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05/09/2026
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जब दिघवारा में खुद मदद को उतर गए DSP अभिषेक कुमार
माही नदी के दायाँ तटबंध में क्षति के बाद युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य जारी, डीएम ने किया स्थल निरीक्षण
सारण छपरा 5 सितंबर,2026
सारण जिले के दिघवारा प्रखंड अंतर्गत माही नदी के दायाँ तटबंध, जो लगभग 7.5 किलोमीटर लंबा है, में पानी के अत्यधिक दबाव के कारण लीकेज की स्थिति उत्पन्न होने से करीब 12 मीटर हिस्से में तटबंध क्षतिग्रस्त/टूट गया। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता एवं सहायक अभियंता की निगरानी में युद्धस्तर पर कराया जा रहा है।
जिला पदाधिकारी, सारण श्री वैभव श्रीवास्तव ने भी क्षतिग्रस्त स्थल का स्वयं निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं अभियंताओं को मरम्मत कार्य में तेजी लाने तथा तटबंध की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता न हो तथा स्थल पर पर्याप्त संसाधन एवं मानवबल की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए। उन्होंने तटबंध की स्थिति की लगातार निगरानी रखने एवं आवश्यकता के अनुरूप तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।
जल संसाधन विभाग के संबंधित अभियंताओं द्वारा स्थल पर लगातार कैंप कर मरम्मत कार्य की निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा भी स्थिति पर सतत नजर रखते हुए संबंधित विभाग के पदाधिकारियों के साथ लगातार समन्वय एवं समीक्षा की जा रही है।
03/09/2026
घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य विभाग की टीम 19 लाख लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य
छपरा: गैर संचारी रोगों की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सारण जिले में बुधवार को ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत हुई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यव्यापी अभियान का शुभारंभ किया।
इस दौरान सारण एनआईसी से डीएम वैभव श्रीवास्तव, तरैया विधायक जनक सिंह, सीएस डॉ. राजकुमार चौधरी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जुड़े।
अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा।
राज्य में करीब छह करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है, जबकि सारण में करीब 19 लाख लोगों की जांच की जाएगी।
प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान को प्रतिदिन 50 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य दिया गया है। अभियान की जिलास्तर पर निगरानी डीएम करेंगे।
अभियान के तहत उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुंह, स्तन एवं गर्भाशय के मुख के कैंसर, हृदय रोग, गैर-मादक वसायुक्त यकृत रोग तथा लंबे समय से फेफड़ों में रुकावट वाली बीमारी की जांच की जाएगी।
विशेष रूप से 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों पर ध्यान दिया जाएगा।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आने वाले लोगों की लंबाई-वजन मापकर शरीर द्रव्यमान सूचकांक भी निकाला जाएगा।
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर परिवारों का सर्वे करेंगी।
प्रत्येक परिवार का पारिवारिक विवरण तैयार कर जोखिम वाले लोगों की पहचान की जाएगी।
संदिग्ध मरीजों को नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ता सहयोग करेंगी।
जरूरत के अनुसार मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श, दवा और उच्चतर स्वास्थ्य संस्थान में उपचार के लिए भेजा जाएगा।
स्वास्थ्य संस्थानों में रक्त जांच, मधुमेह की जांच, यकृत एवं गुर्दे की कार्यक्षमता की जांच, हृदय की विद्युत जांच, गर्भाशय मुख की जांच समेत विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
उपचाररत मरीजों का नियमित फॉलोअप भी किया जाएगा।
अभियान के आंकड़े ऑनलाइन दर्ज कर प्रतिदिन प्रखंड और जिला स्तर पर समीक्षा की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि अभियान का उद्देश्य बीमारी की पहचान के साथ उसके जोखिम को समय रहते कम करना भी है।
इसमें जांच, पहचान और उपचार के जरिए गैर संचारी रोगों से होने वाली असामयिक मौतों को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
03/09/2026
18 से 26 उच्च माध्यमिक व 21 से 23 तक माध्यमिक स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा
पटना: बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने राज्य के उच्च माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक की त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षा की तिथि जारी कर दी है।
समिति के निर्देश के अनुसार कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों की त्रैमासिक परीक्षा तथा कक्षा 12वीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा 18 से 26 सितंबर तक आयोजित होगी।
वहीं, कक्षा नौवीं और 10वीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा 21 से 23 सितंबर तक ली जाएगी।
परीक्षा समिति ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को गोपनीय सामग्री प्राप्त करने, सुरक्षित रखने और निर्धारित समय पर विद्यालयों को उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिया है। परीक्षा के लिए आवश्यक गोपनीय सामग्री सात से 15 सितंबर के बीच संबंधित जिलों में पहुंच जाएगी, ताकि निर्धारित तिथि पर परीक्षा के संचालन में किसी तरह की परेशानी नहीं हो।
परीक्षा समिति ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की गोपनीय सामग्री की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय के प्रधान की होगी।
विद्यालय प्रधान या उनके द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि किसी भी परिस्थिति में परीक्षा सामग्री की गोपनीयता भंग न हो।
गोपनीय सामग्री के साथ उत्तरपुस्तिकाओं के सुरक्षित संग्रहण की जिम्मेदारी भी विद्यालय प्रधान की होगी।
जिला शिक्षा पदाधिकारियों को अपने स्तर से इसकी लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
03/09/2026
सदर अस्पताल में पहली बार हिप रिप्लेसमेंट, 65 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन
छपरा: सदर अस्पताल में आर्थोपेडिक चिकित्सा के क्षेत्र में नई सुविधा की शुरुआत हुई है।
अस्पताल में पहली बार बुधवार को फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर से पीड़ित 65 वर्षीय मरीज का सफल हिप रिप्लेसमेंट किया गया।
अमनौर निवासी भारत राम कुहले की हड्डी में फ्रैक्चर के बाद इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद चिकित्सकों ने हिप रिप्लेसमेंट का निर्णय लिया।
आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि अमृत के नेतृत्व में बाइपोलर हेमिआर्थ्रोप्लास्टी तकनीक से मरीज की सर्जरी की गई।
एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अमरेश कुमार ने एनेस्थीसिया देने के साथ ऑपरेशन के दौरान मरीज की निगरानी की।
इसकी सर्जरी काफी देर तक चली। चिकित्सकों के अनुसार सर्जरी सफल रही और मरीज की स्थिति स्थिर है।
फिलहाल उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. केएम दुबे ने कहा कि इस सुविधा से जिले के मरीजों को लाभ मिलेगा।
अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सर्जरी निःशुल्क की गई।
03/09/2026
अब हर मंगलवार-बुधवार स्कूल में लगेगी सेहत की पाठशाला
छपरा: सारण के सरकारी विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ बच्चों की सेहत, भावनाओं और व्यवहार को समझने की भी नियमित कक्षा लगेगी।
कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय स्वास्थ्य एवं आरोग्य कार्यक्रम को नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाते हुए हर सप्ताह एक घंटी निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है।
मंगलवार या बुधवार को प्रत्येक कक्षा में 45 मिनट का सत्र आयोजित किया जाएगा।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी समग्र शिक्षा (नीरज कुमार) ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल से संचालित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के जीवन कौशल, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
विद्यालयों की समय-सारणी में प्रत्येक सप्ताह एक घंटी इसके लिए निर्धारित करना अनिवार्य होगा।
निर्धारित कैलेंडर में विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग विषयों को शामिल किया गया है।
स्वस्थ बढ़ना विषय के तहत किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलाव, यौनावस्था, सौंदर्य संबंधी धारणाओं और मिथकों पर चर्चा होगी।
भावनात्मक कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य के अंतर्गत अपनी भावनाओं को समझने, चुनौतीपूर्ण भावनाओं से निपटने और मानसिक स्वास्थ्य को जानने की गतिविधियां कराई जाएंगी।
कार्यक्रम में पारस्परिक संबंधों को भी विशेष स्थान दिया गया है।
विद्यार्थियों को दूसरों की भावनाओं को समझने, सकारात्मक संबंध बनाने, कटु संबंधों से निपटने, संवाद करने और संघर्ष का समाधान करने के कौशल सिखाए जाएंगे।
मूल्य एवं जिम्मेदार नागरिकता के तहत वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में सही निर्णय लेने तथा सक्रिय नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
विद्यालयों में प्रत्येक तीन माह पर किशोर स्वास्थ्य एवं आरोग्य दिवस का आयोजन किया जाएगा।
इसके साथ जेंडर समानता पर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।
इसमें जेंडर की समझ, भूमिकाओं, भेदभाव और रूढ़िवादी धारणाओं जैसे विषयों पर गतिविधियां होंगी।
कार्यक्रम की प्रगति की मासिक समीक्षा प्रखंड स्तर पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी करेंगे।
विद्यालयों को प्रत्येक माह मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रतिवेदन देना होगा।
02/09/2026
पीएम ने फिर सोना खरीद व विदेश भ्रमण से दूर रहने को कहा
नई दिल्ली: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उत्साहजनक आर्थिक प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास गति को जारी रखने का मंत्र दिया और स्वदेशी व ‘वोकल फॉर लोकल’ को दोहराया।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत हासिल करने के बाद इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर दिए अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से देशवासियों को सोने की खरीदारी और विदेश भ्रमण से दूर रहने की सलाह दी।
पहली तिमाही में भी भारत ने घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति की वजह से 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2020 में कोविड के बाद से अब तक कहीं भी स्थिरता नजर नहीं आ रही है, विश्व युद्ध में डूबा हुआ है, सप्लाई चेन बाधित है, इसके बावजूद भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है।
दूसरी तरफ देश में करीब 40 करोड़ मध्य वर्ग हैं जो परचेजिंग पावर में यूरोप के कई देशों से आगे हैं।
1.40 अरब की आबादी वाला देश अगर स्वदेशी को अपनाता है तो विदेशी करेंसी की भी बचत होगी। स्वदेशी अपनाने पर आयात में कमी आएगी।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक सोने की खरीदारी बढ़ने से इसका आयात बढ़ता है और इसकी खरीदारी कम होने पर उस पैसे से लोग अन्य कीमती सामान खरीदेंगे जिससे अर्थव्यवस्था में मांग निकलेगी।
गैर जरूरी विदेश यात्रा करने पर लोग उन देशों में सिर्फ खाने-पीने और घूमने पर ही खर्च नहीं करते हैं बल्कि वहां खरीदारी भी करते हैं। इससे हमारे देश की अर्थव्यवस्था को कोई लाभ नहीं मिलता है।
प्रधानमंत्री ने विदेश में जाकर शादी समारोह आयोजित नहीं करने की सलाह दी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक उथल-पुथल और अन्य व्यवधानों के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने को बेहद प्रभावशाली बताते हुए इसका श्रेय देश की जनता को दिया।
इंटरनेट मीडिया पर उन्होंने ‘झूठ की गूंज’ फैलाने वालों (राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर तंज) पर निशाना साधते हुए कहा कि जीडीपी की ताजा वृद्धि दर ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर फैलाए जा रहे ‘निराशावाद’ के नैरेटिव को खारिज कर दिया है।
02/09/2026
जिले में मोबाइल एप से होगी उर्वरक की खरीदारी
छपरा: जिले में उर्वरक की बिक्री और वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई प्रणाली लागू की जा रही है।
इसके सफल संचालन को लेकर मंगलवार को संयुक्त कृषि भवन, बाजार समिति परिसर स्थित सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक स्तर से आयोजित प्रशिक्षण में कृषि विभाग के पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार शामिल हुए।
उर्वरक बिक्री अनुप्रयोग प्रणाली (एफएसएएस) के तहत किसान मोबाइल में एफएफएस ऐप डाउनलोड कर आधार संख्या और ओटीपी अथवा चेहरे की पहचान से लॉगिन कर सकेंगे।
खेत के भूखंड और फसल का विवरण दर्ज करने पर मौसम के लिए अनुशंसित उर्वरक की मात्रा प्रदर्शित होगी।
किसान जरूरत के अनुसार मात्रा चुनकर क्यूआर कोड प्राप्त कर सकेंगे।
खुदरा विक्रेता पॉस मशीन से जैविक सत्यापन कर क्यूआर कोड स्कैन करेंगे और निर्धारित दर पर उर्वरक देंगे।
बुकिंग में परेशानी होने पर किसान सीएससी, वसुधा केंद्र, एफपीओ, पैक्स, स्वयं सहायता समूह या कृषि कर्मियों की सहायता ले सकेंगे।
पंचायत स्तर पर दो, प्रखंड में तीन, अनुमंडल में पांच और जिला स्तर पर सात कार्य दिवस में शिकायतों के समाधान का प्रावधान किया गया है।
कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर निगरानी व छापेमारी जारी रहेगी।
अनियमितता की सूचना जिला हेल्प डेस्क के फोन 06152-248042 या मोबाइल 9031645882 पर देने की अपील की गई है।
02/09/2026
⚠️ नेपाल की बाढ़ के साथ बिहार पहुंची अज्ञात मछलियां, खाने से बचने की सरकार की सलाह
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद गंडक समेत बिहार की कुछ नदियों और बाढ़ प्रभावित इलाकों में असामान्य और अज्ञात मछलियां मिलने की खबरों के बीच बिहार सरकार ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
बिहार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने एडवाइजरी जारी कर बाढ़ के पानी से पकड़ी गई अज्ञात या असामान्य दिखने वाली मछलियों को खरीदने, बेचने और खाने से बचने को कहा है। विभाग के अनुसार, बाढ़ के दौरान तालाबों, नदियों और अन्य जलस्रोतों की मछलियां पानी के तेज बहाव के साथ दूर तक पहुंच सकती हैं।
आखिर खतरा क्या है?
बाढ़ का पानी कई जगह नालों, सीवेज, मृत जानवरों और अन्य प्रदूषित स्रोतों के संपर्क में आ सकता है। ऐसे पानी में रहने या बहकर आने वाली मछलियों के शरीर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जैसे रोगजनक मौजूद होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसी वजह से विभाग ने सलाह दी है कि जब तक बाढ़ का पानी स्थिर न हो जाए और जलस्रोतों की स्थिति सामान्य न हो, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को खाने से बचें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी बाढ़ के बाद दूषित पानी और भोजन से होने वाली बीमारियों के खतरे को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देता है और बाढ़ के पानी के संपर्क में आए भोजन को नहीं खाने की बात कहता है।
कौन-कौन सी मछलियों की चर्चा है?
बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गोनच/गूंज कैटफिश, बघार, ग्रास कार्प, बराली यानी वॉलागो और रोहू जैसी मछलियों के मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इन मछलियों को “आदमखोर” या “शव खाने वाली खतरनाक मछली” बताकर किए जा रहे दावों को तथ्य मानना सही नहीं है। कुछ रिपोर्टों में मिली बड़ी मछलियों को स्थानीय रूप से पहचानी जाने वाली वॉलागो अट्टू प्रजाति से जोड़ा गया है, लेकिन इनसे जुड़े कई वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन की लोगों से अपील
लोगों से कहा गया है कि—
• बाढ़ के पानी से पकड़ी गई अज्ञात मछली न खाएं।
• ऐसी मछलियों की खरीद-बिक्री से बचें।
• बिना पहचान और संबंधित विभाग की पुष्टि के किसी अज्ञात मछली को खाने योग्य न मानें।
• ऐसी मछली मिलने पर स्थानीय मत्स्य पदाधिकारी या प्रशासन को सूचना दें।
• अगर ऐसी मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर, सांस लेने में परेशानी या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
यानी फिलहाल सबसे सुरक्षित तरीका यही है—बाढ़ के पानी से आई या अज्ञात मछली को न खरीदें, न बेचें और न खाएं।
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