Shishu Gupta
Social worker
30/12/2023
26/07/2022
रणजीत बावा का कार्यक्रम रद्द हुआ ..
समस्त हिंदू समाज को बहुत बहुत बधाई !ये वही पंजाबी सिंगर है जिसने पवित्र शिवलिंग ओर गौमाता के लिए अपशब्द कहे थे !
समस्त हिंदू संगठनों के संयुक्त प्रयास को साधुवाद !
25/02/2022
15/02/2022
धार्मिक उन्माद से परहेज हेतु कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करे प्रदेश सरकार---- शिशु गुप्ता
इससे पहले कि आने वाले समय में हिमाचल में भी बुर्के व हिजाब को लेकर किसी प्रकार की विवाद की स्थिति उपजे, इसकी रोकथाम हेतु कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेशों को हिमाचल सरकार भी लागू करे। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक शिशु गुप्ता ने जारी बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस प्रकार हिमाचल प्रदेश के सभी सरकारी व गैर सरकारी शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थानों में यूनिफॉर्म कोड लागू हो। ताकि किसी भी वर्ग से संबंधित छात्रा को शिक्षा के अधिकार से वंचित न होना पड़े । जिला संयोजक ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय संविधान सभी को अपने धर्म को मानने व उसकी अनुपालन करने का अधिकार देता है। लेकिन उसकी यह आजादी अथवा अधिकार सरकारी अथवा सरकारी मान्यता प्राप्त शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थानों में धार्मिक भावनाओं को उकसाने व भड़काने के उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
अगर कोई धार्मिक शिक्षा प्राप्त करना चाहता है तो वे अलग से धर्म की शिक्षा से संबंधित संस्थानों में प्रवेश ले सकता है । गुप्ता का कहना है कि हिमाचल सरकार वोट बैंक की राजनीति से खुद को अलग रखते हुए इस दिशा में शीघ्र कदम उठाए उठाए । ताकि प्रदेश के सौहार्दपूर्ण व आपसी भाईचारे के वातावरण में कोई धर्म की आड़ में द्वेष भावना का जहर न घोल सके।
21/01/2022
आकांक्षा सूची में दर्ज देश में पिछड़े जिलों की सूची में दूसरे नंबर पर शुमार होने के बावजूद भी चम्बा जिला के लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण यहां उचित परिवहन व्यवस्था का न होना भी है । वर्षों से चुवाडी से चम्बा मुख्यालय को सुरंग के माध्यम से जोड़ने की मांग उठाई जाती रही है । इसकी सैद्धांतिक मंजूरी होने की बात भी बार-बार दोहराई जाती है परंतु अभी तक धरातल पर तो कुछ नजर नहीं आता।
विशेष है कि चम्बा में उचित चिकित्सा व्यवस्था न होने के कारण मरीजों व तीमारदारों को अक्सर पठानकोट, टांडा, शिमला व चंडीगढ़ की ओर को रूख करना पड़ता है। उधर चम्बा का व्यापार भी मुख्यतय: पठानकोट व पंजाब के अन्य शहरों पर निर्भर करता है। ऐसे में व्यापारी वर्ग एवं अन्य वर्गों के लोगों का विभिन्न प्रयोजनों हेतु पठानकोट एवं पंजाब के अन्य शहरों में आना- जाना लगा रहता है। इसलिए आवश्यक हो जाता है कि उक्त सुरंग का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक समाजसेवी शिशु गुप्ता ने कहा है कि वे हाल ही में डलहौजी को रेल मार्ग से जोड़ने की सांसद किशन कपूर की घोषणा का स्वागत करते हैं। परंतु चम्बा के अधिकतर लोगों को रेलवे सुविधा का फायदा तभी मिल सकेगा जब चम्बा मुख्यालय तक रेलवे का विस्तार हो।
उन्होंने प्रस्तावित सुरंग के माध्यम से सड़क व पठानकोट से जसूर -चुवाडी से चम्बा मुख्यालय तक रेलवे लाइन बिछाने की मांग को दोहराया है। इससे पठानकोट और चम्बा के बीच की दूरी वर्तमान में ओसतन 5- 6 घंटे के बजाए एक- डेढ़ घंटे की रह जाएगी और चम्बा के लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में अभूतपूर्व सुधार होगा । उन्होंने सांसद किशन कपूर व सरकार से गुहार लगाई है कि सार्वजनिक हित में उपरोक्त प्रस्ताव को यथाशीघ्र अमलीजामा पहनाया जाए।
19/01/2022
माँ भारती के अमर सपूत, भारतीय स्वाभिमान व शौर्य के अप्रतिम प्रतीक, महापराक्रमी, विलक्षण संगठनकर्ता, त्याग व बलिदान के उच्चतम आदर्श महाराणा प्रताप जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन।
20/10/2021
आदिकवि वाल्मीकि जी की जयंती पर शत शत नमन💐
हिंदुओं के लोकप्रिय धार्मिक ग्रंथ रामायण के रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी और इसलिए वाल्मीकि जयंती का विशेष महत्व है. वाल्मीकि जयंती केवल वाल्मीकि समाज में ही नहीं बल्कि सभी के लिए बेहद ही अहम है. देशभर के अलग-अलग हिस्सों में वाल्मीकि जयंती के दिन सामाजिक और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं. बता दें कि महर्षिक वाल्मीकि के जन्म को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित है. कहा जाता है कि वाल्मीकि का जन्म महर्षि कश्यप और देवी अदिति के 9वें पुत्र और उनकी पत्नी चर्षिणी से हुआ था. कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने ही दुनिया में सबसे पहले श्लोक की रचना की थी. वाल्मीकि जी को लेकर एक प्रचलित कहानी ये भी है कि जब भगवान राम ने माता सीता का त्याग किया था तो माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही निवास किया था. इसी आश्रम में ही उन्होंने लव-कुश को जन्म दिया था. इसलिए लोगों के बीच वाल्मीकि जयंती का विशेष महत्व है. मान्यता है कि महर्षि वाल्मीकि के पास इतनी मजबूत ध्यान शक्ति थी कि वे एक बार ध्यान में लीन हो गए थे और उनके शरीर के ऊपर दीमक ने घर बना लिया था और फिर भी उनका ध्यान भंग नहीं हुआ.उन्होंने अपने भौतिक जीवन की समस्त विकृतियों का त्याग कर धर्म का मार्ग अपनाया था. उन्हें देवर्षि नारद ने राम नाम का जप करने की सलाह दी थी. जिसके बाद वाल्मीकि जी राम नाम में लीन होकर एक तपस्वी बन गए. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ही ब्रह्मा जी ने उन्हें ज्ञान का भंडार दिया और फिर उन्होंने रामायण लिखी. जो कि हिंदू धर्म में आज एक धार्मिक ग्रंथ के तौर पर पूजी और पढ़ी जाती है.
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