Pitambara dham
maa pitambara temple is situated in datia mp . it is one of the shaktipeeth of india
08/01/2022
बगलामुखी जगत कल्याणी🙏🙏🙏
अपने इष्टदेव को प्रसन्न करने के लिए आपको करना है किस मंत्र का जाप :-
1. मेष- आपकी राशि का स्वामी मंगल ग्रह है और इष्टदेव हनुमान जी। ऐसे में अगर आप हनुमान जी की नित्य आराधना करें तो सभी तरह की आर्थिक मुश्किलों से छुटकारा मिल सकता है।
मंत्र- ॐ हनुमते नमः का जाप
2. वृष- वृष राशिवालों का स्वामी ग्रह शुक्र है और इष्टदेव मां दुर्गा। धन संबंधी सभी तरह की समस्याओं के अंत के लिए मां दुर्गा की पूजा करना आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है।
मंत्र- ॐ दुर्गादेव्यै नम: का जाप
3. मिथुन- मिथुन राशि का स्वामी ग्रह बुध है और मिथुन राशि के जातकों को भगवान गणेश जी पूजा करने से सफलता प्राप्त हो सकती है।
मंत्र- ॐ गं गणपते नमः
4. कर्क- चंद्रमा ग्रह, कर्क राशि का स्वामी है और चंद्रमा पर भगवान शिव का राज है। इसलिए अगर कर्क राशि के जातकों को धन संबंधित लाभ प्राप्त करना है तो भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
मंत्र- ॐ नमः शिवाय का नित्य जाप
5. सिंह- आपकी राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है और इष्टदेव भी भगवान सूर्य ही हैं। ऐसे में हर दिन सूर्य देव को अर्घ्य चढ़ाने से लाभ प्राप्त हो सकता है।
मंत्र- ॐ सूर्यायें नमः
6. कन्या- जिन लोगों की राशि कन्या है उनका राशि स्वामी बुध है और इष्टदेव विघ्नहर्ता गणेश। लिहाजा गणेश जी की पूजा से धन संबंधी समस्याओं में लाभ हो सकता है।
मंत्र- ॐ गं गणपते नमः
7. तुला- तुला राशिवालों का स्वामी ग्रह शुक्र है और इनके लिए देवी लक्ष्मी की पूजा लाभदायक मानी जाती है।
मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै नमः का जाप
8. वृश्चिक- वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह भी मंगल है। इनके लिए भी हनुमान जी की पूजा शुभ मानी जाती है और धन संबंधी पीड़ा का अंत होता है।
मंत्र- ॐ हं हनुमते नमः
9. धनु- धनु राशि का बृहस्पति ग्रह से संबंध है और इसके इष्टदेव भगवान विष्णु। लिहाजा धनु राशिवालों के लिए भगवान विष्णु की पूजा से व्यवसाय में लाभ हो सकता है।
मंत्र- ॐ श्री विष्णवे नमः
10. मकर- मकर राशि का स्वामी शनि है इसलिए शनि या हनुमान जी की पूजा, इन जातकों के लिए शुभ रहती है। साथ ही सभी बाधाएं दूर कर सुख-शांति मिलती है।
मंत्र- ॐ शम् शनिश्चराये नम:
11. कुंभ- इस राशिवालों का स्वामी ग्रह शनि है। शनि के गुरु भगवान शंकर माने जाते हैं, इसलिए कुंभ राशिवालों को शनि के साथ-साथ भगवान शंकर की भी पूजा करनी चाहिए।
मंत्र- ॐ महामृत्युंजय नमः का हर सुबह 108 बार जाप
12. मीन- मीन राशि का स्वामी बृहस्पति ग्रह और इस राशि वालों को भगवान विष्णु की पूजा से धन संबंधित समस्याओं में लाभ प्राप्त हो सकता है।
मंत्र- ॐ नारायणा नमः और ॐ गुरुवे नमः
कुंडली में बैठे ग्रहों और बीमारियाँ :::-
ग्रह जब भ्रमण करते हुए संवेदनशील राशियों के अंगों से होकर गुजरता है तो वह उनको नुकसान पहुंचाता है। नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को ध्यान में रखकर आप अपने भविष्य को सुखद बना सकते हैं।
वैदिक वाक्य है कि पिछले जन्म में किया हुआ पाप इस जन्म में रोग के रूप में सामने आता है। शास्त्रों में बताया है-पूर्व जन्मकृतं पापं व्याधिरूपेण जायते अत: पाप जितना कम करेंगे, रोग उतने ही कम होंगे। अग्नि, पृथ्वी, जल, आकाश और वायु इन्हीं पांच तत्वों से यह नश्वर शरीर निर्मित हुआ है। यही पांच तत्व 360 की राशियों का समूह है।
इन्हीं में मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व, वृष, कन्या और मकर पृथ्वी तत्व, मिथुन, तुला और कुंभ वायु तत्व तथा कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। कालपुरुष की कुंडली में मेष का स्थान मस्तक, वृष का मुख, मिथुन का कंधे और छाती तथा कर्क का हृदय पर निवास है जबकि सिंह का उदर (पेट), कन्या का कमर, तुला का पेडू और वृश्चिक राशि का निवास लिंग प्रदेश है। धनु राशि तथा मीन का पगतल और अंगुलियों पर वास है।
इन्हीं बारह राशियों को बारह भाव के नाम से जाना जाता है। इन भावों के द्वारा क्रमश: शरीर, धन, भाई, माता, पुत्र, ऋण-रोग, पत्नी, आयु, धर्म, कर्म, आय और व्यय का चक्र मानव के जीवन में चलता रहता है। इसमें जो राशि शरीर के जिस अंग का प्रतिनिधित्व करती है, उसी राशि में बैठे ग्रहों के प्रभाव के अनुसार रोग की उत्पत्ति होती है। कुंडली में बैठे ग्रहों के अनुसार किसी भी जातक के रोग के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
कोई भी ग्रह जब भ्रमण करते हुए संवेदनशील राशियों के अंगों से होकर गुजरता है तो वह उन अंगों को नुकसान पहुंचाता है। जैसे आज कल सिंह राशि में शनि और मंगल चल रहे हैं तो मीन लग्न मकर और कन्या लग्न में पैदा लोगों के लिए यह समय स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं कहा जा सकता।
अब सिंह राशि कालपुरुष की कुंडली में हृदय, पेट (उदर) के क्षेत्र पर वास करती है तो इन लग्नों में पैदा लोगों को हृदयघात और पेट से संबंधित बीमारियों का खतरा बना रहेगा। इसी प्रकार कुंडली में यदि सूर्य के साथ पापग्रह शनि या राहु आदि बैठे हों तो जातक में विटामिन ए की कमी रहती है। साथ ही विटामिन सी की कमी रहती है जिससे आंखें और हड्डियों की बीमारी का भय रहता है।
चंद्र और शुक्र के साथ जब भी पाप ग्रहों का संबंध होगा तो जलीय रोग जैसे शुगर, मूत्र विकार और स्नायुमंडल जनित बीमारियां होती है। मंगल शरीर में रक्त का स्वामी है। यदि ये नीच राशिगत, शनि और अन्य पाप ग्रहों से ग्रसित हैं तो व्यक्ति को रक्तविकार और कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं। यदि इनके साथ चंद्रमा भी हो जाए तो महिलाओं को माहवारी की समस्या रहती है जबकि बुध का कुंडली में अशुभ प्रभाव चर्मरोग देता हैं।
चंद्रमा का पापयुक्त होना और शुक्र का संबंध व्यसनी एवं गुप्त रोगी बनाता है। शनि का संबंध हो तो नशाखोरी की लत पड़ती है। इसलिए कुंडली में बैठे ग्रहों का विवेचन करके आप अपने शरीर को निरोगी रख सकते हैं। किंतु इसके लिए सच्चरित्रता आवश्यक है। आरंभ से ही नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को ध्यान में रखकर आप अपने भविष्य को सुखद बना सकते हैं।
Sabhi Bhakto ka Kalyan ho.
ज्योतिषशास्त्र में केतु के प्रभाव:
सूर्य जब केतु के साथ होता है तो जातक के व्यवसाय, पिता की सेहत, मान-प्रतिष्ठा, आयु, सुख आदि पर बुरा प्रभाव डालता है।
चंद्र यदि केतु के साथ हो और उस पर किसी अन्य शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो व्यक्ति मानसिक रोग, वातरोग, पागलपन आदि का शिकार होता है।
वृश्चिक लग्न में यह योग जातक को अत्यधिक धार्मिक बना देता है।
मंगल केतु के साथ हो तो जातक को हिंसक बना देता है। इस योग से प्रभावित जातक अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाते और कभी-कभी तो कातिल भी बन जाते हैं।
बुध केतु के साथ हो तो व्यक्ति लाइलाज बीमारी ग्रस्त होता है। यह योग उसे पागल, सनकी, चालाक, कपटी या चोर बना देता है। वह धर्म विरुद्ध आचरण करता है।
केतु गुरु के साथ हो तो गुरु के सात्विक गुणों को समाप्त कर देता है और जातक को परंपरा विरोधी बनाता है। यह योग यदि किसी शुभ भाव में हो तो जातक ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखता है।
शुक्र केतु के साथ हो तो जातक दूसरों की स्त्रियों या पर पुरुष के प्रति आकर्षित होता है।
शनि केतु के साथ हो तो आत्महत्या तक कराता है। ऐसा जातक आतंकवादी प्रवृति का होता है। अगर बृहस्पति की दृष्टि हो तो अच्छा योगी होता है।
किसी स्त्री के जन्म लग्न या नवांश लग्न में केतु हो तो उसके बच्चे का जन्म आपरेशन से होता है। इस योग में अगर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो कष्ट कम होता है।
भतीजे एवं भांजे का दिल दुखाने एवं उनका हक छीनने पर केतु अशुभ फल देता है। कुत्ते को मारने एवं किसी के द्वारा मरवाने पर, किसी भी मंदिर को तोडऩे अथवा ध्वजा नष्ट करने पर इसी के साथ ज्यादा कंजूसी करने पर केतु अशुभ फल देता है। किसी से धोखा करने व झूठी गवाही देने पर भी केतु अशुभ फल देते हैं।
अत: मनुष्य को अपना जीवन व्यवस्थित जीना चाहिए। किसी को कष्ट या छल-कपट द्वारा अपनी रोजी नहीं चलानी चाहिए। किसी भी प्राणी को अपने अधीन नहीं समझना चाहिए जिससे ग्रहों के अशुभ कष्ट सहना पड़े।
सकारात्मक केतु और नकारात्मक केतु का प्रभाव:
गुरु के साथ नकारात्मक केतु अपंगता का इशारा करता है, उसी तरह से सकारात्मक केतु साधन सहित और जिम्मेदारी वाली जगह पर स्थापित होना कहता है, मीन का केतु उच्च का माना जाता है और कन्या का केतु नकारात्मक कहा जाता है, मीन राशि गुरु की राशि है और कन्या राशि बुध की राशि है। गुरु ज्ञान से सम्बन्ध रखता है और बुध जुबान से, ज्ञान और जुबान में बहुत अन्तर है। इसी के साथ अगर शनि के साथ केतु है तो काला कुत्ता कहा जाता है, शनि ठंडा भी है और अन्धकार युक्त भी है, गुरु अगर गर्मी का एहसास करवा दे तो ठंडक भी गर्मी में बदल जाती है, चन्द्र केतु के साथ गुरु की मेहरबानी प्राप्त करने के लिये जातक को धर्म कर्म पर विश्वास करना जरूरी होता है, सबसे पहले वह अपने परिवार के गुरु यानी पिता की महरबानी प्राप्त करे, फिर वह अपने कुल के पुरोहित की मेहरबानी प्राप्त करे, या फिर वह अपने शरीर में विद्यमान दिमाग नामक गुरु की मेहरबानी प्राप्त करे।
मंगल को नवग्रहों में तीसरा स्थान प्राप्त है और केतु को नवम स्थान, फिर भी ज्योतिष की पुस्तकों में कई स्थान पर लिखा मिलता है कि मंगल एवं केतु समान फल देने वाले ग्रह हैं।
ज्योतिषशास्त्र में मंगल एवं केतु को राहु एवं शनि के समान ही पाप ग्रह कहा जाता है। मंगल एवं केतु दोनों ही उग्र एवं क्रोधी स्वभाव के माने जाते हैं। इनकी प्रकृति अग्नि प्रधान होती है, मंगल एवं केतु एक प्रकृति होने के बावजूद इनमें काफी कुछ अंतर हैं एवं कई विषयों में मंगल केतु एक समान प्रतीत होते हैं।
मंगल एवं केतु में समानता:
मंगल व केतु दोनों ही जोशीले ग्रह हैं, लेकिन इनका जोश अधिक समय तक नहीं रहता है। दूध की उबाल की तरह इनका जोश जितनी चल्दी आसमान छूने लगता है उतनी ही जल्दी वह ठंडा भी हो जाता है। इसलिए, इनसे प्रभावित व्यक्ति अधिक समय तक किसी मुद्दे पर डटे नहीं रहते हैं, जल्दी ही उनके अंदर का उत्साह कम हो जाता है और मुद्दे से हट जाते हैं। मंगल एवं केतु का यह गुण है कि इन्हें सत्ता सुख काफी पसंद होता है। ये राजनीति में एवं सरकारी मामलों में काफी उन्नति करते हैं। शासित होने की बजाय शासन करना इन्हें रूचिकर लगता है। मंगल एवं केतु दोनों को कष्टकारी, हिंसक, एवं कठोर हृदय वाला ग्रह कहा जाता है। परंतु, ये दोनों ही ग्रह जब देने पर आते हैं तो उदारता की पराकष्ठा दिखाने लगते हैं यानी मान-सम्मान, धन-दौलत से घर भर देते हैं
Mantra to Attract Flow of Money :
This is a Mantra Prayog to attract the flow of money and wealth to your home. This experiment has to be conducted during the period of the Rohini Nakshatra.
For this you need to bring home a Banda or a parasite tree or plant which is growing out of an Udumbara tree; known in English as the Cluster Fig Tree.
This plant has to be infused by the money mantra given below by chanting it 108 times. And then planted in the home.
This plant is considered as being most auspicious in attracting money, wealth and abundance to your house.
Mantra : Om Namo Dhanadaayai Swaha ||
ॐनमो धनदायै स्वाहा ||
Brahamastrarupini devi mata shri baglamukhi sabka kalyan karein.
Jai mahamayi sabka kalyan ho.
18/02/2013
jai swami ji
18/02/2013
jai ho mahamayi
mai teri kripa se sab sambhav ho jata hai.
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