी में मिलाएँ।
दीमक की रोकथाम के लिए 300 ग्राम एल्ड्रेक्स 5 प्रतिशत धूल मिट्टी में मिलाएँ।
केला रोपण करें।
कटहल में क्रपकरोग की रोकथाम हेतु प्र्रभावित शाखा को डेढ फीट नीचे से काटकर पृथक करें तथा बोर्े मिक्चर का छिडकाव करें।
पपीता की फसल पर लाल मकडी एवं पावडरी मिल्डय्यू की रोकथाम हेतु मेटासिस्टाक एवं केरेथार्ैंन 02 प्र्रतिशत का छिडकाव करें।
लगन से मिल जाती हैं मंजिल,बस दिशा एक हो!
भदोही में Raitech की पहल हो,जब खेती संग हो!!
#जय #जवान #जय #किसान
family
07/02/2022
💓💓💓💓💓
16/01/2022
#रोज #खाएं #पपीता, #कई #बीमारियां #रहेंगी #दूर
पपीता एक ऐसा फल है, जो पोषण से भरपूर तो है ही, इसमें बहुत से औषधीय गुण भी हैं। इन गुणों के कारण इसकी अपनी खास पहचान है। चाहे कच्चा पपीता हो या पका हुआ, दोनों ही स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद है। पपीते में विटामिन ए, विटामिन सी, नियासिन, मैग्नीशियम, कैरोटीन, फाइबर, फोलेट, पोटैशियम, कॉपर, कैल्शियम और कई तरह के एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं। पपीते में कुछ मात्रा में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं। एक छोटे पपीते में लगभग 60 कैलोरी होती है
#दिल #को #रखे #दुरुस्त:
पपीता विटामिन सी , एंटीऑक्सिडेंट्स व फाइबर से भरपूर होता है। इसमें मौजूद फाइबर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करनें में बेहद कारगर साबित होता है।
#वजन #को #रखे #नियंत्रित:
यदि वजन कम करना चाहते हैं, तो एक मध्यम आकार के पपीते का सेवन फायदेमंद है। इसमें 120 कैलोरी होती है, साथ ही विटामिन सी, फोलेट और पोटैशियम आदि पाए जाते हैं। इसमें पाया जाने वाला पपेन एंजाइम पाचन में सहायता कर आपका काम और आसान कर देता है। पपीते में कोलेस्ट्रॉल और वसा न के बराबर पाया जाता है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
#इम्यूनिटी #होगी #मजबूत:
पपीते के सेवन से शरीर को कई जरूरी तत्वों की पूर्ति हो जाती है। शरीर को विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में मिलता है, जो सफेद कोशिकाओं के निर्माण में सहायक साबित होता है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट, प्रोटीन, विटामिन ए और ई हमारे प्रतिरक्षा तंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं। इससे कई बीमारियां दूर रहती हैं।
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