Knowledge ADDA
Engineering Experts
21/07/2024
29/07/2023
सन् अस्सी के दशक तक एक गाँव देहात में एक ख़ास प्रकार का पंखा प्रचलन में था जो छत पर लगा रहता और एक रस्सी द्वारा कोई प्राणी डुलाता रहता।चूँकि विद्युतीकरण उस समय हुआ नहीं था हाथ से डुलाने वाला ये पंखा बड़े अमीर वर्ग में ख़ासा प्रचलन में था। अंग्रेज़ी हुकूमत के दौरान ऐसे पंखों का खूब प्रयोग हुआ। अनेक भारतीय मज़दूर को पंखा डुलाने के लिए अंग्रेज़ी अफ़सर रखते थे। अमूमन दिन के नौकर रात को पंखा डुलाने का कार्य करते थे।ये पंखे बड़े बड़े लकड़ी के तख्तों पर कपड़े चढ़े हुए होते जिन्हें एक रस्सी और पुली से जोड़ा जाता था। रस्सी को लगातार खींचा जाता ताकि पंखा डुलता रहे।
आमिर ख़ान की फ़िल्म मंगल पांडेय में एक आदमी का रोल इसी पंखा डुलाने की नौकरी ब्रिटिश अधिकारियों के हियाँ करता दिखाया गया है। अंग्रेज अफ़सर इस काम के लिए गूँगे बहरे भारतीयों को प्राथमिकता दिया करते थे। कारण- उनके बेडरूम की अंतरंगता और प्राइवेसी डिस्टर्ब ना हो- कोई भारतीय अंग्रेजों की बातें ना सुन लें। इन पंखा डुलाने वालों को पंखावाला कहा जाता था। दिन में फ़िरंगी अफ़सरों की चाकरी करने के बाद भारतीयों से रात में पंखा डुलाने का काम करवाया जाता था। स्वाभाविक है दिन भर के थके माँदे बेचारे ये लोग पंखा डुलाते डुलाते सो जाते थे और उस हालत में गोरा हाकिम बड़ी बेदर्दी से पेश आता था।
अंग्रेज जंट साहब लोग अपने कमरे में पुराने जूते आदि रख सोते थे- जैसे ही नौकर ने पंखा डुलाना बंद किया- फ़िरंगी जूता फेंक मारता ताकि नौकर जग जाये। कुछ अंग्रेज अफ़सरों के रोजनामचनो के अनुसार कुछ बेचारे भारतीय लोग इन भारी भरकम जूतो आदि के नर्म स्थान पर चोट पहुँचने के कारण मारे भी गये किन्तु मारने वाले अंग्रेज पर कभी कोई कार्यवाही ना हुई।अनेक भारतीय पंखे वाले हाथ की वजह पैर से पंखा डुलाते ताकि वो लेट सके और हाथो को आराम पहुँच सकें।
अपने ही देश में इस हद तक की बेक़द्री के शिकार केवल हम भारतीय ही रहे होंगे। 🙏🏻
25/06/2023
जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उनहोंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’ हमने आखें बंद कर लीं,,, जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’
इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और हमारे पास आजादी और निजता थी।
उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है।’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।
जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।
“ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”
25/03/2023
18 57 की क्रांति के हीरो बांके हिन्दुस्तानी जी
बांके जौनपुर जिले के मछली तहसील के गांव के कुवरपुर के निवासी थे। वह अकेले ही अंग्रेजों से लोहा लेने निकल पड़े लेकिन बाद में उनसे प्रभावित होकर और लोगों ने भी उनके साथ अंग्रेजों से जंग का ऐलान कर दिया। लगातार अंग्रेजों के खिलाफ गतिविधियों के कारण उन पर 50 हजार रुपये सबसे बड़ा इनाम रखा, जब 2 गायें 6 पैसे थीं। अंग्रेजों और बांके हरिजनऔर उनके साथियों के बीच कई संघर्ष हुए।
लेकिन एक मुखबिर ने अंग्रेजों को उनके ठिकाने की सूचना दे दी, इसलिए अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए कई सैनिकों को ले लिया, जहां अंग्रेजों और बांके हिन्दुस्तानी जी और उनके साथियों के बीच संघर्ष हुआ, उन्होंने कई ब्रिटिश सैनिकों को मार डाला, लेकिन अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ लिया। और बाद में इन महान स्वतंत्रता सेनानियों और उनके 18 साथियों को फांसी पर लटका दिया
01/01/2023
Mahadev with 25 faces, 75 eyes and 50 arms. This magnificent form of Mahadev is known as Mahasadashiva !!
Located at Sri Thanumalaya Swamy Temple Tower, Suchindram, Tamil Nadu, BHARAT (India) 🚩
Har Har Mahadev 🔱🙏
25/12/2022
Srinivasa Ramanujan The Man who wrote poetry about Infinity
As Nikola Tesla said, Universe and everything in it, is written in the language of Energy & Frequency Everything in this Universe always has a pattern - just that its offen not easily visible, unless you see it with the lens of Mathematics.
Srinivasa Ramanujan - an Indian Mathematician, a born genius who contributed with his inventions on working with Infinite Series. In simple words, every scientific research often involves in decoding the hidden patterns - be it the DNA of a Pathogen or understanding energy shifts in the Cosmos. Ramanujan's inventions contributed heavily to such scientific researches.
Ramanujan had a mysterious condition. All the formulae for different mathematical problems just used to come to his mind intuitively, which eventually are all proven to be right! Even on his deathbed, during his last days, he wrote 600 such mathematical formulae which scientists are now using to understand the entropy & behaviour of Black holes in the Universe. Ramanujan didn't just knew Infinity, but he wrote a poetry about it!
I believe that every child in the school needs to know why they are learning Mathematics and how it really translates to our daily usage.
And most will not be knowing this.
ATMs of Morden age dispense money based on Srinivas Ramanujans Partition theory. It divides and arranges money based on this theory only.
09/12/2022
किताबों में नहीं लिखा तो क्या हुआ,
पत्थरों में गुदे इतिहास को कैसे मिटाओगे?
09/11/2022
04/11/2022
Intsa-
01/11/2022
Cholas. : 1600 Yrs
Ahom. : 700 Yrs
Chalukyas : 700 Yrs
Pallavas : 600 Yrs
Rashtrakuta : 500 Yrs
Vijayanagara : 400 Yrs
Yet all we have been taught in textbooks is about Mughals (300 yrs)
Ever thought Why?
21/10/2022
चित्र 1:- "रथमुसल" युद्ध हथियार।
चित्र 2:- "महाशिलाकंटाक" युद्ध हथियार।
लगभग २५०० सालो पहले भारत की धरती पर सम्राट अजातशत्रु और वज्जि साम्राज्य के बीच गंगा के किनारे मिलने वाले मूल्यवान हीरे ,मोतियो ओर सोने के खनन के लिए भयानक युद्ध हुआ, वज्जि साम्राज्य और अजातशत्रु की सेना की ताकत बराबर थी।
लेकिन अजातशत्रु के वैज्ञानिकों द्वारा आविष्कार किये गए इन 2 शस्त्रों का नाम "महाशिलकंटाक और रथमुसल" था।
इन हथियारों ने वज्जि साम्राज्य की सेना को काटकर रख दिया, अजातशत्रु ने ये युद्ध निर्णायक रूप से जीतकर मगध साम्राज्य का विस्तार किया। यही हथियार बाहुबली फिल्म में भी दिखाए गये थे।
17/10/2022
Dancing Varaha swamy, Siddeswara temple, Haveri, Karnataka, BHARAT (India) 🚩
Built in 11th century by Kalyanachalukya
Siddhesvara Temple (also spelt Siddheshvara or Siddheshwara and locally called Purada Siddeshwara ) is located in the town of Haveri in Haveri district, Karnataka state, India. It is considered an ornate example of 12th century Western Chalukyan art and is well known for the many loose sculptures of Hindu deities that exist in it. However, inscriptional evidence would suggest that the initial consecration of the temple was in late 11th century. An interesting aspect about the temple is that it faces west, instead of facing the rising sun in the east–a standard in Chalukyan constructions.
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Delhi
110001